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संक्षेप में समाचार

23 Jun 2026

बोलीविया 

4 20

हाल ही में बोलीविया ने मितव्ययिता उपायों, ईंधन संकट तथा आवश्यक आपूर्ति शृंखलाओं को बाधित करने वाले सड़क अवरोधों के विरोध में चल रहे राष्ट्रव्यापी प्रदर्शनों के बीच 90 दिनों के आपातकाल की घोषणा की है।

बोलीविया के बारे में 

  • बोलीविया दक्षिण अमेरिका के मध्य भाग में स्थित एक स्थलरुद्ध (Landlocked) देश है, जिसका आधिकारिक नाम बहुराष्ट्रीय बोलीविया राज्य (Plurinational State of Bolivia) है।
    • ला पाज (La Paz) इसकी प्रशासनिक राजधानी है, जबकि सुक्रे (Sucre) संवैधानिक एवं न्यायिक राजधानी है।
  • अवस्थिति: बोलीविया दक्षिण अमेरिका के मध्य में एंडीज पर्वतमाला और अमेजन बेसिन के मध्य स्थित है।
    • यह लगभग 11 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में विस्तृत है, जिससे यह दक्षिण अमेरिका के सबसे बड़े देशों में से एक है।
  • सीमाएँ: बोलीविया के उत्तर एवं पूर्व में ब्राजील, उत्तर-पश्चिम में पेरू, दक्षिण-पश्चिम में चिली, दक्षिण में अर्जेंटीना तथा दक्षिण-पूर्व में पराग्वे स्थित हैं।
  • जलवायु: बोलीविया में विविध प्रकार की जलवायु पाई जाती है, जो एंडीज क्षेत्र की शीत पर्वतीय जलवायु से लेकर अमेजन के निम्नभूमि क्षेत्रों की उष्णकटिबंधीय जलवायु तक विस्तृत है।
  • स्थलाकृतियाँ
    • एंडीज पर्वतमाला पश्चिमी बोलीविया को कवर करती है तथा यहाँ प्रचुर मात्रा में खनिज संसाधन पाए जाते हैं।
      • बोलीविया के पास विश्व में लीथियम का सबसे बड़ा अनुमानित भंडार है।
    • अल्टिप्लानो पठार, जो विश्व के सर्वाधिक ऊँचाई पर बसे पठारों में से एक है, एंडीज पर्वत श्रेणियों के मध्य स्थित है।
  • वनस्पतियाँ
    • उष्णकटिबंधीय वर्षावन अमेजन क्षेत्र के अंतर्गत उत्तरी एवं पूर्वी बोलीविया के अधिकांश भाग को आच्छादित करते हैं।
      • पूर्वी बोलीविया में निम्नभूमि मैदान, वन तथा सवाना परिदृश्य पाए जाते हैं।
  • जल निकाय: टिटिकाका झील, जो पेरू के साथ साझा की जाती है, विश्व की सर्वाधिक ऊँचाई पर स्थित नौगम्य झील है।
    • प्रमुख नदी प्रणालियों में मदीरा (Madeira), बेनी, मामोरे तथा पिलकोमायो नदियाँ शामिल हैं।
    • अधिकांश नदियाँ अमेजन बेसिन तथा ला प्लाटा बेसिन में प्रवाहित होती हैं।
  • सर्वोच्च शिखर: नेवादो साजामा (6,542 मीटर) बोलीविया का सर्वोच्च शिखर है तथा यह पश्चिमी एंडीज में स्थित एक निष्क्रिय स्ट्रैटो ज्वालामुखी है।

निर्भय चेतना (Nirbhay Chetna)

पंचायती राज मंत्रालय ने ‘निर्भय चेतना’ पहल का शुभारंभ किया है, जिसका उद्देश्य 17.5 लाख से अधिक पुरुष निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को महिला सुरक्षा, लैंगिक समानता तथा महिला सशक्तीकरण के प्रति संवेदनशील बनाना है।

निर्भय चेतना के बारे में

  • निर्भय चेतना एक राष्ट्रव्यापी लैंगिक संवेदनशीलता कार्यक्रम है, जिसे ‘निर्भय रहो पहल’ के व्यापक ढाँचे के अंतर्गत पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) के माध्यम से क्रियान्वित किया जा रहा है।
  • इसका उद्देश्य पुरुष निर्वाचित जनप्रतिनिधियों में जागरूकता, उत्तरदायित्व एवं सामुदायिक नेतृत्व को विकसित कर लैंगिक-संवेदनशील शासन को बढ़ावा देना है।
  • प्रमुख विशेषताएँ
    • पुरुष संवेदनशीलता एवं लैंगिक समानता: यह कार्यक्रम पुरुष निर्वाचित प्रतिनिधियों को महिला सुरक्षा, गरिमा, नेतृत्व तथा लैंगिक-संवेदनशील निर्णय-निर्माण के संबंध में प्रशिक्षण प्रदान करता है।
      • यह सकारात्मक पुरुषत्व को प्रोत्साहित करता है तथा लिंग आधारित हिंसा की रोकथाम में सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा देता है।
    • राष्ट्रव्यापी क्षमता निर्माण ढाँचा: यह पहल राज्य, जिला एवं ब्लॉक स्तर पर मास्टर ट्रेनर्स के माध्यम से कैस्केडिंग ट्रेनिंग मॉडल का अनुसरण करती है।
      • लगभग 28,500 मास्टर ट्रेनर्स देशभर के पंचायत प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण प्रदान करेंगे।
    • मूलभूत स्तर पर शासन में परिवर्तन: पंचायतों को स्थानीय शासन एवं विकास योजनाओं में महिला सुरक्षा संबंधी मुद्दों को शामिल करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
      • यह कार्यक्रम कानूनी जागरूकता, सहायता सेवाओं एवं शिकायत निवारण के लिए स्थानीय संस्थाओं को प्रथम प्रत्युत्तरकर्ता के रूप में सशक्त बनाता है।

निर्भय रहो पहल के बारे में

  • निर्भय रहो एक व्यापक ग्रामीण महिला सुरक्षा एवं सशक्तीकरण पहल है, जिसे मार्च 2026 में प्रारंभ किया गया।
  • यह निर्भया फंड से वित्तपोषित है तथा इसका उद्देश्य अधिक सुरक्षित, समावेशी एवं लैंगिक-संवेदनशील ग्रामीण समुदायों का निर्माण करना है।
  • नोडल मंत्रालय: पंचायती राज मंत्रालय (भारत सरकार) 
  • घटक 
    • निर्भय नेत्री: निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों के नेतृत्व विकास, कानूनी जागरूकता एवं क्षमता निर्माण पर केंद्रित है।
    • निर्भय चेतना: पुरुष निर्वाचित प्रतिनिधियों को लैंगिक समानता, महिलाओं के अधिकारों एवं सामुदायिक उत्तरदायित्व के प्रति संवेदनशील बनाता है।
    • निर्भय दृष्टि: ग्रामीण क्षेत्रों में CCTV कैमरों तथा प्रौद्योगिकी-सक्षम सुरक्षा अवसंरचना की स्थापना को बढ़ावा देता है।
  • महत्त्व
    • जमीनी स्तर पर सामाजिक परिवर्तन: 32 लाख से अधिक पंचायत प्रतिनिधियों को लक्षित कर पितृसत्तात्मक मान्यताओं को चुनौती देने तथा लैंगिक न्याय को बढ़ावा देने का प्रयास करता है।
    • स्थानीय सहायता तंत्र का सुदृढ़ीकरण: पंचायत प्रतिनिधियों को कानूनी सहायता, साइबर सुरक्षा जागरूकता एवं विभिन्न सहायता तंत्रों तक पहुँच सुनिश्चित करने में सक्षम बनाता है।
    • समावेशी शासन: स्थानीय नियोजन प्रक्रियाओं में लैंगिक दृष्टिकोण को एकीकृत करता है तथा महिला-नेतृत्व वाले विकास के माध्यम से विकसित भारत के लक्ष्य में योगदान देता है।

नाफेक्स.इन (NAFEX.in)

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केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NAFED) के ई-नीलामी प्लेटफार्म नाफेक्स.इन (NAFEX.in) का शुभारंभ किया।

नाफेक्स.इन (NAFEX.in) के बारे में

  • यह नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NAFED) द्वारा विकसित एक डिजिटल नीलामी प्लेटफार्म है।
  • ऑनलाइन इंटरफेस: नीलामी संबंधी गतिविधियों को सुव्यवस्थित एवं डिजिटल माध्यम से संचालित करने के लिए विकसित किया गया है।
  • उद्देश्य: कृषि नीलामियों में पारदर्शिता, दक्षता तथा ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देना।
  • लाभार्थी: यह मंच किसानों, सदस्य संस्थाओं तथा अन्य हितधारकों को लाभ प्रदान करता है।

साथ में प्रारंभ की गई अन्य पहलें

  • नाफेड-कल्याण: किसानों के बच्चों के लिए छात्रवृत्ति योजना।
  • दृष्टि पोर्टल: दलहन एवं तिलहन के लिए भंडार प्रबंधन प्रणाली।
  • ईआरपी पोर्टल: NAFED के भीतर उद्यम संसाधन नियोजन (ERP) एवं परिचालन प्रबंधन को सुदृढ़ करता है।

नाफेड (NAFED) के बारे में

  • नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NAFED) एक केंद्रीय सहकारी संगठन है, जिसकी स्थापना भारत में किसानों के हित में कृषि उपज के विपणन एवं व्यापार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई थी।
    • यह ऑपरेशन ग्रीन्स एवं पीएम-आशा (PM-AASHA) जैसी योजनाओं के अंतर्गत मूल्य स्थिरीकरण उपायों के क्रियान्वयन हेतु नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करता है तथा किसानों की आय बढ़ाने के सरकार के लक्ष्य में योगदान देता है।
  • स्थापना: वर्ष 1958।
  • कानूनी स्थिति: यह बहु-राज्य सहकारी समितियाँ अधिनियम के अंतर्गत पंजीकृत है।
  • मुख्यालय: नई दिल्ली।
  • नेटवर्क: 4 क्षेत्रीय कार्यालय— दिल्ली, मुंबई, चेन्नई एवं कोलकाता और राज्य की राजधानियों एवं प्रमुख शहरों में 28 क्षेत्रीय/जोनल कार्यालय है

सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया 

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केंद्र सरकार ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को 1 जुलाई, 2026 से प्रभावी तीन वर्ष की अतिरिक्त अवधि के लिए पुनर्नियुक्त किया है।

सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया के बारे में

  • सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया केंद्र सरकार के द्वितीय सर्वोच्च विधि अधिकारी होता है तथा भारत के महान्यायवादी के प्रमुख सहायक के रूप में कार्य करता हैं।
  • संवैधानिक प्रावधान: सॉलिसिटर जनरल का पद भारतीय संविधान में उल्लिखित नहीं है
    • यह एक कार्यकारी/वैधानिक पद है, जो अनुच्छेद-309 के प्रावधानों के अंतर्गत बनाए गए विधि अधिकारियों (सेवा की शर्तें) नियम, 1987 द्वारा विनियमित होता है।
  • पात्रता: इस पद के लिए संविधान में कोई विशिष्ट योग्यता निर्धारित नहीं की गई है।
    • परंपरागत रूप से सर्वोच्च न्यायालय में व्यापक अनुभव रखने वाले प्रतिष्ठित अधिवक्ताओं की नियुक्ति की जाती है।
    • नियुक्ति: सॉलिसिटर जनरल की नियुक्ति प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली मंत्रिमंडलीय नियुक्ति समिति (ACC) द्वारा की जाती है।
  • कार्यकाल: सामान्यतः इनका कार्यकाल तीन वर्ष का होता है, जो विधि अधिकारियों (सेवा की शर्तें) नियम, 1987 के अधीन होता है।
    • पदधारी पुनर्नियुक्ति (Reappointment) के लिए पात्र होता है।
  • पद से हटाया जाना: सॉलिसिटर जनरल भारत सरकार के प्रसादपर्यंत पद धारण करते हैं।
    • केंद्र सरकार कार्यकाल पूर्ण होने से पूर्व भी उनकी नियुक्ति समाप्त कर सकती है।
    • पदधारी सरकार को त्याग-पत्र देकर पद छोड़ सकता है।
  • प्रमुख भूमिका
    • सॉलिसिटर जनरल, विधि एवं न्याय मंत्रालय (Ministry of Law and Justice) द्वारा संदर्भित विधिक मामलों पर केंद्र सरकार को कानूनी सलाह प्रदान करते हैं।
    • यह पद सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालयों तथा विभिन्न न्यायाधिकरणों के समक्ष भारत सरकार का प्रतिनिधित्व करता है।
    • सॉलिसिटर जनरल, महान्यायवादी (Attorney General) की सहायता करते हैं तथा संवैधानिक, कराधान, राष्ट्रीय सुरक्षा एवं केंद्र–राज्य विवादों से जुड़े महत्त्वपूर्ण मामलों में सरकार की ओर से पक्ष रखते हैं।
    • अनुच्छेद-143 के अंतर्गत राष्ट्रपति द्वारा सर्वोच्च न्यायालय को भेजे गए संदर्भों (Presidential References) से संबंधित मामलों में भी सॉलिसिटर जनरल सरकार का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं।

खुरासानी इमली (बाओबाब फ्रूट) 

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हाल ही में मांडू की खुरासानी इमली (बाओबाब फ्रूट) को भौगोलिक संकेतक (Geographical Indication – GI) टैग प्रदान किया गया है, जिससे इसकी विशिष्ट पहचान, सांस्कृतिक महत्त्व तथा बाजार क्षमता को बढ़ावा मिला है।

खुरासानी इमली के बारे में

  • खुरासानी इमली बाओबाब वृक्ष (Adansonia digitata) का फल है, जो मुख्यतः मध्य प्रदेश के मांडू क्षेत्र में पाया जाता है।
  • प्रमुख विशेषताएँ
    • विशिष्ट उत्पत्ति एवं वितरण: बाओबाब वृक्ष मूलतः अफ्रीका का देशज है और माना जाता है कि इसे लगभग छह शताब्दी पूर्व अफगान एवं अरब व्यापारियों द्वारा मांडू लाया गया था।
      • मांडू में भारत में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले बाओबाब वृक्षों की सर्वाधिक सघनता है, जहाँ इस प्रजाति के 1,000 से अधिक वृक्ष पाए जाते हैं।
    • विशिष्ट वानस्पतिक विशेषताएँ: बाओबाब वृक्षों का तना अत्यधिक जल-संग्रहण क्षमता वाला होता है, जिसके कारण इसे “ट्री ऑफ लाइफ (Tree of Life)” कहा जाता है। इसकी शाखाओं की संरचना उल्टे वृक्ष (Inverted Tree) जैसी दिखाई देती है।
      • यह प्रजाति शुष्क एवं प्रतिकूल जलवायु परिस्थितियों के प्रति अत्यधिक अनुकूलित है।
    • पोषण एवं औषधीय महत्त्व: खुरासानी इमली विटामिन-C, एंटीऑक्सीडेंट्स एवं आवश्यक खनिजों से भरपूर होती है, जिससे यह एक अत्यंत पौष्टिक फल बन जाती है।
      • जनजातीय समुदाय पारंपरिक रूप से इसके गूदे, रस, बीज एवं छाल का उपयोग पाचन संबंधी विकारों, थकान, बुखार तथा अन्य रोगों के उपचार में करते हैं।

भौगोलिक संकेतक (GI) टैग के बारे में

  • भौगोलिक संकेतक (GI) एक बौद्धिक संपदा अधिकार है, जो किसी उत्पाद को उसकी विशिष्ट भौगोलिक उत्पत्ति तथा उससे जुड़ी विशिष्ट गुणवत्ता, प्रतिष्ठा या अन्य विशेषताओं के आधार पर पहचान प्रदान करता है।
  • प्रदान करने वाली संस्था: भारत में GI पंजीकरण भौगोलिक संकेतक रजिस्ट्री (Geographical Indications Registry), चेन्नई द्वारा प्रदान किया जाता है, जो उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्द्धन विभाग (DPIIT), वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन कार्य करती है।
  • कानूनी आधार: GI प्रणाली भौगोलिक संकेतक वस्तु (पंजीकरण एवं संरक्षण) अधिनियम, 1999 द्वारा संचालित होती है, जो वर्ष 2003 में प्रभावी हुआ।
  • वैश्विक मान्यता: GI प्रणाली को विश्व व्यापार संगठन (WTO) के व्यापार-संबंधित बौद्धिक संपदा अधिकार समझौते (TRIPS Agreement) के अंतर्गत अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त है।
  • वैधता: पंजीकृत GI को 10 वर्षों तक कानूनी संरक्षण प्राप्त होता है तथा इसे प्रत्येक 10 वर्ष की आगामी अवधि के लिए अनिश्चितकाल तक नवीनीकृत किया जा सकता है।

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