Q. भारत में प्रमुख परियोजनाओं के लिए पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) परिणामों को प्रभावित करने में पर्यावरण गैर सरकारी संगठन और कार्यकर्ता क्या भूमिका निभाते हैं? सभी महत्वपूर्ण विवरणों के साथ चार उदाहरण भी दीजिए। (10 अंक, 150 शब्द)

प्रश्न की मुख्य माँग

  • पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) परिणामों को प्रभावित करने में पर्यावरणीय गैर सरकारी संगठनों (NGOs) और कार्यकर्ताओं की भूमिका स्पष्ट कीजिए। 
  • महत्त्वपूर्ण विवरणों सहित चार उदाहरण दीजिए। 

उत्तर

पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA), विकास और पारिस्थितिक स्थिरता के बीच संतुलन बनाने का एक महत्त्वपूर्ण साधन है। भारत में इसकी प्रभावशीलता केवल संस्थागत तंत्र से नहीं, बल्कि पर्यावरणीय  गैर सरकारी संगठनों (NGOs) और कार्यकर्ताओं द्वारा संचालित सहभागी निगरानी से भी निर्धारित होती है। ये संगठन एवं कार्यकर्ता  पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) प्रक्रिया में निगरानीकर्ता की भूमिका निभाते हुए पारदर्शिता, पारिस्थितिक न्याय और समुदाय सहभागिता सुनिश्चित करते हैं।

पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) परिणामों को प्रभावित करने में पर्यावरणीय गैर सरकारी संगठनों (NGOs) और कार्यकर्ताओं की भूमिका

  • जन-जागरूकता और सहभागिता में वृद्धि: वे प्रभावित समुदायों को परियोजनाओं के प्रभावों के बारे में जागरूक करते हैं और उन्हें पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) की सार्वजनिक सुनवाई में भाग लेने के लिए संगठित करते हैं।
    • उदाहरण: एक गैर-लाभकारी पर्यावरण संगठन ‘कल्पवृक्ष’ ने लोअर सुबनसिरी जलविद्युत परियोजना के दौरान स्थानीय समुदायों में जागरूकता वृद्धि में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) रिपोर्टों की कमियों को उजागर करना: कार्यकर्ता पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) दस्तावेजों का समालोचनात्मक मूल्यांकन करते हैं और डेटा में हेरफेर या अपर्याप्त पारिस्थितिक आकलन के मामलों को उजागर करते हैं।
    • उदाहरण: वेदांता-नियमगिरि खनन मामले में कार्यकर्ताओं ने पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) में उपेक्षित आदिवासी अधिकारों को उजागर किया।
  • अनुमोदन-उपरांत निगरानी:  गैर सरकारी संगठन (NGO) पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों के अनुपालन की निगरानी करते हैं और उल्लंघनों की रिपोर्ट करते हैं, जिससे परियोजना निर्माताओं की दीर्घकालिक जवाबदेही सुनिश्चित होती है।
    • उदाहरण: एनवायरनमेंट सपोर्ट ग्रुप (ESG) ने बेंगलुरु की पेरिफेरल रिंग रोड परियोजना में उल्लंघनों को उजागर किया, जिससे प्राधिकरणों को अनुपालन का पुनर्मूल्यांकन करने के लिए प्रेरित किया।
  • समानांतर पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) और तथ्य-जाँच मिशन संचालित करना: कुछ गैर सरकारी संगठन (NGO)  पक्षपाती आधिकारिक रिपोर्टों का सही आंकलन करने के लिए स्वतंत्र पारिस्थितिक और सामाजिक आकलन करते हैं।
    • उदाहरण: दक्षिण एशिया नेटवर्क ऑन डैम्स, रिवर्स ऐंड पीपल (SANDRP) ने केन-बेतवा नदी जोड़ परियोजना की स्वतंत्र समीक्षा की, जिसमें पन्ना टाइगर रिजर्व की जैव-विविधता के खतरों को उजागर किया।
  • विशेषज्ञ-वैज्ञानिक गठबंधन बनाना: वे पारिस्थितिकीविदों, वकीलों और वैज्ञानिकों के साथ मिलकर त्रुटिपूर्ण पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) प्रक्रियाओं की साक्ष्य-आधारित आलोचना तैयार करते हैं।
  • कानूनी सक्रियता और जनहित याचिकाएँ: गैर सरकारी संगठन (NGO) और कार्यकर्ता न्यायिक मंचों का उपयोग करके पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) के उल्लंघनों को चुनौती देते हैं और स्थगन आदेश या कड़े पर्यावरणीय अनुपालन की माँग करते हैं।
    • उदाहरण: स्टरलाइट कॉपर प्लांट (थूथुकुडी) मामले में कार्यकर्ताओं ने प्रदूषण के विरुद्ध जनहित याचिकाओं को समर्थन दिया, जिसके परिणामस्वरूप संयंत्र बंद हुआ।
  • नीति-स्तरीय समर्थन: वे मजबूत पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) मानकों का समर्थन करते हैं और प्रावधानों के कमजोर करने वाले प्रावधानों का विरोध करते हैं, जैसे 2020 मसौदा पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) अधिसूचना में प्रस्तावित प्रावधान ।
  • स्थानीय चिंताओं का अंतरराष्ट्रीयकरण: कार्यकर्ता घरेलू पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) मुद्दों को वैश्विक मंचों और मानवाधिकार चिंताओं से जोड़ते हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय समीक्षा और दबाव में वृद्धि होती है।

पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) प्रक्रियाओं में पर्यावरणीय गैर सरकारी संगठनों (NGOs) और कार्यकर्ताओं के प्रभाव के चार उदाहरण

१. नियमगिरि बॉक्साइट खनन परियोजना (ओडिशा)

  • गैर सरकारी संगठन (NGO) /कार्यकर्ता: सर्वाइवल इंटरनेशनल, एमनेस्टी इंटरनेशनल, डोंगरिया कोंध जनजाति (PVTG)।
  • परियोजना: वेदांता-ओडिशा माइनिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (OMC) संयुक्त उपक्रम ने नियमगिरि पहाड़ियों में बॉक्साइट खनन का प्रयास किया।
  • भूमिका: कार्यकर्ताओं ने वनों की कटाई, जैव-विविधता हानि और जनजातीय अधिकारों के उल्लंघन को उजागर किया।
  • परिणाम: सर्वोच्च न्यायालय ने जनजाति के सांस्कृतिक, धार्मिक और आध्यात्मिक अधिकारों को मान्यता दी और ग्राम सभा को परियोजना से होने वाले संभावित उल्लंघनों का आकलन करने का अधिकार दिया।

२. मुंबई कोस्टल रोड परियोजना (महाराष्ट्र)

  • गैर सरकारी संगठन (NGO)/कार्यकर्ता: वनशक्ति और कंज़र्वेशन एक्शन ट्रस्ट
  • परियोजना: तटीय सड़क परियोजना जो समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र और मछुआरा समुदाय को खतरा पहुँचाती थी।
  • भूमिका: त्रुटिपूर्ण पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA), परामर्श की कमी और पर्यावरणीय प्रभावों पर याचिकाएँ दायर कीं।
  • परिणाम: बॉम्बे हाई कोर्ट ने वर्ष 2019 में अनुचित स्वीकृतियों के कारण निर्माण पर रोक लगाई और अधिक विस्तृत पर्यावरणीय मूल्यांकन का निर्देश दिया।

३. पोस्को स्टील प्लांट (ओडिशा)

  • गैर सरकारी संगठन (NGO)/कार्यकर्ता: पोस्को प्रतिरोध संग्राम समिति, ग्रीनपीस इंडिया।
    परियोजना: 12 अरब डॉलर का स्टील प्लांट, जिसमें वनों की कटाई और विस्थापन के जोखिम थे।
  • भूमिका: अपर्याप्त पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) और समुदाय के विस्थापन पर विरोध और कानूनी चुनौतियाँ।
  • परिणाम: पर्यावरणीय स्वीकृति निलंबित हुई; पोस्को ने वर्ष 2017 में पर्यावरणीय और विनियामक कठिनाइयों का हवाला देते हुए परियोजना से हटने की घोषणा की।

४. एरे वन मेट्रो कार शेड (मुंबई)

  • गैर सरकारी संगठन (NGO)/कार्यकर्ता: ‘सेव एरे’ (Save Aarey) आंदोलन और वनशक्ति
  • परियोजना: मुंबई के एरे वन में मेट्रो कार शेड का निर्माण
  • भूमिका: त्रुटिपूर्ण पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) रिपोर्टों को उजागर किया, जिनमें  जैव-विविधता और आदिवासी समुदायों की आजीविका पर परियोजना के प्रभाव को कम करके आंका गया था।
  • परिणाम: महाराष्ट्र सरकार ने वर्ष 2019 में निर्माण रोक दिया। वर्ष 2020 में नई सरकार ने मेट्रो कार शेड को वैकल्पिक स्थल पर स्थानांतरित करने का निर्णय लिया, जिससे आरे वन के लगभग 800 एकड़ हरित क्षेत्र को बचाया गया।

निष्कर्ष

पर्यावरणीय गैर सरकारी संगठन (NGO) और कार्यकर्ता, विकास प्रक्रिया में पारिस्थितिकी और समानता, दोनों का संतुलन सुनिश्चित करते हैं। वे उपेक्षित समुदायों की आवाज को मजबूत बनाकर और पारदर्शिता को बढ़ावा देकर पर्यावरणीय न्याय और SDG 16 (शांति, न्याय और सशक्त संस्थान) को सुदृढ़ करते हैं। पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) प्रक्रिया में उनकी निरंतर भागीदारी जवाबदेह शासन को बढ़ावा देती है, एवं यह सुनिश्चित करती है कि प्रगति के नाम पर संधारणीयता या कमजोर समुदायों के अधिकारों से समझौता न किया जाए।

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