डेलीगेशन ऑफ फाइनेंशियल पॉवर्स (DFP 2026)
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रक्षा मंत्री ने डेलीगेशन ऑफ फाइनेंशियल पॉवर्स (DFP-2026) का शुभारंभ किया, जिसका उद्देश्य रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) को अधिक वित्तीय स्वायत्तता प्रदान करना तथा स्वदेशी रक्षा अनुसंधान, विकास एवं प्रौद्योगिकी के समावेशन में तेजी लाना है।
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन को वित्तीय शक्तियों का प्रत्यायोजन (DFP-2026)
- रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) को वित्तीय शक्तियों का प्रत्यायोजन (DFP-2026) एक संशोधित वित्तीय ढाँचा है, जो रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) को अधिक प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वायत्तता प्रदान करता है।
- उद्देश्य: रक्षा अनुसंधान एवं विकास को गति देना, परियोजनाओं के क्रियान्वयन में सुधार करना तथा स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकियों का सशस्त्र बलों में शीघ्र समावेशन सुनिश्चित करना।
- प्रमुख विशेषताएँ
- वित्तीय स्वायत्तता में वृद्धि: DFP-2026 रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के विभिन्न स्तरों पर कार्यात्मक एवं वित्तीय शक्तियों का विस्तार कर वित्तीय निर्णय-प्रक्रिया का विकेंद्रीकरण करता है।
- प्रारंभिक चरण के अनुसंधान को समर्थन: यह ढाँचा प्री-प्रोजेक्ट अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों के लिए वित्तपोषण की अनुमति देता है, जिससे प्रशासनिक विलंब के बिना नवाचारी अनुसंधान प्रारंभ किया जा सके।
- परीक्षण अभियानों हेतु पृथक वित्तीय प्रावधान: रक्षा प्रौद्योगिकियों के समयबद्ध परीक्षण एवं सत्यापन के लिए परीक्षण अभियानों हेतु अलग वित्तीय प्रावधान किए गए हैं।
- नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र का सुदृढ़ीकरण: DFP-2026 एक्स्ट्रा-म्यूरल रिसर्च प्रोजेक्ट्स, डिफेंस इनोवेशन एक्सेलेरेटर–सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस (DIA-CoEs) तथा टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट फंड (TDF) परियोजनाओं के लिए अनुदान को स्पष्ट रूप से पृथक करता है।
- आत्मनिर्भर भारत को प्रोत्साहन: यह फ्रेमवर्क DRDO, उद्योग, MSMEs, स्टार्ट-अप्स एवं शिक्षण संस्थानों के मध्य सहयोग को मजबूत बनाकर विदेशी रक्षा प्रौद्योगिकियों तथा ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स (OEMs) पर निर्भरता कम करता है।
वित्तीय अनुमोदन प्रक्रिया को सरल एवं त्वरित बनाकर DFP-2026 से स्वदेशी हथियार प्रणालियों, रक्षा प्लेटफॉर्म्स तथा रणनीतिक प्रौद्योगिकियों के उत्पादन एवं सशस्त्र बलों में शीघ्र समावेशन की अपेक्षा की जाती है। |
जोनाथन: विश्व का सबसे वृद्ध जीवित स्थलीय प्राणी

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सेशेल्स की अपनी यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेशेल्स नेशनल बॉटनिकल गार्डन्स में जोनाथन को देखा, जो विश्व का सबसे वृद्ध जीवित स्थलीय प्राणी है।
जोनाथन के बारे में
- जोनाथन एक सेशेल्स जाइंट टॉर्टॉइस (Seychelles Giant Tortoise) है, जिसका जन्म लगभग 1832 ईसवी के आस-पास माना जाता है। इस प्रकार इसकी आयु लगभग 194 वर्ष है।
- प्रजाति: यह एल्डाब्रा जाइंट टॉर्टॉइस (Aldabra Giant Tortoise) प्रजाति से संबंधित है, जो दीर्घायु प्रजाति है तथा एल्डाब्रा एटोल (Aldabra Atoll) की स्थानिक प्रजाति है। एल्डाब्रा एटोल यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है।
- आवास: जोनाथन सेंट हेलेना के गवर्नर के आधिकारिक निवास प्लांटेशन हाउस में रहता है, जहाँ वह 1882 ईसवी से निवास कर रहा है।
- ऐतिहासिक साक्षी: जोनाथन लगभग दो शताब्दियों से जीवित है तथा औद्योगिक क्रांति से लेकर डिजिटल युग तक की अनेक प्रमुख वैश्विक घटनाओं का साक्षी रहा है।
- वैज्ञानिक महत्त्व: इसे दीर्घायु, जैव विविधता संरक्षण तथा सफल प्रजाति संरक्षण का जीवंत प्रतीक माना जाता है, जो विश्वभर के शोधकर्ताओं एवं पर्यटकों को आकर्षित करता है।
- संरक्षण स्थिति: एल्डाब्रा जाइंट टॉर्टॉइस (Aldabra Giant Tortoise) को IUCN रेड लिस्ट में सुभेद्य (Vulnerable) श्रेणी में वर्गीकृत किया गया है।
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राष्ट्रीय निवेश और अवसंरचना कोष (NIIF)
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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय निवेश और अवसंरचना कोष (NIIF) में अतिरिक्त ₹30,000 करोड़ के निवेश को मंजूरी दी है, जिससे भारत सरकार की कुल प्रतिबद्धता बढ़कर ₹60,000 करोड़ हो गई है।
राष्ट्रीय निवेश और अवसंरचना कोष (NIIF)
- राष्ट्रीय निवेश और अवसंरचना कोष (NIIF) भारत का संप्रभु-समर्थित (Sovereign-backed) निवेश प्लेटफार्म है, जिसकी स्थापना अवसंरचना एवं अन्य रणनीतिक क्षेत्रों के लिए दीर्घकालिक पूँजी जुटाने के उद्देश्य से की गई थी।
- स्थापना: NIIF की स्थापना भारत सरकार द्वारा वर्ष 2015 में सेबी (SEBI) के साथ पंजीकृत श्रेणी-II वैकल्पिक निवेश फंड (AIF) के रूप में की गई।
- उद्देश्य: व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य अवसंरचना परियोजनाओं में घरेलू एवं वैश्विक निवेश को प्रोत्साहित करना, आर्थिक विकास को गति देना तथा भारत के अवसंरचना वित्तपोषण अंतराल को कम करना।
- नोडल मंत्रालय: NIIF, वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग (DEA) के प्रशासनिक पर्यवेक्षण में कार्य करता है।
- प्रमुख विशेषताएँ
- संप्रभु-आधारित कोष: भारत सरकार 49% अंशदान के साथ एंकर निवेशक (Anchor Investors) की भूमिका निभाती है, जबकि शेष पूँजी संप्रभु संपत्ति कोष, पेंशन फंड्स, बहुपक्षीय संस्थानों तथा अन्य घरेलू एवं वैश्विक निवेशकों से जुटाई जाती है।
- बहु-आयामी निवेश मंच: NIIF, मास्टर फंड, फंड ऑफ फंड्स तथा ‘स्ट्रेटेजिक ऑपर्च्युनिटीज फंड’ के माध्यम से परिवहन, नवीकरणीय ऊर्जा, डिजिटल अवसंरचना, वित्तीय सेवाओं एवं अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में निवेश करता है।
- पेशेवर प्रबंधन: NIIF एक व्यावसायिक निवेश मॉडल का अनुसरण करता है, जिसका प्रबंधन पेशेवर फंड प्रबंधकों द्वारा किया जाता है, ताकि राष्ट्रीय अवसंरचना विकास को समर्थन देने के साथ-साथ दीर्घकालिक एवं जोखिम-समायोजित प्रतिफल सुनिश्चित किया जा सके।
- सरकारी वित्तपोषण में वृद्धि का महत्त्व
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- अधिक निजी पूँजी को आकर्षित करना: सरकार की अतिरिक्त वित्तीय प्रतिबद्धता कैटेलिटिक कैपिटल मॉडल के माध्यम से घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थागत निवेश को आकर्षित करने की NIIF की क्षमता को सुदृढ़ करेगी।
- अवसंरचना विकास में तेजी: यह अतिरिक्त निवेश NIIF इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड II को समर्थन प्रदान करेगा, जिससे परिवहन, ऊर्जा, डिजिटल अवसंरचना, शहरी अवसंरचना तथा ई-मोबिलिटी परियोजनाओं में निवेश को गति मिलेगी।
- भारत के विकास एजेंडा को समर्थन: अधिक पूँजी उपलब्ध होने से राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन (NIP), पीएम गति शक्ति तथा अन्य रणनीतिक अवसंरचना पहलों के वित्तपोषण को बल मिलेगा, जिससे आर्थिक विकास, रोजगार सृजन तथा वैश्विक प्रतिस्पर्द्धात्मकता में वृद्धि होगी।
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फ्लेमिंगो रिवॉल्यूशन

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अल्बानिया में हजारों प्रदर्शनकारियों ने “फ्लेमिंगो रिवॉल्यूशन” नामक आंदोलन प्रारंभ किया है, जिसका उद्देश्य जेरेड कुशनर (Jared Kushner) समर्थित 1.6 अरब डॉलर की लक्जरी पर्यटन परियोजना का विरोध करना है।
फ्लेमिंगो रिवॉल्यूशन के बारे में
- ‘फ्लेमिंगो रिवॉल्यूशन’ अल्बानिया में चल रहा एक जन-आंदोलन है, जो डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर द्वारा अल्बानिया के एड्रियाटिक तट पर प्रस्तावित 1.6 अरब डॉलर की लक्जरी पर्यटन परियोजना के विरोध में प्रारंभ हुआ।
- विरोध का कारण: प्रदर्शनकारियों ने उस लक्जरी रिसॉर्ट परियोजना का विरोध किया, जिसमें 800 अतिथि कक्ष एवं सुइट्स, लक्जरी विला, गोल्फ कोर्स, कैसीनो, वाटर पार्क तथा पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों में टाउनहाउस एवं अपार्टमेंट्स के निर्माण का प्रस्ताव है।
- प्रारंभ में यह आंदोलन पर्यावरणीय चिंताओं पर केंद्रित था, किंतु बाद में यह एक व्यापक भ्रष्टाचार-विरोधी आंदोलन में परिवर्तित हो गया, जिसमें प्रधानमंत्री एडी रामा के इस्तीफे की भी माँग की जा रही है।
- यूरोपीय संसद का हस्तक्षेप: यह आंदोलन पिछले कई दशकों में अल्बानिया का सबसे बड़ा नागरिक समाज आंदोलन बन चुका है।
- 17 जून को यूरोपीय संसद ने अल्बानिया से संरक्षित क्षेत्रों में निर्माण कार्य रोकने का आग्रह किया।
विरोध के कारण
- पारिस्थितिकी रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में विकास: इस परियोजना में साजान द्वीप (Sazan Island) तथा व्योसा-नार्टा संरक्षित क्षेत्र जैसे पारिस्थितिकी रूप से संवेदनशील आर्द्रभूमि क्षेत्रों में निर्माण का प्रस्ताव है।
- यह आर्द्रभूमि फ्लेमिंगो, भूमध्यसागरीय मॉन्क सील तथा समुद्री कछुओं के प्रजनन एवं आवास का प्रमुख क्षेत्र है, जिससे जैव विविधता के क्षरण की आशंका उत्पन्न हुई है।
- प्रदर्शनकारियों के आरोप
- परियोजना की स्वीकृति से पूर्व सार्वजनिक परामर्श का अभाव।
- बालू के टीलों, वनों तथा संरक्षित आवासों का विनाश।
- स्थानीय समुदायों के हितों की उपेक्षा कर समृद्ध निवेशकों को प्राथमिकता देना।
- पर्यावरणीय एवं कानूनी चिंताएँ: वर्ष 2024 में अल्बानिया ने एक ऐसा कानून पारित किया, जिसके तहत पहले से संरक्षित कुछ क्षेत्रों, जिनमें यूरोपीय संघ के नटूरा 2000 नेटवर्क के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र भी शामिल हैं, में निर्माण कार्य की अनुमति दी गई।
- पर्यावरण संगठनों का मानना है कि यह कानून पारिस्थितिकी तंत्र संरक्षण को कमजोर करता है तथा संवेदनशील आवासों में बड़े पैमाने पर विकास कार्यों का मार्ग प्रशस्त करता है।
सरकार का पक्ष
- आर्थिक औचित्य: प्रधानमंत्री एडी रामा का तर्क है कि यह परियोजना:-
- रोजगार के अवसरों एवं पर्यटन से होने वाले राजस्व में वृद्धि करेगी।
- अल्बानिया को भूमध्यसागरीय क्षेत्र के प्रमुख पर्यटन गंतव्यों में स्थापित करेगी।
- बाहरी हस्तक्षेप का आरोप: प्रधानमंत्री ने यह भी आरोप लगाया है कि ईरान सहित कुछ बाहरी शक्तियाँ, जेरेड कुशनर की भागीदारी के कारण इस आंदोलन को बढ़ावा दे रही हैं।
अन्य विवाद
- सर्बिया की परियोजना रद्द: वर्ष 2025 के अंत में सर्बिया में जेरेड कुशनर से जुड़ी 500 मिलियन डॉलर की एक विकास परियोजना व्यापक जन-विरोध के बाद रद्द कर दी गई।
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