IEA में पूर्ण सदस्यता के लिए भारत की पहल

24 Feb 2026

संदर्भ

हाल ही में अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने भारत की पूर्ण सदस्यता के अनुरोध पर हुई प्रगति का स्वागत किया। यद्यपि भारत वर्ष 2017 से एक एसोसिएट सदस्य रहा है, पूर्ण सदस्यता में परिवर्तन महत्त्वपूर्ण विधिक और सामरिक परिवर्तनों को सम्मिलित करता है।

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के बारे में

  • अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) एक स्वतंत्र अंतर-सरकारी संगठन है।
  • IEA मुख्यालय: पेरिस
  • सदस्य: 32 सदस्य देश, 13 एसोसिएशन देश, 5 अभिगमन (एक्सेशन) देश।
    • भारत ने वर्ष 2017 में अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी में एक एसोसिएशन देश के रूप में प्रवेश किया था।
  • इसे वर्ष 1974 में 1973 के तेल संकट के प्रत्युत्तर में OECD (आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन) के ढाँचे के अंतर्गत स्थापित किया गया था।
  • यह वैश्विक ऊर्जा क्षेत्र पर नीतिगत अनुशंसाएँ, विश्लेषण तथा आँकड़े प्रदान करता है।
  • प्रारंभिक रूप से इसका ध्यान निम्नलिखित पर केंद्रित था:
    • तेल आपूर्ति व्यवधानों का समाधान
    •  बाजार आँकड़े उपलब्ध कराना
    •  ऊर्जा संरक्षण को प्रोत्साहित करना
    •  अंतरराष्ट्रीय तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देना।

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  • समय के साथ, IEA का दायरा विस्तृत होकर संपूर्ण वैश्विक ऊर्जा तंत्र को समाहित करने लगा, जिसमें पारंपरिक तथा स्वच्छ ऊर्जा स्रोत दोनों शामिल हैं।
    • इसमें सौर, पवन और जैव-ईंधन जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के साथ-साथ परमाणु ऊर्जा और हाइड्रोजन प्रौद्योगिकियाँ भी सम्मिलित हैं।
  • अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी की रिपोर्ट प्रकाशन
    • विश्व ऊर्जा परिदृश्य रिपोर्ट।
    • विश्व ऊर्जा निवेश रिपोर्ट।
    •  विश्व ऊर्जा सांख्यिकी।
    •  विश्व ऊर्जा संतुलन।
    •  ऊर्जा प्रौद्योगिकी परिप्रेक्ष्य।
    •  भारत ऊर्जा परिदृश्य रिपोर्ट।

IEA की सदस्यता के लिए अनिवार्य आवश्यकताएँ

  • OECD से संबद्धता: ऐतिहासिक रूप से, IEA का सदस्य बनने के लिए किसी देश का आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (OECD) का सदस्य होना आवश्यक है।
    • भारत का दृष्टिकोण: भारत OECD का सदस्य नहीं है और तथाकथित “समृद्ध देशों के क्लब” में सम्मिलित होने की कोई तात्कालिक प्रवृत्ति नहीं दर्शाई है।
  • रणनीतिक तेल भंडार: सदस्यों के पास पिछले वर्ष के शुद्ध आयात के न्यूनतम 90 दिनों के बराबर तेल भंडार होना चाहिए। वर्तमान में, भारत के सामरिक पेट्रोलियम भंडार (SPR) तथा तेल कंपनियों के भंडार मिलाकर लगभग 66–70 दिनों की आवश्यकता को आच्छादित करते हैं।
  • माँग नियंत्रण: आपूर्ति व्यवधान की स्थिति में सदस्यों के पास राष्ट्रीय तेल उपभोग में 7% से 10% तक कमी लाने के कार्यक्रम होने चाहिए।

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