संदर्भ
नीट यूजी, 2026 परीक्षा में कथित प्रश्न-पत्र लीक एवं परीक्षा की निष्पक्षता पर उठे गंभीर प्रशनों की पृष्ठभूमि में, सर्वोच्च न्यायालय ने नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता वाले उच्चस्तरीय कार्यबल से नीट-यूजी परीक्षा को चरणबद्ध रूप से कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) में आयोजित करने की व्यवहार्यता एवं आवश्यक सुधारों पर सुझाव माँगे हैं, ताकि सार्वजनिक परीक्षाओं की सुरक्षा, पारदर्शिता एवं विश्वसनीयता को सुदृढ़ किया जा सके।

पृष्ठभूमि
- नीट यूजी परीक्षा का 2026 का रद्द होना: 3 मई, 2026 को आयोजित नीट यूजी की परीक्षा 2026 को व्यापक प्रश्न-पत्र लीक के आरोपों के बाद केंद्र सरकार तथा राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने रद्द कर दिया था।
- न्यायिक हस्तक्षेप: सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष दायर एक याचिका में नीट के संचालन में व्यापक सुधारों की माँग की गई, जिसमें ऑफलाइन परीक्षा से कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) कराने की माँग भी शामिल थी।
- व्यवस्थागत सुधारों की आवश्यकता: न्यायालय ने टिप्पणी की कि प्रश्न-पत्रों के परिवहन के लिए भारतीय वायु सेना (IAF) की तैनाती जैसे असाधारण उपाय केवल अस्थायी समाधान हैं तथा वे दीर्घकालिक संस्थागत सुधारों का विकल्प नहीं हो सकते हैं।
सर्वोच्च न्यायालय की प्रमुख टिप्पणियाँ
- संस्थागत सुधार अनिवार्य हैं: न्यायालय ने बल दिया कि सार्वजनिक परीक्षाओं की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए अस्थायी प्रशासनिक व्यवस्थाओं के बजाय स्थायी संस्थागत सुरक्षा उपायों की आवश्यकता है।
- डिजिटल परीक्षाओं के लिए साइबर सुरक्षा अनिवार्य है: न्यायालय ने स्पष्ट किया कि CBT प्रणाली को अपनाने के साथ एन्क्रिप्शन (Encryption), डेटाबेस सुरक्षा, साइबर सुरक्षा तथा सुरक्षित डेटा भंडारण से संबंधित सुदृढ़ उपाय अनिवार्य होने चाहिए।
- व्यापक सुधार रूपरेखा आवश्यक है: न्यायालय ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह प्रस्तावित साइबर सुरक्षा ढाँचे, क्रियान्वयन एजेंसी तथा डेटा उल्लंघन से सुरक्षा उपायों का विवरण देते हुए एक अतिरिक्त शपथ-पत्र प्रस्तुत करे।
- विशेषज्ञ परामर्श आवश्यक है: न्यायालय ने उच्चस्तरीय कार्यबल से CBT की व्यवहार्यता तथा इसके सुरक्षित क्रियान्वयन के लिए आवश्यक सुरक्षा उपायों के संबंध में अनुशंसाएँ प्राप्त करने का निर्णय लिया है।
कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) आयोजित करने पर क्यों किया जा रहा है?
- प्रश्न-पत्र लीक की रोकथाम: कंप्यूटर आधारित परीक्षा मुद्रण, परिवहन, भंडारण तथा भौतिक प्रश्न-पत्रों के वितरण से जुड़ी कमजोरियों को समाप्त करती है, जिससे संगठित प्रश्न-पत्र लीक की संभावना में उल्लेखनीय कमी आती है।
- परीक्षा की विश्वसनीयता को मजबूत बनाना: डिजिटल परीक्षाएँ सुरक्षित ऑडिट ट्रेल (Audit Trail) उपलब्ध कराती हैं तथा मानवीय हस्तक्षेप की संभावनाओं को न्यूनतम करके निष्पक्षता, पारदर्शिता, विश्वसनीयता एवं जवाबदेही को सुदृढ़ बनाती हैं।
- प्रशासनिक दक्षता में सुधार: CBT के माध्यम से मूल्यांकन शीघ्र किया जा सकता है, परिणाम समय पर घोषित किए जा सकते हैं, संसाधनों का बेहतर प्रबंधन संभव होता है तथा लॉजिस्टिक लागत कम होती है, साथ ही समान परीक्षा मानकों को भी सुनिश्चित किया जा सकता है।
- प्रौद्योगिकी-संचालित शासन को सुदृढ़ बनाना: यह संक्रमण डिजिटल इंडिया, ई-गवर्नेंस (e-Governance) तथा प्रौद्योगिकी-सक्षम लोक सेवा वितरण के उद्देश्यों को समर्थन प्रदान करते हुए परीक्षा प्रबंधन का आधुनिकीकरण करता है।
- उन्नत सुरक्षा उपायों को सक्षम बनाना: डिजिटल मंच एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन , मल्टी-फैक्टर प्रमाणीकरण (Multi-Factor Authentication), यादृच्छिक प्रश्न-पत्र (Randomized Question Papers), AI आधारित निगरानी तथा वास्तविक समय खतरा पहचान (Real-Time Threat Detection) जैसे उपायों को एकीकृत कर परीक्षा सुरक्षा को सुदृढ़ बना सकते हैं।
सार्वजनिक परीक्षा सुधारों पर उच्चस्तरीय कार्यबल के बारे में
- संरचना: नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता वाला यह उच्चस्तरीय कार्यबल डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, साइबर सुरक्षा, खुफिया तंत्र, उच्च शिक्षा, स्कूली शिक्षा तथा लोक प्रशासन के विशेषज्ञों को एक साथ लाकर भारत की सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधारों की अनुशंसा करता है।
अधिदेश
- लीक-रोधी परीक्षा प्रणाली का विकास: सुरक्षित, पारदर्शी, प्रौद्योगिकी-संचालित एवं छेड़छाड़-रोधी सार्वजनिक परीक्षा पारिस्थितिकी तंत्र स्थापित करने हेतु उपायों की अनुशंसा करना।
- कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) में संक्रमण: राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं को चरणबद्ध रूप से कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) में परिवर्तित करने के लिए ऐसी रूपरेखा तैयार करना, जो सुगमता, समानता एवं विश्वसनीयता सुनिश्चित करे।
- साइबर सुरक्षा एवं डेटा संरक्षण: परीक्षा प्रक्रियाओं की सुरक्षा के लिए एन्क्रिप्शन (Encryption), सुरक्षित डेटाबेस, साइबर सुरक्षा, डेटा संरक्षण तथा साइबर प्रत्यास्थता (Cyber Resilience) को सुदृढ़ बनाना।
- संस्थागत एवं शासन सुधार: परीक्षा शासन के आधुनिकीकरण, पारदर्शिता, जवाबदेही, परिचालन दक्षता तथा प्रतिस्पर्द्धी परीक्षाओं में जनविश्वास को सुदृढ़ करने हेतु सुधारों की अनुशंसा करना।
कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) के क्रियान्वयन में चुनौतियाँ:
- डिजिटल अवसंरचना की कमी: देशव्यापी कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) के लिए पर्याप्त कंप्यूटर अवसंरचना, विश्वसनीय विद्युत आपूर्ति, उच्च गति इंटरनेट संपर्क तथा देशभर में मानकीकृत परीक्षा केंद्रों की आवश्यकता होती है।
- साइबर सुरक्षा संबंधी जोखिम: यदि सुदृढ़ साइबर सुरक्षा ढाँचे द्वारा संरक्षित न किया जाए, तो ऑनलाइन परीक्षाएँ हैकिंग, मैलवेयर (Malware), रैनसमवेयर (Ransomware), आंतरिक खतरों तथा अनधिकृत पहुँच जैसी चुनौतियों के प्रति संवेदनशील बनी रहती हैं।
- डिजिटल विभाजन: डिजिटल अवसंरचना तक असमान पहुँच, कंप्यूटर साक्षरता के विभिन्न स्तर तथा क्षेत्रीय असमानताएँ ग्रामीण एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के अभ्यर्थियों को प्रतिकूल स्थिति में ला सकती हैं।
- डेटा गोपनीयता संबंधी चिंताएँ: अभ्यर्थियों की व्यक्तिगत जानकारी के बड़े पैमाने पर संग्रहण एवं भंडारण के कारण डेटा संरक्षण, गोपनीयता तथा सुरक्षित डिजिटल शासन के लिए सुदृढ़ सुरक्षा उपाय आवश्यक हैं।
- तकनीकी व्यवधान: सर्वर विफलता, सॉफ्टवेयर त्रुटियाँ तथा नेटवर्क बाधाएँ परीक्षा के सुचारु संचालन एवं निष्पक्षता को प्रभावित कर सकती हैं, यदि पर्याप्त आकस्मिक व्यवस्था स्थापित न की जाए।
आगे की राह
- चरणबद्ध संक्रमण अपनाना: सभी क्षेत्रों में पर्याप्त डिजिटल अवसंरचना एवं संस्थागत तैयारी सुनिश्चित करने के बाद ही कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) की ओर क्रमिक संक्रमण किया जाना चाहिए।
- सुदृढ़ साइबर सुरक्षा को संस्थागत बनाना: परीक्षा प्रणाली में एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन (End-to-End Encryption), मल्टी-फैक्टर प्रमाणीकरण (Multi-Factor Authentication), AI आधारित खतरा पहचान, नियमित सुरक्षा ऑडिट तथा आपदा पुनर्प्राप्ति तंत्र (Disaster Recovery Mechanism) को शामिल किया जाना चाहिए।
- डिजिटल विभाजन को कम करना: सरकार को डिजिटल अवसंरचना का विस्तार करना चाहिए, मॉक CBT परीक्षाएँ आयोजित करनी चाहिए तथा डिजिटल साक्षरता को सुदृढ़ बनाना चाहिए, ताकि सभी अभ्यर्थियों की समान भागीदारी सुनिश्चित हो सके।
- संस्थागत निगरानी को सुदृढ़ बनाना: स्वतंत्र तकनीकी ऑडिट, सतत् निगरानी तथा पारदर्शी शिकायत निवारण तंत्र स्थापित किए जाने चाहिए, ताकि सार्वजनिक परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनी रहे।
- विधिक एवं प्रशासनिक सुधारों को बढ़ावा देना: नकल-रोधी कानून का प्रभावी क्रियान्वयन, त्वरित न्यायालयों (Fast-Track Courts) के माध्यम से शीघ्र अभियोजन तथा सतत् संस्थागत समीक्षा को तकनीकी सुधारों के साथ समन्वित किया जाना चाहिए।
निष्कर्ष
कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) की ओर संक्रमण सार्वजनिक परीक्षाओं की सुरक्षा, पारदर्शिता एवं विश्वसनीयता को सुदृढ़ बना सकता है, बशर्ते इसे सुदृढ़ साइबर सुरक्षा, डिजिटल समावेशन, संस्थागत जवाबदेही तथा प्रभावी विधिक सुरक्षा उपायों का समर्थन प्राप्त हो।