चीता मित्र (‘Cheetah Mitras’)
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हाल ही में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कूनो राष्ट्रीय उद्यान में ‘चीता मित्रों’ के साथ संवाद किया तथा भारत की प्रमुख प्रोजेक्ट चीता (Project Cheetah) पहल के अंतर्गत हुई प्रगति की समीक्षा की।
प्रोजेक्ट चीता के बारे में
- प्रोजेक्ट चीता भारत का एक अग्रणी वन्यजीव संरक्षण कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य वर्ष 1952 में भारत से विलुप्त घोषित किए गए चीतों को पुनर्संरक्षण करना है।
- उद्देश्य: एक संधारणीय चीता आबादी की स्थापना करना, साथ ही घासभूमि एवं सवाना पारितंत्र का पुनर्स्थापन तथा जैव विविधता संरक्षण को बढ़ावा देना।
- शुभारंभ: इस परियोजना का शुभारंभ 17 सितंबर, 2022 को नामीबिया से लाए गए आठ चीतों को कूनो राष्ट्रीय उद्यान में छोड़ने के साथ किया गया।
- कार्यान्वयन एजेंसी: यह परियोजना राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) द्वारा भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) तथा मध्य प्रदेश वन विभाग के सहयोग से क्रियान्वित की जा रही है।
- चीता मित्र एवं उनकी भूमिका
- सामुदायिक जागरूकता: चीता मित्र स्थानीय समुदायों को चीतों के व्यवहार एवं संरक्षण के बारे में जागरूक करते हैं।
- संघर्ष न्यूनीकरण: वे चीतों के देखे जाने की सूचना देकर तथा चीतों के संरक्षित क्षेत्रों से बाहर जाने पर वन अधिकारियों की सहायता करके मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने में सहायता करते हैं।
- संरक्षण सहयोग: वे स्थानीय स्वयंसेवकों एवं संरक्षण दूतों के रूप में कार्य करते हुए वन्यजीव संरक्षण में सामुदायिक भागीदारी को सुदृढ़ बनाते हैं।
कूनो राष्ट्रीय उद्यान के बारे में
- कूनो राष्ट्रीय उद्यान भारत का पहला चीता पुनर्स्थापन स्थल है तथा मध्य भारत का एक महत्त्वपूर्ण जैव विविधता परिदृश्य है।
- स्थान: यह मध्य प्रदेश के श्योपुर एवं मुरैना जिलों में स्थित है। इसके मध्य से कूनो नदी, जो चंबल नदी की एक सहायक नदी है, प्रवाहित होती है।
- प्रमुख विशेषताएँ
- आवास: उद्यान में शुष्क पर्णपाती वन, घासभूमियाँ तथा सवाना पारितंत्र पाए जाते हैं, जो चीतों के लिए उपयुक्त आवास प्रदान करते हैं।
- जैव विविधता: यहाँ तेंदुआ, भेड़िया, धारीदार लकड़बग्घा, स्लॉथ बियर, चीतल, सांभर, नीलगाय एवं चिंकारा जैसे वन्यजीव पाए जाते हैं।
- संरक्षण प्रयास
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- ग्राम पुनर्वास: अवरोध-मुक्त कोर आवास विकसित करने के लिए 20 से अधिक गाँवों का स्वैच्छिक पुनर्वास किया गया है।
- वैज्ञानिक निगरानी: चीतों की निगरानी रेडियो कॉलर, ड्रोन, CCTV प्रणालियों तथा समर्पित पशु-चिकित्सा सहायता के माध्यम से की जाती है।
- परिदृश्य पुनर्स्थापन: घासभूमि पुनर्स्थापन, आक्रामक प्रजातियों को हटाने तथा जल संरक्षण उपायों के माध्यम से आवास की गुणवत्ता एवं शिकार प्रजातियों की उपलब्धता में सुधार किया गया है।
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ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम (TReDS)
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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम (TReDS) के लिए संशोधित दिशानिर्देश जारी किए हैं, ताकि MSMEs की ऑनबोर्डिंग को सरल बनाया जा सके तथा उन्हें कार्यशील पूँजी वित्त तक बेहतर पहुँच उपलब्ध कराई जा सके।
TReDS हेतु RBI के नए दिशा-निर्देश
- MSME सत्यापन एवं प्रत्यक्ष भुगतान: TReDS प्लेटफॉर्मों को यह सुनिश्चित करना होगा कि विक्रेता वास्तविक MSME हैं तथा डिस्काउंट की गई राशि सीधे उनके बैंक खातों में जमा की जाए।
- क्रेडिट गारंटी कवरेज: वित्तपोषकों को अब पात्र गारंटी निधियों के माध्यम से TReDS लेन-देन के लिए बीमा एवं सरकारी समर्थित क्रेडिट गारंटी कवरेज प्राप्त करने की अनुमति दी गई है।
- न्यूनतम निवल मूल्य आवश्यकता: नए TReDS संचालकों के लिए ₹25 करोड़ का न्यूनतम निवल मूल्य (Net Worth) बनाए रखना अनिवार्य होगा, जबकि मौजूदा संचालकों को इसका अनुपालन करने के लिए 31 मार्च, 2028 तक का समय दिया गया है।
ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम (TReDS) के बारे में
- TReDS एक इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म है, जो MSMEs को अपने व्यापारिक देयकों (Invoices) को बैंकों एवं वित्तीय संस्थानों के समक्ष नीलाम करके तत्काल नकदी प्राप्त करने की सुविधा प्रदान करता है।
- शुभारंभ: TReDS का ढाँचा भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा वर्ष 2014 में प्रस्तुत किया गया था, जबकि लाइसेंस प्राप्त प्लेटफॉर्म वर्ष 2018 में परिचालन में आए।
- उद्देश्य: डिजिटल मार्केटप्लेस के माध्यम से व्यापारिक देयकों के त्वरित एवं पारदर्शी वित्तपोषण को सक्षम बनाकर MSMEs की कार्यशील पूँजी संबंधी बाधाओं को कम करना।
- नोडल निकाय: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 के अंतर्गत TReDS प्लेटफॉर्मों का विनियमन, प्राधिकरण एवं पर्यवेक्षण करता है।
- प्रमुख विशेषताएँ
- एकीकृत डिजिटल बाजार: TReDS, MSME विक्रेताओं, कॉर्पोरेट/सरकारी खरीदारों तथा बैंकों/NBFCs को एक साझा इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफार्म पर जोड़ता है।
- प्रतिस्पर्धी बोली प्रणाली: अपलोड किए गए इनवॉइसों के लिए अनेक वित्तपोषक बोली लगाते हैं, जिससे MSMEs को प्रतिस्पर्द्धी दरों पर वित्त उपलब्ध होता है।
- संपार्श्विक-मुक्त वित्तपोषण: वित्तपोषण MSME के बजाय खरीदार की साख (Creditworthiness) के आधार पर प्रदान किया जाता है, जिसके लिए संपार्श्विक (Collateral) की आवश्यकता नहीं होती है।
- डिजिटल निपटान: लेन-देन पूरी तरह इलेक्ट्रॉनिक रूप से संपन्न होते हैं, जिससे भुगतान का तीव्र एवं पारदर्शी निपटान सुनिश्चित होता है।
- कॉर्पोरेट भागीदारी अनिवार्यता: निर्दिष्ट बड़ी कंपनियों के लिए TReDS से जुड़ना अनिवार्य है, ताकि MSMEs को समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित किया जा सके।
- MSMEs की ऑनबोर्डिंग की प्रक्रिया
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- पोर्टल पंजीकरण: MSMEs, RBI द्वारा अधिकृत प्लेटफॉर्मों जैसे रिसीवेबल्स एक्सचेंज ऑफ इंडिया (RXIL), एम1एक्सचेंज (M1xchange) तथा इनवॉइसमार्ट (Invoicemart) पर पंजीकरण करते हैं।
- KYC एवं दस्तावेज प्रस्तुत करना : सत्यापन हेतु PAN, GST पंजीकरण, उद्यम प्रमाण-पत्र (Udyam Certificate), वित्तीय विवरण तथा बैंक खाते का विवरण प्रस्तुत किया जाता है।
- डिजिटल समझौता एवं सक्रियण: मानकीकृत डिजिटल समझौते के निष्पादन एवं सत्यापन के बाद MSMEs अपने इनवॉइस डिस्काउंटिंग हेतु अपलोड कर सकते हैं।
महत्त्व: TReDS MSMEs की तरलता को सुदृढ़ करता है, भुगतान में होने वाली देरी को कम करता है, औपचारिक ऋण तक पहुँच को बढ़ावा देता है तथा भारत के MSME क्षेत्र के सतत् एवं समावेशी विकास को समर्थन प्रदान करता है। |
रास लफ्फान इंडस्ट्रियल सिटी (RLIC)

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कतर की रास लफ्फान इंडस्ट्रियल सिटी (RLIC) स्थित बरज़ान गैस सुविधा में हुए विस्फोट ने विश्व के सबसे बड़े द्रवीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) उत्पादन केंद्र की ओर पुनः वैश्विक ध्यान आकर्षित किया है।
रास लफ्फान इंडस्ट्रियल सिटी (RLIC) के बारे में
- रास लफ्फान इंडस्ट्रियल सिटी (RLIC) विश्व का सबसे बड़ा द्रवीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) उत्पादन, प्रसंस्करण एवं निर्यात केंद्र है, जिसका प्रबंधन कतरएनर्जी (QatarEnergy) द्वारा किया जाता है।
- अवस्थिति: RLIC, फ़ारस की खाड़ी के किनारे कतर के उत्तर-पूर्वी तट पर स्थित है, जो दोहा से लगभग 80 किमी. उत्तर-पूर्व में स्थित है।
- संसाधन आधार: यह परिसर नॉर्थ फील्ड से निकाली गई गैस के तटीय प्रसंस्करण केंद्र (Onshore Processing Centre) के रूप में कार्य करता है। नॉर्थ फील्ड विश्व का सबसे बड़ा गैर-संबद्ध प्राकृतिक गैस भंडार है।
- उत्पादन क्षमता: इस शहर में 14 LNG प्रोसेसिंग ट्रेन्स हैं, जिनमें 6 मेगा-ट्रेन्स शामिल हैं, जिससे कतर विश्व के प्रमुख LNG निर्यातकों में से एक बना हुआ है।
- प्रमुख विशेषताएँ
- बरजान गैस संयंत्र: यह कतरएनर्जी और एक्सॉनमोबिल (ExxonMobil) का संयुक्त उपक्रम है, जिसकी उत्पादन क्षमता प्रतिदिन 4 बिलियन मानक घन फीट गैस है।
- रिफाइनिंग एवं GTL सुविधाएँ: परिसर में लफ्फान रिफाइनरी, पर्ल GTL तथा ORYX GTL संयंत्र स्थित हैं, जो प्राकृतिक गैस को तरल ईंधन एवं पेट्रोलियम उत्पादों में परिवर्तित करते हैं।
- हीलियम उत्पादन केंद्र: RLIC में हीलियम 1 और हीलियम 2 संयंत्र स्थित हैं, जिससे कतर तरल हीलियम का एक प्रमुख वैश्विक निर्यातक बन गया है।
- एकीकृत उपयोगिता अवसंरचना: रास लफ्फान A, B और C नामक तीन प्रमुख विद्युत एवं विलवणीकरण संयंत्र कतर की विद्युत एवं स्वच्छ जल आवश्यकताओं का एक बड़ा हिस्सा पूरा करते हैं।
सामरिक महत्त्व: रास लफ्फान इंडस्ट्रियल सिटी (RLIC) कतर की अर्थव्यवस्था, वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा तथा द्रवीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) व्यापार का प्रमुख केंद्र है, जो खाड़ी क्षेत्र के गैस संसाधनों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ता है। |
पद्म पुरस्कार, 2026
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 23 जून, 2026 को राष्ट्रपति भवन में आयोजित सिविल इन्वेस्टिचर समारोह-II के दौरान शेष पद्म पुरस्कार, 2026 प्रदान किए।
पद्म पुरस्कार, 2026 : प्रमुख बिंदु
- कुल पुरस्कार विजेता: वर्ष 2026 में कुल 131 पद्म पुरस्कारों की घोषणा की गई, जिनमें 5 पद्म विभूषण, 13 पद्म भूषण और 113 पद्म श्री पुरस्कार शामिल थे।
- पद्म विभूषण: भारत के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से विशिष्ट व्यक्तित्वों को सम्मानित किया गया, जिनमें धर्मेंद्र (मरणोपरांत) को उनकी असाधारण एवं विशिष्ट सेवाओं के लिए सम्मान प्रदान किया गया।
- पद्म भूषण: उल्लेखनीय पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं में भारत के प्रसिद्ध अभिनेता ममूटी (Mammootty) तथा सुप्रसिद्ध पार्श्व गायिका अलका याज्ञनिक शामिल थीं, जिन्हें कला एवं संस्कृति के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
- पद्म श्री: प्रमुख सम्मानित व्यक्तियों में अभिनेता आर. माधवन, तेलुगु अभिनेता मुरली मोहन, राजेंद्र कुमार तथा सतीश शाह (मरणोपरांत) शामिल थे, जिन्हें उनके-अपने क्षेत्रों में योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
पद्म पुरस्कार (UPSC Pre 2021)
- पद्म पुरस्कार भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक हैं, जिनकी घोषणा प्रतिवर्ष गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर की जाती है।
- यह तीन श्रेणियों में प्रदान किए जाते हैं, अर्थात् पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री।
- ‘पद्म विभूषण’ उन व्यक्तियों को प्रदान किया जाता है, जिन्होंने असाधारण एवं उल्लेखनीय सेवा की हो।
- ‘पद्म भूषण’ उच्च कोटि की उत्कृष्ट सेवा के लिए प्रदान किया जाता है।
- ‘पद्म श्री’ उन व्यक्तियों को प्रदान किया जाता है, जिन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में विशिष्ट सेवा प्रदर्शित की हो।
- पात्रता: जाति, व्यवसाय, पद अथवा लिंग की परवाह किए बिना सभी पृष्ठभूमियों के व्यक्ति इन पुरस्कारों के लिए पात्र हैं।
- तथापि, डॉक्टरों और वैज्ञानिकों को छोड़कर सरकारी कर्मचारी, जिनमें सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) में कार्यरत कर्मचारी भी शामिल हैं, इन पुरस्कारों के लिए पात्र नहीं होते।
- मान्यता प्राप्त क्षेत्र: कला, समाज सेवा, लोक कार्य, विज्ञान एवं अभियांत्रिकी, व्यापार एवं उद्योग, चिकित्सा, साहित्य एवं शिक्षा, सिविल सेवा तथा खेल।
- पद्म पुरस्कार चयन प्रक्रिया
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- पद्म पुरस्कार प्रतिवर्ष गठित पद्म पुरस्कार समिति की अनुशंसाओं के आधार पर प्रदान किए जाते हैं, जिसका गठन प्रधानमंत्री द्वारा किया जाता है।
- आम जनता नामांकन प्रक्रिया में भाग ले सकती है, जिसमें स्व-नामांकन का विकल्प भी शामिल है।
- अनुच्छेद-18(1) के अंतर्गत उपाधि नहीं: अनुच्छेद-18(1) सभी उपाधियों को समाप्त करता है तथा राज्य को किसी भी व्यक्ति, चाहे वह नागरिक हो या विदेशी नागरिक, को उपाधि प्रदान करने से प्रतिबंधित करता है।
- पद्म पुरस्कार अनुच्छेद-18 के अंतर्गत प्रतिबंधित नहीं हैं, क्योंकि ये सम्मान कोई विशेष कानूनी दर्जा या विशेषाधिकार प्रदान नहीं करते।
- इनका उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्टता एवं सेवा को मान्यता देना और प्रोत्साहित करना है, जिससे राष्ट्रीय विकास एवं गौरव को बढ़ावा मिलता है।
- एक वर्ष में दिए जाने वाले कुल पुरस्कारों की संख्या (मरणोपरांत पुरस्कारों तथा NRI/विदेशियों/OCI को दिए गए पुरस्कारों को छोड़कर) 120 से अधिक नहीं होनी चाहिए।
- किसी व्यक्ति को पद्म पुरस्कार की उच्चतर श्रेणी तभी प्रदान की जा सकती है, जब पूर्व पद्म पुरस्कार प्राप्त करने के बाद कम-से-कम पाँच वर्ष की अवधि बीत चुकी हो।
- तथापि, अत्यंत योग्य मामलों में पद्म पुरस्कार समिति द्वारा इस शर्त में छूट दी जा सकती है।
- पुरस्कार प्रतिवर्ष भारत के राष्ट्रपति द्वारा प्रदान किए जाते हैं तथा सम्मानित व्यक्तियों को राष्ट्रपति के हस्ताक्षरयुक्त सनद (प्रमाण-पत्र) एवं एक पदक प्रदान किया जाता है।
महत्त्व: पद्म पुरस्कार कला, साहित्य, विज्ञान, चिकित्सा, लोक कार्य, खेल, समाज सेवा तथा सिविल सेवा जैसे विभिन्न क्षेत्रों में विशिष्ट योगदान को मान्यता प्रदान करते हैं, जो उत्कृष्टता एवं लोकसेवा के सम्मान के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। |
प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिक्स देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों से मुलाकात की

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स (BRICS) देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों तथा वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों से मुलाकात की और उभरती वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों के समाधान में ब्रिक्स (BRICS) की बढ़ती भूमिका पर बल दिया।
बैठक के बारे में
- चर्चा का विषय: ब्रिक्स (BRICS) राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक में गैर-पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियों जैसे साइबर सुरक्षा, डिजिटल कमजोरियाँ तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित खतरों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया।
- बैठक की अध्यक्षता: नई दिल्ली में आयोजित दो-दिवसीय बैठक की अध्यक्षता राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने की।
- भारत की ब्रिक्स (BRICS) अध्यक्षता की थीम: वर्ष 2026 के लिए भारत की ब्रिक्स (BRICS) अध्यक्षता “बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी” (Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability) थीम पर आधारित है।
प्रमुख बिंदु
- वैश्विक सुरक्षा में ब्रिक्स (BRICS) की भूमिका: प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर बल दिया कि तेजी से जटिल होते वैश्विक सुरक्षा परिवेश में सहयोग को सुदृढ़ करने में ब्रिक्स (BRICS) की महत्त्वपूर्ण भूमिका है।
- साझी सुरक्षा चुनौतियों पर सहयोग: उन्होंने आतंकवाद, साइबर सुरक्षा तथा उभरती प्रौद्योगिकियों से उत्पन्न चुनौतियों जैसे साझा मुद्दों पर गहन सहयोग का आह्वान किया।
ब्रिक्स (BRICS) के बारे में
- प्रकृति: ब्रिक्स (BRICS) उभरती अर्थव्यवस्थाओं का एक अंतर-सरकारी समूह है।
- सदस्य: ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका (मूल पाँच सदस्य) के साथ-साथ विस्तार के बाद शामिल छह देश—मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात।
- उद्देश्य: आर्थिक, राजनीतिक, सुरक्षा एवं विकास संबंधी मुद्दों पर सहयोग को बढ़ावा देना तथा वैश्विक शासन में ग्लोबल साउथ की आवाज को सशक्त बनाना।
- जनसांख्यिकीय शक्ति: ब्रिक्स देशों में विश्व की लगभग 40% जनसंख्या निवास करती है।
- आर्थिक महत्त्व: ब्रिक्स का वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में लगभग 26% योगदान है।
- व्यापारिक प्रभाव: वैश्विक व्यापार में ब्रिक्स देशों की हिस्सेदारी लगभग 26% है।
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विश्व का अग्रणी जहाज पुनर्चक्रण राष्ट्र बना भारत
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संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास सम्मेलन (UNCTAD) की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, भारत वर्ष 2025 में विश्व का सबसे बड़ा जहाज पुनर्चक्रण (Ship Recycling) राष्ट्र बनकर उभरा है। इसके साथ ही भारत ने मैरीटाइम इंडिया विजन 2030 के अंतर्गत निर्धारित एक प्रमुख लक्ष्य को निर्धारित समय से पाँच वर्ष पूर्व ही प्राप्त कर लिया है।
संबंधित तथ्य
- वैश्विक स्तर पर अग्रणी: वैश्विक जहाज पुनर्चक्रण में भारत की हिस्सेदारी वर्ष 2024 में 30.1% से बढ़कर 2025 में 35.4% हो गई, जिससे भारत विश्व का अग्रणी जहाज पुनर्चक्रण देश बन गया।
- वृद्धि: जहाज़ पुनर्चक्रण की मात्रा में लगभग 60% की वृद्धि दर्ज की गई, जो वर्ष 2024 में 1.86 मिलियन ग्रॉस टन (GT) से बढ़कर 2025 में 2.99 मिलियन ग्रॉस टन (GT) हो गई।
- विधिक ढाँचा: भारत ने जहाज़ पुनर्चक्रण अधिनियम, 2019 अधिनियमित किया, ताकि घरेलू नियमों को अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) के जहाजों के सुरक्षित एवं पर्यावरणीय दृष्टि से उपयुक्त पुनर्चक्रण हेतु हांगकांग अंतरराष्ट्रीय अभिसमय (HKC) के अनुरूप बनाया जा सके।
मैरीटाइम इंडिया विजन (MIV) 2030
- शुभारंभ: इसे भारत को बंदरगाह-आधारित विकास के माध्यम से एक अग्रणी वैश्विक समुद्री राष्ट्र बनाने के उद्देश्य से बंदरगाह, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय द्वारा वर्ष 2021 में प्रारंभ किया गया।
- उद्देश्य: बंदरगाहों का आधुनिकीकरण, मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी में सुधार, लॉजिस्टिक्स लागत में कमी तथा बंदरगाह दक्षता को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाना।
- ब्लू इकोनॉमी एवं समुद्री उद्योग: आर्थिक विकास एवं रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के लिए जहाज निर्माण, जहाज मरम्मत, जहाज पुनर्चक्रण, तटीय नौवहन, अंतर्देशीय जलमार्ग तथा समुद्री क्लस्टरों को प्रोत्साहित करता है।
- हरित एवं स्मार्ट समुद्री क्षेत्र: भविष्य के लिए तैयार बंदरगाहों के निर्माण हेतु कार्बन उत्सर्जन में कमी, नवीकरणीय ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन, डिजिटलीकरण, स्वचालन तथा सतत् बंदरगाह संचालन पर विशेष बल देता है।
जहाज पुनर्चक्रण क्षेत्र हेतु सरकारी पहलें
- हांगकांग अभिसमय का अनुमोदन (2019): भारत इस अभिसमय का अनुमोदन करने वाले प्रारंभिक देशों में से एक बना, जिससे जहाज पुनर्चक्रण में वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं को बढ़ावा मिला।
- HKC-अनुरूप पुनर्चक्रण सुविधाएँ: लगभग 115 जहाज पुनर्चक्रण यार्डों को अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा एवं पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप उन्नत किया गया है।
- यार्ड आधुनिकीकरण हेतु वित्तीय सहायता: जहाज पुनर्चक्रण सुविधाओं के उन्नयन तथा सुरक्षा एवं पर्यावरणीय अनुपालन में सुधार के लिए सरकार द्वारा ₹53.5 करोड़ की सहायता प्रदान की गई।
- शिप-ब्रेकिंग क्रेडिट नोट योजना: पुनर्चक्रित जहाज के कबाड़ मूल्य (Scrap Value) का 40% मूल्य का क्रेडिट नोट प्रदान किया जाता है, जिसका उपयोग भारत में निर्मित नए जहाज़ की लागत के 5% तक किया जा सकता है। यह योजना जहाज पुनर्चक्रण एवं घरेलू जहाज निर्माण दोनों को प्रोत्साहित करती है।
- अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुँच के प्रयास: सरकार भारतीय पुनर्चक्रण सुविधाओं को यूरोपीय संघ (EU) की स्वीकृत जहाज पुनर्चक्रण यार्डों की सूची में शामिल कराने के प्रयास कर रही है, जिससे उनकी वैश्विक प्रतिस्पर्द्धात्मकता में वृद्धि होगी।
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