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संक्षिप्त समाचार

10 Mar 2026

OTEC विलवणीकरण संयंत्र  

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भारत लक्षद्वीप के कवरती द्वीप पर अपना पहला महासागर तापीय ऊर्जा रूपांतरण (OTEC) संचालित विलवणीकरण संयंत्र स्थापित कर रहा है, जिसका उद्देश्य बिजली उत्पन्न करना और समुद्री जल को स्थायी रूप से पीने योग्य पानी में परिवर्तित करना है।

OTEC-आधारित विलवणीकरण संयंत्र के बारे में

  • महासागर तापीय ऊर्जा रूपांतरण (OTEC) आधारित विलवणीकरण संयंत्र,  समुद्र के तापमान के अंतर का उपयोग करके विद्युत उत्पन्न करता है और साथ ही समुद्री जल को पीने योग्य पानी में परिवर्तित करता है।
  • विकसितकर्ता: पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय महासागर प्रौद्योगिकी संस्थान (NIOT)।
  • कार्यप्रणाली 
    • गर्म समुद्री जल एक वाष्पीकरण यंत्र में कार्यशील द्रव को गर्म करता है, जिससे वह वाष्प में परिवर्तित हो जाता है और टरबाइन को चलाकर बिजली उत्पन्न करता है।
      • कार्यकारी ईंधन कम क्वथनांक वाले पदार्थ (तरल अमोनिया, प्रोपेन और हाइड्रोफ्लोरोओलेफिन (HFO), आदि) होते हैं जिनका उपयोग OTEC प्रणालियों में ऊष्मा स्थानांतरण और टरबाइन चलाने के लिए किया जाता है।
    • ठंडा गहरे समुद्र का जल, वाष्प को पुनः द्रव में संघनित कर देता है, जिससे चक्र पूरा होता है। 
    • यह प्रक्रिया कम तापमान पर ऊष्मीय विलवणीकरण को भी सक्षम बनाती है, जिससे समुद्री जल पीने योग्य पानी में परिवर्तित हो जाता है।
  • क्षमता: प्रतिदिन लगभग 60-65 किलोवाट बिजली और 1 लाख लीटर पीने योग्य जल उत्पादित करने का अनुमान है।

महत्त्व

  • द्वीपों और तटीय बस्तियों के लिए सतत् पेयजल उपलब्ध कराता है।
  • दूरदराज के समुद्री क्षेत्रों में नवीकरणीय बिजली उत्पन्न करता है।
  • जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करके जलवायु-अनुकूल अवसंरचना का समर्थन करता है।

निर्भया निशा अभियान

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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (8 मार्च) के अवसर पर केरल पुलिस ने “निर्भया निशा” नामक एक नई पहल शुरू की है, जिसका उद्देश्य रात में यात्रा करने वाली महिलाओं की सुरक्षा को सुदृढ़ करना है।

निर्भया निशा पहल के बारे में

  • यह पहल केरल पुलिस द्वारा शहरों को रात के समय महिलाओं के लिए अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है।
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को मौजूदा पुलिस प्रणालियों के साथ जोड़कर यह कार्यक्रम एक “बल गुणक” की तरह कार्य करता है, जिससे पुलिस की प्रभावशीलता बढ़ती है और रात 9 बजे से सुबह 5 बजे के बीच प्रतिक्रिया अधिक तेज और सक्षम बनती है।
  • पहल की प्रमुख विशेषताएँ
    • एकीकृत सहायता प्रणाली: 112 हेल्पलाइन, आपातकालीन प्रतिक्रिया सहायता प्रणाली (ERSS) और पोल-ऐप SoS बटन के बीच 24/7 संपर्क यह सुनिश्चित करता है कि सहायता हमेशा एक टैप की दूरी पर हो।
    • स्मार्ट सुरक्षा पोल: अधिक भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों में निर्भया निशा सुरक्षा पोल लगाए गए हैं। इनमें शामिल हैं:
      • पैनिक बटन: पास के पुलिस कर्मियों को तुरंत अलर्ट भेजने के लिए।
      • AI निगरानी: चेहरे की पहचान करने वाले कैमरे, जो संभावित अपराधियों की पहचान करने और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों की निगरानी करने में सहायक हैं।
    • सशक्त रात्रि गश्त: पुलिस ने पिंक पैट्रोल और हाईवे मॉनिटरिंग के माध्यम से अपनी मौजूदगी बढ़ाई है।
      • इसके अंतर्गत 28 फोर्स गोरखा जीपों को तैनात किया गया है, जिन्हें विशेष रूप से महिला पुलिस कर्मियों द्वारा चलाया जाता है।
    • हॉटस्पॉट निगरानी: डेटा विश्लेषण की सहायता से पुलिस उन “ संवेदनशील क्षेत्रों” की पहचान करती है, जैसे- आईटी पार्क, अस्पतालों के आस-पास के क्षेत्र और बस/रेलवे स्टेशन, और इन स्थानों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाता है।
  • इस पहल का महत्त्व
    • स्मार्ट नवाचार: यह पहल दिखाती है कि आधुनिक तकनीक (AI और डेटा विश्लेषण) का उपयोग करके मौजूदा अवसंरचना (जैसे- 112 हेल्पलाइन) को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है, जिससे एक विशेष सुरक्षा तंत्र तैयार होता है।
    • आर्थिक स्वतंत्रता: सिर्फ सुरक्षा प्रदान करने के अलावा, इसका उद्देश्य महिलाओं को कार्य और आवागमन में परिचालन स्वतंत्रता देना भी है।
      • इससे महिलाएँ बिना भय के रात्रिकालीन अर्थव्यवस्था (Night economy) में सक्रिय रह सकती हैं।
    • बेहतर जवाबदेही: निश्चित समय सीमा तय करके और महिला-नेतृत्व वाली टीमों को शामिल करके राज्य सार्वजनिक सुरक्षा के लिए एक स्पष्ट और मापनीय मानक स्थापित कर रहा है।

अभ्यास लामितिये, 2026

भारतीय सशस्त्र बलों का एक दल सैन्य अभ्यास लामितिये 2026 (Exercise LAMITIYE 2026) के 11वें भारत–सेशेल्स संयुक्त सैन्य अभ्यास में भाग लेने के लिए सेशेल्स पहुँचा है।

अभ्यास लामितिये, 2026 के बारे में

  • द्विपक्षीय अभ्यास: लामितिये 2026 भारत और सेशेल्स के बीच आयोजित किया जाने वाला एक संयुक्त सैन्य अभ्यास है, जिसमें सेशेल्स रक्षा बल के सदस्य भाग लेते हैं।
  • यह एक द्विवार्षिक प्रशिक्षण अभ्यास है, जो वर्ष  2001 से सेशेल्स में आयोजित किया जा रहा है।
  • 11वाँ संस्करण: इस अभ्यास का 11वाँ संस्करण 9–20 मार्च, 2026 के दौरान सेशेल्स रक्षा अकादमी में आयोजित किया जा रहा है।
  • नाम का अर्थ: “लामितिये” का अर्थ क्रियोल भाषा में “मित्रता” है, जो दोनों देशों के बीच मजबूत द्विपक्षीय संबंधों का प्रतीक है।
  • भाग लेने वाली सेनाएँ: भारतीय दल में असम रेजिमेंट के सैनिक शामिल हैं, साथ ही भारतीय नौसेना और भारतीय वायुसेना की भी भागीदारी है।
  • मुख्य संसाधन: भारत ने इस अभ्यास के लिए आईएनएस त्रिकंद (नौसैनिक पोत) और एक सी-130 विमान (C-130 aircraft) तैनात किया है।
  • उद्देश्य: इसका मुख्य उद्देश्य दोनों देशों की सशस्त्र सेनाओं के बीच अंतरसंचालन क्षमता, सैन्य सहयोग और समन्वय को मजबूत करना है।

वॉर ऑफ एट्रिशन

संयुक्त राज्य अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यह संघर्ष वॉर ऑफ एट्रिशन (War of Attrition) का रूप लेता जा रहा है।

वॉर ऑफ एट्रिशन क्या है?

  • परिभाषा: यह एक सैन्य रणनीति है, जिसका उद्देश्य दुश्मन की जनशक्ति, संसाधनों और मनोबल को धीरे-धीरे समाप्त करना होता है, ताकि वह युद्ध जारी रखने में असमर्थ हो जाए।
  • अर्थ: “एट्रिशन” शब्द लैटिन शब्द अट्रिशियोनेम (Attritionem) से आया है, जिसका अर्थ “रगड़कर या घिसकर कमजोर करना” है, जो प्रतिद्वंद्वी को धीरे-धीरे कमजोर करने की प्रक्रिया को दर्शाता है।
  • रणनीति: इसमें एक पक्ष तेज और निर्णायक जीत की बजाय लगातार हमलों, आर्थिक दबाव और निरंतर संघर्ष के माध्यम से विरोधी को धीरे-धीरे कमजोर करने का प्रयास करता है।
  • भारी क्षति: इस प्रकार के युद्ध अक्सर लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष में बदल जाते हैं और दोनों पक्षों को मानव तथा भौतिक संसाधनों की भारी हानि होती है।
    • उदाहरण: इसका उदाहरण प्रथम विश्वयुद्ध की ट्रेंच युद्ध प्रणाली (Trench warfare) और ईरान–इराक युद्ध में देखा गया था।

उत्तर भारत में ग्रीष्म ऋतु की शुरुआत और हीट-वेव की स्थिति

कई क्षेत्रों में उत्तर और पश्चिम भारत में तापमान सामान्य से 8–13°C अधिक दर्ज किया गया है, जिससे हीट-वेव जैसी स्थिति बन गई है।

  • IMD पूर्वानुमान: भारत मौसम विज्ञान विभाग ने पश्चिमी हिमालयी, मध्य और प्रायद्वीपीय क्षेत्रों में सामान्य से अधिक दिन के तापमान रहने का अनुमान लगाया है।

प्रारंभिक हीट-वेव के कारण

  • शीतकालीन वर्षा की कमी: कम वर्षा और हिमपात से मृदा की नमी घट जाती है, जिससे भूमि जल्दी गर्म हो जाती है और प्रारंभिक हीट-वेव की स्थिति बनती है।
  • कमजोर पश्चिमी विक्षोभ: पश्चिमी विक्षोभ की आवृत्ति कम होने से उत्तर भारत में शीतकालीन वर्षा घटती है, जिससे तापमान अधिक रहता है।
  • शुष्क मृदा: शुष्क मृदा तेजी से गर्मी को अवशोषित करती है क्योंकि वाष्पीकरण में कम ऊर्जा व्यय होती है, जिससे तापमान तेजी से बढ़ता है।
  • आर्द्र हवाओं की कमी: पश्चिमी और पूर्वी हवाओं के बीच कमजोर अंतःक्रिया समुद्र से आर्द्रता के परिवहन को सीमित करती है, जिससे वर्षा कम हो जाती है।
  • जलवायु परिवर्तन: ग्लोबल वार्मिंग के कारण हीट-वेव की आवृत्ति, तीव्रता और समय से पहले होने की घटनाएँ बढ़ रही हैं।

प्रारंभिक हीट-वेव का कृषि पर प्रभाव

  • फसल उत्पादन में कमी: रबी फसलों (विशेषकर गेहूँ) में पुष्प आने के चरण में अधिक तापमान दाने के आकार और कुल उत्पादन को कम कर देता है।
  • फसलों पर नमी का दबाव: तेजी से वाष्पीकरण और शुष्क मृदा के कारण जल की कमी उत्पन्न होती है, जिससे सरसों, चना और सब्जियों जैसी फसलें प्रभावित होती हैं।
  • सिंचाई की अधिक माँग: मृदा में नमी बनाए रखने के लिए किसानों को बार-बार सिंचाई करनी पड़ती है, जिससे भूजल और स्थानीय जल संसाधनों पर दबाव बढ़ता है।

हीटवेव

  • परिभाषा: हीटवेव वह स्थिति है, जब किसी क्षेत्र में तापमान सामान्य जलवायु मानकों की तुलना में असामान्य रूप से अधिक हो जाता है।
  • हीटवेव घोषित करने के लिए भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मानदंड
    • सामान्य तापमान से विचलन के आधार पर
      • हीटवेव: अधिकतम तापमान सामान्य से 4.5°C से 6.4°C अधिक।
      • चरम हीटवेव: अधिकतम तापमान सामान्य से 6.4°C से अधिक।
    • निरपेक्ष अधिकतम तापमान के आधार पर
      • मैदानी क्षेत्रों के लिए हीटवेव: अधिकतम तापमान ≥ 40°C तथा
      • गंभीर हीटवेव: अधिकतम तापमान ≥ 47°C।
      • पहाड़ी क्षेत्रों के लिए हीटवेव: अधिकतम तापमान ≥ 30°C।
      • तटीय क्षेत्रों के लिए हीटवेव: अधिकतम तापमान ≥ 37°C।

अभ्यास धर्म गार्जियन 2026

हाल ही में उत्तराखंड में भारत–जापान के बीच  संयुक्त सैन्य अभ्यास धर्म गार्जियन के 7वें संस्करण (2026) का समापन हुआ।

अभ्यास धर्म गार्जियन 2026 के बारे में

  • धर्म गार्जियन 2026 भारतीय सेना और जापान ग्राउंड सेल्फ-डिफेंस फोर्स (JGSDF) के बीच आयोजित एक संयुक्त सैन्य अभ्यास है।
  • स्थान: यह अभ्यास उत्तराखंड के चौबटिया स्थित फॉरेन ट्रेनिंग नोड (Foreign Training Node) में आयोजित किया गया।
  • वार्षिक अभ्यास: यह अभ्यास वर्ष 2018 से भारत और जापान में बारी-बारी से प्रतिवर्ष आयोजित किया जाता है।
  • उद्देश्य: इस अभ्यास का उद्देश्य विशेष रूप से काउंटर-इंसर्जेंसी और काउंटर-टेररिज्म अभियानों में अंतरसंचालन क्षमता और संयुक्त संचालन क्षमता को बढ़ाना था।
  • मान्यता अभ्यास– असाही शक्ति (ASAHI SHAKTI): संयुक्त प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त मानकों का परीक्षण करने के लिए 48 घंटे का फील्ड अभ्यास “असाही शक्ति ” आयोजित किया गया।
  • रणनीतिक महत्त्व: इस अभ्यास ने भारत–जापान रणनीतिक साझेदारी को मजबूत किया और क्षेत्रीय शांति तथा स्थिरता के प्रति दोनों देशों की प्रतिबद्धता को पुनः पुष्टि की।

डार्क ऑक्सीजन

वैज्ञानिकों ने गहरे प्रशांत महासागर का अध्ययन करते हुए “डार्क ऑक्सीजन (Dark oxygen) की खोज की है। “डार्क ऑक्सीजन सूर्य के प्रकाश के बिना उत्पन्न होती है और ऑक्सीजन उत्पादन की पारंपरिक समझ को चुनौती देती है।

डार्क ऑक्सीजन के बारे में

  • परिभाषा: डार्क ऑक्सीजन उस ऑक्सीजन को कहा जाता है, जो गहरे महासागर में सूर्य के प्रकाश के बिना उत्पन्न होती है।
  • खोज: वैज्ञानिकों ने इस घटना की खोज प्रशांत महासागर के समुद्र तल के अध्ययन के दौरान क्लैरियन–क्लिपर्टन जोन (Clarion–Clipperton Zone- CCZ) में की।
  • खोज स्थल की गहराई: यह घटना लगभग 4,000 मीटर की गहराई पर पाई जाती है, जहाँ सूर्य का प्रकाश नहीं पहुँच पाता।
  • ऑक्सीजन का स्रोत: माना जाता है कि यह ऑक्सीजन समुद्र तल पर पाए जाने वाले पॉलीमेटैलिक (मैंगनीज) नाॅड्यूल्स द्वारा उत्पन्न होती है, जो विद्युत धारा उत्पन्न कर समुद्री जल के अणुओं को विभाजित करते हैं और ऑक्सीजन छोड़ते हैं।
  • प्रक्रिया: इस प्रक्रिया में संभवतः इलेक्ट्रोकेमिकल प्रतिक्रियाएँ शामिल होती हैं, जो इलेक्ट्रोलिसिस के समान होती हैं, जहाँ नाॅड्यूल्स में मौजूद खनिज, सूर्य के प्रकाश के बिना ही जल (H2O) को हाइड्रोजन (H) और ऑक्सीजन (O) में विभाजित करने में सहायता करते हैं।
  • वैज्ञानिक महत्त्व: यह इस लंबे समय से प्रचलित धारणा को चुनौती देता है कि पृथ्वी पर ऑक्सीजन का एकमात्र प्राकृतिक स्रोत प्रकाश-संश्लेषण है।
    • वैज्ञानिकों के अनुसार यह खोज पृथ्वी के ऑक्सीजन चक्र और गहरे समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र के बारे में हमारी समझ को परिवर्तित कर सकती है।
  • समुद्री जीवन पर प्रभाव: डार्क ऑक्सीजन की उपस्थिति गहरे समुद्र के पारिस्थितिकी तंत्र को सहारा दे सकती है, जिससे जीव ऑक्सीजन की कमी वाले वातावरण में भी जीवित रह सकते हैं।

क्लैरियन–क्लिपर्टन जोन (CCZ)

  • स्थान: क्लैरियन–क्लिपर्टन जोन (CCZ) मध्य प्रशांत महासागर में स्थित एक विशाल गहरे समुद्र का क्षेत्र है, जो हवाई और मैक्सिको के मध्य स्थित है।
  • खनिज-समृद्ध समुद्र तल: यहाँ पॉलीमेटैलिक (मैंगनीज) नाॅड्यूल्स के बड़े भंडार पाए जाते हैं, जो निकल, कोबाल्ट, ताँबा और मैंगनीज से समृद्ध हैं, इसलिए यह गहरे समुद्री खनन के लिए महत्त्वपूर्ण क्षेत्र माना जाता है।
  • शासन व्यवस्था: क्लैरियन–क्लिपर्टन जोन में अन्वेषण और संभावित खनन गतिविधियों का नियमन संयुक्त राष्ट्र समुद्र कानून सम्मेलन (UNCLOS) के अंतर्गत अंतरराष्ट्रीय समुद्र तल प्राधिकरण (International Seabed Authority under) द्वारा किया जाता है।

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