कोसी–मेची अंतरराज्यीय संपर्क परियोजना

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हाल ही में केंद्र सरकार ने कोसी–मेची अंतरराज्यीय संपर्क परियोजना को प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना–त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम (PMKSY-AIBP) के अंतर्गत शामिल करते हुए परियोजना के लिए ₹3,652.56 करोड़ की केंद्रीय सहायता स्वीकृत की है।
संबंधित तथ्य
- इस परियोजना को मार्च 2029 तक पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
कोसी–मेची अंतरराज्यीय संपर्क परियोजना के बारे में
- यह बिहार की एक नदी जोड़ो परियोजना है, जिसका उद्देश्य कोसी नदी (महानंदा नदी की सहायक नदी, जिसका उद्गम नेपाल में है तथा जो भारत के उत्तरी बिहार से होकर प्रवाहित होती है) तथा मेची नदी (जो बिहार एवं नेपाल के मध्य भारत–नेपाल सीमा के एक भाग का निर्माण करती है) को नहर प्रणाली के माध्यम से जोड़कर सिंचाई अवसंरचना में सुधार करना है।
- भारत–नेपाल सहयोग: कोसी नदी पर बाँधों के निर्माण के संबंध में भारत एवं नेपाल के मध्य बाढ़ प्रबंधन सहित पारस्परिक लाभों के लिए नियमित संवाद जारी है।
- संयुक्त परियोजना कार्यालय (JPO-SKSKI): भारत एवं नेपाल द्वारा वर्ष 2003 में गठित यह कार्यालय सप्त कोसी बहुउद्देशीय परियोजना तथा सुन-कोसी–कमला अपवर्तन बहुउद्देशीय परियोजना के सर्वेक्षण तकनीक अध्ययन एवं विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPRs) तैयार करने के लिए कार्य कर रहा है।
- कोसी-गंडक बेसिन प्राधिकरण: सरकार ने स्पष्ट किया है कि स्थायी कोसी-गंडक बेसिन प्राधिकरण की स्थापना का कोई प्रस्ताव वर्तमान में विचाराधीन नहीं है।
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यूनेस्को की विश्व धरोहर संकटग्रस्त सूची का विस्तार: छह नए स्थल शामिल

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यूनेस्को (UNESCO) की विश्व धरोहर समिति के 47वें सत्र, जो वर्ष 2026 में बुसान, कोरिया गणराज्य में आयोजित हुआ, में छह स्थलों को विश्व धरोहर संकटग्रस्त सूची में शामिल किया गया है।
- इनमें से तीन स्थलों को आपातकालीन प्रक्रिया के माध्यम से विश्व धरोहर सूची में नव-अभिलेखित किया गया तथा साथ ही उन्हें संकटग्रस्त सूची में भी शामिल किया गया।
आपातकालीन प्रक्रिया के माध्यम से नव-अभिलेखित विश्व धरोहर स्थल
- बोमा-बाडिंगिलो प्रवासी परिदृश्य (दक्षिण सूडान): पूर्वी अफ्रीका का सवाना क्षेत्र, जहाँ विश्व का सबसे बड़ा ज्ञात स्थलीय स्तनधारी प्रवासन तथा समृद्ध जैव विविधता पाई जाती है।
- यह अवसंरचना विकास, अवैध शिकार, वन्यजीव तस्करी, असुरक्षा तथा संरक्षण क्षमता की कमी से संकटग्रस्त है।
- माउंट अमेल के दुर्ग (लेबनान): पाँच दुर्गों का समूह, जो क्रूसेडर, इस्लामी तथा 19वीं शताब्दी तक रक्षात्मक वास्तुकला के विकास को प्रदर्शित करता है।
- यह चल रहे सशस्त्र संघर्ष से संकटग्रस्त है।
- सेबास्टिया (फिलिस्तीन राज्य): पुरातात्त्विक स्थल, जहाँ इजरायल के राज्य, हेलेनिस्टिक, रोमन, बाइजेंटाइन, इस्लामी, क्रूसेडर, अय्यूबिद/ममलूक तथा उस्मानी काल के अवशेष प्राप्त हुए हैं।
- समारिया राष्ट्रीय उद्यान: यह स्थल सशस्त्र संघर्ष, विकास संबंधी दबावों तथा अपरदन (Erosion) के कारण गंभीर खतरे का सामना कर रहा है, जिसके परिणामस्वरूप इसकी पारिस्थितिकीय अखंडता एवं जैव विविधता प्रभावित हो रही है।
पूर्व से विश्व धरोहर सूची में शामिल वे स्थल, जिन्हें संकटग्रस्त सूची में जोड़ा गया
- टॉरिक चेर्सोनीज का प्राचीन नगर एवं उसका कोरा (यूक्रेन): अवैध अधिकार, नए निर्माण तथा पुरातात्त्विक उत्खननों के कारण इसकी अखंडता प्रभावित हो रही है।
- परामारिबो का ऐतिहासिक आंतरिक नगर (सूरीनाम): आधुनिक निर्माण परियोजनाओं के कारण इसके ऐतिहासिक नगरीय परिदृश्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
- टायर (लेबनान): वर्तमान संचालित सशस्त्र संघर्ष के कारण इसका असाधारण सार्वभौमिक मूल्य (OUV) संकट में है।
यूनेस्को की विश्व धरोहर संकटग्रस्त सूची के बारे में:
- स्थापना: वर्ष 1972 के यूनेस्को विश्व धरोहर अभिसमय के अनुच्छेद-11(4) के अंतर्गत इसकी स्थापना की गई थी।
- क्षेत्र: इसमें ऐसे विश्व धरोहर स्थल शामिल किए जाते हैं, जो अपने असाधारण सार्वभौमिक मूल्य (OUV) के लिए गंभीर एवं विशिष्ट खतरों का सामना कर रहे हों।
- विश्व धरोहर कोष: इस सूची में अभिलेखन के बाद आवश्यकता पड़ने पर विश्व धरोहर समिति द्वारा विश्व धरोहर कोष से तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जा सकती है।
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फील्ड्स मेडल (Fields Medals)

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वर्ष 2026 के फील्ड्स मेडल यू डेंग, जॉन पार्डन, जैकब त्सिमरमैन तथा होंग वांग को प्रदान किए गए, जिनमें होंग वांग यह सम्मान प्राप्त करने वाली तीसरी महिला बनीं।
- होंग वांग तथा यू डेंग फील्ड्स मेडल प्राप्त करने वाले पहले चीनी नागरिक बने।
‘फील्ड्स मेडल’ के बारे में
- फील्ड्स मेडल गणित के क्षेत्र के सर्वोच्च सम्मानों में से एक है, जो युवा गणितज्ञों के उत्कृष्ट शोध योगदान तथा भावी क्षमता को मान्यता प्रदान करता है।
- फील्ड्स मेडल पहली बार वर्ष 1936 में प्रदान किया गया।
- आयोजक: यह मेडल अंतरराष्ट्रीय गणितीय संघ (IMU) द्वारा प्रत्येक चार वर्ष में अंतरराष्ट्रीय गणितज्ञ कांग्रेस (ICM) के दौरान प्रदान किया जाता है।
- ICM 2026 का आयोजन फिलाडेल्फिया, पेन्सिल्वेनिया, अमेरिका में हुआ।
- IMU की स्थापना वर्ष 1920 में हुई, वर्ष 1932 में इसे भंग कर दिया गया तथा वर्ष 1950 में पुनः स्थापित किया गया। इसका मुख्यालय बर्लिन, जर्मनी में स्थित है।
- मानदंड: पुरस्कार वर्ष की 1 जनवरी को प्राप्तकर्ता की आयु 40 वर्ष से कम होनी चाहिए तथा प्रत्येक संस्करण में अधिकतम चार गणितज्ञों का चयन किया जाता है।
- अब तक केवल तीन महिलाओं को यह सम्मान प्राप्त हुआ है- मरियम मिर्जाखानी (2014), मरिना वियाजोव्स्का (2022) तथा होंग वांग (2026)।
वर्ष 2026 के फील्ड्स मेडल विजेता
- होंग वांग
- योगदान: उन्हें हार्मोनिक विश्लेषण (Harmonic Analysis) तथा ज्यामितीय मापन सिद्धांत (Geometric Measure Theory) में महत्त्वपूर्ण उपलब्धियों, विशेष रूप से त्रि-आयामी काकेया अनुमान (Kakeya Conjecture) के समाधान के लिए सम्मानित किया गया।
- पुरस्कार की पृष्ठभूमि: न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय की प्रोफेसर होंग वांग, मरियम मिर्जाखानी एवं मरिना वियाजोव्स्का के बाद फील्ड्स मेडल प्राप्त करने वाली तीसरी महिला बनीं।
- यू डेंग
- योगदान: उन्होंने तरंग गतिज समीकरणों (Wave Kinetic Equations) तथा सांख्यिकीय भौतिकी (Statistical Physics) और जटिल गणितीय विश्लेषण के मध्य संबंध स्थापित करने वाली गणितीय समस्याओं में मौलिक योगदान दिया।
- पुरस्कार की पृष्ठभूमि: वर्ष 1989 में चीन में जन्मे तथा शिकागो विश्वविद्यालय के प्रोफेसर यू डेंग, वर्ष 1982 के बाद फील्ड्स मेडल प्राप्त करने वाले पहले चीनी नागरिकों में शामिल हुए।
- जॉन पार्डन
- योगदान: उन्होंने वर्चुअल फंडामेंटल साइकिल्स (Virtual Fundamental Cycles) का विकास किया तथा कैलाबी–याउ त्रिविमीय बहुरूपों (Calabi–Yau Threefolds) पर वक्र गणना (Curve Counting) से संबंधित दीर्घकालिक MNOP अनुमान (MNOP Conjecture) का समाधान किया।
- पुरस्कार की पृष्ठभूमि: स्टोनी ब्रुक विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जॉन पार्डन ने स्नातक अध्ययन के दौरान गाँठ विकृति समस्या (Knot Distortion Problem) का भी समाधान किया था।
- जैकब त्सिमरमैन
- योगदान: उन्होंने ओ-मिनिमैलिटी (O-minimality) का उपयोग करते हुए संख्या सिद्धांत (Number Theory) तथा बीजगणितीय ज्यामिति (Algebraic Geometry) में महत्त्वपूर्ण प्रगति की तथा आंद्रे–ऊर्ट अनुमान (André–Oort Conjecture) से संबंधित प्रमुख परिणामों में योगदान दिया।
- पुरस्कार की पृष्ठभूमि: टोरंटो विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जैकब त्सिमरमैन ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता की गणितीय आधारशिला पर भी कार्य किया है।
भारत का कोई प्रत्यक्ष नागरिक अब तक गणित में फील्ड्स मेडल प्राप्त नहीं कर सका है।
भारतीय मूल के विजेता
- मंजुल भार्गव (2014): वे संख्या ज्यामिति (Geometry of Numbers) में नई एवं प्रभावशाली विधियों के विकास के लिए फील्ड्स मेडल प्राप्त करने वाले पहले भारतीय मूल के गणितज्ञ बने।
- अक्षय वेंकटेश (2018): उन्हें विश्लेषणात्मक संख्या सिद्धांत, समरूप गतिकी तथा टोपोलॉजी के मध्य गहरे संबंध स्थापित करने वाले योगदानों के लिए यह सम्मान प्रदान किया गया।
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आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम
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हाल ही में पंचायती राज मंत्रालय (MoPR) ने आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम तथा समर्थ पंचायत पोर्टल (SAMARTH) का शुभारंभ किया है।
आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम के बारे में
- यह पंचायती राज मंत्रालय (MoPR) की एक प्रतिस्पर्द्धात्मक राष्ट्रीय चुनौती पहल है, जो ग्राम एवं खंड पंचायतों को स्थानीय परिसंपत्तियों तथा अवसरों को सतत् राजस्व-सृजन परियोजनाओं में परिवर्तित करने में सहायता प्रदान करती है।
- उद्देश्य: इस कार्यक्रम का उद्देश्य पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) के स्वयं के स्रोत से प्राप्त राजस्व (OSR) को सुदृढ़ बनाना तथा सरकारी अनुदानों पर उनकी निर्भरता कम करना है।
- क्रियान्वयन निकाय: इस कार्यक्रम का क्रियान्वयन पंचायती राज मंत्रालय (MoPR) द्वारा किया जाता है, जबकि वित्तपोषण सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPPs), कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) अंशदान, योजनाओं के अभिसरण तथा बैंक वित्तपोषण के माध्यम से किया जाता है। राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (NABARD) तथा आवास एवं शहरी विकास निगम (HUDCO) इसके संस्थागत भागीदार हैं।
- प्रमुख विशेषताएँ
- परियोजना का दायरा: चार वर्षों में 350 परियोजनाओं को लक्षित किया गया है, जिनमें प्रथम वर्ष 50 परियोजनाएँ तथा अगले तीन वर्षों में प्रतिवर्ष 100 परियोजनाएँ शामिल हैं।
- पात्रता: जिन ग्राम पंचायतों का न्यूनतम OSR ₹50 लाख तथा खंड पंचायतों का न्यूनतम OSR ₹1 करोड़ है तथा जिनका कार्यकाल न्यूनतम तीन वर्ष शेष है, वे पात्र हैं। विशेष श्रेणी के राज्यों के लिए इन मानदंडों में छूट प्रदान की गई है।
- तकनीकी मार्गदर्शन: यह कार्यक्रम बैंक योग्य परियोजनाओं के विकास हेतु तकनीकी सहायता प्रदान करता है तथा सतत् स्थानीय राजस्व सृजन के लिए नवाचारी वित्तपोषण मॉडल को बढ़ावा देता है।
‘समर्थ’ पंचायत पोर्टल (SAMARTH) के बारे में
- समर्थ (SAMARTH) एक एकीकृत, विन्यास योग्य राष्ट्रीय डिजिटल मंच है, जिसे प्रौद्योगिकी-सक्षम प्रबंधन के माध्यम से पंचायतों के स्वयं के स्रोत से प्राप्त राजस्व (OSR) को सुदृढ़ करने के लिए विकसित किया गया है।
- उद्देश्य: पंचायतों के राजस्व संग्रहण की दक्षता, पारदर्शिता तथा जवाबदेही को बढ़ाने के लिए संपूर्ण राजस्व जीवनचक्र का डिजिटलीकरण करना।
- क्रियान्वयन निकाय: इस पोर्टल का विकास पंचायती राज मंत्रालय (MoPR) द्वारा एक राष्ट्रीय डिजिटल पहल के रूप में किया गया है।
- प्रमुख प्रावधान: यह करदाता पंजीकरण, माँग सृजन, ऑनलाइन भुगतान, राजस्व संग्रहण तथा वास्तविक समय निगरानी का डिजिटल प्रबंधन सक्षम बनाता है।
- विशेषताएँ: छत्तीसगढ़ एवं हिमाचल प्रदेश को इस पोर्टल से जोड़ा जा चुका है तथा 51 लाख से अधिक करदाताओं का पंजीकरण हो चुका है। महाराष्ट्र, मिजोरम, असम, हरियाणा, पश्चिम बंगाल तथा उत्तर प्रदेश में इसे जोड़ने की प्रक्रिया जारी है।
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ब्लू स्ट्रैगलर स्टार्स (BSS)

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भारतीय खगोलविदों ने TIC 327546480 नामक बाइनरी सिस्टम में सक्रिय रूप से निर्मित हो रहे ब्लू स्ट्रैगलर स्टार (BSS) की खोज की है।
ब्लू स्ट्रैगलर स्टार (BSS) के बारे में
- ब्लू स्ट्रैगलर स्टार (BSS) ऐसे असामान्य रूप से अधिक तापमान वाले, अधिक चमकीले तथा अधिक द्रव्यमान वाले तारे होते हैं, जो पुराने तारा मंडलों में पाए जाते हैं, किंतु समान आयु वाले आस-पास के तारों की तुलना में अधिक नए प्रतीत होते हैं।
- खोज: BSS की पहचान TIC 327546480 में की गई, जो पुराने ओपन क्लस्टर कोलिंडर 261 में स्थित एक सेमी-डिटैच्ड बाइनरी सिस्टम है। यह पृथ्वी से लगभग 9,500 प्रकाश-वर्ष दूर स्थित है।
- इस अध्ययन में भारतीय खगोलभौतिकी संस्थान (IIA) के शोधकर्ताओं ने अंतरराष्ट्रीय खगोलविदों के साथ सहयोग किया।
- आँकड़ों के स्रोत: शोधकर्ताओं ने नासा (NASA) के टेस (TESS) मिशन से प्राप्त उच्च-परिशुद्धता यूरोपीय दक्षिणी वेधशाला (ESO) के वेरी लार्ज टेलीस्कोप (VLT) से प्राप्त रेडियल वेलोसिटी मापन तथा एक्स-रे प्रेक्षणों का संयुक्त उपयोग किया।
- ब्लू स्ट्रैगलर स्टार (BSS) की प्रमुख विशेषताएँ
- स्टेलर रिजुवेनेशन: BSS अपने आस-पास के तारों की तुलना में अधिक युवा दिखाई देते हैं, क्योंकि अतिरिक्त द्रव्यमान एवं हाइड्रोजन ईंधन प्राप्त कर वे अपनी तारकीय विकास प्रक्रिया (Stellar Evolution) को प्रभावी रूप से पुनः प्रारंभ कर लेते हैं।
- द्रव्यमान स्थानांतरण: TIC 327546480 में कम द्रव्यमान वाला तारा अपनी ‘रोश लोब’ से बाहर निकलकर BSS को पदार्थ स्थानांतरित करता है, जो बाइनरी द्रव्यमान स्थानांतरण के माध्यम से इसके सक्रिय निर्माण का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
- तीव्र घूर्णन: BSS लगभग 69.55 किमी/सेकंड की गति से तीव्र घूर्णन करता है, क्योंकि संचित पदार्थ तारे को कोणीय संवेग भी स्थानांतरित करता है।
- ‘एक्स-रे’ प्रमाण: इस प्रणाली से प्राप्त प्रबल एक्स-रे उत्सर्जन इस बात का स्वतंत्र प्रमाण है कि सहचर तारे से पदार्थ का BSS पर सक्रिय रूप से अभिवृद्धि हो रही है।
यह खोज बाइनरी इवॉल्यूशन, स्टेलर रिजुवेनेशन तथा स्टार क्लस्टर के निर्माण के अध्ययन का एक दुर्लभ अवसर प्रदान करती है तथा स्टेलर एस्ट्रोफिजिक्स की एक दीर्घकालिक पहेली को सुलझाने में सहायक है। |
‘ऊँझा जीरा’ एवं ‘ऊँझा सौंफ’

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राजस्थान के किसानों ने ‘ऊँझा जीरा’ तथा ‘ऊँझा सौंफ’ को भौगोलिक संकेतक (GI) मान्यता दिए जाने पर आपत्ति जताई है। उनका तर्क है कि ऊँझा (गुजरात) मुख्यतः एक प्रमुख ट्रेडिंग हब है, न कि उत्पादन केंद्र।
प्रमुख आपत्तियाँ
- उत्पादन बनाम विपणन केंद्र: किसानों का तर्क है कि GI टैग उन उत्पादों को दिया जाना चाहिए, जिनकी विशिष्ट गुणवत्ता, प्रतिष्ठा अथवा विशेषताएँ उनके उत्पादन क्षेत्र से जुड़ी हों, जबकि ऊँझा मुख्य रूप से कृषि उत्पादों के एकत्रीकरण, गुणवत्ता-निर्धारण (ग्रेडिंग) तथा विपणन (ट्रेडिंग) का प्रमुख केंद्र है।
- राजस्थान की उत्पादन भूमिका: राजस्थान दोनों मसालों का प्रमुख उत्पादक है तथा ऊँझा APMC में व्यापारित होने वाले जीरा और सौंफ का बड़ा भाग राजस्थान से आता है।
- मूल्यगत हानि की आशंका: किसानों को आशंका है कि GI टैग मिलने के बाद व्यापारी ऊँझा नाम से उत्पादों को अधिक गुणवत्तायुक्त बताकर बेच सकते हैं, जिससे राजस्थान के उत्पादकों की मोलभाव क्षमता तथा उत्पादों के मूल्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
GI टैग प्रमाणन के बारे में
- अर्थ: भौगोलिक संकेतक (GI) टैग ऐसे उत्पादों की पहचान करता है, जो किसी विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र से उत्पन्न होते हैं तथा जिनकी गुणवत्ता, प्रतिष्ठा अथवा विशेषताएँ मूलतः उसी क्षेत्र से संबंधित होती हैं।
- विधिक ढाँचा: भारत में GI संरक्षण भौगोलिक संकेतक वस्तु (पंजीकरण एवं संरक्षण) अधिनियम, 1999 के अंतर्गत प्रदान किया जाता है, जिसका प्रशासन GI रजिस्ट्री द्वारा किया जाता है।
- महत्त्व: GI पंजीकरण भौगोलिक नामों के अनधिकृत उपयोग को रोकता है तथा उत्पादकों के हितों की रक्षा, पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण और उत्पादों की बाजार-योग्यता बढ़ाने में सहायक होता है।
सौंफ (फेनल) के बारे में
- सौंफ, जिसका वैज्ञानिक नाम फोएनिकुलम वल्गारे है, एपिएसी (Apiaceae) कुल का एक सुगंधित बीज मसाला है, जो अपने मीठे लिकोरिस जैसे स्वाद तथा विशेष रूप से एनेथोल (Anethole) युक्त आवश्यक तेल के लिए प्रसिद्ध है।
- किस्में: भारत की प्रमुख किस्मों में गुजरात फेनल-1, GF-11, राजस्थान फेनल किस्में, अजमेर फेनल-1 एवं 2, पंत मधुरिका तथा हिसार स्वरूप शामिल हैं।
- अनुकूल परिस्थितियाँ
- जलवायु: यह ठंडी एवं शुष्क जलवायु में अच्छी तरह विकसित होती है, जबकि अत्यधिक गर्मी, पाला तथा अधिक नमी फूल एवं बीज विकास को प्रभावित करते हैं।
- मृदा: इसके लिए कार्बनिक पदार्थों से समृद्ध उपजाऊ, अच्छी जल-निकासी वाली दोमट, बलुई दोमट अथवा काली मिट्टी उपयुक्त होती है। यह जलभराव एवं लवणीयता के प्रति संवेदनशील होती है।
- वर्षा: इस फसल के लिए सीमित एवं समान रूप से वितरित वर्षा उपयुक्त होती है, जबकि पुष्पन के समय अधिक नमी फफूँदजनित रोगों को बढ़ावा देती है।
- उत्पादन: गुजरात एवं राजस्थान इसके प्रमुख उत्पादक राज्य हैं, जबकि उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश एवं पंजाब में भी सीमित क्षेत्र में इसकी कृषि की जाती है।
जीरा (क्यूमिन) के बारे में
- जीरा, जिसका वैज्ञानिक नाम क्यूमिनम साइमिनम है, एपिएसी (Apiaceae) कुल का एक वार्षिक बीज मसाला है तथा भारत इसका विश्व का सबसे बड़ा उत्पादक एवं निर्यातक है।
- किस्में: भारत की प्रमुख किस्मों में गुजरात क्यूमिन-1 से 4, राजस्थान क्यूमिन किस्में तथा मेवाड़ क्यूमिन शामिल हैं।
- अनुकूल परिस्थितियाँ
- जलवायु: यह मौसम के प्रति संवेदनशील रबी फसल है, जिसे हल्की एवं शुष्क जलवायु की आवश्यकता होती है। पुष्पन के समय आर्द्रता रोगों के जोखिम को बढ़ाते हैं।
- मृदा: यह उपजाऊ, उचित जल-निकासी वाली बलुई दोमट अथवा दोमट मृदा के अनुकूल है तथा भारी, जलभरावयुक्त अथवा अत्यधिक लवणीय मिट्टी में इसका विकास प्रभावित होता है।
- तापमान एवं वर्षा: यह सामान्यतः मध्यम तापमान तथा सीमित जल की आवश्यकता वाली फसल है तथा बीजों की अच्छी गुणवत्ता के लिए परिपक्वता के समय शुष्क मौसम आवश्यक होता है।
- उत्पादन: भारत विश्व का सबसे बड़ा जीरा उत्पादक एवं निर्यातक है।
- राजस्थान एवं गुजरात भारत के जीरा उत्पादन में अग्रणी हैं, जबकि मध्य प्रदेश एवं हरियाणा में भी सीमित क्षेत्र में इसकी कृषि की जाती है।
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