संदर्भ
हाल ही में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) ने सुमन रोडमैप 2030 (SUMAN Roadmap 2030) का शुभारंभ किया।
सुमन रोडमैप 2030 की प्रमुख विशेषताएँ
यह मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने तथा सतत् विकास लक्ष्य (SDG)-3 के लक्ष्यों को वर्ष 2030 तक प्राप्त करने हेतु एक व्यापक रणनीतिक रूपरेखा है, जिसका विशेष उद्देश्य निवारणीय मातृ एवं नवजात मृत्यु में कमी लाना है।
- जीवन-चक्र आधारित दृष्टिकोण: यह RMNCHA+N ढाँचे पर आधारित है, जिसमें गर्भधारण-पूर्व, गर्भावस्था, प्रसव, प्रसवोत्तर देखभाल, शिशु स्वास्थ्य, किशोर स्वास्थ्य, परिवार नियोजन तथा पोषण को समग्र रूप से शामिल किया गया है।
- लक्षित जिला रणनीति: 13 उच्च-प्राथमिकता वाले राज्यों के 130 जिलों में लक्षित हस्तक्षेपों की व्यवस्था करते हुए सभी राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के लिए सार्वभौमिक रणनीतियाँ निर्धारित की गई हैं।
- उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था का प्रबंधन: समय पर हस्तक्षेप सुनिश्चित करने हेतु प्रसव-पूर्व, गर्भावस्था की अंतिम तिमाही, प्रसवकाल एवं प्रसवोत्तर चरणों में उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की व्यवस्थित पहचान एवं निगरानी की व्यवस्था की गई है।

- गर्भवती महिलाओं हेतु सुमन पैकेज: प्रारंभिक गर्भावस्था पंजीकरण, गुणवत्तापूर्ण प्रसव-पूर्व देखभाल, संस्थागत प्रसव, प्रसवोत्तर देखभाल तथा संपूर्ण नैदानिक मूल्यांकन को प्रोत्साहित किया गया है।
- सामुदायिक-आधारित देखभाल का सुदृढ़ीकरण: गर्भावस्था के 8वें एवं 9वें महीने में आशा (ASHA) कार्यकर्ताओं द्वारा प्रत्येक पखवाड़े घर-घर भ्रमण अनिवार्य किया गया है, ताकि परामर्श, प्रसव-पूर्व तैयारी, पोषण सहायता एवं खतरे के संकेतों की पहचान सुनिश्चित की जा सके।
- स्वास्थ्य अवसंरचना का सुदृढ़ीकरण: वंचित क्षेत्रों में बर्थ वेटिंग होम्स, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य विंग्स, प्रसूति HDUs, ICUs तथा आपातकालीन प्रसूति सेवाओं का विस्तार किया जाएगा।
- डिजिटल एवं एआई एकीकरण: एआई-सक्षम लेबर रूम्स, डिजिटल निगरानी हेतु जननी पोर्टल तथा शिकायत निवारण के लिए केंद्रीकृत सुमन कॉल सेंटर की व्यवस्था की गई है।
- सामुदायिक सहभागिता: स्थानीय स्वामित्व एवं जन-जागरूकता बढ़ाने हेतु सुमन पंचायत एवं मदर्स पिकनिक जैसी पहलों को बढ़ावा दिया गया है।

- जलवायु-अनुकूल स्वास्थ्य सेवाएँ: मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं में जलवायु-संवेदनशील योजना को एकीकृत किया गया है।
- शिशु स्वास्थ्य का एकीकरण: समग्र शिशु बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (SSBSK) को शामिल करते हुए जन्म से 36 माह तक के बच्चों के लिए एकीकृत गृह-आधारित स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराई जाएँगी।
भारत की पूर्ववर्ती संबंधित पहलें
- सुरक्षित मातृत्व आश्वासन (SUMAN) पहल (2019): सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों में निःशुल्क, सम्मानजनक एवं शून्य-व्यय मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाएँ सुनिश्चित करती है।
- जननी सुरक्षा योजना (JSY): संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने हेतु सशर्त नकद अंतरण योजना।
- जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम (JSSK): निःशुल्क प्रसव, सिजेरियन सेक्शन, जाँच, दवाएँ, परिवहन तथा नवजात देखभाल की सुविधा प्रदान करता है।
- प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA): प्रत्येक माह की 9 तारीख को गर्भवती महिलाओं के लिए निःशुल्क एवं गुणवत्तापूर्ण प्रसव-पूर्व जाँच उपलब्ध कराता है।
- लक्ष्य (LaQshya) कार्यक्रम: लेबर रूम्स एवं मातृत्व ऑपरेशन थियेटर्स की गुणवत्ता में सुधार करता है।
- पोषण अभियान: अभिसरण एवं व्यवहार परिवर्तन के माध्यम से मातृ एवं बाल कुपोषण को कम करने का प्रयास करता है।
- एनीमिया मुक्त भारत: महिलाओं, किशोरों एवं बच्चों में एनीमिया की रोकथाम एवं कमी पर केंद्रित पहल।
- RMNCHA+N रणनीति: प्रजनन, मातृ, नवजात, शिशु, किशोर स्वास्थ्य एवं पोषण (Reproductive, Maternal, Newborn, Child, Adolescent Health and Nutrition) को समाहित करने वाला एकीकृत दृष्टिकोण।
संबंधित वैश्विक पहलें
- SDG 3.1 एवं 3.2: वर्ष 2030 तक मातृ मृत्यु अनुपात (MMR) को प्रति 1,00,000 जीवित जन्मों पर 70 से कम करना तथा रोकी जा सकने वाली नवजात एवं पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु को नियंत्रित करना।
- WHO की रणनीतियाँ: एवरी वुमन एवरी न्यूबॉर्न एवरीवेयर (Every Woman Every Newborn Everywhere – EWENE) तथा गुणवत्तापूर्ण मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवा मानक।
- एवरी वुमन एवरी चाइल्ड (Every Woman Every Child – EWEC): महिलाओं, बच्चों एवं किशोरों के स्वास्थ्य में सुधार हेतु वैश्विक पहल।
- महिलाओं, बच्चों एवं किशोरों के स्वास्थ्य हेतु वैश्विक रणनीति (2016–2030): सर्वाइव, थ्राइव एंड ट्रांसफॉर्म दृष्टिकोण पर आधारित रणनीति।
- UNICEF एवं UNFPA कार्यक्रम: सुरक्षित प्रसव, कुशल प्रसव सहयोग तथा मातृ पोषण को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देते हैं।
निष्कर्ष
सुमन रोडमैप 2030 सुरक्षित मातृत्व, स्वस्थ नवजात तथा समतामूलक स्वास्थ्य सेवाओं तक सार्वभौमिक पहुँच सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण पहल है। लक्षित हस्तक्षेपों, डिजिटल नवाचार, स्वास्थ्य प्रणाली के सुदृढ़ीकरण तथा सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से यह रोकी जा सकने वाली मातृ एवं नवजात मृत्यु को शून्य करने तथा भारत में सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (UHC) के लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु सुदृढ़ आधार प्रदान करता है।