संदर्भ
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने भारत की ‘केयर इकोनॉमी’ को सुदृढ़ करने के लिए “क्रिएटिंग अ वेल-फंक्शनिंग केयर इकोनॉमी” विषय पर एक आभासी कार्यक्रम आयोजित किया।
- इस कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ नागरिकों के लिए ‘जीवन’ ऐप तथा ‘शतायु’ डैशबोर्ड का भी शुभारंभ किया गया।
‘जीवन’ ऐप (JEEVAN App) के बारे में
- “जॉइंट एल्डरली एंपॉवरमेंट एंड वर्चुअल असिस्टेंस नेटवर्क” (JEEVAN) एक मोबाइल एप्लिकेशन है, जिसे वरिष्ठ नागरिकों के लिए शुरू किया गया है ताकि देखभाल सेवाओं, सहायता तंत्र और कल्याणकारी जानकारी तक पहुँच को बेहतर बनाया जा सके।
- उद्देश्य: प्रौद्योगिकी-आधारित सहायता तंत्र के माध्यम से बुजुर्गों के लिए गरिमा, सुरक्षा, सुगमता और स्वतंत्र जीवन को बढ़ावा देना।
- नोडल मंत्रालय: सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग।
- मुख्य विशेषताएँ
- वरिष्ठ नागरिक कल्याण योजनाओं और सहायता सेवाओं की जानकारी प्रदान करता है।
- वृद्धावस्था संबंधी देखभाल और सामुदायिक आधारित सहायता तक पहुँच को सुगम बनाता है।
- डिजिटल समावेशन और शिकायत निवारण को सरल बनाता है।
- देखभालकर्ताओं, संस्थानों और लाभार्थियों के बीच समन्वय को समर्थन देता है।
‘शतायु’ डैशबोर्ड के बारे में
- “सीनियर होलिस्टिक केयर असिस्टेंस एंड ट्रेनिंग फॉर योर यूटिलिटी” (SHATAYU) एक डिजिटल डैशबोर्ड है, जिसे वृद्धावस्था में देखभालकर्ताओं और सेवाओं से संबंधित जानकारी प्रदान करने के लिए विकसित किया गया है।
- उद्देश्य: बेहतर डेटा प्रबंधन, निगरानी और समन्वय के माध्यम से भारत के वरिष्ठ नागरिक देखभाल तंत्र को सुदृढ़ करना।
- मुख्य विशेषताएँ
- प्रशिक्षित वृद्धावस्था संबंधी देखभालकर्ताओं और देखभाल संस्थानों की जानकारी धारित करता है।
- नीति निर्माताओं को वरिष्ठ नागरिक देखभाल अवसंरचना में कमियों की पहचान में सहायता करता है।
- निगरानी, योजना निर्माण और विस्तार में सहायता प्रदान करता है।
- देखभाल क्षेत्र में प्रौद्योगिकी-आधारित शासन को बढ़ावा देता है।
केयर इकोनॉमी (देखभाल अर्थव्यवस्था) के बारे में
केयर इकोनॉमी में बाल देखभाल, वृद्ध देखभाल, दिव्यांग सहायता, घरेलू कार्य और स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित सभी सवेतन और अवैतनिक गतिविधियाँ शामिल होती हैं।
केयर इकोनॉमी के घटक
- अवैतनिक देखभाल कार्य: इसमें खाना बनाना, सफाई, देखभाल और घरेलू जिम्मेदारियाँ शामिल हैं, जो बिना किसी आर्थिक भुगतान के, मुख्यतः महिलाओं द्वारा परिवार के भीतर किए जाते हैं।
- सवेतन देखभाल कार्य: इसमें नर्स, घरेलू कामगार, बाल देखभाल प्रदाता, थेरेपिस्ट और वृद्ध देखभाल पेशेवर शामिल होते हैं, जो औपचारिक और अनौपचारिक क्षेत्रों में कार्य करते हैं।
- देखभाल अवसंरचना: इसमें डे-केयर केंद्र, वृद्धाश्रम, सहायक आवास सुविधाएँ और प्रारंभिक बाल शिक्षा संस्थान शामिल हैं, जो देखभाल सेवाओं को समर्थन देते हैं।
- सामाजिक नीतियाँ: इसमें मातृत्व अवकाश, पितृत्व अवकाश, सब्सिडी, कल्याणकारी योजनाएँ और श्रम सुरक्षा शामिल हैं, जो देखभालकर्ताओं तथा आश्रितों को समर्थन प्रदान करती हैं।
भारत में केयर इकोनॉमी का महत्त्व
- महिला श्रम बल भागीदारी में वृद्धि: भारत में महिलाओं की कम कार्यबल भागीदारी का संबंध अवैतनिक देखभाल कार्य के बोझ से है।
- सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के टाइम यूज सर्वे के अनुसार, 15–59 वर्ष की महिलाएँ घरेलू सदस्यों की देखभाल में प्रतिदिन औसतन 140 मिनट खर्च करती हैं, जबकि पुरुष केवल 74 मिनट।
- भारत की वृद्ध होती जनसंख्या का समाधान: भारत की वृद्ध जनसंख्या वर्ष 2050 तक 20.8% (347 मिलियन) तक पहुँचने का अनुमान है, जिससे संगठित वृद्ध देखभाल और वृद्धावस्था संबंधी सेवाओं की माँग बढ़ेगी।
- रोजगार सृजन और आर्थिक विकास: अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के अनुसार, भारत की केयर इकोनॉमी में निवेश से लगभग 11 मिलियन नौकरियाँ उत्पन्न हो सकती हैं, जिससे विशेष रूप से महिलाओं और अनौपचारिक क्षेत्र के श्रमिकों को लाभ होगा।
निष्कर्ष
एक सुदृढ़ केयर इकोनॉमी लैंगिक समानता को बढ़ावा, रोजगार सृजन और भारत की बदलती जनसांख्यिकीय आवश्यकताओं के लिए समावेशी सामाजिक सुरक्षा ढाँचा विकसित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।