Q. सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में, इस प्रणाली के बाजारीकरण (Marketisation) के प्रतिकूल प्रभावों को नियंत्रित करने में भारतीय राज्य को एक अहम भूमिका निभानी चाहिए। ऐसे कुछ उपाय सुझाइए जिनके माध्यम से राज्य जमीनी स्तर पर सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच का विस्तार कर सके। (15 अंक, 250 शब्द)

प्रश्न की मुख्य माँग

  • बाजारीकरण को नियंत्रित करने में राज्य की भूमिका का वर्णन कीजिए।
  • स्वास्थ्य सेवाओं के बाजारीकरण के दुष्प्रभावों की चर्चा कीजिए।
  • जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के उपाय सुझाइए।

उत्तर

भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था में बढ़ते बाजारीकरण के कारण पहुँच और वहनीयता में असमानताएँ बढ़ रही हैं। यद्यपि निजी क्षेत्र के विस्तार से क्षमता में वृद्धि हुई है, लेकिन इससे असमानताएँ भी गहरी हुई हैं। इसलिए संविधान के अनुच्छेद-47 के अनुरूप समान और सार्वभौमिक स्वास्थ्य सेवाएँ सुनिश्चित करने के लिए राज्य की मजबूत भूमिका आवश्यक है।

बाजारीकरण को नियंत्रित करने में राज्य की भूमिका

  • नियामकीय निगरानी: निजी स्वास्थ्य क्षेत्र में मूल्य नियंत्रण और गुणवत्ता मानकों को सुनिश्चित कर शोषण को रोका जाए।
    • उदाहरण: क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट्स एक्ट अस्पतालों में दरों और मानकों को नियंत्रित करता है।
  • सार्वजनिक प्रावधान: सरकारी अस्पतालों को मजबूत कर सस्ती स्वास्थ्य सेवाओं का विकल्प उपलब्ध कराया जाए।
    • उदाहरण: एम्स (AIIMS) विस्तार और प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (PMSSY) के माध्यम से तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच बढ़ी है।
  • वित्तीय सुरक्षा: बीमा कवरेज का विस्तार कर जेब से होने वाले खर्च को कम किया जाए।
    • उदाहरण: आयुष्मान भारत–PMJAY के तहत कमजोर वर्गों को ₹5 लाख तक का कवरेज।
  • आवश्यक सेवाएँ: आवश्यक दवाओं और जाँचों को मुफ्त या सब्सिडी पर उपलब्ध कराया जाए।
    • उदाहरण: जन औषधि केंद्र, स्वास्थ्य व्यय को कम करने में सहायक हैं।
  • सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय में वृद्धि: सस्ती और सुदृढ़ स्वास्थ्य सेवाओं के लिए सरकारी खर्च को जीडीपी के 2.5% तक बढ़ाया जाए।

बाजारीकरण को नियंत्रित करने में राज्य की भूमिका

  • नियामकीय निगरानी: निजी स्वास्थ्य क्षेत्र में मूल्य नियंत्रण और गुणवत्ता मानकों को सुनिश्चित कर शोषण को रोका जाए।
    • उदाहरण: क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट्स एक्ट अस्पतालों में दरों और मानकों को नियंत्रित करता है।
  • सार्वजनिक प्रावधान: सरकारी अस्पतालों को मजबूत कर सस्ती स्वास्थ्य सेवाओं का विकल्प उपलब्ध कराया जाए।
    • उदाहरण: एम्स (AIIMS) विस्तार और प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (PMSSY) के माध्यम से तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच बढ़ी है।
  • वित्तीय सुरक्षा: बीमा कवरेज का विस्तार कर जेब से होने वाले खर्च को कम किया जाए।
    • उदाहरण: आयुष्मान भारत–PMJAY के तहत कमजोर वर्गों को ₹5 लाख तक का कवरेज।
  • आवश्यक सेवाएँ: आवश्यक दवाओं और जाँचों को मुफ्त या सब्सिडी पर उपलब्ध कराया जाए।
    • उदाहरण: जन औषधि केंद्र स्वास्थ्य व्यय को कम करने में सहायक हैं।
  • सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय में वृद्धि: सस्ती और सुदृढ़ स्वास्थ्य सेवाओं के लिए सरकारी खर्च को जीडीपी के 2.5% तक बढ़ाया जाए।

जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के उपाय

  • प्राथमिक स्वास्थ्य सुदृढ़ीकरण: समग्र देखभाल के लिए हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स का विस्तार और उन्नयन किया जाए।
    • उदाहरण: आयुष्मान भारत के तहत 1.5 लाख हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स स्थापित करने का लक्ष्य।
  • मानव संसाधन विकास: ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों की संख्या बढ़ाई जाए।
    • उदाहरण: राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत आशा कार्यकर्ता अंतिम छोर तक सेवाएँ पहुँचाती हैं।
  • डिजिटल स्वास्थ्य: टेलीमेडिसिन और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से पहुँच की कमी को दूर किया जाए।
    • उदाहरण: ई-संजीवनी प्लेटफॉर्म ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक रूप से उपयोग किया जा रहा है।
  • विकेंद्रीकृत योजना: स्थानीय निकायों को स्वास्थ्य योजना और निगरानी में सशक्त बनाया जाए।
    • उदाहरण: केरल का विकेंद्रीकृत स्वास्थ्य मॉडल प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार का उदाहरण है।
  • अवसंरचना सुदृढ़ीकरण: उप-केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पतालों में निवेश बढ़ाया जाए।
    • उदाहरण: पीएम आयुष्मान भारत हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर मिशन ग्रामीण स्वास्थ्य ढाँचे को मजबूत करता है।

निष्कर्ष

नियमन, सार्वजनिक निवेश और समुदाय-आधारित सेवा वितरण का संतुलित दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है, ताकि सतत् विकास लक्ष्य-3 (सभी के लिए स्वास्थ्य) को प्राप्त किया जा सके। साथ ही, सतत् विकास लक्ष्य-10 (समानता) और सतत् विकास लक्ष्य-9 (सुदृढ़ एवं सुलभ स्वास्थ्य अवसंरचना) की दिशा में भी प्रगति सुनिश्चित की जा सके।

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