संदर्भ
वर्ष 2026 की ग्लोबल एजुकेशन मॉनिटरिंग (GEM) रिपोर्ट ने बिगड़ते वैश्विक शिक्षा संकट को उजागर किया है, जो सतत् विकास लक्ष्य 4 (गुणवत्तापूर्ण शिक्षा) की प्राप्ति के लिए खतरा उत्पन्न कर रहा है।
ग्लोबल एजुकेशन मॉनिटरिंग (GEM) रिपोर्ट के बारे में
- प्रकाशनकर्ता: यह यूनेस्को द्वारा जारी की जाने वाली एक वार्षिक वैश्विक रिपोर्ट है, जो सतत् विकास लक्ष्य 4 (गुणवत्तापूर्ण शिक्षा) की दिशा में हुई प्रगति की निगरानी करती है।
- विषय: GEM 2026 का मुख्य विषय है ‘पहुँच और समानता: वर्ष 2030 2030 का काउंटडाउन’ (Access and Equity: Countdown to 2030)।
- इसकी स्थापना यूनेस्को द्वारा वर्ष 2002 में की गई थी।
रिपोर्ट की मुख्य विशेषताएँ
- वंचितता का पैमाना: विश्व स्तर पर लगभग 273 मिलियन बच्चे और युवा अभी भी स्कूल से बाहर हैं और संघर्ष क्षेत्रों में लाखों बच्चों की संख्या का पूरा हिसाब नहीं है।
- पहुँच बनाम शिक्षा संकट: नामांकन में सुधार के बावजूद गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित नहीं हो पाई है, क्योंकि खराब शैक्षिक परिस्थितियों के कारण कई छात्रों में बुनियादी कौशल की कमी है।
- शिक्षा में असमानता: लड़कियाँ, विकलांग, ग्रामीण और विस्थापित बच्चे जैसे हाशिए पर रहने वाले समूहों को शिक्षा तक पहुँच और भागीदारी में लगातार बाधाओं का सामना करना पड़ता है।
- संघर्ष का प्रभाव: चल रहे संघर्ष, विशेष रूप से पश्चिम एशिया जैसे क्षेत्रों में, स्कूली शिक्षा को बाधित कर रहे हैं और स्कूल छोड़ने की दर बढ़ा रहे हैं।
- वित्तपोषण अंतर: अपर्याप्त और गलत तरीके से लक्षित वित्त पोषण प्रगति में बाधा डाल रहा है, विशेष रूप से कम आय वाले देशों में।
- डिजिटल विभाजन: प्रौद्योगिकी, इंटरनेट और डिजिटल कौशल तक असमान पहुँच से शैक्षिक असमानताओं के बढ़ने का खतरा है।
- असमान प्रगति: कुछ देशों ने ड्रापआउट दर में उल्लेखनीय कमी हासिल की है, जो दर्शाता है कि लक्षित नीतियाँ परिणाम दे सकती हैं।
आगे की राह
- समान पहुँच: सरकारों को हाशिए पर पड़े समूहों जैसे कि लड़कियों, विकलांगों, ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों और संघर्ष प्रभावित बच्चों को लक्षित करके सार्वभौमिक पहुँच को प्राथमिकता देनी चाहिए।
- सीखने के परिणामों पर ध्यान केंद्रित करना: शिक्षा नीतियों को नामांकन से हटकर बेहतर शिक्षकों, बुनियादी ढाँचे और संसाधनों के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने पर केंद्रित करना चाहिए।
- शिक्षा वित्तपोषण को मजबूत करना: देशों को बुनियादी ढाँचे, शिक्षकों और शिक्षण सामग्री में मौजूद कमियों को दूर करने के लिए सार्वजनिक धन को बढ़ाना और कुशलतापूर्वक आवंटित करना चाहिए।
- डिजिटल विभाजन को कम करना: समावेशी और समान डिजिटल शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रौद्योगिकी, इंटरनेट कनेक्टिविटी और डिजिटल कौशल तक पहुँच का विस्तार करना चाहिए।
- सहयोगात्मक वैश्विक कार्रवाई: सरकारों, नागरिक समाज और यूनेस्को जैसे संगठनों को व्यवस्थागत बाधाओं को दूर करने के लिए मिलकर कार्य करना चाहिए।