संक्षिप्त समाचार

14 Apr 2026

ई-सेफहर (e-SafeHER) अभियान

4 10

हाल ही में (अप्रैल 2026) इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा सी-डैक (C-DAC) के सहयोग से ई-सेफहर (e-SafeHER) पहल शुरू की गई है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं में साइबर सुरक्षा जागरूकता को बढ़ावा देना है।

उद्देश्य

  • 3 वर्षों में 10 लाख ग्रामीण महिलाओं को साइबर सखी (Cyber Sakhis) के माध्यम से साइबर सुरक्षा के प्रति प्रशिक्षित करना।
  • डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र में सुरक्षित और आत्मविश्वासपूर्ण भागीदारी को बढ़ावा देना।

आधार कार्यक्रम 

  • यह पहल MeitY के सूचना सुरक्षा शिक्षा एवं जागरूकता (ISEA) कार्यक्रम के अंतर्गत लागू की जा रही है।

कार्यान्वयन एजेंसियाँ

  • C-DAC हैदराबाद: सामग्री विकास, स्थानीयकरण और प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार करना।
  • रिलायंस फाउंडेशन: स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के माध्यम से जमीनी स्तर पर प्रसार।

लक्षित समूह 

  • ग्रामीण महिलाएँ, विशेषकर वे जो डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से वित्त, आजीविका तथा सेवाओं से जुड़ी हैं।

दृष्टिकोण

  • स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के माध्यम से समुदाय-नेतृत्व वाला, सहकर्मी-आधारित प्रशिक्षण मॉडल।
  • बहुभाषी, ऑडियो-विजुअल और मिश्रित अधिगम (Blended learning) मॉड्यूल का उपयोग।

कार्यान्वयन रणनीति 

  • चरणबद्ध क्रियान्वयन, जिसकी शुरुआत मध्य प्रदेश और ओडिशा से होगी।
  • वर्ष 2029 तक पूरे देश में विस्तार।

महत्त्व 

  • लैंगिक समावेशन को बढ़ावा: महिलाओं के लिए डिजिटल समावेशन को सुदृढ़ करता है।
  • साइबर सुरक्षित भारत” के लक्ष्य को मजबूत करता है।
  • वित्तीय समावेशन और सुरक्षित डिजिटल भागीदारी: महिलाओं को सुरक्षित डिजिटल लेन-देन और सेवाओं में भाग लेने में सक्षम बनाता है।

हिंद महासागर सम्मेलन (IOC) 

5 6

हाल ही में हिंद महासागर सम्मेलन (IOC) का 9वाँ संस्करण मॉरीशस में हिंद महासागर शासन के लिए सामूहिक संरक्षकता” विषय के तहत संपन्न हुआ।

हिंद महासागर सम्मेलन के बारे में 

  • हिंद महासागर सम्मेलन (IOC) हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) पर केंद्रित एक प्रमुख वार्षिक रणनीतिक मंच है, जहाँ क्षेत्रीय संरचना, समुद्री सुरक्षा और आर्थिक सहयोग पर विचार-विमर्श किया जाता है।
  • आयोजन: इंडिया फाउंडेशन द्वारा, विदेश मंत्रालय और मेजबान देशों के सहयोग से आयोजित।
  • संरचना (Structure): यह एक ट्रैक 1.5 कूटनीति मंच के रूप में कार्य करता है, जिसमें सरकारी प्रतिनिधियों के साथ-साथ नीति विशेषज्ञों, विद्वानों और रणनीतिक समुदाय की भागीदारी होती है।
  • प्रथम आयोजन: वर्ष 2016, सिंगापुर।
  • महत्त्व: भारत की सागर (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास) नीति को आगे बढ़ाने का प्रमुख मंच है। यह हिंद महासागर क्षेत्र के देशों के साथ सहभागिता और सहयोग को सुदृढ़ करता है।

मॉरीशस के बारे में 

  • स्थान: मॉरीशस दक्षिण-पश्चिम हिंद महासागर में स्थित एक द्वीपीय देश है, जो अफ्रीका के दक्षिण-पूर्वी तट से लगभग 2,000 किमी दूर और मेडागास्कर के पूर्व में स्थित है।
  • क्षेत्रीय विवाद: मॉरीशस का यूनाइटेड किंगडम के साथ चागोस द्वीपसमूह को लेकर संप्रभुता विवाद है, जहाँ डिएगो गार्सिया सैन्य अड्डा स्थित है।

हिंद महासागर क्षेत्र के बारे में

  • भौगोलिक विस्तार: हिंद महासागर विश्व का तीसरा सबसे बड़ा महासागर है, जो लगभग 70.56 मिलियन वर्ग किमी. क्षेत्र में विस्तृत है। यह एशिया, अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया को जोड़ता है और इसमें 35 से अधिक तटीय एवं द्वीपीय देश शामिल हैं।
  • रणनीतिक जलडमरूमध्य
    • हॉर्मुज जलडमरूमध्य: यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है और अरब सागर तथा हिंद महासागर के लिए एक महत्त्वपूर्ण प्रवेश द्वार है।
    • मलक्का जलडमरूमध्य: यह मलय प्रायद्वीप और सुमात्रा के बीच स्थित है तथा हिंद महासागर और प्रशांत महासागर को जोड़ने वाले सबसे छोटे तथा व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक है।
    • बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य: यह लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और स्वेज नहर के माध्यम से एशिया तथा यूरोप के मध्य व्यापार को सुगम बनाता है।
  • ऊर्जा संबंधी महत्त्वपूर्ण मार्ग: विश्व के समुद्री मार्गों से होने वाले तेल व्यापार का लगभग 80% हिंद महासागर से होकर गुजरता है।
  • संसाधन: केंद्रीय हिंद महासागर बेसिन (CIOB) में निकेल, ताँबा, कोबाल्ट और मैंगनीज जैसे खनिजों के महत्त्वपूर्ण भंडार होने की संभावना है।
  • सामरिक महत्त्व: यह क्षेत्र समुद्री डकैती, समुद्री आतंकवाद, अवैध मत्स्यन और भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्द्धा जैसी चुनौतियों का सामना करता है।

स्प्रैटली द्वीपसमूह (Spratly Islands)

6 8

फिलीपींस ने आरोप लगाया है कि चीनी मछुआरों ने दक्षिण चीन सागर के स्प्रैटली द्वीपसमूह में स्थित सेकंड थॉमस शोल के पास साइनाइड (Cyanide) का उपयोग किया, जिससे समुद्री जीवन और प्रवाल भित्तियों को नुकसान हो सकता है, जो फिलीपींस के युद्धपोत BRP सिएरा माद्रे का समर्थन करती हैं।

  • चीन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए फिलीपींस पर अपने मत्स्यन जहाजों को परेशान करने का आरोप लगाया।

स्प्रैटली द्वीपसमूह के बारे में

  • स्थान: स्प्रैटली द्वीपसमूह दक्षिण चीन सागर के मध्य भाग में स्थित है, जो वियतनाम, फिलीपींस, मलेशिया और ब्रुनेई के बीच विस्तृत है।
  • विवादित दावे: इस क्षेत्र पर चीन, वियतनाम, फिलीपींस, मलेशिया, ब्रुनेई और ताइवान द्वारा आंशिक या पूर्ण दावा किया जाता है।
  • मुख्य विशेषताएँ (Key Features): यहाँ की प्रमुख प्रवाल भित्तियाँ और क्षेत्र हैं: फायरी क्रॉस रीफ, सुबि रीफ, मिसचीफ रीफ तथा सेकंड थॉमस शोल।
  • संसाधन क्षमता: यह क्षेत्र समृद्ध मत्स्य संसाधनों और संभावित तेल एवं प्राकृतिक गैस भंडार के लिए जाना जाता है।
  • कानूनी संदर्भ: वर्ष 2016 में स्थायी मध्यस्थता न्यायालय (PCA) के निर्णय में कहा गया कि चीन का नाइन-डैश लाइन दावा अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत वैध नहीं है, हालाँकि चीन इस निर्णय को स्वीकार नहीं करता है।

सरल एआई 

अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF) वैज्ञानिक ज्ञान को जन-सुलभ बनाने के लिए सरल एआई (SARAL AI) विकसित कर रहा है।

सरल एआई के बारे में 

  • उद्देश्य: जटिल शोध को सरल और रोचक रूप में प्रस्तुत कर सामान्य लोगों के लिए समझना आसान बनाना।
  • बहुभाषी: 18 भारतीय भाषाओं में सामग्री तैयार कर व्यापक पहुँच सुनिश्चित करना।
  • सामग्री के प्रारूप: पॉडकास्ट, शॉर्ट वीडियो, पोस्टर, प्रस्तुतियाँ तथा व्यावसायिक सार तैयार करता है।
  • सामाजिक उद्देश्य: शोध के परिणामों को आम नागरिकों के लिए प्रासंगिक और समझने योग्य बनाना।

अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन के बारे में

  • यह भारत की एक प्रमुख संस्था है, जो वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार को सुदृढ़, वित्तपोषित तथा समन्वित करती है।
  • नीतिगत दृष्टि: अनुसंधान को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और सामाजिक प्रभाव के साथ जोड़ना।
  • कानूनी आधार: ANRF अधिनियम, 2023 के तहत स्थापित, और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के अंतर्गत कार्यरत।
  • मुख्य उद्देश्य: विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और शोध संस्थानों में अनुसंधान एवं विकास (R&D) पारिस्थितिकी तंत्र को विकसित और प्रोत्साहित करना।

मानसून का सामान्य से कम रहने का पूर्वानुमान 

भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने दीर्घावधि औसत (LPA) के 92% वर्षा का अनुमान लगाया है, जो सामान्य से कम मानसून का संकेत देता है।

मानसून पूर्वानुमान एवं प्रवृत्तियाँ

  • दीर्घावधि औसत मानक: मानसून के लिए दीर्घावधि औसत वर्षा 87 सेमी. (वर्ष 1971–2020) निर्धारित है।
  • अल्प वर्षा श्रेणी: LPA के 90% से कम वर्षा को अल्प वर्षा (Deficient) माना जाता है, जो सूखे की स्थिति से जुड़ी होती है।
  • प्रवृत्ति में परिवर्तन: यह पूर्वानुमान लगातार दो वर्षों (2024–25) के अधिक वर्षा वाले मानसून के अंत का संकेत देता है।
  • मौसमी चिंता: मानसून के दूसरे चरण (अगस्त–सितंबर) में वर्षा की कमी का अधिक जोखिम।

भारतीय मानसून के जलवायु कारक

  • ENSO का प्रभाव: अल नीनो-दक्षिणी दोलन (ENSO) मानसून की तीव्रता को प्रभावित करता है, अल नीनो वर्षा को कमजोर करता है और ला नीना वर्षा को बढ़ाता है।
    • ENSO: अल नीनो दक्षिणी दोलन, प्रशांत महासागर में तापमान और शीतलन का एक आवधिक जलवायु चक्र है, जो वैश्विक मौसम पैटर्न को प्रभावित करता है।
    • अल नीनो: अल नीनो मध्य-पूर्वी प्रशांत महासागर के जल की असामान्य रूप से गर्म होने से संबंधित घटना है, जो भारतीय मानसून को कमजोर करती है।
    • ला नीना: ला नीना प्रशांत महासागर के जल का असामान्य रूप से ठंडा होना है, जिससे भारत में मानसून की वर्षा बढ़ जाती है।
  • IOD का प्रभाव: हिंद महासागर द्विध्रुव (IOD) का सकारात्मक चरण वर्षा बढ़ाता है, जबकि नकारात्मक चरण वर्षा को कम करता है।
    • यह पश्चिमी और पूर्वी हिंद महासागर के बीच तापमान अंतर को दर्शाता है, जो मानसून की तीव्रता को प्रभावित करता है।
  • वॉकर परिसंचरण (Walker Circulation): यह पूर्व–पश्चिम वायुमंडलीय परिसंचरण है, जो भारत की ओर आर्द्रता के परिवहन को प्रभावित करता है।
    • वॉकर परिसंचरण भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र के ऊपर पूर्व-पश्चिम वायुमंडलीय परिसंचरण है, जो व्यापारिक पवनों और वर्षा के पैटर्न को संचालित करता है।
  • जेट धाराएँ: उपोष्णकटिबंधीय पश्चिमी और उष्णकटिबंधीय पूर्वी जेट धाराएँ मानसून के आगमन, तीव्रता और वितरण को निर्धारित करती हैं।
    • जट धाराएँ तीव्र गति से बहने वाली ऊपरी वायुमंडलीय हवाएँ हैं, जो मानसून को प्रभावित करती हैं।

सामान्य से कम मानसून के प्रभाव

  • कृषि पर दबाव: लगभग 60% किसान मानसून पर निर्भर हैं, जिससे खरीफ की फसलों की उत्पादकता पर खतरा बढ़ जाता है।
  • आय में कमी: कम वर्षा से ग्रामीण आय और उपभोग माँग में कमी आती है।
  • जल संकट: कमजोर मानसून से भूजल पुनर्भरण और पेयजल उपलब्धता प्रभावित होती है।
  • ऊर्जा पर प्रभाव: जलाशयों का स्तर घटने से जलविद्युत उत्पादन क्षमता कम हो जाती है।
  • खाद्य मुद्रास्फीति: फसल उत्पादन में कमी से खाद्य पदार्थों की कीमतों में वृद्धि हो सकती है।

Follow Us

Need help preparing for UPSC or State PSCs?

Connect with our experts to get free counselling & start preparing

Aiming for UPSC?

Download Our App

      
Quick Revise Now !
AVAILABLE FOR DOWNLOAD SOON
UDAAN PRELIMS WALLAH
Comprehensive coverage with a concise format
Integration of PYQ within the booklet
Designed as per recent trends of Prelims questions
हिंदी में भी उपलब्ध
Quick Revise Now !
UDAAN PRELIMS WALLAH
Comprehensive coverage with a concise format
Integration of PYQ within the booklet
Designed as per recent trends of Prelims questions
हिंदी में भी उपलब्ध

<div class="new-fform">







    </div>

    Subscribe our Newsletter
    Sign up now for our exclusive newsletter and be the first to know about our latest Initiatives, Quality Content, and much more.
    *Promise! We won't spam you.
    Yes! I want to Subscribe.