Q. जेन Z की राजनीतिक भागीदारी अक्सर सतत वैचारिक आंदोलनों के बजाय 'अस्थायी विरोध प्रदर्शनों' और 'डिजिटल सक्रियता' से चिह्नित होती है। विश्लेषण कीजिए कि यह परिवर्तन समकालीन विश्व में लोकतंत्र और नागरिक समाज की गतिशीलता को किस प्रकार पुनर्परिभाषित कर रहा है। (15 अंक, 250 शब्द)

प्रश्न की मुख्य माँग

  • बताइए कि यह परिवर्तन लोकतंत्र और नागरिक समाज को किस प्रकार पुनर्परिभाषित कर रहा है।
  • इस परिवर्तन के पीछे के कारणों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर

लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में जहाँ प्रतिगमन की प्रवृत्ति देखी जा रही है, वहाँ जेन-जी (Gen-Z) एक अप्रत्याशित राजनीतिक शक्ति के रूप में उभरे हैं। पूर्ववर्ती वैचारिक आंदोलनों के विपरीत, इसकी भागीदारी डिजिटल सक्रियता और समय-समय पर होने वाले प्रदर्शनों से चिह्नित है। यह परिवर्तन राजनीतिक चेतना, प्रौद्योगिकी के उपयोग तथा नागरिक भागीदारी में गहरे परिवर्तनों को दर्शाता है, जिससे लोकतंत्र के दैनिक संचालन की प्रकृति पुनर्परिभाषित हो रही है।

यह परिवर्तन लोकतंत्र और नागरिक समाज को कैसे पुनर्परिभाषित कर रहा है

  • नेतृत्वविहीन लामबंदी: विकेंद्रीकृत, डिजिटल समन्वय पारंपरिक पदानुक्रमित दल संरचनाओं का स्थान ले रहा है।
    • उदाहरण: बांग्लादेश (2024) में जेन-जी (Gen-Z) के नेतृत्व में हुए प्रदर्शनों में औपचारिक नेतृत्व का अभाव था, फिर भी उन्होंने शासन की सत्ता को चुनौती दी।
  • विषय-विशिष्ट राजनीति: व्यापक वैचारिक परिवर्तन के बजाय विशिष्ट मुद्दों पर केंद्रित माँगें।
    • उदाहरण: नेपाल (2025) में प्रदर्शन भ्रष्टाचार और संस्थागत जवाबदेही पर केंद्रित थे।
  • डिजिटल सार्वजनिक क्षेत्र: ऑनलाइन मंच अब लामबंदी और विमर्श के प्रमुख माध्यम बन गए हैं।
    • उदाहरण: आभासी अभियानों के माध्यम से शिकायतें पारंपरिक नागरिक समाज मंचों की तुलना में अधिक तीव्रता से प्रसारित होती हैं।
  • नैतिक-व्यक्तिगत राजनीति: “व्यक्तिगत ही राजनीतिक है” की धारणा जीवनशैली और पहचान के माध्यम से नागरिक अभिव्यक्ति को आकार दे रही है।
    • उदाहरण: कार्यस्थल पर विषाक्त वातावरण और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चिंताएँ युवाओं की राजनीतिक भागीदारी को प्रभावित कर रही हैं।
  • क्षणिक किंतु प्रभावशाली आंदोलन: अल्पकालिक लामबंदियाँ प्रतीकात्मक और नीतिगत दबाव उत्पन्न करती हैं।
    • उदाहरण: वर्ष 2020–24 के दीर्घकालिक किसान आंदोलन की तुलना में समय-समय पर होने वाले प्रदर्शन एक भिन्न प्रवृत्ति को दर्शाते हैं।

इस परिवर्तन के पीछे के कारण

  • प्रौद्योगिकी में गहन सहभागिता: डिजिटल परिवेश में पले-बढ़े होने के कारण राजनीतिक संप्रेषण और भागीदारी की शैली परिवर्तित हुई है।
    • उदाहरण: प्रत्यक्ष बैठकों की तुलना में सामाजिक मीडिया के माध्यम से लामबंदी को अधिक प्राथमिकता दी जाती है।
  • लोकतांत्रिक सामाजीकरण: लोकतंत्रीकरण के बाद विकसित आत्मविश्वास ने नागरिकों को अधिक मुखर बनाया है।
    • उदाहरण: युवा वर्ग शासन व्यवस्था और संस्थागत अपारदर्शिता पर खुलकर प्रश्न उठा रहा है।
  • आर्थिक असुरक्षा: बेरोज़गारी और सीमित अवसरों ने चिंता-प्रेरित राजनीति को जन्म दिया है।
    • उदाहरण: विभिन्न रिपोर्टों में नियोजित और बेरोजगार दोनों प्रकार के युवाओं में “मानसिक निराशा” का उल्लेख किया गया है।
  • विचारधाराओं से दूरी: महान वैचारिक आख्यानों के प्रति संदेह तथा प्रत्यक्ष अनुभवों को प्राथमिकता।
  • बाज़ार-प्रेरित पहचान: उपभोग संस्कृति और वैश्विक संपर्क ने सामाजिक कल्पनाओं को प्रभावित किया है।
    • उदाहरण: तकनीक तक पहुँच को जातिगत पहचान की अपेक्षा गरिमा के समतुल्य माना जा रहा है।

निष्कर्ष

जेन-जी (Gen-Z) की ऊर्जा का सकारात्मक उपयोग करने हेतु लोकतंत्रों को डिजिटल भागीदारी को संस्थागत स्वरूप देना होगा, नागरिक शिक्षा को सुदृढ़ करना होगा तथा समय-समय पर होने वाली सक्रियता को सुव्यवस्थित विचार-विमर्श की प्रक्रियाओं से जोड़ना होगा। उत्तरदायी शासन, पारदर्शी संस्थाएँ और समावेशी आर्थिक नीतियाँ क्षणिक प्रदर्शनों को रचनात्मक लोकतांत्रिक पुनरुत्थान में परिवर्तित कर सकती हैं, विशेषकर ऐसे वैश्विक परिदृश्य में जहाँ अधिनायकवादी प्रवृत्तियाँ बढ़ रही हैं।

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