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उत्तर:
दृष्टिकोण:
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परिचय:
दलाई लामा का यह कथन बाहरी दुनिया में शांति प्राप्त करने के लिए एक शर्त के रूप में आंतरिक शांति विकसित करने के महत्व पर जोर देता है। दूसरे शब्दों में, यदि हम एक शांतिपूर्ण और सामंजस्यपूर्ण समाज बनाना चाहते हैं, तो हमें सबसे पहले खुद पर काम करना होगा और दूसरों के प्रति आंतरिक शांति, करुणा और समझ विकसित करनी होगी।
मुख्य विषयवस्तु:
भारतीय संदर्भ में देखा जाए तो ऐसे कई उदाहरण हैं कि कैसे व्यक्ति और समुदाय पहले आंतरिक शांति विकसित करके शांति प्राप्त करने में सक्षम हुए हैं।
उदाहरण के लिए, योग और ध्यान का अभ्यास हजारों वर्षों से भारतीय संस्कृति का एक अभिन्न अंग रहा है, और ऐसा माना जाता है कि यह व्यक्तियों को आंतरिक शांति, मन की स्पष्टता और भावनात्मक स्थिरता प्राप्त करने में मदद करता है।
इसी प्रकार महात्मा गांधी, जिन्हें व्यापक रूप से भारत का राष्ट्रपिता माना जाता है, अहिंसा और शांतिपूर्ण प्रतिरोध के प्रबल समर्थक थे। उनका मानना था कि सच्ची शांति केवल अपने भीतर प्रेम और करुणा पैदा करके और जीवन के सभी पहलुओं में अहिंसा का पालन करके ही प्राप्त की जा सकती है।
इसके अतिरिक्त भारतीय आध्यात्मिकता में, अहिंसा (अहिंसा) की अवधारणा गहराई से निहित है, और यह सिखाती है कि हमें किसी भी जीवित प्राणी को शारीरिक और मानसिक रूप से नुकसान पहुंचाने से बचना चाहिए। यह सिद्धांत भारत में कई सामाजिक और राजनीतिक आंदोलनों के लिए एक मार्गदर्शक शक्ति रहा है, जिसमें गांधी के नेतृत्व में भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन भी शामिल है।
अन्य उदाहरण:
निष्कर्ष:
भारतीय संस्कृति और दर्शन आंतरिक शांति, करुणा और दूसरों के प्रति समझ विकसित करने के सिद्धांतों में गहराई से निहित हैं। यह आध्यात्मिकता, चिकित्सा, राजनीति और सामाजिक आंदोलनों सहित भारतीय जीवन के विभिन्न पहलुओं में परिलक्षित हुआ है। इन सिद्धांतों का पालन करके, व्यक्ति और समुदाय एक अधिक शांतिपूर्ण और सामंजस्यपूर्ण दुनिया बना सकते हैं।
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Quote Waale question theek se elaborate nhi kar paati.