संदर्भ:
पारंपरिक शासन मॉडल एक ‘ऊपर-से-नीचे’ (top-down) दृष्टिकोण का पालन करता है, जहाँ नीतियाँ राजधानियों (दिल्ली या राज्य की राजधानियों) में तैयार कर जमीनी स्तर पर लागू की जाती हैं।
- वर्तमान में, AI उपकरणों ने इसे ‘नीचे-से-ऊपर’ (bottom-up) दृष्टिकोण में बदल दिया है, जो नागरिकों और नीति-निर्माताओं के बीच एक वास्तविक समय फीडबैक लूप का उपयोग करता है।
ई-गवर्नेंस → समुदाय-संचालित AI
पायलट प्रोजेक्ट के बारे में:
- राज्य: राजस्थान
- जिले: सिरोही और पाली
- उद्देश्य: जल नीति में सक्रिय सामुदायिक जागरूकता के लिए AI का उपयोग करना।
- महत्त्व: टॉप-डाउन से बॉटम-अप दृष्टिकोण की ओर बड़ा बदलाव।
शासन का विकास:
- पारंपरिक: नौकरशाह दिल्ली में निर्णय लेते हैं; सर्वेक्षणों में महीनों लगते हैं; डेटा अविश्वसनीय।
- ई-गवर्नेंस: सेवाओं की डिजिटल डिलीवरी; सूचना पोर्टल; ऑनलाइन फॉर्म।
- AI गवर्नेंस: रीयल-टाइम सामुदायिक विकास; भविष्य आधारित विश्लेषण; उत्तरदायी नीति |
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AI-आधारित सामुदायिक विकास के बारे में:
- AI-आधारित सामुदायिक विकास से तात्पर्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता का सहभागी शासन मॉडल के साथ एकीकरण है।
- यह निम्नलिखित को जोड़ता है:
- तकनीकी दक्षता (AI)
- जमीनी स्तर की भागीदारी (सामुदायिक नेतृत्व वाला दृष्टिकोण)
AI सामुदायिक विकास के मुख्य स्तंभ:
- भागीदारी: नागरिक केवल लाभ प्राप्तकर्ता होने की बजाय सक्रिय “समस्या समाधानकर्ता” बन जाते हैं।
- विकेंद्रीकरण: एक द्वि-दिशीय वार्ता स्थापित करना, जहाँ पंचायत-स्तर की चुनौतियों को केंद्रीय योजनाकारों के लिए स्वचालित रूप से अपडेट किया जाता है।
शासन संबंधी उपकरण :
- चैटबॉट्स और वॉयस-आधारित प्रणाली: वास्तविक समय में शिकायत निवारण प्रदान करना और उन लोगों के लिए डिजिटल समावेशन सुनिश्चित करना, जो टाइप नहीं कर सकते या अंग्रेजी/हिंदी नहीं बोल सकते।
- भविष्य आधारित विश्लेषण: सक्रिय योजना निर्माण की अनुमति देने के लिए पर्यावरणीय चुनौतियों (जलवायु घटनाओं) का पूर्वानुमान लगाना।
क्षेत्रवार अनुप्रयोग :
- कृषि: मृदा की गुणवत्ता का विश्लेषण करने और उत्पादकता बढ़ाने के लिए सटीक कृषि (जैसे- आंध्र प्रदेश)।
- स्वास्थ्य सेवा: डेंगू या कोविड जैसी बीमारियों के प्रकोपों का पूर्व आकलन करने के लिए रोग निगरानी।
- आपदा प्रबंधन: बाढ़ और चक्रवात के लिए पूर्व चेतावनी प्रणाली।
- शहरी शासन: स्मार्ट ट्रैफिक प्रबंधन और बुनियादी ढाँचा दक्षता।
- समग्र विकास और विधि प्रवर्तन: डुप्लिकेट लाभार्थियों को हटाकर लाभों को लक्षित करना, पर्यावरणीय निगरानी (खनन/वनों की कटाई), और अपराध की रोकथाम के लिए चेहरे की पहचान तकनीकी का उपयोग करना।
विद्यमान चुनौतियाँ:
- डिजिटल विभाजन: शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच इंटरनेट तथा स्मार्टफोन की पहुँच में असमानता।
- एल्गोरिथमिक पक्षपात: जाति, धर्म या लिंग से संबंधित सामाजिक पूर्वाग्रहों की नकल करने वाले AI का जोखिम।
- क्षमता और विश्वास: कुशल अधिकारियों की कमी और व्यक्तिगत डेटा का उपयोग करके सरकारी निगरानी का भय।
- स्थिरता: पायलट प्रोजेक्ट्स का राष्ट्रीय स्तर तक विस्तार की उच्च लागत।
आगे की राह:
- ज़मीनी स्तर पर डिजिटल अवसंरचना को मज़बूत करें: ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में इंटरनेट कनेक्टिविटी, डिवाइस की उपलब्धता और डिजिटल पहुँच को बेहतर बनाने की ज़रूरत है।
- इससे यह सुनिश्चित होगा, कि AI-आधारित शासन व्यवस्थाएँ समावेशी हों तथा प्रभावी ढंग समाज के से अंतिम छोर तक पहुँचें।
- स्थानीय संस्थाओं की क्षमता बढ़ाएँ: पंचायतों और स्थानीय शासन निकायों को AI टूल्स और डेटा-आधारित जानकारियों का प्रभावी ढंग से प्रयोग करने के लिए प्रशिक्षित किया जाना चाहिए।
- क्षमता निर्माण से संस्थाओं को फ़ीडबैक समझने तथा समुदाय की ज़रूरतों पर कुशलता से प्रतिक्रिया देने में मदद मिलेगी।
- नैतिक AI ढाँचा सुनिश्चित करें: डेटा की गोपनीयता, सुरक्षा और पारदर्शिता के लिए मज़बूत सुरक्षा उपाय विकसित किए जाने चाहिए।
- एल्गोरिद्मिक पक्षपात और भेदभाव संबंधी जोखिमों को कम करने के लिए तंत्र मौजूद होने चाहिए, ताकि शासन संबंधी परिणामों में निष्पक्षता सुनिश्चित हो सके।
निष्कर्ष
AI जमीनी स्तर के विकास के लिए परिवर्तनकारी क्षमता प्रदान करता है, लेकिन इसे मजबूत डिजिटल अवसंरचना (भारतनेट), नैतिक ढाँचे और मानव-AI सहयोग द्वारा समर्थित होना चाहिए, जहाँ फ्रंट-लाइन कार्यकर्ताओं (आशा/आँगनवाड़ी) को मानवीय सहानुभूति खोए बिना इन उपकरणों का उपयोग करने हेतु प्रशिक्षित किया जाए।
मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न
प्रश्न: जहाँ कृत्रिम बुद्धिमत्ता जमीनी स्तर पर समुदाय-आधारित विकास के लिए परिवर्तनकारी क्षमता प्रदान करती है, वहीं यह महत्त्वपूर्ण नैतिक तथा बुनियादी ढाँचागत चुनौतियाँ भी प्रस्तुत करती है। चर्चा कीजिए।
(15 अंक, 250 शब्द)
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