Q. अमेरिकी-इजरायली हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता की हत्या के बाद केंद्र सरकार की चुप्पी की आलोचना हुई है। इस संदर्भ में, भारत की संयमित प्रतिक्रिया के पीछे के कारकों का विश्लेषण कीजिए और पश्चिम एशिया कूटनीति के लिए आगे का रास्ता सुझाइए। (15 अंक, 250 शब्द)

प्रश्न की मुख्य माँग

  • भारत की संयमित प्रतिक्रिया के पीछे के कारकों का उल्लेख कीजिए।
  • भारत की संयमित प्रतिक्रिया के परिणामों की चर्चा कीजिए।
  • पश्चिम एशिया में भारत की कूटनीति के लिए आगे की राह सुझाइए।

उत्तर

अमेरिका–इजरायल के हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की हत्या ने भारत की संयमित प्रतिक्रिया को लेकर व्यापक बहस उत्पन्न कर दी है। यह स्थिति पश्चिम एशिया में बदलते शक्ति समीकरणों, रणनीतिक साझेदारियों, प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा और ऊर्जा हितों से जुड़ी जटिल भू-राजनीतिक गणनाओं को उजागर करती है। 

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मुख्य भाग

भारत की संयमित प्रतिक्रिया के पीछे के कारक

  • इजरायल के साथ रणनीतिक साझेदारी: भारत-इजरायल के बीच बढ़ता रक्षा सहयोग सार्वजनिक आलोचना को कूटनीतिक रूप से संवेदनशील बनाता है।
  • ईरान के साथ घटता आर्थिक जुड़ाव: प्रतिबंधों और व्यापारिक गतिविधियों में कमी के कारण भारत–ईरान संबंध कमजोर हुए हैं।
    • उदाहरण: द्विपक्षीय व्यापार वर्ष 2018 में 17 अरब डॉलर से घटकर वर्ष 2025 में लगभग 1.68 अरब डॉलर रह गया।
  • खाड़ी क्षेत्र की क्षेत्रीय गतिशीलताओं के प्रति संवेदनशीलता: भारत उन खाड़ी देशों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखना चाहता है, जहाँ बड़ी संख्या में भारतीय प्रवासी रहते हैं।
    • उदाहरण: लगभग 1 करोड़ भारतीय खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के देशों में रहते हैं।
  • संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ रणनीतिक सामंजस्य: अमेरिका के साथ भारत की बढ़ती रणनीतिक साझेदारी कूटनीतिक सावधानी को प्रभावित करती है।
    • उदाहरण: भारत ने हाल ही में अमेरिका के साथ आर्थिक जुड़ाव को पुनर्स्थापित किया और पैक्स सिलिका (Pax Silica) के महत्त्वपूर्ण प्रौद्योगिकी आपूर्ति शृंखला में शामिल हुआ।

भारत की संयमित प्रतिक्रिया के परिणाम

  • रणनीतिक झुकाव की धारणा: चुप्पी से यह धारणा मजबूत हो सकती है कि भारत पश्चिम एशिया में अपनी पारंपरिक संतुलित नीति से दूर जा रहा है।
    • उदाहरण: भारत ऐतिहासिक रूप से ईरान और इजरायल दोनों के साथ समानांतर संबंध बनाए रखता रहा है।
  • भारत–ईरान संबंधों में विश्वास का क्षरण: सीमित कूटनीतिक प्रतिक्रिया से तेहरान के साथ संबंध और कमजोर हो सकते हैं।
    • उदाहरण: चाबहार बंदरगाह में भारत की भागीदारी पहले से ही प्रतिबंधों के कारण अनिश्चितता का सामना कर रही है।
  • वैश्विक दक्षिण में भारत की छवि पर प्रभाव: भारत की चुप्पी को विकासशील देशों द्वारा चयनात्मक कूटनीति के रूप में देखा जा सकता है।
    • उदाहरण: भारत अक्सर ब्रिक्स (BRICS) जैसे मंचों पर संप्रभुता के सम्मान की वकालत करता है।
  • क्षेत्रीय संपर्क परियोजनाओं के लिए रणनीतिक जोखिम: ईरान में अस्थिरता भारत की क्षेत्रीय संपर्क महत्त्वाकांक्षाओं को प्रभावित कर सकती है।
    • उदाहरण: संघर्ष के दौरान चाबहार बंदरगाह के बुनियादी ढाँचे को नुकसान होने की खबरें सामने आईं।
  • पश्चिम एशिया में कूटनीतिक प्रभाव में कमी: निष्क्रिय दृष्टिकोण भारत की क्षेत्रीय शांति प्रयासों को प्रभावित करने की क्षमता को सीमित कर सकता है।

पश्चिम एशिया में भारत की कूटनीति के लिए आगे की राह

  • संतुलित पश्चिम एशिया नीति को पुनः स्थापित करना: भारत को सभी क्षेत्रीय पक्षों के साथ संवाद बनाए रखते हुए अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को बनाए रखना चाहिए।
    • उदाहरण: ईरान और इजराइल दोनों के साथ संवाद को पुनर्जीवित करना भारत की बहु-संरेखण (multi-alignment) नीति को बनाए रखने में सहायक हो सकता है।
  • ईरान के साथ रणनीतिक संपर्क को मजबूत करना: अवसंरचना सहयोग को जारी रखना भारत की महाद्वीपीय संपर्क महत्त्वाकांक्षाओं को सुरक्षित रख सकता है।
    • उदाहरण: चाबहार बंदरगाह में निरंतर सहभागिता से अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुँच को समर्थन मिलता है।
  • भारतीय प्रवासी और ऊर्जा हितों की सुरक्षा: कूटनीतिक प्रयासों में विदेशों में रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
    • उदाहरण: खाड़ी क्षेत्र में 1 करोड़ से अधिक भारतीय कामगार रहते हैं और यह क्षेत्र भारत के लिए एक प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ता भी है।
  • संवाद और तनाव-निवारण को बढ़ावा देना: भारत अपनी विश्वसनीयता का उपयोग करते हुए शांतिपूर्ण समाधान और तनाव कम करने की वकालत कर सकता है।
  • बहुपक्षीय मंचों का उपयोग: भारत बहुपक्षीय कूटनीति के माध्यम से क्षेत्रीय स्थिरता को प्रोत्साहित कर सकता है।
    • उदाहरण: आगामी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी भारत को मध्यस्थता और संवाद को बढ़ावा देने का अवसर प्रदान कर सकती है। 

निष्कर्ष

भारत की संयमित प्रतिक्रिया रणनीतिक साझेदारियों, क्षेत्रीय स्थिरता और राष्ट्रीय हितों के बीच संतुलन स्थापित करने की कठिन चुनौती को दर्शाती है। आगे बढ़ते हुए, रणनीतिक स्वायत्तता, प्रतिस्पर्द्धी शक्तियों के साथ संतुलित सहभागिता और सक्रिय शांति पहल को संयोजित करने वाली संतुलित कूटनीति पश्चिम एशिया में भारत की भूमिका को एक जिम्मेदार और प्रभावशाली वैश्विक अभिनेता के रूप में सुदृढ़ कर सकती है। 

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