मुंडियल डो क्वीजो डो ब्राजील 2026
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुंडियल डो क्वीजो डो ब्राजील (Mundial do Queijo do Brasil) 2026 में भारतीय पनीर निर्माताओं की उल्लेखनीय उपलब्धि पर उन्हें बधाई दी।
मुंडियल डो क्वीजो डो ब्रासील 2026 के बारे में
- यह ब्राजील में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय डेयरी प्रतियोगिता है, जिसमें विश्वभर के पनीर का प्रदर्शन और मूल्यांकन किया जाता है।
- उद्देश्य: कुटीर स्तर के चीज निर्माण की परंपराओं को बढ़ावा देना, नवाचार को प्रोत्साहित करना और वैश्विक स्तर पर छोटे डेयरी उत्पादकों का समर्थन करना।
- मूल्यांकन मानदंड: विशेषज्ञ निर्णायकों द्वारा बनावट, सुगंध, स्वाद, दिखावट और संतुलन के आधार पर पनीर का आकलन किया जाता है।
- पुरस्कार संरचना: इसमें सुपर गोल्ड, गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज जैसी विभिन्न श्रेणियाँ होती हैं, जो उत्कृष्टता के विभिन्न स्तरों को मान्यता देती हैं।
- भारत की भागीदारी: भारत ने अपने पहले ही प्रयास में चार पदक जीतकर वैश्विक स्तर पर अपने कॉटेज चीज (पनीर) क्षेत्र की बढ़ती पहचान को दर्शाया।
- सुपर गोल्ड विजेता: एलीफथेरिया गुलमर्ग [ब्री (Brie) शैली का पनीर] ने सुपर गोल्ड जीता।
- स्वर्ण पदक विजेता: नॉर्डिक फार्म (लेह, लद्दाख) की याक चुरपी-सॉफ्ट और एलेफ्थेरिया ब्रुनोस्ट [व्हे (Whey) पनीर] दोनों ने स्वर्ण पदक प्राप्त किए।
- रजत विजेता: एलेफ्थेरिया काली मिरी [बेल्पर नोल (Belper Knolle) शैली का पनीर] को रजत पदक से सम्मानित किया गया।
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अत्यधिक गर्मी से वैश्विक खाद्य प्रणालियों पर खतरा
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संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) तथा विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की एक संयुक्त रिपोर्ट ने वैश्विक कृषि-खाद्य प्रणालियों पर अत्यधिक गर्मी के बढ़ते खतरे को रेखांकित किया है।
मुख्य निष्कर्ष
- हीटवेव की बढ़ती प्रवृत्ति: जलवायु परिवर्तन के कारण हीटवेव अधिक बार-बार, लंबी अवधि तक और तीव्र होती जा रही हैं।
- वर्ष 2025 अब तक के तीन सबसे गर्म वर्षों में शामिल रहा।
- तापमान की चरम सीमा: फसलें, पशुधन, मत्स्य संसाधन और वन अत्यधिक संवेदनशील होते जा रहे हैं।
- जब तापमान लगभग 30 डिग्री सेल्सियस से अधिक होता है, तो फसल उत्पादन में तेज गिरावट आती है।
- वैश्विक तापमान में 1 डिग्री वृद्धि से चावल, गेहूँ, मक्का, और सोयाबीन जैसी प्रमुख फसलों की उपज में लगभग 6 प्रतिशत की कमी होती है।
- समुद्री ऊष्मा तनाव: समुद्री हीटवेव बढ़ रही हैं और विश्व के अधिकांश महासागरों को प्रभावित कर चुकी हैं, जिससे मछली भंडार में कमी आ रही है।
- जोखिम गुणक प्रभाव: अत्यधिक गर्मी सूखा, जंगल की आग और कीट प्रकोप को बढ़ाती है तथा तापमान सीमा पार होने पर फसल उत्पादन में तीव्र गिरावट लाती है।
- व्यावहारिक प्रमाण: मोरक्को में सूखा और हीटवेव के संयुक्त प्रभाव से अनाज उत्पादन में 40% से अधिक गिरावट दर्ज की गई।
भविष्य के अनुमान
- अत्यधिक गर्मी में अरेखीय वृद्धि: तापमान बढ़ने के साथ गर्मी की तीव्रता तेजी से बढ़ती है- 2 डिग्री पर यह लगभग दोगुनी और 3 डिग्री पर लगभग चार गुना हो जाती है।
- घटती जैविक सीमाएँ: जैविक और पारिस्थितिकी सहनशीलता सीमाएँ तेजी से टूट रही हैं।
- जैविक सीमा वह अधिकतम तापमान या पर्यावरणीय स्थिति है, जिसे जीवित प्राणी सहन कर सकते हैं और सामान्य रूप से कार्य कर सकते हैं।
प्रभाव
- खाद्य सुरक्षा पर खतरा: यह 1 अरब से अधिक लोगों की खाद्य सुरक्षा और आजीविका को प्रभावित करता है।
- कृषि में व्यवधान: यह फसल चक्रों को बदलता है और कृषि उत्पादकता को कम करता है।
- मत्स्य क्षेत्र पर प्रभाव: महासागरों में ऑक्सीजन की कमी के कारण मत्स्य संसाधनों के घटने का जोखिम बढ़ता है।
- बाजार अस्थिरता: इससे वैश्विक खाद्य आपूर्ति और कीमतों में अस्थिरता उत्पन्न होती है।
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शेखा झील पक्षी अभयारण्य
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हाल ही में शेखा झील पक्षी अभयारण्य को भारत का 99वाँ रामसर स्थल घोषित किया गया।
- इससे पहले छारी-ढांड (गुजरात) को 97वाँ तथा पटना पक्षी अभयारण्य (उत्तर प्रदेश) को 98वाँ रामसर स्थल घोषित किया गया था।
शेखा झील पक्षी अभयारण्य के बारे में
- शेखा झील पक्षी अभयारण्य एक मीठे पानी का आर्द्रभूमि पारिस्थितिकी तंत्र है, जो अपनी समृद्ध जैव विविधता और प्रवासी पक्षियों के आवास के लिए प्रसिद्ध है।
- स्थान: यह उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में गंगा के मैदानी क्षेत्र में स्थित है।
- यह झील वर्ष 1852 में अपर गंगा नहर के निर्माण के बाद विकसित हुई।
- विशेषताएँ
- यह एक स्थायी मीठे पानी की आर्द्रभूमि है, जो मानसूनी जल प्रणाली से प्रभावित होती है।
- यह मध्य एशियाई प्रवासी मार्ग पर स्थित है, जो पक्षियों का एक प्रमुख प्रवास मार्ग है।
- यहाँ की वनस्पति में जलमग्न पौधे [जैस- हाइड्रिला (Hydrilla), वैलिसनेरिया (Vallisneria)], तैरते पौधे (जैसे अजोला (Azolla), आइकोर्निया (Eichhornia)] और जड़युक्त प्रजातियाँ शामिल हैं।
- यह बार-हेडेड गूज, पेंटेड स्टॉर्क और विभिन्न प्रवासी बत्तखों जैसे पक्षियों का आवास है।
- महत्त्व
- पारिस्थितिकी महत्त्व: यह प्रवासी पक्षियों के लिए एक महत्त्वपूर्ण विश्राम स्थल और प्रजनन आवास प्रदान करता है।
- आजीविका समर्थन: यह इको-टूरिज्म और संबंधित गतिविधियों के माध्यम से स्थानीय लोगों की आजीविका को बढ़ावा देता है।
- जलवायु भूमिका: यह जल विनियमन और कार्बन अवशोषण के माध्यम से जलवायु सहनशीलता को मजबूत करता है।
रामसर स्थल के बारे में
- रामसर स्थल वे आर्द्रभूमियाँ हैं, जिन्हें रामसर अभिसमय के तहत अंतरराष्ट्रीय महत्त्व के लिए नामित किया जाता है।
- यह अभिसमय वर्ष 1971 में ईरान के रामसर में अपनाया गया और वर्ष 1975 में लागू हुआ।
- स्वरूप एवं ढाँचा: यह एक अंतर-सरकारी संधि है, जो आर्द्रभूमियों के संरक्षण और सतत् उपयोग को बढ़ावा देती है।
- सदस्य देश पारिस्थितिकी, वनस्पति, प्राणीशास्त्रीय या जलवैज्ञानिक महत्त्व के आधार पर आर्द्रभूमियों को नामित करते हैं।
- मोंट्रेक्स अभिलेख: इसमें वे रामसर स्थल शामिल होते हैं, जो पारिस्थितिकी खतरों का सामना कर रहे हैं और जिन्हें प्राथमिक संरक्षण की आवश्यकता है।
- यह वर्ष 1990 में स्थापित किया गया था, ताकि पारिस्थितिकी स्थिति में बदलावों की निगरानी की जा सके।
- वर्तमान में केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (राजस्थान) और लोकटक झील (मणिपुर) मोंट्रेक्स अभिलेख में शामिल हैं।
आर्द्रभूमियों के बारे में
- आर्द्रभूमियाँ वे क्षेत्र हैं, जहाँ भूमि पानी से संतृप्त रहती है—चाहे वह मीठा, खारा या अर्द्ध-खारा पानी हो और यह स्थिति स्थायी या मौसमी हो सकती है। इनमें दलदल, झीलें और बाढ़ क्षेत्र शामिल होते हैं।
- आर्द्रभूमियों का महत्त्व
- प्राकृतिक जल शुद्धिकरण: आर्द्रभूमियाँ प्राकृतिक जल फिल्टर की तरह कार्य करती हैं और भूजल पुनर्भरण में सहायक होती हैं।
- बाढ़ नियंत्रण: ये अत्यधिक वर्षा के दौरान अतिरिक्त पानी को संगृहीत कर बाढ़ के प्रभाव को कम करती हैं।
- जलवायु विनियमन: ये कार्बन का भंडारण कर और जल चक्र को बनाए रखकर जलवायु को संतुलित करती हैं।
- जैव विविधता एवं आजीविका: ये विविध वनस्पति और जीवों का आवास प्रदान करती हैं तथा मानव आजीविका का समर्थन करती हैं।
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भारत-श्रीलंका गोताखोरी अभ्यास (DIVEX 2026)

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आईएनएस निरीक्षक DIVEX 2026 के चौथे संस्करण में भाग लेने के लिए कोलंबो, श्रीलंका पहुँचा।
DIVEX 2026 के बारे में
- DIVEX 2026 भारत और श्रीलंका के बीच आयोजित एक द्विपक्षीय नौसैनिक गोताखोरी अभ्यास है।
- उद्देश्य: परस्पर संचालन क्षमता, संचालन समन्वय और तकनीकी दक्षता को बढ़ाना।
- यह जल के भीतर अभियानों और समुद्री सुरक्षा में सहयोग को सुदृढ़ करने पर केंद्रित है।
- स्थान: कोलंबो, श्रीलंका
- मुख्य विशेषताएँ
- यह अभ्यास लगभग एक सप्ताह तक चलता है, जिसमें दोनों देशों की नौसेनाओं की गोताखोरी टीमें भाग लेती हैं।
- इसमें पनडुब्बी बचाव और उद्धार अभियानों जैसे विशेष गतिविधियाँ शामिल हैं।
- गतिविधियों में संयुक्त प्रशिक्षण, ज्ञान का आदान-प्रदान, और श्रेष्ठ प्रक्रियाओं का साझा करना शामिल है।
- इस अभ्यास में आरोग्य मैत्री के अंतर्गत चिकित्सा सहायता जैसी मानवीय पहलें भी शामिल हैं।
- भारतीय नौसेना BHISM (Bharat Health Initiative for Sahyog Hita & Maitri) के दो क्यूब प्रस्तुत करेगी।
- महत्त्व
- यह पनडुब्बी दुर्घटनाओं सहित जल क्षेत्र में आपात स्थितियों के लिए तैयारी को सुदृढ़ करता है।
- यह हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करता है।
- यह सांस्कृतिक और सामाजिक संपर्कों के माध्यम से आपसी विश्वास, सद्भाव और जन-से-जन संपर्क को बढ़ावा देता है।
- यह भारत की SAGAR (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास) की नीति के अनुरूप है।
आईएनएस निरीक्षक के बारे में
- आईएनएस निरीक्षक भारतीय नौसेना का एक गोताखोरी सहायता एवं पनडुब्बी बचाव पोत है।
- इसे मझगाँव शिपबिल्डर्स द्वारा वर्ष 1985 में निर्मित किया गया था। यह पोत वर्ष 1989 से नौसेना की सेवा में है और वर्ष 1995 में इसका विधिवत समारोहपूर्वक समावेशन (commissioning) हुआ।
- यह कई गोताखोरी अभियानों का हिस्सा रहा है और देश में अब तक की सबसे गहरी गोताखोरी (257 मीटर) का रिकॉर्ड रखता है।
भारत और श्रीलंका के बीच अन्य द्विपक्षीय अभ्यास
- मित्र शक्ति (थल सेना): यह एक वार्षिक संयुक्त सैन्य अभ्यास है, जिसमें दोनों देशों की सेनाओं की विशेष इकाइयाँ भाग लेती हैं और इसका मुख्य फोकस उग्रवाद-रोधी तथा आतंकवाद-रोधी अभियानों पर होता है।
- 11वाँ संस्करण नवंबर 2025 में बेलगावी (भारत) में आयोजित हुआ, जिसमें संयुक्त सामरिक अभ्यास और संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों पर ध्यान दिया गया।
- SLINEX (श्रीलंका-भारत नौसैनिक अभ्यास): यह एक नियमित द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास है, जिसका उद्देश्य समुद्री सहयोग और परस्पर संचालन क्षमता को सुदृढ़ करना है।
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प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना (PMIS)
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सरकार ने वर्ष 2026 में प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना का विस्तार करते हुए अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों को शामिल किया, जिससे प्रारंभिक औद्योगिक अनुभव और रोजगार क्षमता में वृद्धि होगी।
प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना (PMIS) के बारे में
- PMIS एक प्रमुख पहल है, जिसे अक्टूबर 2024 में प्रारंभ किया गया था, जिसका उद्देश्य भारत की शीर्ष 500 कंपनियों में विभिन्न क्षेत्रों में संरचित एवं सवेतन इंटर्नशिप प्रदान करना है।
- मंत्रालय: कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय
- उद्देश्य
- व्यावहारिक कार्य अनुभव और वास्तविक जीवन के अनुभव के माध्यम से रोजगार क्षमता को बढ़ाना।
- शिक्षा और उद्योग के बीच अंतर को कम करना तथा व्यावहारिक कौशल एवं व्यावसायिक नेटवर्किंग को प्रोत्साहित करना।
- लाभार्थी: यह योजना 18–25 वर्ष के उन भारतीय युवाओं को लक्षित करती है, जो पूर्णकालिक रोजगार या शिक्षा में संलग्न नहीं हैं।
- पात्र अभ्यर्थियों में स्कूल उत्तीर्ण, आईटीआई धारक, डिप्लोमा धारक और स्नातक शामिल हैं।
- हालिया विस्तार के तहत अब स्नातक और स्नातकोत्तर के अंतिम वर्ष के विद्यार्थी भी अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC) के साथ आवेदन कर सकते हैं।
- वित्तीय सहायता: इसमें मासिक सहायता और एकमुश्त वजीफा की योजना है।
- प्रत्येक प्रशिक्षु को प्रति माह ₹5,000 सरकार से तथा ₹500 संबंधित कंपनी से वजीफा मिलेगा।
- आय-आधारित मानदंड सुनिश्चित करते हैं कि लाभ आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों तक पहुँचे।
- अवधि: 12 माह का औद्योगिक प्रशिक्षण
- विस्तार का महत्त्व
- यह प्रारंभिक कॅरियर अनुभव प्रदान कर शिक्षा से रोजगार के बीच की दूरी को कम करता है।
- यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप अनुभवात्मक अधिगम को बढ़ावा देता है।
- यह कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स और हरित ऊर्जा जैसे उभरते क्षेत्रों में उद्योग-उन्मुख कौशल को सुदृढ़ करता है।
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