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क्रिप्टो-एसेट रिपोर्टिंग फ्रेमवर्क (CARF)

28 Jul 2026

संदर्भ

हाल ही में केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने कर पारदर्शिता और कर सूचनाओं के सीमा-पार आदान-प्रदान को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से भारत के क्रिप्टो-संपत्ति रिपोर्टिंग तंत्र को आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD) के क्रिप्टो-एसेट रिपोर्टिंग फ्रेमवर्क (CARF) के अनुरूप संशोधित किया है।

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क्रिप्टो-एसेट रिपोर्टिंग फ्रेमवर्क (CARF) के बारे में

यह आर्थिक सहयोग संगठन द्वारा विकसित एक वैश्विक रिपोर्टिंग ढाँचा है, जिसका उद्देश्य सहभागी अधिकार क्षेत्रों (Participating jurisdictions) के बीच क्रिप्टो-संपत्तियों से संबंधित कर सूचनाओं के स्वचालित आदान प्रदान को सुगम बनाना है।

  • उद्देश्य: कर पारदर्शिता में सुधार करना, सीमा-पार कर चोरी को रोकना और क्रिप्टो-संपत्तियों के बढ़ते उपयोग के कारण उत्पन्न होने वाले रिपोर्टिंग अंतराल को दूर करना।
  • क्षेत्र: इस ढाँचे के अंतर्गत रिपोर्टिंग क्रिप्टो-एसेट सर्विस प्रदाताओं (RCASPs) के लिए उपयोगकर्ताओं की पहचान स्थापित करना, समुचित जाँच/पड़ताल करना तथा निर्दिष्ट क्रिप्टो-संपत्ति लेनदेन की जानकारी कर अधिकारियों को रिपोर्ट करना आवश्यक है।
  • वैश्विक विकास:
    • यह ढाँचा वर्ष 2022 में G20 के अधिदेश के तहत OECD द्वारा विकसित किया गया था।
    • इसे G20 बाली लीडर्स घोषणा (2022) द्वारा समर्थन दिया गया था।
    • भारत की G20 अध्यक्षता (2023):सदस्य देशों ने एक समन्वित कार्यान्वयन समयसीमा का समर्थन किया, जिसके अंतर्गत अधिकांश देशों ने वर्ष 2027 से इसके कार्यान्वयन (रोलआउट) प्रारंभ करने का समर्थन किया।

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के बारे में

  • केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) केन्द्रीय राजस्व बोर्ड अधिनियम, 1963 के अंतर्गत गठित एक वैधानिक निकाय है।
  • प्रशासनिक मंत्रालय: यह वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग के अंतर्गत कार्य करता है।
  • कार्य: यह आयकर अधिनियम का प्रशासन करता है, प्रत्यक्ष कर नीतियों का निर्माण करता है, नियम, अधिसूचनाएँ और दिशा-निर्देश जारी करता है तथा आयकर विभाग के कामकाज का पर्यवेक्षण करता है।

आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD) के बारे में

  • OECD वर्ष 1961 में स्थापित एक अंतर-सरकारी संगठन है, जिसका उद्देश्य आर्थिक सहयोग, नीतिगत समन्वय और सतत् विकास को बढ़ावा देना है।
  • मुख्यालय: पेरिस, फ्राँस।
  • सदस्यता: इसमें 38 सदस्य देश शामिल हैं।
  • भारत का संबंध: यद्यपि भारत OECD का सदस्य नहीं है, तथापि वह इसकी कई पहलों में सक्रिय रूप से भाग लेता है, जिनमें बेस इरोजन एंड प्रॉफिट शिफ्टिंग (BEPS) पर G20/OECD इन्क्लूसिव फ्रेमवर्क’ और ‘क्रिप्टो-एसेट रिपोर्टिंग फ्रेमवर्क (CARF)’ प्रमुख हैं।

फ्रेमवर्क क्यों विकसित किया गया था?

  • कर चोरी पर अंकुश: क्रिप्टो-संपत्तियों के तीव्र विस्तार ने पारंपरिक वित्तीय प्रणाली से इतर सीमा-पार लेनदेन को बढ़ावा दिया है, जिससे कर चोरी और अघोषित आय का जोखिम बढ़ गया है।
  • रिपोर्टिंग अंतरालों को पाटना: ‘कॉमन रिपोर्टिंग स्टैंडर्ड’ (CRS) और ‘फॉरेन अकाउंट टैक्स कंप्लायंस एक्ट’ (FATCA) जैसे मौजूदा सूचना-साझाकरण तंत्र क्रिप्टो-संपत्ति लेनदेन को व्यापक रूप से कवर नहीं करते हैं।
  • वैश्विक कर पारदर्शिता को मजबूत करना: एक समान रिपोर्टिंग मानक अधिकार क्षेत्रों के मध्य सूचनाओं के स्वचालित आदान-प्रदान (AEOI) को सुगम बनाता है, जिससे कर अधिकारियों को ऑफशोर क्रिप्टो संपत्तियों और उनके लेनदेन की पहचान करने में सहायता मिलती है।
  • सरकारी राजस्व का संरक्षण: प्रभावी रिपोर्टिंग व्यवस्था, डिजिटल संपत्तियों के माध्यम से कर वंचना की संभावनाओं को सीमित करके कराधार की सुरक्षा तरता सरकारी राजस्व करने संरक्षण में सहायक होती है।

क्रिप्टो-एसेट सर्विस प्रदाताओं के लिए रिपोर्टिंग दायित्व:

  • ग्राहक संबंधित समुचित जाँच-पड़ताल: रिपोर्टिंग क्रिप्टो-एसेट सेवा प्रदाताओं (RCASPs) के लिए लेनदेन की रिपोर्टिंग से पूर्व अपने ग्राहक को जानिए’ (Know Your Customer—KYC) प्रक्रिया के अंतर्गत उपयोगकर्ताओं का सत्यापन करना अनिवार्य है।
  • करदाता की जानकारी एकत्र करना: सेवा प्रदाताओं के लिए उपयोगकर्ताओं से निर्धारित करदाता संबंधी जानकारी और वैध स्व-प्रमाणन प्राप्त करना अनिवार्य है।
  • लेनदेन रिकॉर्ड का रखरखाव: RCASPs को रिपोर्ट करने योग्य क्रिप्टो लेनदेन के विस्तृत रिकॉर्ड बनाए रखने और सहायक दस्तावेजों को सुरक्षित रखना आवश्यक है।
  • वार्षिक रिपोर्टिंग: सेवा प्रदाताओं को फॉर्म 167 के माध्यम से निर्धारित प्रारूप में वार्षिक लेनदेन जानकारी प्रस्तुत करना आवश्यक है।
  • संक्रमणकालीन समयसीम (ट्रांजिशन टाइमलाइन): नए उपयोगकर्ताओं के लिए ऑनबोर्डिंग (पंजीकरण) के समय ही समुचित जाँच पड़ताल (सत्यापन) करना अनिवार्य है, जबकि 31 दिसंबर, 2025 तक के पूर्ववर्ती उपयोगकर्ताओं का सत्यापन 1 जनवरी 2026 से 12 महीने के भीतर पूरा किया जाना आवश्यक है।

करदाताओं के लिए प्रभाव

  • कोई अतिरिक्त अनुपालन बोझ नहीं: यह टिप्पणी व्यक्तिगत करदाताओं पर कोई नया रितुर्ण दाखिल करने या अतिरिक्त अनुपालन संबंधी दायित्व आरोपित नहीं करती है।
  • अधिक कर पारदर्शिता: इस व्यवस्था के माध्यम से कर अधिकारियों को लेनदेन-स्तरीय जानकारी उपलब्ध होगी, जिसमें ऑफशोर क्रिप्टो एक्सचेंजों के माध्यम से किए गए लेनदेन भी शामिल हैं।
  • गहन जाँच (Enhanced Scrutiny): विस्तृत लेनदेन संबंधी आँकड़ों की उपलब्धता डेटा-आधारित सत्यापन को सुदृढ़ करेगी और अघोषित क्रिप्टो आय का पता लगाने में सुधार करेगी।
  • सटीक रिकॉर्ड-रखरखाव की आवश्यकता: रिपोर्ट की गई जानकारी के साथ निरंतरता (सामंजस्य) सुनिश्चित करने के लिए करदाताओं को खरीद, बिक्री, वॉलेट ट्रांसफर, एक्सचेंज स्टेटमेंट और सहायक दस्तावेजों के उचित रिकॉर्ड बनाए रखने चाहिए।
  • सुदृढ़ कर अनुपालन: क्रिप्टो-संपत्तियों से प्राप्त आय का आयकर अधिनियम के लागू प्रावधानों के अनुसार यथावत् प्रकटीकरण एवं रिपोर्टिंग करना आवश्यक होगा, जिससे कर अनुपालन और अधिक सुदृढ़ होगा।

इस फ्रेमवर्क का महत्त्व

  • कर प्रशासन का सुदृढ़ीकरण: यह ढाँचा कर चोरी का पता लगाने, स्वैच्छिक अनुपालन में सुधार करने और कर प्रशासन को मजबूत करने की कर अधिकारियों की क्षमता को बढ़ाता है।
  • अंतरराष्ट्रीय कर सहयोग को बढ़ावा देना: क्रिप्टो लेनदेन डेटा का स्वचालित आदान-प्रदान कर प्रशासनों के मध्य सहयोग को मजबूत करता है और कर चोरी के विरुद्ध विश्व स्टार पर किए जा रहे प्रयासों को को सुदृढ़ समर्थन प्रदान करता है।
  • डिजिटल अर्थव्यवस्था में पारदर्शिता में सुधार: मानकीकृत रिपोर्टिंग आवश्यकताएँ तेजी से बढ़ते क्रिप्टो-संपत्ति पारिस्थितिकी तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ाती हैं।
  • साक्ष्य-आधारित प्रवर्तन का समर्थन: विश्वसनीय लेनदेन डेटा तक पहुँच अधिक प्रभावी जोखिम मूल्यांकन, डेटा एनालिटिक्स और लक्षित कर प्रवर्तन को सक्षम बनाती है।
  • भारत को वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप ढालना: OECD ढाँचे को अपनाना कर पारदर्शिता और वित्तीय अखंडता पर अंतरराष्ट्रीय मानकों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है।
क्रिप्टो-एसेट रिपोर्टिंग फ्रेमवर्क (CARF)

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