‘उम्मीद’ कार्यक्रम (UMMID Programme)
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सरकार ने ‘उम्मीद’ (UMMID) कार्यक्रम के तहत निगरानी में सुधार के लिए ‘उम्मीद डैशबोर्ड’ (UMMID Dashboard) लॉन्च किया है और ‘उम्मीद संग्रह’ (UMMID Compendium) जारी किया है।
उम्मीद (UMMID) कार्यक्रम के बारे में
‘उम्मीद’ का पूर्ण रूप यूनिक मेथड्स ऑफ मैनेजमेंट एंड ट्रीटमेंट ऑफ इनहेरिटेड डिसऑर्डर्स (Unique Methods of Management and Treatment of Inherited Disorders) है, जिसे नवजात शिशुओं और बच्चों में वंशानुगत आनुवंशिक रोगों (Inherited Genetic Diseases) के समाधान के लिए लॉन्च किया गया था।
- लॉन्च और मंत्रालय: यह कार्यक्रम वर्ष 2019 में विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा लॉन्च किया गया था।
- उद्देश्य: जन्मजात और वंशानुगत आनुवंशिक विकारों के लिए शुरुआती निदान, आनुवंशिक परामर्श (Genetic Counselling), प्रसव-पूर्व परीक्षण (Prenatal Testing) और किफायती उपचार को बढ़ावा देना।
इस पहल की मुख्य विशेषताएँ
- रोकथाम-आधारित दृष्टिकोण: उम्मीद कार्यक्रम “इलाज से बेहतर रोकथाम है” के सिद्धांत पर तैयार किया गया है, ताकि शुरुआती हस्तक्षेप के माध्यम से वंशानुगत बीमारियों के बोझ को कम किया जा सके।
- निदान (NIDAN) केंद्र: बहु-विषयक देखभाल (Multidisciplinary Care) और उन्नत आनुवंशिक निदान प्रदान करने के लिए इस कार्यक्रम के तहत सरकारी अस्पतालों में निदान (National Inherited Diseases Administration – NIDAN) केंद्रों की स्थापना की गई।
- स्क्रीनिंग कार्यक्रम: उम्मीद के अंतर्गत गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं की वंशानुगत आनुवंशिक रोगों के लिए जाँच शामिल है, विशेष रूप से आकांक्षी जिलों (Aspirational Districts) में।
- लाभार्थी: इस कार्यक्रम से स्क्रीनिंग और नैदानिक सेवाओं के माध्यम से लगभग तीन लाख लोग लाभान्वित हुए हैं, जिसमें आकांक्षी जिलों और कम सेवायुक्त क्षेत्रों में पहुँच शामिल है।
वंशानुगत आनुवंशिक रोग (Inherited Genetic Diseases)
वंशानुगत आनुवंशिक रोग वे विकार हैं, जो जीन में असामान्यताओं या म्यूटेशन (उत्परिवर्तन) के कारण होते हैं, जो माता-पिता से बच्चों में स्थानांतरित होते हैं।
- कारण: ये बीमारियाँ दोषपूर्ण जीन, गुणसूत्र संबंधी असामान्यताओं (Chromosomal Abnormalities) या सामान्य शारीरिक कार्यों को प्रभावित करने वाले वंशानुगत म्यूटेशन के कारण होती हैं।
- संचरण: ये आमतौर पर वंशानुगत पैटर्न जैसे कि ऑटोसोमल डोमिनेंट (Autosomal Dominant), ऑटोसोमल रिसेसिव (Autosomal Recessive) या सेक्स-लिंक्ड इनहेरिटेंस के माध्यम से स्थानांतरित होते हैं।
- उदाहरण: सामान्य वंशानुगत आनुवंशिक विकारों में शामिल हैं:
- थैलेसीमिया (Thalassemia)
- सिकल सेल एनीमिया (Sickle Cell Anaemia)
- हीमोफिलिया (Haemophilia)
- सिस्टिक फाइब्रोसिस (Cystic Fibrosis)
- मस्कुलर डिस्ट्रॉफी (Muscular Dystrophy)।
- प्रारंभिक पहचान का महत्त्व: शुरुआती स्क्रीनिंग, आनुवंशिक परामर्श और प्रसव-पूर्व निदान से वंशानुगत आनुवंशिक रोगों के प्रभाव को प्रबंधित या कम करने में मदद मिल सकती है।
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भारत द्वारा वानुअतु के नेतृत्व वाले UN जलवायु प्रस्ताव पर मतदान न करना

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भारत, संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के उस प्रस्ताव पर मतदान से दूर रहा है, जो राज्यों के जलवायु दायित्वों पर अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) के सलाहकार दृष्टिकोण (Advisory Opinion) का समर्थन करता है।
प्रस्ताव के बारे में
- प्रस्ताव की शुरुआत: यह प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र महासभा में वानुआतु द्वारा प्रस्तुत किया गया था और कई देशों, विशेष रूप से जलवायु परिवर्तन के प्रति संवेदनशील लघु द्वीप विकासशील देशों (SIDS) द्वारा इसका समर्थन किया गया था।
- प्रमुख माँगें: इस प्रस्ताव में मजबूत राष्ट्रीय जलवायु कार्य योजनाओं, वैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5°C से नीचे सीमित करने और जीवाश्म ईंधन सब्सिडी को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने का आह्वान किया गया था।
- मतदान का परिणाम: इस प्रस्ताव को पक्ष में 141 मतों, विरोध में 8 मतों और 28 अनुपस्थितियों के साथ अपना लिया गया।
अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) के सलाहकार दृष्टिकोण के बारे में
- ICJ द्वारा पहला जलवायु दृष्टिकोण: ICJ ने जलवायु परिवर्तन के संबंध में राज्यों के कानूनी दायित्वों की समीक्षा की थी।
- मुख्य निष्कर्ष: ICJ ने कहा कि:
- जलवायु प्रणाली की रक्षा करना देशों का कानूनी दायित्व है।
- इन दायित्वों का उल्लंघन करने वाले राज्यों को कानूनी जिम्मेदारी और क्षतिपूर्ति का सामना करना पड़ सकता है।
- गैर-बाध्यकारी प्रकृति: यह सलाहकार दृष्टिकोण अपने आप में गैर-बाध्यकारी है और यह UNFCCC प्रक्रिया से बाहर स्वचालित रूप से कानूनी दायित्व नहीं आरोपित कर सकता है।
भारत इस प्रस्ताव से दूर क्यों रहा?
- जलवायु वित्त पर चिंता: यह प्रस्ताव विकासशील देशों को जलवायु वित्त, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और क्षमता निर्माण प्रदान करने की विकसित देशों की जिम्मेदारी को पर्याप्त रूप से संबोधित करने में विफल रहा।
- UNFCCC ढाँचे का संरक्षण: यह प्रस्ताव ‘संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क कन्वेंशन’ (UNFCCC) और पेरिस समझौते के तहत स्थापित जलवायु वार्ता ढाँचे को कमजोर कर सकता था।
- बाध्यकारी दायित्व: भारत ने चेतावनी दी कि यह प्रस्ताव बहुपक्षीय समझौतों से परे विकासशील देशों पर अप्रत्यक्ष रूप से बाध्यकारी या अर्द्ध-बाध्यकारी जलवायु दायित्व थोप सकता है।
वानुअतु के बारे में
- वानुआतु दक्षिण प्रशांत महासागर में ऑस्ट्रेलिया के पूर्व में स्थित एक प्रशांत द्वीप देश है।
- राजधानी: वानुआतु की राजधानी पोर्ट विला (Port Vila) है, जो इफाते द्वीप (Efate Island) पर अवस्थित है।
- द्वीपीय देश: वानुअतु में प्रशांत क्षेत्र में विस्तारित ज्वालामुखी मूल के लगभग 80 द्वीप शामिल हैं।
- जलवायु संवेदनशीलता: यह विश्व के सर्वाधिक जलवायु-संवेदनशील देशों में से एक है, जो बढ़ते समुद्र के जलस्तर, चक्रवातों और चरम मौसम की घटनाओं से खतरों का सामना कर रहा है।
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68वीं APO शासी निकाय

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भारत ने नई दिल्ली के भारत मंडपम में एशियाई उत्पादकता संगठन (APO) की 68वीं गवर्निंग बॉडी मीटिंग (GBM) की मेजबानी की।
बैठक की मुख्य विशेषताएँ
- मेजबानी: केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्द्धन विभाग (DPIIT) के तत्त्वावधान में राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद (NPC) द्वारा इसकी मेजबानी की गई।
- चर्चा के प्रमुख क्षेत्र: बैठक में APO विजन 2030 (APO Vision 2030), वित्तीय रिपोर्टिंग मानकों और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सतत् सामाजिक-आर्थिक विकास पर चर्चा की गई।
- नेतृत्व परिवर्तन: भारत के बाद इंडोनेशिया ने वर्ष 2026-27 के लिए एपीओ (APO) की अध्यक्षता सँभाली।
- उत्पादकता विशेषज्ञों को सम्मान: कार्यक्रम के दौरान APO राष्ट्रीय पुरस्कार (APO National Award) प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए।
एशियाई उत्पादकता संगठन (APO) के बारे में
- एशियाई उत्पादकता संगठन (APO) एशिया-प्रशांत क्षेत्र में उत्पादकता और सतत् सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा देने वाला एक अग्रणी अंतर-सरकारी संगठन है।
- स्थापना: वर्ष 1961
- मुख्यालय: टोक्यो, जापान।
- सदस्यता पात्रता: APO की सदस्यता एशिया और प्रशांत क्षेत्र के उन देशों के लिए खुली है, जो ‘एशिया और प्रशांत के लिए संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक आयोग’ (UN ESCAP) के सदस्य हैं।
- सदस्यता: वर्तमान में इसमें 21 सदस्य अर्थव्यवस्थाएँ शामिल हैं।
- सदस्य देश: बांग्लादेश, कंबोडिया, चीनी गणराज्य (ताइवान), फिजी, हांगकांग, भारत, इंडोनेशिया, ईरान इस्लामी गणराज्य, जापान, कोरिया गणराज्य, लाओस, मलेशिया, मंगोलिया, नेपाल, पाकिस्तान, फिलीपींस, सिंगापुर, श्रीलंका, थाईलैंड, तुर्की और वियतनाम।
- भारत की भूमिका: भारत APO का एक संस्थापक सदस्य है।
राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद (NPC) के बारे में
- स्थापना: इसकी स्थापना वर्ष 1958 में एक स्वायत्त निकाय के रूप में की गई थी।
- मुख्यालय: नई दिल्ली।
- प्रशासनिक नियंत्रण: यह केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्द्धन विभाग (DPIIT) के तहत कार्य करता है।
- उद्देश्य: उत्पादकता के प्रति जागरूकता बढ़ाना, विकास के सूक्ष्म आर्थिक आधार को मजबूत करना, सरकारी थिंक टैंक के रूप में कार्य करना, परामर्श व प्रशिक्षण सेवाएँ प्रदान करना तथा विभिन्न क्षेत्रों में उत्पादकता को बढ़ाना।
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अरुणाचल कीवी मिशन

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हाल ही में केंद्रीय उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास और संचार मंत्री ने ‘अरुणाचल कीवी: द यूएसपी ऑफ अरुणाचल प्रदेश (Arunachal Kiwi: The USP of Arunachal Pradesh)” मिशन की शुरुआत की है।
मिशन के बारे में
- यह सरकार द्वारा शुरू किया गया एक क्लस्टर-आधारित मिशन है, जिसका उद्देश्य मूल्य-शृंखला, ब्रांडिंग और बुनियादी ढाँचागत सहायता के माध्यम से अरुणाचल प्रदेश को एक प्रीमियम जैविक कीवी उत्पादन और निर्यात केंद्र के रूप में विकसित करना है।
- वित्तीय परिव्यय: अभिसरण-संचालित दृष्टिकोण के माध्यम से इसका परिव्यय लगभग ₹167 करोड़ है।
- संस्थागत सहायता: यह उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय (MDoNER) द्वारा संचालित है, जिसे राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (NABARD), कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद – केंद्रीय शीतोष्ण बागवानी संस्थान अर्थात् आईसीएआर-सीआईटीएच (ICAR-CITH) और निजी निवेशकों का सहयोग प्राप्त है।
- फसल कटाई के बाद का प्रबंधन: यह जीरो वैली (Ziro Valley), दिरांग, कलाकतांग, शी योमी और दिबांग वैली में छह फसल कटाई-उपरांत प्रबंधन केंद्रों के साथ एक क्लस्टर-आधारित मॉडल को अपनाता है।
योजना का महत्त्व
- प्रमुख उत्पादक: अरुणाचल प्रदेश भारत का सबसे बड़ा कीवी उत्पादक राज्य है और सालाना 7,050 मीट्रिक टन से अधिक के साथ भारत के कुल कीवी उत्पादन में 50% से अधिक का योगदान देता है।
- यह वर्ष 2020 में उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के लिए मिशन ऑर्गेनिक वैल्यू चेन डेवलपमेंट (MOVCD-NER) के तहत जैविक कीवी प्रमाणन (Organic Kiwi Certification) प्राप्त करने वाला देश का पहला राज्य बना था।
- इस राज्य में उच्च-ऊँचाई और जैविक कृषि-जलवायु परिस्थितियाँ मौजूद हैं, जो प्रीमियम-ग्रेड हेवार्ड (Hayward) और एलिसन (Allison) कीवी किस्मों के लिए उपयुक्त हैं।
- ब्रांड नॉर्थ ईस्ट विजन: प्रत्येक उत्तर-पूर्वी राज्य से एक विशिष्ट यूएसपी (USP) वाले एक अद्वितीय उत्पाद की पहचान की गई है।
- इनमें मिजोरम की अदरक, नागालैंड की कॉफी, सिक्किम की जैविक खेती, मणिपुर का पोलो खेल, असम का मूगा सिल्क, मेघालय की लाकाडोंग हल्दी और अरुणाचल प्रदेश का जैविक कीवी शामिल हैं।
कीवी फल के बारे में
- कीवी फल [वैज्ञानिक नाम: एक्टिनिडिया डेलिसिओसा (Actinidia Deliciosa)], जिसे चाइनीज गूसबेरी (Chinese Gooseberry) के नाम से भी जाना जाता है, एक्टिनिडिएसी (Actinidiaceae) कुल से संबंधित एक पर्णपाती आरोही बेल (Deciduous Climbing Vine) है।
- पोषण मूल्य: यह विटामिन B और C तथा फास्फोरस, पोटेशियम और कैल्शियम जैसे खनिजों से भरपूर होता है।
- इसमें एंटीऑक्सीडेंट और डाइटरी फाइबर (आहारीय फाइबर) भी होते हैं, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता और पाचन में सहायता करते हैं।
जलवायु परिस्थितियाँ
- ऊँचाई: यह गर्म और आर्द्र जलवायु में समुद्र तल से 900-1600 मीटर की ऊँचाई पर अच्छी तरह उगता है।
- वर्षा: इसके लिए लगभग 150 सेमी. अच्छी तरह से वितरित वार्षिक वर्षा की आवश्यकता होती है।
- मृदा: गहरी, उपजाऊ और अच्छी जल निकासी वाली बलुई दोमट मृदा इसके लिए आदर्श होती है।
- शीतलन घंटे (Chilling Hours): सर्दियों के दौरान 7°C या उससे कम तापमान पर 700-800 घंटों की आवश्यकता होती है।
- परागण (Pollination): कीवी के पौधे आम तौर पर डायोसियस (Dioecious) अर्थात् एकलिंगाश्रयी होते हैं, जिसका अर्थ है कि नर और मादा फूल अलग-अलग पौधों पर उगते हैं।
- भारत में खेती: कीवी की खेती मुख्य रूप से हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, सिक्किम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और केरल में केंद्रित है।
- विश्व में खेती: प्रमुख उत्पादकों में न्यूजीलैंड, चीन, इटली, अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया, फ्राँस, चिली और स्पेन शामिल हैं।
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