संदर्भ
यूएन-हैबिटेट की वर्ल्ड सिटीज रिपोर्ट, 2026 में चेतावनी दी गई है कि वैश्विक जनसंख्या का लगभग 40% हिस्सा गंभीर आवास संकट का सामना कर रहा है।
यूएन-हैबिटेट के बारे में
- वर्ष 1978 में स्थापित, यूएन-हैबिटेट संयुक्त राष्ट्र का एक कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य सामाजिक एवं पर्यावरणीय रूप से सतत् मानव बस्तियों और शहरी विकास को बढ़ावा देना है। इसका मुख्यालय नैरोबी, केन्या में स्थित है।
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वर्ल्ड सिटीज रिपोर्ट के बारे में
- वर्ल्ड सिटीज रिपोर्ट एक द्विवार्षिक वैश्विक शहरी आकलन रिपोर्ट है, जो शहरीकरण और सतत् विकास से जुड़े रुझानों, चुनौतियों तथा अवसरों का विश्लेषण करती है।
- प्रकाशन: इसे यूएन-हैबिटेट द्वारा प्रकाशित किया जाता है।
- थीम 2026: “द ग्लोबल हाउसिंग क्राइसिस: पाथवेज टू एक्शन”
- रिपोर्ट का फोकस निम्नलिखित पर है:
- सस्ती आवास व्यवस्था और शहरी असमानता
- जलवायु-लचीला शहरी अवसंरचना
- अनौपचारिक बस्तियाँ और आवासहीनता
- सतत् शहरी नियोजन और वित्तपोषण
- समावेशी शहरी शासन।
वर्ल्ड सिटीज रिपोर्ट, 2026 के प्रमुख निष्कर्ष
- आवास संकट: वैश्विक स्तर पर लगभग 3.4 अरब लोग सस्ते, सुरक्षित और पर्याप्त आवास से वंचित हैं, जिनमें 1 अरब से अधिक लोग अनौपचारिक बस्तियों में रह रहे हैं।
- सुलभता संबंधी अंतर: वैश्विक मूल्य-आय अनुपात वर्ष 2010 में 9.3 से बढ़कर वर्ष 2023 में 11.2 हो गया, जबकि मध्य और दक्षिण एशिया (भारत सहित) में यह 16.8 तक पहुँच गया है।
- किराया: विश्वभर में लगभग 44% परिवार अपनी आय का 30% से अधिक आवास पर खर्च करते हैं, जो बढ़ते किराये और शहरी असमानता को दर्शाता है।
- जलवायु खतरा: वर्ष 2040 तक जलवायु आघात लगभग 167 मिलियन घरों को नष्ट कर सकते हैं, जबकि वर्ष 2023 में प्राकृतिक आपदाओं से लगभग 280 अरब अमेरिकी डॉलर का आर्थिक नुकसान हुआ।
- वैश्विक आवासहीनता दर : रिपोर्ट में आवासहीनता दरें इस प्रकार बताई गई हैं—
- चीन: प्रति 10,000 लोगों पर 21,
- भारत: प्रति 10,000 लोगों पर 13,
- संयुक्त राज्य अमेरिका: प्रति 10,000 लोगों पर 20,
- ब्राजील: प्रति 10,000 लोगों पर 11।
- भारत में शहरी रुझान: भारत के आठ सबसे बड़े शहरों में सस्ती आवास परियोजनाएँ वर्ष 2018 में 52% से घटकर वर्ष 2025 में 17% रह गई हैं, जिसका मुख्य कारण लक्जरी हाउसिंग पर बढ़ता ध्यान है।
भारत में आवास से संबंधित प्रमुख चिंताएँ
- शहरी सुलभता: मुंबई और दिल्ली जैसे शहरों में मूल्य-आय अनुपात क्रमशः 14.3 और 10.1 है, जिससे मध्यम आय वर्ग के लिए घर खरीदना कठिन हो जाता है।
- सस्ती आवास में गिरावट: डेवलपर्स अधिक लाभ के कारण उच्च-स्तरीय (लक्जरी) आवास को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे बड़े शहरों में सस्ते घरों की आपूर्ति कम हो रही है।
- अनौपचारिक बस्तियाँ: तीव्र शहरीकरण और प्रवासन के कारण झुग्गी बस्तियों की आबादी बढ़ रही है, जहाँ स्वच्छता, पेयजल और सुरक्षित स्वामित्व संबंधी अधिकार की कमी होती है।
- सीमित आवास वित्त: निम्न आय वर्ग के बड़े हिस्से को औपचारिक गृह ऋण (मॉर्गेज) वित्त तक पहुँच नहीं मिलती और वे अनौपचारिक उधारी तंत्र पर निर्भर रहते हैं।
- जलवायु संवेदनशीलता: शहरी बाढ़, हीटवेव और चरम मौसम घटनाएँ आवास अवसंरचना के लिए खतरा हैं, विशेषकर तटीय क्षेत्रों और अनौपचारिक शहरी बस्तियों में।
भारत में आवास हेतु प्रमुख पहलें
- प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) (2015): “सभी के लिए आवास” के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए शुरू की गई, जिसमें दो घटक हैं—PMAY-शहरी और PMAY-ग्रामीण।
- यह क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी स्कीम (CLSS) के तहत ब्याज सब्सिडी प्रदान करती है, लाभार्थी-नेतृत्व वाले आवास निर्माण को बढ़ावा देती है और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS), निम्न आय वर्ग (LIG) तथा ग्रामीण परिवारों के लिए सस्ती आवास सुविधा उपलब्ध कराती है।
- अफोर्डेबल रेंटल हाउसिंग कॉम्प्लेक्स (ARHCs) (2020): PMAY-शहरी के अंतर्गत शुरू किया गया, जिसका उद्देश्य प्रवासी श्रमिकों, शहरी गरीबों, छात्रों और औद्योगिक श्रमिकों को कार्यस्थल के निकट सस्ती किराये की आवास सुविधा प्रदान करना है।
- यह सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) तथा खाली सरकारी आवासों के रूपांतरण के माध्यम से लागू किया जाता है।
- स्मार्ट सिटीज मिशन (2015): 100 स्मार्ट शहरों के विकास का लक्ष्य, जिसमें सतत् शहरी नियोजन, बेहतर आवास, ICT-आधारित शासन, एकीकृत परिवहन, ऊर्जा-कुशल अवसंरचना और बेहतर जीवन गुणवत्ता पर ध्यान दिया जाता है।
- अमृत (AMRUT) (2015): शहरी अवसंरचना में सुधार के लिए सार्वभौमिक जल आपूर्ति, सीवरेज नेटवर्क, शहरी परिवहन, हरित क्षेत्र और मूलभूत नागरिक सुविधाओं पर ध्यान केंद्रित करता है।
- झुग्गी पुनर्विकास पहलें: अहमदाबाद का स्लम नेटवर्किंग प्रोजेक्ट जैसे कार्यक्रम इन-सीटू स्लम उन्नयन, सामुदायिक भागीदारी, स्वच्छता, जल आपूर्ति और सुरक्षित आवास को बढ़ावा देते हैं।
- राज्य आवास बोर्ड और योजनाएँ: राज्य सरकारें राज्य आवास बोर्डों और शहरी विकास प्राधिकरणों के माध्यम से सब्सिडी युक्त आवास कार्यक्रम, भूमि आवंटन नीतियाँ और EWS तथा मध्यम आय वर्ग के लिए कल्याणकारी योजनाएँ लागू करती हैं।
आगे की राह
- समावेशी नियोजन: मिश्रित आय वाले आवास, परिवहन-उन्मुख विकास और समान भूमि उपयोग योजना को बढ़ावा देकर शहरी विभाजन को कम करना।
- सस्ती वित्त व्यवस्था: कम ब्याज वाले आवास ऋण, सूक्ष्म वित्त और किराया से स्वामित्व मॉडल का विस्तार, विशेषकर आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए।
- जलवायु सहनशीलता: आपदा-रोधी और ऊर्जा-कुशल आवास, हरित अवसंरचना तथा सतत् निर्माण पद्धतियों का विकास।
- सार्वजनिक-निजी भागीदारी: सरकारों, निजी डेवलपर्स और सामुदायिक संस्थानों के बीच सहयोग को प्रोत्साहित कर बड़े पैमाने पर सस्ती आवास उपलब्धता सुनिश्चित करना।
निष्कर्ष
सस्ती, जलवायु-सहनशील और समावेशी आवास सुनिश्चित करना सतत् शहरीकरण प्राप्त करने और तेजी से बढ़ते शहरों में जीवन गुणवत्ता सुधारने के लिए अत्यंत आवश्यक है।