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भारतीय बच्चों के लिए ‘सात-बिंदु आईक्यू (IQ) अवसर’

भारतीय बच्चों के लिए ‘सात-बिंदु आईक्यू (IQ) अवसर’ 15 Jun 2026

संदर्भ:

आँगनवाड़ी प्रतिमान को बुनियादी जीवन रक्षा और पोषण से हटाकर शुरुआती प्रोत्साहन के एक एकीकृत ‘पारिस्थितिक’ मॉडल में बदलना, भारत की भावी पीढ़ियों के संज्ञानात्मक विकास को सात आईक्यू अंकों तक बढ़ा सकता है।

प्रारंभिक बाल्यावस्था लक्ष्यों में व्यापक परिवर्तन:

  • ऐतिहासिक लक्ष्य: विगत सरकारी प्रयासों ने शारीरिक जीवन रक्षा, पोषण, टीकाकरण और स्वच्छता को सफलतापूर्वक प्राथमिकता दी, जिससे पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर 43 (2012) से घटकर 32 (2020) हो गई।
  • नई वास्तविकता: मस्तिष्क और शरीर का विकास आपस में गहराई से जुड़े हुए हैं; विकसित हो रहा मस्तिष्क आराम की स्थिति में शरीर की ऊर्जा का पाँचवा हिस्सा उपभोग करता है, और अकेले पहले वर्ष में ग्रे मैटर (grey matter) की मात्रा में 149% का भारी उछाल आता है।

शुरुआती प्रोत्साहन पर अनुभवजन्य साक्ष्य:

  • जमैका अध्ययन: मध्यम आय वाले देशों पर किए गए शोध से स्पष्ट होता है, कि जहाँ पोषण शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार करता है, वहीं मनो-सामाजिक प्रोत्साहन (प्रेम-वार्ता-खेल) को जोड़ने से कहीं अधिक बेहतर संज्ञानात्मक लाभ प्राप्त होते हैं।
  • वेलोर बर्थ कोहोर्ट (जन्म सहवास): 250 भारतीय बच्चों की ट्रैकिंग के आँकड़ों से पता चला है, कि 18-24 महीनों तक संरचित प्रीस्कूल जाने वाले बच्चों ने गरीबी, मातृ शिक्षा या स्टंटिंग (बौनापन) से स्वतंत्र होकर, सात आईक्यू अंक अधिक हासिल किए।
  • पर्यावरणीय मध्यस्थता: शारीरिक विकास के चार्ट सम्पूर्ण परिदृश्य को स्पष्ट नहीं करते हैं, क्योंकि जहरीला संपर्क, आंतों की शिथिलता, और जुड़ाव की कमी बच्चे के शरीर को पोषण संबंधी इनपुट को ठीक से अवशोषित करने से रोक सकती है।

रणनीतिक नीतिगत प्रतिक्रियाएँ एवं रूपरेखा:

  • राष्ट्रीय पहल: आधारशिला (खेल-आधारित शिक्षा केंद्रों का विकास) और नवचेतना (विज्ञान-आधारित घरेलू प्रोत्साहन का विस्तार) जैसी केंद्रीय रूपरेखाएँ, सक्रिय रूप से आँगनवाड़ी को नया रूप दे रही हैं।
  • पोषण भी, पढ़ाई भी: यह कार्यक्रम पड़ोस की आँगनवाड़ियों को जीवंत प्रारंभिक बचपन शिक्षा केंद्रों के रूप में पुनः-परिभाषित करता है, जिन्हें एक ही समय में मस्तिष्क और शरीर दोनों को पोषित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
  • सामुदायिक एकता: पोषण पखवाड़ा (अप्रैल 2026) जैसे लक्षित अभियान सीधे तौर पर स्क्रीन एक्सपोज़र को कम करने, माता-पिता की भागीदारी में वृद्धि तथा मस्तिष्क के शुरुआती विकास को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

पारिस्थितिक और सामाजिक-आर्थिक चक्र:

  • महिला अधिकारिता: आँगनवाड़ी केंद्रों पर विश्वसनीय, संरचित बाल देखभाल सुविधा प्राप्त होने से माताएँ मुक्त होती हैं, जिससे उन्हें अन्य कार्य काम करने, अध्ययन या आर्थिक रूप से योगदान करने का अवसर प्राप्त होता है।
  • गुणकारी देखभाल चक्र : स्थानीय महिलाओं को प्रशिक्षित बाल देखभाल कार्यकर्ताओं में बदलना सामुदायिक गरिमा तथा आजीविका का निर्माण करता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि रसोई, कक्षा और क्रेच (crèche) सुचारू रूप से एक दिशा में कार्य करें।

निष्कर्ष:

विकसित भारत के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए स्वास्थ्य के प्रति केवल-कैलोरी युक्त दृष्टिकोण से आगे बढ़ने की आवश्यकता है। भारत में बच्चों की पूर्ण संज्ञानात्मक क्षमता का विकास करने हेतु, घरों तथा आँगनवाड़ियों के भीतर समृद्ध, संवादात्मक खेल और अधिगम परिदृश्य का निर्माण महत्त्वपूर्ण है।

मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न

प्र. केवल जीवन रक्षा से समग्र संज्ञानात्मक विकास की ओर संक्रमण भारत की प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा (ECCE) के लिए समय की माँग है। इस कथन के आलोक में, आँगनवाड़ी प्रणाली में हालिया बदलावों और उनके संभावित आर्थिक प्रभावों का मूल्यांकन कीजिए।

(15 अंक, 250 शब्द)

भारतीय बच्चों के लिए ‘सात-बिंदु आईक्यू (IQ) अवसर’

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