आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM)

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आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) ने 100 करोड़ आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खातों (ABHA) से जुड़े स्वास्थ्य रिकॉर्ड का आँकड़ा पार कर लिया है, जिससे भारत के परस्पर संचालित और नागरिक-केंद्रित डिजिटल स्वास्थ्य सेवा पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती मिली है।
प्रमुख उपलब्धियाँ
- डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड का तेजी से विस्तार: ABDM ने फरवरी 2025 में 50 करोड़ से जुड़े स्वास्थ्य रिकॉर्ड की संख्या को केवल 15 महीनों के भीतर दोगुना करके 100 करोड़ से अधिक कर दिया है।
- राज्य-स्तरीय मजबूत भागीदारी: उत्तर प्रदेश 15 करोड़ से अधिक दर्ज किए गए रिकॉर्ड के साथ अग्रणी योगदानकर्ता के रूप में उभरा है।
- आंध्र प्रदेश, बिहार, राजस्थान और गुजरात ने भी डिजिटल स्वास्थ्य एकीकरण में महत्त्वपूर्ण प्रगति दर्ज की है।
- सार्वजनिक और निजी क्षेत्र का एकीकरण: 450 से अधिक सरकारी और निजी डिजिटल स्वास्थ्य प्लेटफॉर्म ABDM के साथ एकीकृत हो चुके हैं।
- प्रमुख योगदानकर्ताओं में कोविन (CoWIN), पीएम-जय (PM-JAY), ई-हॉस्पिटल (eHospital), ई-सुश्रुत (eSushrut) और राज्य-स्तरीय स्वास्थ्य प्लेटफॉर्म शामिल हैं।
आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) के बारे में
- ABDM एक राष्ट्रव्यापी डिजिटल स्वास्थ्य पहल है, जिसका उद्देश्य भारत में एक परस्पर संचालित, कागज रहित और सहमति-आधारित स्वास्थ्य सेवा पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करना है।
- शुरुआत: सितंबर 2021।
- नोडल एजेंसी: स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (भारत सरकार) के तहत राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) द्वारा कार्यान्वित।
- पात्र लाभार्थी: प्रत्येक भारतीय नागरिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड तक डिजिटल पहुँच के लिए स्वेच्छा से आभा (ABHA) खाता बना सकता है।
मुख्य विशेषताएँ
- आभा (ABHA) डिजिटल पहचान: ABHA चिकित्सा रिकॉर्ड के सुरक्षित भंडारण और साझाकरण के लिए 14-अंकों की एक विशिष्ट डिजिटल स्वास्थ्य आईडी प्रदान करता है।
- सहमति-आधारित डेटा साझाकरण: हेल्थ इनफॉरमेशन एक्सचेंज एंड कंसेंट मैनेजर (HIE-CM) स्वास्थ्य सूचना के सुरक्षित और रोगी-नियंत्रित साझाकरण को सक्षम बनाता है।
- राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य रजिस्ट्री: ABDM सत्यापित स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं और संस्थानों के लिए हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स रजिस्ट्री (HPR) और हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्री (HFR) का रखरखाव करता है।
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एशियाई भारोत्तोलन चैंपियनशिप, 2026
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गांधीनगर में आयोजित एशियाई भारोत्तोलन (वेटलिफ्टिंग) चैंपियनशिप, 2026 में भारत ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए 10 पदक जीते। यह जियांगशान (चीन) में हुए पिछले संस्करण के बाद एक शानदार वापसी थी, जहाँ भारत कोई पदक नही जीत पाया था।
भारत की पदक तालिका
- भारत ने चैंपियनशिप का समापन एक रजत और नौ कांस्य पदकों के साथ किया। ये पदक स्नैच (Snatch), क्लीन एंड जर्क (Clean and Jerk) और ‘ओवरऑल टोटल’ श्रेणियों में अलग-अलग प्रदान किए गए थे।
विजेता
- ‘सुपर हैवीवेट’ श्रेणी में स्वर्ण
- पुरुषों की ‘सुपर हैवीवेट’ श्रेणी में, बहरीन के दो बार के ओलंपिक पदक विजेता गोर मिनासियान ने 457 किग्रा. का कुल भार उठाकर स्वर्ण पदक जीता।
सर्वश्रेष्ठ भारतीय प्रदर्शन
- राष्ट्रमंडल खेलों के कांस्य पदक विजेता लवप्रीत सिंह ने अंतिम दिन महत्त्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की।
- उन्होंने पुरुषों की 110 किग्रा.+ श्रेणी में 386 किग्रा. के अपने व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ कुल भारोत्तोलन के साथ पाँचवाँ स्थान हासिल किया।
- उन्होंने स्नैच में 174 किग्रा. और क्लीन एंड जर्क में 212 किग्रा. भार उठाया।
प्रमुख भारतीय पदक विजेता
- ज्ञानेश्वरी यादव ने महिलाओं की 53 किग्रा. स्नैच स्पर्द्धा में भारत का एकमात्र रजत पदक जीता। उन्होंने इसी श्रेणी में ओवरऑल श्रेणी में कांस्य पदक भी हासिल किया।
- कोमल कोहर ने महिलाओं की 48 किग्रा. श्रेणी में कांस्य पदक जीतकर भारत को इस चैंपियनशिप का पहला पदक दिलाया। उन्होंने चोटिल ओलंपिक पदक विजेता साइखोम मीराबाई चानू की जगह लेकर इस प्रतियोगिता में हिस्सा लिया।
- अजित नारायण ने पुरुषों के 71 किग्रा. वर्ग में दो कांस्य पदक जीते, जबकि हरजिंदर कौर ने महिलाओं की 69 किग्रा. स्नैच स्पर्द्धा में कांस्य पदक हासिल किया।
- संजना ने महिलाओं की 77 किग्रा. श्रेणी में तीन कांस्य पदक जीते।
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सौरव कोठारी ने जीती IBSF वर्ल्ड बिलियर्ड्स चैंपियनशिप
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इंडियन क्यूइस्ट सौरव कोठारी ने पंकज आडवाणी को हराकर कार्लो, आयरलैंड में IBSF वर्ल्ड बिलियर्ड्स चैंपियनशिप का खिताब जीत लिया।
संबंधित तथ्य
- सौरव कोठारी ने IBSF वर्ल्ड बिलियर्ड्स चैंपियनशिप खिताब हासिल करते हुए इस टूर्नामेंट में लगातार दूसरी बार यह खिताब अपने नाम किया।
- कोठारी ने 1133–477 के शानदार स्कोर के साथ फाइनल जीता।
‘इंटरनेशनल बिलियर्ड्स एंड स्नूकर फेडरेशन’ (IBSF) के बारे में
- इंटरनेशनल बिलियर्ड्स एंड स्नूकर फेडरेशन (IBSF) स्नूकर और इंग्लिश बिलियर्ड्स के लिए वैश्विक शासी निकाय है।
- मूल स्थापना: इसे प्रारंभ में वर्ष 1971 में ‘वर्ल्ड बिलियर्ड्स एंड स्नूकर कंट्रोल काउंसिल’ के रूप में स्थापित किया गया था और वर्ष 1973 में इसका नाम बदलकर ‘इंटरनेशनल बिलियर्ड्स एंड स्नूकर फेडरेशन’ कर दिया गया।
- मान्यता: IBSF को वर्ल्ड कन्फेडरेशन ऑफ बिलियर्ड्स स्पोर्ट्स (WCBS) के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) द्वारा मान्यता प्राप्त है।
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पद्म पुरस्कार 2026
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भारत के राष्ट्रपति ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित नागरिक अलंकरण समारोह (Civil Investiture Ceremony) के दौरान पद्म पुरस्कार, 2026 प्रदान किए।
प्रमुख पुरस्कार विजेता
- पद्म विभूषण प्राप्तकर्ता
- कला के क्षेत्र में धर्मेंद्र (मरणोपरांत)।
- वायलिन वादक एन. राजम्, जिन्होंने शास्त्रीय संगीत की ‘गायकी अंग’ शैली (यह एक ऐसी तकनीक है, जो वायलिन को मानवीय ध्वनि की नकल करने में सक्षम बनाती है) की शुरुआत की, जिसके कारण उन्हें ‘सिंगिंग वायलिन’ (गाती हुई वायलिन) की उपाधि मिली।
- पद्म भूषण प्राप्तकर्ता: उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी, उदय कोटक, डॉ. आर. गणेश और डॉ. कल्लीपट्टी रामसामी पलानीस्वामी।
- पद्म श्री प्राप्तकर्ता: खेल में योगदान के लिए हरमनप्रीत कौर। अन्य प्राप्तकर्ताओं में तगा राम भील, रतिलाल मोहनलाल बोरीसागर, स्वामी ब्रह्मदेव और कुमार बोस शामिल थे।
- कुल पुरस्कार (2026): वर्ष 2026 के लिए, राष्ट्रपति ने 5 पद्म विभूषण, 13 पद्म भूषण और 113 पद्म श्री पुरस्कार प्रदान किए।
पद्म पुरस्कारों के बारे में
- पद्म पुरस्कार भारत के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कारों में से हैं, जिनकी घोषणा प्रतिवर्ष गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर की जाती है।
- पुरस्कारों की श्रेणियाँ
- पद्म विभूषण: असाधारण और विशिष्ट सेवा के लिए।
- पद्म भूषण: उच्च क्रम की विशिष्ट सेवा के लिए।
- पद्म श्री: किसी भी क्षेत्र में विशिष्ट सेवा के लिए।
- वर्ष 1954 में स्थापना: पद्म पुरस्कारों की शुरुआत वर्ष 1954 में की गई थी और ये भारत के राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रपति भवन में प्रदान किए जाते हैं।
- शामिल क्षेत्र: ये कला, साहित्य, विज्ञान, चिकित्सा, खेल, लोक मामलों और सामाजिक कार्य जैसे क्षेत्रों में असाधारण सेवा और उपलब्धियों को मान्यता देते हैं।
- पात्रता: जाति, व्यवसाय, पद या लिंग के भेदभाव के बिना सभी व्यक्ति इसके पात्र हैं, जिनमें विदेशी और मरणोपरांत पुरस्कार पाने वाले लोग भी शामिल हैं।
नागरिक अलंकरण समारोह (Civil Investiture Ceremony) के बारे में
- नागरिक अलंकरण समारोह एक आधिकारिक समारोह है, जिसमें भारत के राष्ट्रपति प्रतिष्ठित व्यक्तियों को नागरिक सम्मान और राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान करते हैं।
- स्थान: यह समारोह आमतौर पर राष्ट्रपति भवन में आयोजित किया जाता है।
- अध्यक्षता: इस समारोह की अध्यक्षता भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
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CBSE की डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली

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केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं के लिए अपने नए ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम के कार्यान्वयन को लेकर जाँच के दायरे में है।
ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम के बारे में
- ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) एक कंप्यूटर आधारित मूल्यांकन प्रणाली है, जिसे केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा वर्ष 2026 की कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं से लागू किया गया है।
- कार्यप्रणाली: इस प्रणाली के तहत, फिजिकल आंसर शीट्स को उच्च गुणवत्ता वाले डिजिटल प्रारूपों में स्कैन किया जाता है और एक सुरक्षित पोर्टल पर अपलोड किया जाता है।
- शिक्षक अपने लॉगिन क्रेडेंशियल का उपयोग करके, अपने स्कूलों या निर्धारित मूल्यांकन केंद्रों से सीधे कंप्यूटर स्क्रीन पर उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कर सकते हैं, जिससे कागजी प्रतियों को सँभालने की आवश्यकता समाप्त हो जाती है।
OSM के लाभ
- त्रुटिहीन मूल्यांकन: OSM से अंकों को जोड़ने संबंधी त्रुटियों के समाप्त होने की संभावना बढ़ जाती है।
- एकसमान मूल्यांकन: इस प्रणाली का उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों में मूल्यांकन का मानकीकरण करना है।
- अधिक पारदर्शिता: CBSE का कहना है कि OSM निष्पक्षता और पारदर्शिता में सुधार करता है।
- क्षेत्रीय पूर्वाग्रह में कमी: डिजिटल मूल्यांकन उत्तर पुस्तिकाओं के अंतर्क्षेत्रीय मूल्यांकन को सक्षम बनाता है।
OSM से जुड़ी चिंताएँ
- स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाओं में त्रुटियाँ: छात्रों ने धुँधले पन्नों, गायब पन्नों और किसी अन्य छात्र की उत्तर पुस्तिका प्राप्त होने के मामलों की शिकायत की।
- भुगतान पोर्टल में गड़बड़ी: पुनर्मूल्यांकन एवं स्कैन-कॉपी पोर्टल को भारी तकनीकी रुकावटों, आंशिक व्यवधानों और बार-बार विफल होते लेन-देन की समस्याओं का सामना करना पड़ा है।
- उत्तीर्ण प्रतिशत में गिरावट: कक्षा 12वीं का उत्तीर्ण प्रतिशत गिरकर 85.29% हो गया, जो वर्ष 2019 के बाद से सबसे कम है।
- शीर्ष अंकों में गिरावट: 90% से अधिक अंक प्राप्त करने वाले छात्रों की संख्या में लगभग 16% की गिरावट आई है।
- कई अभिभावकों ने अंकों में इस गिरावट को नए शुरू किए गए ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम से जोड़ा है।
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भारत औद्यौगिक विकास योजना (BHAVYA)
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DPIIT ने मई 2026 में पूरे भारत में निवेश के लिए तैयार औद्योगिक पार्क विकसित करने हेतु भारत औद्योगिक विकास योजना (BHAVYA) योजना के लिए परिचालन दिशा-निर्देश जारी किए।
भारत औद्योगिक विकास योजना (BHAVYA) योजना के बारे में
- BHAVYA एक केंद्रीय क्षेत्रक योजना है, जिसका उद्देश्य पूरे भारत में विश्व-स्तरीय, ‘प्लग-एंड-प्ले’ औद्योगिक पार्क और स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम विकसित करना है।
- उद्देश्य
- एकीकृत औद्योगिक बुनियादी ढाँचे और लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी के माध्यम से भारत के विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना।
- बुनियादी ढाँचे और विनियामक बाधाओं को कम करके घरेलू और वैश्विक विनिर्माण निवेश को आकर्षित करना।
- ‘मेक इन इंडिया’, ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘PM गति शक्ति’ के उद्देश्यों का समर्थन करना।
- वैश्विक मूल्य शृंखलाओं के साथ भारत के जुड़ाव को बढ़ाना और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर उत्पन्न करना।
- नोडल निकाय: वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय (भारत सरकार) के अंतर्गत उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्द्धन विभाग (DPIIT)।
- परियोजना प्रबंधन एजेंसी (PMA): निगरानी और कार्यान्वयन के लिए राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास निगम (NICDC) को परियोजना प्रबंधन एजेंसी के रूप में नामित किया गया है।
- बजट परिव्यय: ₹33,660 करोड़।
- वित्तीय सहायता: यह योजना प्रति एकड़ ₹1 करोड़ तक की वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
- यह बाहरी बुनियादी ढाँचे पर होने वाले खर्च का 25% तक भी कवर करती है, ताकि राष्ट्रीय माल ढुलाई नेटवर्क के साथ कुशल ‘लास्ट-माइल कनेक्टिविटी’ (अंतिम-छोर तक जुड़ाव) को सुगम बनाया जा सके।
- BHAVYA योजना की मुख्य विशेषताएँ
- पैमाना और वित्तीय खर्च: इस योजना का लक्ष्य वर्ष 2026-27 और वर्ष 2031-32 के बीच 100 औद्योगिक पार्कों का विकास करना है।
- चुनौती-आधारित चयन: औद्योगिक पार्कों का चयन एक प्रतिस्पर्द्धी चुनौती-आधारित ढाँचे के माध्यम से किया जाएगा, जो बुनियादी ढाँचे की गुणवत्ता, स्थिरता और कनेक्टिविटी संकेतकों पर आधारित होगा।
- प्लग-एंड-प्ले बुनियादी ढाँचा: यह योजना सड़कों, उपयोगिता प्रणालियों, लॉजिस्टिक्स सुविधाओं और डिजिटल शासन तंत्रों से युक्त पहले से तैयार औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्रों पर केंद्रित है।
- बहु-स्तरीय बुनियादी ढाँचा
- मुख्य बुनियादी ढाँचा, जैसे सड़कें, जल निकासी और साझा अपशिष्ट उपचार संयंत्र (CETPs)।
- मूल्य-वर्द्धित बुनियादी ढाँचा, जैसे परीक्षण प्रयोगशालाएँ और लॉजिस्टिक्स हब।
- सामाजिक बुनियादी ढाँचा, जिसमें श्रमिकों के लिए आवास, स्वास्थ्य सेवा और कौशल केंद्र शामिल हैं।
- SPV-आधारित कार्यान्वयन: परियोजनाओं का कार्यान्वयन कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत निगमित विशेष प्रयोज्य वाहनों (SPVs) के माध्यम से किया जाएगा।
- कार्यान्वयन के लिए दिशा-निर्देश
- भूमि की आवश्यकता: मैदानी राज्यों के लिए कम-से-कम 100 एकड़ जमीन की आवश्यकता है और पहाड़ी, उत्तर-पूर्वी और छोटे राज्यों के लिए 25 एकड़।
- अधिक से अधिक छूट के तहत, मैक्रो-क्लस्टर को 1,000 एकड़ तक बढ़ाया जा सकता है।
- PM गति शक्ति के साथ जुड़ाव: मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी के लिए इंडस्ट्रियल पार्क को PM गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान के साथ जोड़ा जाना आवश्यक है।
- GIS-आधारित निगरानी: इस योजना में GIS-आधारित निगरानी, समय-समय पर ऑडिट और DPIIT के सेक्रेटरी की अध्यक्षता वाली एक राष्ट्रीय स्तर की संचालन समिति द्वारा देख-रेख का प्रावधान है।
- निजी क्षेत्र की भागीदारी: निजी डेवलपर PPP-आधारित SPV के जरिए पारदर्शिता, जवाबदेही और ऑडिट सुरक्षा उपायों के साथ इसमें हिस्सा ले सकते हैं।
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मेडिकल इनोवेशन पेटेंट मित्र: I-2-I कनेक्ट
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भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद ने नई दिल्ली में भारत का सबसे बड़ा बायोमेडिकल नवाचार और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण मंच ‘मेडिकल इनोवेशन पेटेंट मित्र: इनोवेटर्स-टू-इंडस्ट्री (I-2-I) कनेक्ट’ लॉन्च किया है।
‘मेडिकल इनोवेशन पेटेंट मित्र: इनोवेटर्स-टू-इंडस्ट्री (I-2-I) कनेक्ट’ के बारे में
- यह एक सुव्यवस्थित बायोमेडिकल नवाचार और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण मंच है, जिसका उद्देश्य स्वदेशी स्वास्थ्य देखभाल प्रौद्योगिकियों का व्यावसायीकरण करना है।
- आयोजक: इस पहल का आयोजन स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (भारत सरकार) के अंतर्गत भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) द्वारा किया गया था।
- प्रतिभागी: यह मंच ने निम्नलिखित को एक साथ लाएगा:
- ICMR अनुसंधान संस्थान और वैज्ञानिक
- स्टार्ट-अप और बायोमेडिकल इनोवेटर
- स्वास्थ्य देखभाल और फार्मास्यूटिकल उद्योग
- सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ और नीति-निर्माता।
- उद्देश्य
- प्रयोगशाला अनुसंधान और औद्योगिक स्तर पर स्वास्थ्य सेवा निर्माण के बीच के अंतर को पाटना।
- प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, बौद्धिक संपदा संरक्षण और स्वदेशी बायोमेडिकल नवाचारों के व्यावसायीकरण में तेजी लाना।
- मुख्य फोकस क्षेत्र
- प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और व्यावसायीकरण: इस मंच ने विनिर्माण और बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए अनुसंधान संस्थानों से औद्योगिक भागीदारों को 41 सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रौद्योगिकियों के हस्तांतरण को सुगम बनाया।
- स्वदेशी वैक्सीन और नैदानिक विकास: टाइफाइड, पैराटाइफाइड, तपेदिक (TB), जापानी इंसेफेलाइटिस, एमपॉक्स (Mpox), KFD और चाँदीपुरा वायरस से संबंधित प्रौद्योगिकियों को उद्योग के हितधारकों को हस्तांतरित किया गया।
- बायोमेडिकल नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र: घरेलू बायोमेडिकल नवाचार को बढ़ावा देने के लिए नैदानिक, थेराप्यूटिक्स, वैक्सीन और चिकित्सा उपकरणों में 100 से अधिक भारतीय प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन किया गया।
- बौद्धिक संपदा विकास: ICMR ने भारत के बायोमेडिकल बौद्धिक संपदा पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए ‘इंडियन बायोमेडिकल पेटेंट लैंडस्केप रिपोर्ट’ और एक ‘प्रौद्योगिकी संग्रह’ (Technology Compendium) जारी किया।
- महत्त्व
- स्वास्थ्य सेवा में आत्मनिर्भरता को मजबूत बनाना: यह पहल ‘मेक इन इंडिया’ विजन के तहत वैक्सीन, डायग्नोस्टिक्स और मेडिकल उपकरणों के स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देती है।
- सार्वजनिक-निजी भागीदारी को बढ़ावा देना: यह प्लेटफाॅर्म स्वास्थ्य सेवा में नवाचारों को तेजी से लागू करने के लिए शोधकर्ताओं, स्टार्ट-अप्स और उद्योगों के बीच सहयोग को बढ़ाता है।
- भारत को एक वैश्विक नवाचार केंद्र के रूप में आगे बढ़ाना: यह पहल भारत को स्वास्थ्य सेवा प्रौद्योगिकी का आयातक देश होने से बदलकर, किफायती स्वास्थ्य समाधानों का वैश्विक प्रदाता बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
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