संदर्भ
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में व्यवधानों ने भारत की आयातित गैस पर भारी निर्भरता को उजागर कर दिया है। प्रमुख शहरों में आपूर्ति की कमी के बीच LPG, LNG, PNG और CNG के बीच अंतर को समझना अत्यंत महत्त्वपूर्ण हो गया है।
संबंधित तथ्य
- होर्मुज जलडमरूमध्य, जिसके माध्यम से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का 20% से अधिक भाग गुजरता है, एक महत्त्वपूर्ण मार्ग (चोकपॉइंट) बन गया है।
- केंद्र ने गैस आपूर्ति के पुनः आवंटन के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 को लागू किया।
- निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए घरों और अस्पतालों को प्राथमिकता दी गई है।
लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG)
- LPG एक पोर्टेबल, स्वच्छ और कुशल ऊर्जा स्रोत है, जो मुख्य रूप से प्रोपेन और ब्यूटेन से बना होता है।
- इसे दाबयुक्त सिलेंडरों में तरल रूप में संगृहीत किया जाता है और यह घरों में खाना पकाने हेतु व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है।
- भारत कुछ LPG का घरेलू उत्पादन करता है, लेकिन कुल माँग को पूरा करने के लिए आयात आवश्यक है।
- सरकार ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के माध्यम से LPG की पहुँच का विस्तार किया, जिसके तहत निम्न आय वर्ग के परिवारों को सब्सिडी युक्त कनेक्शन प्रदान किए गए।
कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (CNG)
- CNG एक पर्यावरण अनुकूल वाहन ईंधन है, जो मुख्य रूप से मेथेन (80–90%) से बना होता है।
- इसे लगभग 200–250 किलोग्राम/सेमी² के दाब पर संपीडित किया जाता है, जिससे कम स्थान में अधिक गैस संगृहीत की जा सकती है।
- LPG के विपरीत, जिसे तरल रूप में संगृहीत किया जाता है, CNG गैसीय अवस्था में ही रहती है।
- CNG का व्यापक उपयोग वाहनों से होने वाले ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन और शहरी प्रदूषण को कम करने के लिए किया जाता है।
पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG)
- PNG मुख्यतः मेथेन (CH₄) से बनी होती है, जिसमें अन्य हाइड्रोकार्बनों की थोड़ी मात्रा भी होती है।
- इसे पाइपलाइनों के माध्यम से सीधे घरों, वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों और उद्योगों तक पहुँचाया जाता है।
- मेथेन में जीवाश्म ईंधनों में सबसे कम कार्बन-से-हाइड्रोजन अनुपात होता है, जिससे PNG अधिक स्वच्छ रूप से जलती है।
- PNG सिलेंडर की आवश्यकता को समाप्त करती है और ईंधन की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करती है।
लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG)
- LNG प्राकृतिक गैस है, जो मुख्यतः मेथेन होती है और इसे –160°C तक ठंडा करके तरल रूप में परिवर्तित किया जाता है।
- इसका विशेष क्रायोजेनिक टैंकरों के माध्यम से परिवहन किया जाता है और बंदरगाहों के निकट स्थित इन्सुलेटेड टैंकों में संगृहीत किया जाता है।
- भारत के LNG आयात का लगभग आधा हिस्सा कतर से दीर्घकालिक अनुबंधों के तहत आता है, जबकि अन्य आपूर्तिकर्ताओं में संयुक्त राज्य अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और रूस शामिल हैं।
- आयातित LNG को पुनः गैसीकरण (regasification) के बाद पाइपलाइनों के माध्यम से बिजली उत्पादन, उर्वरक निर्माण, सिटी गैस वितरण और औद्योगिक प्रक्रियाओं में उपयोग किया जाता है।
- यूरोप जैसे क्षेत्रों की तुलना में भारत की LNG भंडारण क्षमता सीमित है, जिससे वह आपूर्ति में व्यवधान के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाता है।