Q. प्रेषण (Remittances) भारत के प्रवासी समुदाय के संदर्भ में प्राथमिक चरण है। अब विकसित भारत के लिए द्वितीय-क्रम के लाभों पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है। विश्लेषण कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)

प्रश्न की मुख्य माँग

  • प्रेषण के प्रारंभिक लाभों का उल्लेख कीजिए।
  • प्रवासी भारतीयों के द्वितीय-क्रम के लाभों की चर्चा कीजिए।
  • सहभागिता में चुनौतियों को रेखांकित कीजिए। 

उत्तर

भारत का 3.5 करोड़ से अधिक का प्रवासी समुदाय एक वैश्विक आर्थिक शक्ति के रूप में उभरा है, जहाँ प्रेषण एक महत्त्वपूर्ण आधार स्तंभ है। तथापि, ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए केवल इस प्रारंभिक लाभ से आगे बढ़कर गहरे संरचनात्मक और संस्थागत जुड़ाव की आवश्यकता है।

प्रेषण के रूप में प्रारंभिक लाभ

  • घरेलू समर्थन: प्रेषण सीधे परिवारों के भरण-पोषण और मूलभूत उपभोग को बनाए रखते हैं।
    • उदाहरण: लगभग 138 अरब डॉलर की आमदनी शिक्षा, आवास और आजीविका को वित्तपोषित करती है।
  • आर्थिक स्थिरता: यह बाह्य क्षेत्र के असंतुलन को संतुलित करने में सहायक होता है।
    • उदाहरण: प्रेषण भारत के व्यापार घाटे के लगभग आधे हिस्से को वित्तपोषित करते हैं।
  • कौशल परिवर्तन: उन्नत अर्थव्यवस्थाओं से आने वाले प्रेषण का बढ़ता हिस्सा उच्च कौशल वाली वैश्विक नौकरियों की ओर परिवर्तन को दर्शाता है।
  • निष्क्रिय लाभ: ये लाभ बिना किसी सक्रिय सरकारी नीति या प्रोत्साहन योजना के उत्पन्न होते हैं।
  • सीमित दायरा: इनका उपयोग मुख्यतः उपभोग तक सीमित रहता है, न कि दीर्घकालिक विकास में।
    • उदाहरण: अधिकांश प्रेषण घरेलू खर्च में उपयोग होते हैं, संस्थागत परिवर्तन में नहीं।

प्रवासी भारतीयों के द्वितीय-क्रम लाभ

  • व्यापारिक संबंध: प्रवासी समुदाय सीमा-पार व्यापार और व्यावसायिक नेटवर्क विकसित कर वैश्विक संपर्क को मजबूत करता है।
  • निवेश प्रवाह: स्टार्ट-अप और उद्यमों में वेंचर कैपिटल तथा निवेश को बढ़ावा देता है।
  • प्रौद्योगिकी हस्तांतरण: वैश्विक तकनीकी और शोध पारिस्थितिकी तंत्र के माध्यम से ज्ञान और नवाचार का प्रसार करता है।
  • शोध सहयोग: अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक और वैज्ञानिक सहयोग को सुदृढ़ करता है।
    • उदाहरण: भारतीय प्रवासी से जुड़ी सीमा-पार शोध साझेदारी।
  • संस्थागत विश्वसनीयता: वैश्विक कंपनियों और विश्वविद्यालयों में भारतीय मूल के व्यक्तियों के नेतृत्व के माध्यम से भारत की प्रतिष्ठा और प्रभाव को बढ़ाता है।

संपर्क में चुनौतियाँ

  • नीतिगत शून्यता: एक स्पष्ट और समन्वित प्रवासी नीति के अभाव में योगदान आकस्मिक रह जाते हैं, न कि रणनीतिक।
  • नियामकीय बाधाएँ: जटिल कानूनी और वित्तीय ढाँचे निवेश और सहयोग में बाधा उत्पन्न करते हैं।
    • उदाहरण: एनआरआई के लिए कराधान, उत्तराधिकार और निवास संबंधी नियमों में कठिनाइयाँ।
  • सीमित समावेशन: नागरिक और कानूनी अधिकारों की सीमितता से दीर्घकालिक प्रतिबद्धता प्रभावित होती है।
    • उदाहरण: ओवरसीज सिटीजनशिप ऑफ इंडिया में पूर्ण राजनीतिक और नागरिक अधिकारों का अभाव।
  • संस्थागत कमजोरी: सतत् और संरचित सहयोग के लिए समर्पित मंचों की कमी।
    • उदाहरण: शोध, नवाचार और शासन में प्रवासी भागीदारी के लिए सीमित औपचारिक तंत्र।
  • अप्रयुक्त क्षमता: भावनात्मक जुड़ाव को आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी में परिवर्तित नहीं किया जा सका है।
    • उदाहरण: आयरलैंड ने अपने अमेरिकी प्रवासी समुदाय को भावनात्मक और वित्तीय रूप से प्रभावी ढंग से जोड़ा।

निष्कर्ष

यद्यपि प्रेषण महत्त्वपूर्ण आर्थिक सहारा प्रदान करते हैं, भारत को नीतिगत सुधारों, संस्थागत ढाँचों और गहन जुड़ाव के माध्यम से प्रवासी समुदाय के द्वितीयक लाभों को रणनीतिक रूप से साकार करना होगा। इससे वैश्विक भारतीय प्रतिभा को नवाचार, निवेश और दीर्घकालिक राष्ट्रीय विकास के प्रेरक में बदला जा सकेगा। अर्थात् “घर भेजे गए धन” से आगे बढ़कर “वैश्विक स्तर पर सृजित मूल्य” की दिशा में परिवर्तन आवश्यक है।

To get PDF version, Please click on "Print PDF" button.

Need help preparing for UPSC or State PSCs?

Connect with our experts to get free counselling & start preparing

Aiming for UPSC?

Download Our App

      
Quick Revise Now !
AVAILABLE FOR DOWNLOAD SOON
UDAAN PRELIMS WALLAH
Comprehensive coverage with a concise format
Integration of PYQ within the booklet
Designed as per recent trends of Prelims questions
हिंदी में भी उपलब्ध
Quick Revise Now !
UDAAN PRELIMS WALLAH
Comprehensive coverage with a concise format
Integration of PYQ within the booklet
Designed as per recent trends of Prelims questions
हिंदी में भी उपलब्ध

<div class="new-fform">







    </div>

    Subscribe our Newsletter
    Sign up now for our exclusive newsletter and be the first to know about our latest Initiatives, Quality Content, and much more.
    *Promise! We won't spam you.
    Yes! I want to Subscribe.