प्रैक्सिस (PRAXIS) मिशन
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हाल ही में प्रैक्सिस (PRAXIS) मिशन को नासा ने NIAC 2026 के चरण-I वित्तपोषण के लिए चुना है। इसका उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित ऐसे रोबोटिक अन्वेषक का विकास करना है, जो ग्रहों के वलयों के कणों का प्रत्यक्ष नमूना एकत्रित कर सके।
प्रैक्सिस (PRAXIS) मिशन के बारे में
- प्रैक्सिस (PRAXIS) का पूर्ण रूप ‘प्लैनेटरी रिंग्स ऑटोनॉमस एक्सप्लोरेशन विद इन-सीटू सैंपलिंग’ (PRAXIS) है। यह नासा (NASA) के इनोवेटिव एडवांस्ड कॉन्सेप्ट्स (NIAC) कार्यक्रम के अंतर्गत प्रस्तावित एक मिशन अवधारणा है।
- NIAC नासा की एक विशेष पहल है, जिसका उद्देश्य प्रारंभिक चरण के उच्च-जोखिम एवं परिवर्तनकारी अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी विचारों को वित्तीय सहायता एवं प्रोत्साहन प्रदान करना है, जो भविष्य में अंतरिक्ष अन्वेषण की संभावनाओं को परिवर्तित कर सकते हैं।
- उद्देश्य: ग्रहों के वलय तंत्रों से कणों का प्रत्यक्ष संग्रहण एवं विश्लेषण कर उनकी उत्पत्ति, विकास तथा संरचना को समझना।
- प्रमुख घटक
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित रोबोटिक अन्वेषक: यह जैव-प्रेरित अंतरिक्षयान कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) मॉडल की सहायता से उपयुक्त वलय कणों की पहचान एवं विश्लेषण करेगा।
- टच-एंड-गो’ सैंपलिंग: खतरनाक वलय तल से होकर गुजरने के स्थान पर अंतरिक्षयान वलय को क्षणिक रूप से स्पर्श करेगा तथा एक ‘लॉन्ग डिप्लॉयेबल बूम’ की सहायता से कणों की सतह से नमूने एकत्र करेगा।
- इन-सीटू विश्लेषण: उपकरण एकत्रित कणों के आकार, सरंध्रता तथा संरचना का विश्लेषण करेंगे, जिससे वलयों के विभिन्न क्षेत्रों अथवा रिक्त स्थानों से नमूना संग्रहण संभव होगा।
ग्रहों के वलयों के बारे में
- ग्रहों के वलय, कणों से निर्मित चक्राकार संरचनाएँ हैं, जो ग्रहों की परिक्रमा करती हैं। ये विशेष रूप से शनि (Saturn) के चारों ओर अत्यधिक विकसित एवं अत्यधिक परावर्तक रूप में पाए जाते हैं।
- प्रमुख संरचना
- जल-बर्फ: शनि के वलय मुख्यतः जल-बर्फ द्वारा निर्मित हैं, जिसके कारण वे अत्यधिक परावर्तक दिखाई देते हैं।
- शैल एवं धूल: वलय तंत्रों में विभिन्न मात्रा में शैल पदार्थ तथा धूल कण भी पाए जाते हैं।
- विविध कण: वलय कण आकार, सरंध्रता तथा संरचना में भिन्न होते हैं, जिससे उनकी उत्पत्ति एवं विकास के बारे में महत्त्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होती है।
- महत्त्व: ग्रहों के वलयों का अध्ययन खगोलीय संरचनाओं के निर्माण एवं विकास को समझने में सहायता करता है तथा ग्रह तंत्रों एवं उनके विकासक्रम के बारे में हमारी समझ को और अधिक सुदृढ़ बनाता है।
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चाँदीपुरा वायरस (CHPV)

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हाल ही में राजस्थान के दो बच्चों की गुजरात में उपचार के दौरान चाँदीपुरा वायरस (CHPV) से संक्रमित पाए जाने के बाद मृत्यु हो गई।
चाँदीपुरा वायरस (CHPV) के बारे में:
- यह चाँदीपुरा वायरस (CHPV) से होने वाला एक विषाणुजनित संक्रमण है।
- यह रैब्डोविरिडी (Rhabdoviridae) कुल का सदस्य है, जिसमें रेबीज उत्पन्न करने वाला लिसावायरस (Lyssavirus) भी शामिल है।
- संचरण: इसका संचरण संक्रमित वाहकों, जैसे सैंडफ्लाई (Sandfly), मच्छरों तथा किलनियों के काटने से होता है।
- इसके प्रमुख वाहकों में फ्लेबोटोमाइन सैंडफ्लाई (Phlebotomine Sandflies), फ्लेबोटोमस पपाटासी (Phlebotomus papatasi) तथा एडीज एजिप्टी (Aedes aegypti) जैसे कुछ मच्छर शामिल हैं।
- यह विषाणु संक्रमित वाहकों की लार ग्रंथियों में विद्यमान रहता है तथा उनके काटने के माध्यम से मनुष्यों एवं अन्य कशेरुकी जीवों में पहुँचता है।
- रोग की प्रगति: यह विषाणु केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (CNS) तक पहुँचकर मस्तिष्कशोथ (Encephalitis) उत्पन्न कर सकता है।
- रोग अत्यंत तीव्र गति से बढ़ता है तथा अस्पताल में भर्ती होने के 24–48 घंटों के भीतर मृत्यु भी हो सकती है।
- लक्षण: अचानक तेज बुखार, सिरदर्द एवं शरीर में दर्द, श्वसन अवरोध, रक्तस्राव की प्रवृत्ति तथा रक्ताल्पता।
- संवेदनशील जनसंख्या: यह मुख्यतः 15 वर्ष से कम आयु के बच्चों को प्रभावित करता है।
- उपचार: वर्तमान में इसके लिए कोई विशिष्ट एंटीवायरल (Antiviral) औषधि अथवा टीका उपलब्ध नहीं है।
- उपचार मुख्यतः सहायक होता है, जिसमें मस्तिष्क की जटिलताओं के प्रबंधन पर विशेष बल दिया जाता है।
- भारत में महामारी विज्ञान: इस विषाणु को पहली बार वर्ष 1965 में महाराष्ट्र के चाँदीपुरा गाँव में डेंगू/चिकनगुनिया प्रकोप की जाँच के दौरान पृथक किया गया था।
- वर्ष 2003–04 के दौरान इसके प्रमुख प्रकोप महाराष्ट्र, उत्तरी गुजरात तथा आंध्र प्रदेश में दर्ज किए गए।
- यह संक्रमण मुख्यतः मध्य भारत तक स्थानिक (Endemic) बना हुआ है, जहाँ चाँदीपुरा वायरस (CHPV) का प्रसार करने वाली सैंडफ्लाई एवं मच्छरों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक है।
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ईस्ट एशिया समिट (EAS)

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हाल ही में फिलीपींस के मनीला में आयोजित 21वें ईस्ट एशिया समिट (EAS) में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने आसियान (ASEAN) की केंद्रीयता तथा स्वतंत्र, मुक्त एवं समृद्ध हिंद-प्रशांत के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई।
ईस्ट एशिया समिट (EAS) के बारे में:
- प्रकृति: यह हिंद-प्रशांत क्षेत्र से संबंधित राजनीतिक, सुरक्षा एवं आर्थिक मुद्दों पर संवाद के लिए नेताओं के स्तर का एक सामरिक मंच है।
- स्थापना: वर्ष 2005 में। इसका पहला शिखर सम्मेलन दिसंबर 2005 में कुआलालंपुर, मलेशिया में आयोजित हुआ था।
- प्रशासनिक एवं परिचालन सहयोग: इसका प्रशासनिक एवं परिचालन सहयोग इंडोनेशिया के जकार्ता स्थित आसियान सचिवालय (ASEAN Secretariat) द्वारा प्रदान किया जाता है।
- सदस्यता: ईस्ट एशिया समिट में कुल 19 सहभागी देश शामिल हैं, जिनमें 11 आसियान (ASEAN) सदस्य देश— ब्रुनेई दारुस्सलाम, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओ पीडीआर, मलेशिया, म्याँमार, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड, तिमोर-लेस्ते तथा वियतनाम एवं ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, जापान, न्यूज़ीलैंड, दक्षिण कोरिया, रूस व संयुक्त राज्य अमेरिका शामिल हैं।
- नेतृत्व: इसका नेतृत्व आसियान (ASEAN) करता है तथा इसकी अध्यक्षता प्रतिवर्ष आसियान सदस्य देशों के बीच क्रमिक रूप से परिवर्तित होती है।
- प्राथमिकता वाले क्षेत्र: पर्यावरण एवं ऊर्जा, शिक्षा, वित्त, वैश्विक स्वास्थ्य एवं महामारीजनित रोग, प्राकृतिक आपदा प्रबंधन तथा आसियान कनेक्टिविटी।
- बैठक संरचना: ईस्ट एशिया समिट का आयोजन प्रतिवर्ष नेताओं के शिखर सम्मेलन के रूप में किया जाता है, जबकि विदेश मंत्री, आर्थिक मंत्री तथा वरिष्ठ अधिकारी समय-समय पर बैठकें आयोजित कर शिखर सम्मेलन के एजेंडे को आगे बढ़ाते हैं।
- भारत की भागीदारी: भारत इसका संस्थापक सदस्य है तथा क्षेत्रीय सुरक्षा, समुद्री सहयोग एवं संपर्कता से संबंधित चर्चाओं में सक्रिय रूप से भाग लेता है।
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सरबत.एआई (Sarbat.AI) परियोजना
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हाल ही में पंजाब ने ‘Sarbat.AI’ परियोजना के अंतर्गत कक्षा I से XII तक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को मुख्यधारा (Mainstream) के विषय के रूप में शुरू करने की घोषणा की है। इसके साथ ही पंजाब ऐसा करने वाला भारत का पहला राज्य बन गया है।
सरबत.AI (Sarbat.AI) परियोजना के बारे में
- सरबत.AI (Sarbat.AI) पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (PSEB) द्वारा प्रारंभ की गई राज्यव्यापी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) शिक्षा पहल है, जिसका उद्देश्य विद्यालयी शिक्षा में AI को एकीकृत करना तथा विद्यार्थियों में भविष्य उन्मुख तकनीकी कौशल विकसित करना है।
- प्रमुख विशेषताएँ
- चरणबद्ध क्रियान्वयन: प्रथम चरण में कक्षा VIII से XII तक कंप्यूटर विज्ञान पाठ्यक्रम के माध्यम से AI को शामिल किया जाएगा, जबकि द्वितीय चरण में कक्षा I से VII तक आयु-उपयुक्त AI शिक्षा का विस्तार किया जाएगा।
- वैश्विक मानक: पाठ्यक्रम का विकास सिंगापुर, फिनलैंड, संयुक्त अरब अमीरात तथा अमेरिका की सर्वोत्तम अंतरराष्ट्रीय प्रथाओं के आधार पर किया गया है तथा इसे यूनेस्को (UNESCO) के एथिकल AI फ्रेमवर्क के अनुरूप बनाया गया है।
- प्रौद्योगिकी-सक्षम शिक्षण: विद्यार्थी लाइव ऑनलाइन कक्षाओं, रिकॉर्डेड व्याख्यानों, परियोजना-आधारित शिक्षण, सतत् मूल्यांकन तथा लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम (LMS) के माध्यम से अध्ययन करेंगे।
- वृहद क्षमता निर्माण: इस पहल के अंतर्गत 25,172 विद्यालयों तथा लगभग 31.5 लाख विद्यार्थियों को शामिल किया जाएगा। प्रारंभिक चरण में 12,424 कंप्यूटर विज्ञान शिक्षक इसके क्रियान्वयन का नेतृत्व करेंगे तथा क्रमिक रूप से दो लाख से अधिक शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जाएगा।
- महत्त्व: इस पहल का उद्देश्य ऐसी पीढ़ी तैयार करना है, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के प्रति जागरूक, नैतिक रूप से उत्तरदायी तथा डिजिटल, नवाचार एवं उद्यमशीलता कौशल से युक्त हो।
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कॉर्पोरेट मित्र योजना
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हाल ही में कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय (MCA) के अधीन भारतीय कॉरपोरेट कार्य संस्थान (IICA), शिलांग ने अरुणाचल प्रदेश में कॉरपोरेट मित्र योजना पर एक जागरूकता वेबिनार आयोजित किया।
कॉरपोरेट मित्र योजना के बारे में
- कॉरपोरेट मित्र योजना केंद्र सरकार की एक पहल है, जिसकी घोषणा केंद्रीय बजट 2026–27 में कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय (MCA) द्वारा की गई थी।
- इसका उद्देश्य प्रमाणित पैरा-प्रोफेशनल (Para-professionals) का एक कुशल नेटवर्क विकसित करना है, जिन्हें “कॉरपोरेट मित्र” कहा जाएगा। ये सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) को कम लागत पर नियामकीय अनुपालन, लेखांकन तथा कराधान संबंधी सहायता प्रदान करेंगे।
- नोडल मंत्रालय: कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय (MCA)।
- उद्देश्य: विशेष रूप से टियर-II एवं टियर-III शहरों के MSMEs को प्रशिक्षित कॉरपोरेट मित्रों का सहयोगी तंत्र उपलब्ध कराकर सशक्त बनाना।
- पात्रता: 30 वर्ष तक की आयु के स्नातक तथा स्नातक अंतिम वर्ष के विद्यार्थी इस योजना के लिए आवेदन करने के पात्र हैं।
- क्रियान्वयन: योजना का संचालन स्वयं प्लस (SWAYAM Plus) पोर्टल के माध्यम से किया जाएगा।
प्रमुख सहभागी संस्थान
- राजीव गांधी विश्वविद्यालय (RGU), अरुणाचल प्रदेश– वेबिनार का सहयोगी विश्वविद्यालय।
- इंस्टिट्यूट ऑफ कॉस्ट अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICMAI)– प्रमुख सह-आयोजक।
- इंस्टिट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरीज ऑफ इंडिया (ICSI) तथा इंस्टिट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI)– सहायक सह-आयोजक।
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मॉल्डोवा (Moldova)

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हाल ही में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने मॉल्डोवा की राजकीय यात्रा की। यह किसी भारतीय राष्ट्रपति की मॉल्डोवा की पहली द्विपक्षीय (State) यात्रा थी।
संबंधित तथ्य
- वर्ष 1992 में राजनयिक संबंध स्थापित होने के बाद किसी भारतीय राष्ट्राध्यक्ष की यह पहली मॉल्डोवा यात्रा थी।
- उन्होंने राष्ट्रपति माया सांडू के साथ चिसिनाउ में द्विपक्षीय वार्ता की, जिसमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) एवं बहुपक्षीय सुधार, आतंकवाद-रोधी सहयोग तथा आर्थिक एवं सांस्कृतिक सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों पर चर्चा हुई।
मॉल्डोवा के बारे में
- मॉल्डोवा यूक्रेन एवं रोमानिया से घिरा एक स्थलरुद्ध देश है।
- यह बाल्कन प्रायद्वीप के उत्तर-पूर्वी भाग में स्थित है।
- बाल्कन प्रायद्वीप दक्षिण-पूर्वी यूरोप में स्थित है तथा इसका नाम बाल्कन पर्वतमाला के नाम पर पड़ा है।
- मॉल्डोवा का अधिकांश भाग प्रुत एवं नीस्टर नदियों के मध्य स्थित है।
- यह कार्पेथियन पर्वतमाला के विशाल चाप के पूर्व में स्थित है।
- यूरोपीय संघ (EU) के संदर्भ में, मॉल्डोवा इसका सदस्य नहीं है, किंतु वर्ष 2022 में इसे यूरोपीय संघ के उम्मीदवार देश (EU Candidate Status) का दर्जा प्राप्त हुआ।
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कारगिल विजय दिवस
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भारत में 26 जुलाई 2026 को 27वाँ कारगिल विजय दिवस मनाया गया, जिसमें वीरगति प्राप्त सैनिकों को श्रृद्धांजलि अर्पित की।
कारगिल विजय दिवस के बारे में:
- कारगिल विजय दिवस प्रत्येक वर्ष 26 जुलाई को वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध में पाकिस्तान पर भारत की विजय के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।
- यह ऑपरेशन विजय के वीर सैनिकों के साहस, बलिदान एवं अदम्य संकल्प को श्रद्धांजलि अर्पित करता है।
- ऑपरेशन विजय कारगिल क्षेत्र में पाकिस्तान की घुसपैठ के विरुद्ध भारत की सैन्य कार्रवाई वाले ऑपरेशन को नाम दिया था।
- कारगिल लद्दाख में नियंत्रण रेखा (LoC) के निकट स्थित एक नगर है, जो श्रीनगर से लगभग 200 किमी. दूर है।
- विषय (2026, 27वीं वर्षगाँठ): “वन राइड, वन नेशन, वन सैल्यूट” विषय इस अवसर चिह्नित करने के लिए आयोजित शौर्य विजय यात्रा मोटरसाइकिल रैली का विषय था।
कारगिल के बारे में
- कारगिल भारत के लद्दाख केंद्रशासित प्रदेश में स्थित एक प्रमुख नगर एवं जिला है।
- भौगोलिक स्थिति: यह सुरु नदी के तट पर स्थित है, जो सिंधु नदी की एक प्रमुख सहायक नदी है।
- सीमावर्ती स्थिति: यह जिला भारत एवं पाकिस्तान को विभाजित करने वाली नियंत्रण रेखा (LoC) के निकट स्थित है।
- कारगिल की अवस्थिति: अत्यधिक ऊँचाई, दुर्गम पर्वतीय क्षेत्र एवं कठोर जलवायु ने सैन्य अभियानों को अत्यंत चुनौतीपूर्ण बना दिया था।
- वर्तमान सुरक्षा व्यवस्था: कारगिल की सुरक्षा का प्राथमिक परिचालन दायित्व भारतीय सेना के XIV कोर (फायर एंड फ्यूरी कोर) के अधीन है।
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