संदर्भ
न्यूक्लियर पॉवर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) ने स्पष्ट किया है कि कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र (KKNPP) में हाल ही में रिपोर्ट की गई डेटा उल्लंघन की घटना से किसी भी परमाणु सुरक्षा या सुरक्षा प्रणाली से समझौता नहीं हुआ है, क्योंकि लीक हुई जानकारी केवल पारंपरिक बैलेंस ऑफ प्लांट (Balance of Plant–BoP) सुविधाओं से संबंधित है।
बैलेंस ऑफ प्लांट (BoP) के बारे में:
- बैलेंस ऑफ प्लांट (BoP) में परमाणु रिएक्टर तथा उससे संबंधित सुरक्षा प्रणालियों को छोड़कर, किसी विद्युत संयंत्र के संचालन के लिए आवश्यक सभी गैर-परमाणु सहायक प्रणालियाँ सम्मिलित होती हैं।
- घटक: इसमें जल आपूर्ति एवं उपचार प्रणालियाँ, विद्युत उपकेंद्र, शीतलन प्रणालियाँ, भवन, सड़कें, अग्नि सुरक्षा प्रणालियाँ, संपीडित वायु प्रणालियाँ तथा अन्य सामान्य उपयोगिता अवसंरचना शामिल होती हैं।
- भूमिका: यद्यपि बैलेंस ऑफ प्लांट (BoP) अवसंरचना विद्युत संयंत्र के संचालन में सहायक होती है, फिर भी यह परमाणु सुरक्षा अथवा रिएक्टर संरक्षण से संबंधित कोई कार्य नहीं करती है।
भारत में परमाणु ऊर्जा एवं परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की वर्तमान स्थिति:
- परिचालन क्षमता: भारत वर्तमान में 7 स्थलों पर 24 परमाणु ऊर्जा रिएक्टरों का संचालन कर रहा है, जिनकी कुल स्थापित क्षमता 8.78 गीगावाट (GW) है।
- विस्तार जारी: 8,000 मेगावाट (8 GW) की संयुक्त क्षमता वाले 10 अतिरिक्त रिएक्टर निर्माणाधीन हैं, जो देश में परमाणु ऊर्जा उत्पादन के निरंतर विस्तार को दर्शाते हैं।
- रिएक्टरों के प्रकार: भारत के परमाणु रिएक्टर बेड़े में दाबित भारी जल रिएक्टर (PHWRs), बॉयलिंग वाटर रिएक्टर्स (BWRs) तथा लाइट वाटर रिएक्टर्स (Light Water Reactors–LWRs) शामिल हैं।
- ईंधन आधार: प्राकृतिक यूरेनियम दाबित भारी जल रिएक्टर (PHWRs) में प्रयुक्त होने वाला प्रमुख ईंधन है, जो भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम की रीढ़ है।
- सामरिक महत्त्व: सरकार का उद्देश्य ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करने, जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने तथा निम्न-कार्बन आर्थिक विकास को समर्थन देने के लिए परमाणु ऊर्जा का विस्तार करना है।
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कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र (KKNPP) के बारे में:
- अवस्थिति: तमिलनाडु के तिरुनेलवेली जिले के कुडनकुलम में स्थित है।
- संचालक: इसका स्वामित्व एवं संचालन परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) के अधीन न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) द्वारा किया जाता है।

- अंतरराष्ट्रीय सहयोग: इसका विकास भारत–रूस असैन्य परमाणु सहयोग कार्यक्रम के अंतर्गत रोसाटॉम (Rosatom), रूस के तकनीकी सहयोग से किया गया है।
- रिएक्टर प्रौद्योगिकी: इसमें VVER-1000 दाबित जल रिएक्टर (Pressurised Water Reactors–PWRs) का उपयोग किया गया है, जो जनरेशन III+ रिएक्टर प्रौद्योगिकी है तथा उन्नत निष्क्रिय एवं सक्रिय सुरक्षा प्रणालियों से सुसज्जित है।
- क्षमता: इसमें 1,000 मेगावाट क्षमता की 6 इकाइयाँ स्थापित किए जाने की योजना है, जिनकी कुल स्थापित क्षमता 6,000 मेगावाट होगी।
- वर्तमान स्थिति: इकाई 1 एवं 2 परिचालन में हैं; इकाई 3 एवं 4 निर्माणाधीन हैं और इनके वर्ष 2027 तक चालू होने की संभावना है, जबकि इकाई 5 एवं 6 कार्यान्वयन के विभिन्न चरणों में हैं।