संदर्भ
भारत सरकार ने स्टार्ट-अप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 (स्टार्ट-अप इंडिया FoF 2.0) को अधिसूचित कर दिया है।
संबंधित तथ्य
स्टार्ट-अप इंडिया FoF 2.0, स्टार्ट-अप इंडिया एक्शन प्लान के तहत वर्ष 2016 में लॉन्च किए गए फंड ऑफ फंड्स फॉर स्टार्ट-अप्स (FFS 1.0) के मजबूत प्रदर्शन पर आधारित है।
फंड ऑफ फंड्स फॉर स्टार्ट-अप्स (FFS 1.0) के बारे में
- आरंभ: स्टार्ट-अप इंडिया पहल के अंतर्गत वर्ष 2016 में शुरू किया गया।
- उद्देश्य: सरकारी प्रत्यक्ष वित्तपोषण के बजाय, SEBI-पंजीकृत AIFs (वेंचर कैपिटल फंड) के माध्यम से उद्यम पूँजी जुटाकर स्टार्ट-अप्स को पूँजीगत सहायता प्रदान करना।
- निधि: भारत सरकार द्वारा स्वीकृत ₹10,000 करोड़ की निधि।
- कार्यान्वयन एजेंसी: भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (SIDBI) द्वारा प्रबंधित किया जा रहा है।
- निवेश मॉडल
- सरकार AIFs (वेंचर कैपिटल फंड) में निवेश करती है।
- ये AIFs, बदले में, पात्र स्टार्ट-अप्स में निवेश करते हैं।
- केंद्रित क्षेत्र
- प्रारंभिक चरण के स्टार्ट-अप
- प्रौद्योगिकी, विनिर्माण और सेवा जैसे नवाचार-संचालित क्षेत्र
|
स्टार्ट-अप इंडिया FoF 2.0 के बारे में
- नोडल मंत्रालय: वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय (भारत सरकार)।
- उद्देश्य: देश के स्टार्ट-अप इकोसिस्टम को मजबूत और विस्तारित करने के लिए वेंचर तथा उनकी उन्नति हेतु पूँजी जुटाना।
- कार्यान्वयन एजेंसी: भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (SIDBI)।
- वित्तपोषण: 16वें और 17वें वित्त आयोग चक्रों में पात्र वैकल्पिक निवेश कोषों (AIFs) में निवेश करने के लिए कुल ₹10,000 करोड़ का कोष होगा।
- प्राथमिकता वाले क्षेत्र: स्टार्ट-अप इंडिया FoF 2.0 के तहत निवेश, प्राथमिकता वाले क्षेत्रों का समर्थन करने वाले वैकल्पिक निवेश कोषों पर केंद्रित होगा, जिनमें शामिल हैं:-
- डीप टेक स्टार्ट-अप, छोटे AIFs द्वारा समर्थित प्रारंभिक विकास चरण के स्टार्ट-अप, प्रौद्योगिकी-आधारित और नवोन्मेषी विनिर्माण स्टार्ट-अप।
- स्क्रीनिंग प्रक्रिया
- संरचित चयन प्रक्रिया: स्टार्ट-अप इंडिया FoF 2.0, AIFs के चयन के लिए एक सुव्यवस्थित स्क्रीनिंग तंत्र अपनाएगा।
- वेंचर कैपिटल इन्वेस्टमेंट कमेटी (VCIC) द्वारा स्क्रीनिंग: प्रस्तावों का मूल्यांकन वेंचर कैपिटल इन्वेस्टमेंट कमेटी (VCIC) द्वारा किया जाएगा, जिसमें स्टार्ट-अप इकोसिस्टम के अनुभवी सदस्य शामिल होंगे।
- VCIC के संचालन संबंधी दिशा-निर्देश और संरचना उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्द्धन विभाग (DPIIT) द्वारा जारी किए जाएँगे।
- मजबूत निगरानी: पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए योजना में मजबूत निगरानी और पर्यवेक्षण तंत्र शामिल हैं।
- अधिकृत समिति (EC): योजना के कार्यान्वयन की निगरानी और प्रदर्शन का आकलन करने के लिए एक अधिकृत समिति का गठन किया जाएगा।
- सह-निवेश प्रावधान: एक व्यापक ढाँचे के तहत सरकार और संस्थागत निवेशकों द्वारा सह-निवेश को सक्षम बनाता है।
- शासन सुरक्षा उपाय: उचित शासन और निधि के कुशल उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय शामिल किए गए हैं।
महत्त्व
- भारत के नवाचार-आधारित विकास को बढ़ावा देना: स्टार्ट-अप इंडिया FoF 2.0 से भारत के नवाचार-आधारित विकास एजेंडा को आगे बढ़ाने और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्द्धी प्रौद्योगिकियों, उत्पादों और समाधानों का निर्माण करने वाले स्टार्ट-अप्स को समर्थन देने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाने की आशा है।
- भारत की आर्थिक मजबूती: यह योजना भारत की आर्थिक मजबूती को बढ़ाने, विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ावा देने, उच्च गुणवत्ता वाले रोजगार सृजित करने और भारत को वैश्विक नवाचार केंद्र के रूप में स्थापित करने में योगदान देगी।
- कोष में योगदान: यह SEBI में पंजीकृत वैकल्पिक निवेश कोषों (AIFs) के कोष में योगदान देगा, जिनका उपयोग केंद्र सरकार द्वारा ‘स्टार्ट-अप’ के रूप में मान्यता प्राप्त संस्थाओं में निवेश करने के लिए किया जाता है।
- विकसित भारत @ 2047 के राष्ट्रीय विजन के अनुरूप: विकसित भारत @ 2047 के राष्ट्रीय विजन के अनुरूप, यह कोष उद्यमियों को सशक्त बनाने, नवाचार को बढ़ावा देने और भारत के स्टार्ट-अप पारिस्थितिकी तंत्र की पूरी क्षमता को उजागर करने के लिए सरकार की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
वैकल्पिक निवेश कोषों (AIFs) के बारे में
- AIFs निजी तौर पर गठित निवेश माध्यम हैं, जो परिभाषित निवेश नीति के अनुसार निवेश करने के लिए भारतीय या विदेशी निवेशकों से धन जुटाते हैं।
- नियामक: ये SEBI (AIFs) विनियम, 2012 के तहत भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) द्वारा विनियमित होते हैं।
- प्रकृति: पारंपरिक निवेशों (शेयर, बॉण्ड) के विपरीत, AIFs स्टार्ट-अप, प्राइवेट इक्विटी, हेज फंड, बुनियादी ढाँचा आदि जैसी वैकल्पिक संपत्तियों में निवेश करते हैं।
- AIFs की श्रेणियाँ
- श्रेणी I: स्टार्ट-अप, MSME, बुनियादी ढाँचा और वेंचर कैपिटल जैसे सामाजिक या आर्थिक रूप से वांछनीय क्षेत्रों में निवेश करता है।
- श्रेणी II: इसमें प्राइवेट इक्विटी फंड और डेट फंड शामिल हैं – परिचालन आवश्यकताओं को छोड़कर लीवरेज का उपयोग नहीं करते हैं।
- श्रेणी III: इसमें हेज फंड शामिल हैं, जो जटिल ट्रेडिंग रणनीतियों का उपयोग करते हैं और लीवरेज का उपयोग कर सकते हैं।
- न्यूनतम निवेश: आमतौर पर न्यूनतम निवेश ₹1 करोड़ (कर्मचारियों/निदेशकों/प्रबंधकों के लिए ₹25 लाख) आवश्यक होता है।
- अर्थव्यवस्था में भूमिका
- स्टार्ट-अप और उभरते क्षेत्रों को जोखिम पूँजी प्रदान करता है।
- इससे नवाचार, उद्यमिता और रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलता है।
- यह उन क्षेत्रों को सहायता प्रदान करता है, जिन्हें पारंपरिक स्रोतों से वित्तपोषण प्राप्त नहीं होता है।
- स्टार्ट-अप इंडिया फंड ऑफ फाइनेंस के संदर्भ में प्रासंगिकता: AIFs मध्यस्थ के रूप में कार्य करते हैं, जिनके माध्यम से सरकार स्टार्ट-अप्स में सीधे निवेश करने के स्थान पर धन का प्रवाह करती है।
|