NATO से अमेरिका के हटने के निहितार्थ

6 Apr 2026

संदर्भ 

एक ब्रिटिश अखबार को दिए इंटरव्यू में, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बताया कि नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन (NATO) से अमेरिका की सदस्यता वापस लेने पर अब विचार किया जा रहा है। 

उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (NATO) के बारे में

  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: NATO की स्थापना 4 अप्रैल, 1949 को दूसरे विश्वयुद्ध के बाद, सोवियत सुरक्षा खतरे का मुकाबला करने तथा यूरोप में और अधिक अस्थिरता को रोकने के उद्देश्य से की गई थी।
  • उद्देश्य: इसका उद्देश्य उत्तरी अमेरिका और यूरोप के मध्य सामूहिक रक्षा तथा अटलांटिक पार राजनीतिक-सैन्य सहयोग को संस्थागत रूप देना था।
  • सदस्यता: इस गठबंधन की शुरुआत 12 संस्थापक सदस्यों के साथ हुई थी और धीरे-धीरे इसका विस्तार होकर यह 32 सदस्यों तक पहुँच गया है (मार्च 2024 तक), जो इसकी निरंतर रणनीतिक प्रासंगिकता को दर्शाता है।
    • अल्बानिया, बेल्जियम, बुल्गारिया, कनाडा, क्रोएशिया, चेक गणराज्य, डेनमार्क, एस्टोनिया, फिनलैंड, फ्राँस, जर्मनी, ग्रीस, हंगरी, आइसलैंड, इटली, लातविया, लिथुआनिया, लक्जमबर्ग, मोंटेनेग्रो, उत्तरी मैसेडोनिया, नॉर्वे, पोलैंड, पुर्तगाल, रोमानिया, स्लोवाकिया, स्लोवेनिया, स्पेन, स्वीडन, नीदरलैंड, तुर्की, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका।
  • मुख्यालय: NATO का मुख्यालय ब्रुसेल्स, बेल्जियम में स्थित है।
  • NATO के उद्देश्य
    • सामूहिक रक्षा (अनुच्छेद-5): NATO की नींव अनुच्छेद-5 है, जिसमें कहा गया है कि किसी एक सहयोगी पर हमला सभी पर हमला माना जाएगा; यही इस गठबंधन का मुख्य निवारक है।
    • सुरक्षा परामर्श (अनुच्छेद-4): अनुच्छेद-4 सदस्यों को साझा सुरक्षा चिंताओं से जुड़े मामलों पर परामर्श करने में सक्षम बनाता है, जिससे NATO की भूमिका क्षेत्रीय रक्षा से आगे तक विस्तृत होती है।
    • विस्तारित सुरक्षा दायित्व: NATO का मिशन अब विकसित होकर आतंकवाद-रोधी उपायों, साइबर सुरक्षा, समुद्री डकैती, शांति स्थापना और यूरोप से बाहर संकट प्रबंधन को भी अपने दायरे में शामिल करता है।

NATO से अमेरिका के हटने के कारण

  • NATO सहयोगियों का USA को समर्थन देने से इनकार: अधिकतर NATO सहयोगियों ने ईरान के विरुद्ध युद्ध के संबंध में USA के सैन्य और हवाई क्षेत्र के समर्थन के अनुरोधों को ठुकरा दिया, जहाँ USA को हाल के हफ्तों में काफी झटके लगे हैं।
  • मुख्य सहयोगियों के मध्य मतभेद: जहाँ स्पेन और इटली ने ईरान पर USA-इजरायल के हमलों की सीधे तौर पर आलोचना की है, वहीं फ्राँस ने USA के सैन्य जेट विमानों को इजरायल जाने के लिए अपने हवाई क्षेत्र से गुजरने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है।
    • इसके अलावा, USA के सबसे करीबी सहयोगियों – UK, जर्मनी और कनाडा – ने भी इन ऑपरेशनों में हिस्सा लेने से इनकार कर दिया है।
  • अनुच्छेद-5 (सामूहिक रक्षा खंड) पर बहस: बोझ-साझाकरण संबंधी चिंताएँ: राष्ट्रपति ट्रंप ने यूरोपीय सहयोगियों की इस बात के लिए आलोचना की है कि वे NATO के सैन्य खर्च में अपना उचित योगदान नहीं दे रहे हैं, जबकि अपनी रक्षा के लिए वे USA पर निर्भर रहते हैं।
    • उदाहरण के लिए: USA ने NATO की फंडिंग का एक बड़ा हिस्सा उपलब्ध कराया है, जिसमें रक्षा खर्च का 62% और गठबंधन के नागरिक बजट का लगभग 15% शामिल है।
  • व्यापक रणनीतिक असहमति: हाल ही में NATO सदस्यों ने वेनेजुएला में USA के सत्ता परिवर्तन के ऑपरेशनों की आलोचना की और उन्होंने ग्रीनलैंड को अपने क्षेत्र में मिलाने की USA की योजनाओं का जोरदार विरोध किया।

नाटो से बाहर निकलने की प्रक्रिया

  • विधिक प्रावधान (संधि का अनुच्छेद-13)
    • उत्तरी अटलांटिक संधि किसी भी सदस्य देश को इससे अलग होने की अनुमति देती है।
    • इसके लिए संधि को समाप्त करने का एक वर्ष का नोटिस देना आवश्यक है।
    • यह नोटिस संयुक्त राज्य अमेरिका की सरकार को भेजा जाना चाहिए, जो अन्य सदस्य देशों को इसकी सूचना देती है।
  • निक्षेपागार प्राधिकारी की भूमिका
    • संयुक्त राज्य अमेरिका इस संधि के आधिकारिक संरक्षक के रूप में कार्य करता है।
    • इसलिए, निक्षेपागार प्राधिकारी के तौर पर, अमेरिकी सरकार को स्वयं को ही इस आशय की सूचना देनी होगी और तत्पश्चात् अन्य देशों को इस संधि से हटने के बारे में सूचित करना होगा।
  • अमेरिका में घरेलू कानूनी बाधाएँ: वर्ष 2023 में बाइडेन प्रशासन द्वारा एक कानून बनाया गया था, जो अमेरिकी राष्ट्रपति को सीनेट की सलाह और सहमति या कांग्रेस के किसी अधिनियम के बिना “उत्तरी अटलांटिक संधि को निलंबित करने, समाप्त करने, रद्द करने, या उससे अमेरिका को अलग करने” का प्रयास करने से रोकता है।

NATO से USA की वापसी के निहितार्थ

  • वैश्विक सुरक्षा ढाँचे का पुनर्गठन: अगर अमेरिका ‘उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन’ (NATO) से हट जाता है, तो इससे वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह से बदल जाएगी। इसके चलते देशों को दूसरे गठबंधन तलाशने होंगे या फिर अपने क्षेत्रीय रक्षा तंत्र को मजबूत करना पड़ेगा।
  • पश्चिमी गठबंधन का कमजोर होना: इससे अमेरिका के नेतृत्व वाले पश्चिमी गुट की एकजुटता, एकता और विश्वसनीयता को काफी नुकसान पहुँचेगा।
  • प्रतिद्वंद्वियों को रणनीतिक लाभ: अमेरिका के हटने से रूस और चीन जैसी प्रतिद्वंद्वी शक्तियों का भू-राजनीतिक प्रभाव बढ़ सकता है।
  • क्षेत्रीय स्तर पर सैन्यीकरण में बढोतरी: अमेरिका के समर्थन के बिना, कई देश अपने रक्षा खर्च में वृद्धि कर सकते हैं और यहाँ तक कि अपनी स्वतंत्र प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने पर भी विचार कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, जर्मनी ने सुरक्षा से जुड़े बदलते खतरों के प्रत्युत्तर में अपने सैन्य खर्च में पहले ही अत्यधिक बढोतरी करना शुरू कर दिया है।
  • निरंतर संघर्षों के दौरान अस्थिरता: संघर्ष के दौर में संगठन से हटने से पश्चिमी देशों की समन्वित प्रतिक्रिया कमजोर पड़ जाएगी और विरोधियों का हौसला बढ़ेगा।
    • उदाहरण के लिए, रूस-यूक्रेन युद्ध के संदर्भ में, NATO की एकता में कमी आने से सैन्य सहायता, खुफिया जानकारी साझा करने और प्रतिरोधक रणनीतियों पर असर पड़ सकता है।

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