ग्लोबल एजुकेशन मॉनिटरिंग (GEM) रिपोर्ट, 2026

31 Mar 2026

संदर्भ

वर्ष 2026 की ग्लोबल एजुकेशन मॉनिटरिंग (GEM) रिपोर्ट ने बिगड़ते वैश्विक शिक्षा संकट को उजागर किया है, जो सतत् विकास लक्ष्य 4 (गुणवत्तापूर्ण शिक्षा) की प्राप्ति के लिए खतरा उत्पन्न कर रहा है।

ग्लोबल एजुकेशन मॉनिटरिंग (GEM) रिपोर्ट के बारे में

  • प्रकाशनकर्ता: यह यूनेस्को द्वारा जारी की जाने वाली एक वार्षिक वैश्विक रिपोर्ट है, जो सतत् विकास लक्ष्य 4 (गुणवत्तापूर्ण शिक्षा) की दिशा में हुई प्रगति की निगरानी करती है।
  • विषय: GEM 2026 का मुख्य विषय है ‘पहुँच और समानता: वर्ष 2030 2030 का काउंटडाउन’ (Access and Equity: Countdown to 2030)।
    • इसकी स्थापना यूनेस्को द्वारा वर्ष 2002 में की गई थी।

रिपोर्ट की मुख्य विशेषताएँ 

  • वंचितता का पैमाना: विश्व स्तर पर लगभग 273 मिलियन बच्चे और युवा अभी भी स्कूल से बाहर हैं और संघर्ष क्षेत्रों में लाखों बच्चों की संख्या का पूरा हिसाब नहीं है।
  • पहुँच बनाम शिक्षा संकट: नामांकन में सुधार के बावजूद गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित नहीं हो पाई है, क्योंकि खराब शैक्षिक परिस्थितियों के कारण कई छात्रों में बुनियादी कौशल की कमी है।
  • शिक्षा में असमानता: लड़कियाँ, विकलांग, ग्रामीण और विस्थापित बच्चे जैसे हाशिए पर रहने वाले समूहों को शिक्षा तक पहुँच और भागीदारी में लगातार बाधाओं का सामना करना पड़ता है।
  • संघर्ष का प्रभाव: चल रहे संघर्ष, विशेष रूप से पश्चिम एशिया जैसे क्षेत्रों में, स्कूली शिक्षा को बाधित कर रहे हैं और स्कूल छोड़ने की दर बढ़ा रहे हैं।
  • वित्तपोषण अंतर: अपर्याप्त और गलत तरीके से लक्षित वित्त पोषण प्रगति में बाधा डाल रहा है, विशेष रूप से कम आय वाले देशों में।
  • डिजिटल विभाजन: प्रौद्योगिकी, इंटरनेट और डिजिटल कौशल तक असमान पहुँच से शैक्षिक असमानताओं के बढ़ने का खतरा है।
  • असमान प्रगति: कुछ देशों ने ड्रापआउट दर में उल्लेखनीय कमी हासिल की है, जो दर्शाता है कि लक्षित नीतियाँ परिणाम दे सकती हैं।

आगे की राह

  • समान पहुँच: सरकारों को हाशिए पर पड़े समूहों जैसे कि लड़कियों, विकलांगों, ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों और संघर्ष प्रभावित बच्चों को लक्षित करके सार्वभौमिक पहुँच को प्राथमिकता देनी चाहिए।
  • सीखने के परिणामों पर ध्यान केंद्रित करना: शिक्षा नीतियों को नामांकन से हटकर बेहतर शिक्षकों, बुनियादी ढाँचे और संसाधनों के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने पर केंद्रित करना चाहिए।
  • शिक्षा वित्तपोषण को मजबूत करना: देशों को बुनियादी ढाँचे, शिक्षकों और शिक्षण सामग्री में मौजूद कमियों को दूर करने के लिए सार्वजनिक धन को बढ़ाना और कुशलतापूर्वक आवंटित करना चाहिए।
  • डिजिटल विभाजन को कम करना: समावेशी और समान डिजिटल शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रौद्योगिकी, इंटरनेट कनेक्टिविटी और डिजिटल कौशल तक पहुँच का विस्तार करना चाहिए।
  • सहयोगात्मक वैश्विक कार्रवाई: सरकारों, नागरिक समाज और यूनेस्को जैसे संगठनों को व्यवस्थागत बाधाओं को दूर करने के लिए मिलकर कार्य करना चाहिए।

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