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संक्षेप में समाचार

18 Jul 2026

ऑपरेशन सदर्न रेडीनेस 26-2 (Operation Southern Readiness 26-2)

भारतीय नौसेना ने केरल के कोच्चि स्थित दक्षिणी नौसैनिक कमान में ऑपरेशन सदर्न रेडीनेस 26-2, एक बहुराष्ट्रीय समुद्री प्रशिक्षण अभ्यास की मेजबानी की।

ऑपरेशन सदर्न रेडीनेस 26-2 के बारे में

  • यह दक्षिणी नौसैनिक कमान, कोच्चि में भारतीय नौसेना द्वारा आयोजित दूसरा बहुराष्ट्रीय समुद्री प्रशिक्षण अभ्यास है, जिसका उद्देश्य व्यावसायिक समुद्री प्रशिक्षण तथा क्षेत्रीय समुद्री सहयोग को सुदृढ़ करना है।
    • प्रथम ऑपरेशन सदर्न रेडीनेस का आयोजन वर्ष 2022 में पश्चिमी हिंद महासागर के सेशेल्स में किया गया था।
  • उद्देश्य: क्षेत्रीय क्षमता निर्माण को सुदृढ़ करना, सहभागी नौसेनाओं के बीच अंतरसंचालनीयता को बढ़ाना, सर्वोत्तम पद्धतियों के आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करना तथा समन्वित प्रशिक्षण एवं संचालनात्मक सहयोग के माध्यम से सामूहिक समुद्री सुरक्षा को सुदृढ़ करना।
  • साझेदार निकाय: इस अभ्यास का आयोजन कंबाइंड मैरीटाइम फोर्सेज (CMF) के सहयोग से कंबाइंड टास्क फोर्स-154 (CTF-154) के तत्त्वावधान में किया जाता है, जो भारतीय नौसेना के नेतृत्व वाला CMF प्रशिक्षण टास्क फोर्स है।
    • कंबाइंड मैरीटाइम फोर्सेज (CMF) 47 देशों की एक बहुराष्ट्रीय समुद्री साझेदारी है, जो समुद्री सुरक्षा एवं स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।

परिवर्तन योजना (PARIVARTAN Scheme)

आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) ने दिल्ली-एनसीआर में वाहनजनित प्रदूषण को कम करने के लिए परिवर्तन (PARIVARTAN) योजना के संचालनात्मक दिशा-निर्देशों को स्वीकृति प्रदान की है।

परिवर्तन योजना के बारे में

  • परिवर्तन (Program for Accelerated Renewal and Incentivization of Vehicle Assets for Reducing Transport Air Pollution and Network Emissions-  PARIVARTAN) केंद्र सरकार की एक योजना है, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में पुराने एवं अत्यधिक प्रदूषणकारी ट्रकों तथा बसों को भारत स्टेज (BS)-VI अनुरूप अथवा इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) से प्रतिस्थापित करना है।
  • बजट: कुल ₹9,585 करोड़, जिसमें ₹5,041 करोड़ का केंद्रीय सहयोग शामिल है।
  • उद्देश्य: वाहनजनित उत्सर्जन को कम करना, दिल्ली-एनसीआर की वायु गुणवत्ता में सुधार करना, स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देना तथा पर्यावरणीय रूप से सतत वाणिज्यिक परिवहन की ओर संक्रमण को गति प्रदान करना।
  • कार्यान्वयन मंत्रालय: इस योजना का कार्यान्वयन सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) द्वारा किया जाएगा तथा इसका वित्तपोषण राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड (NCRPB) के माध्यम से किया जाएगा।
  • कार्यक्षेत्र: यह योजना राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) को कवर करती है, जहाँ दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान तथा उत्तर प्रदेश पात्र प्रतिस्थापन वाहनों के लिए 10 वर्ष तक मोटर वाहन कर में रियायत तथा पंजीकरण शुल्क में छूट प्रदान करेंगे।
  • पात्र लाभार्थियों को प्राप्त होंगे:-
    • मोटर वाहन कर में रियायत।
    • पंजीकरण शुल्क में छूट।
    • वाहन ऋणों पर 5% ब्याज अनुदान।
    • मूल उपकरण निर्माता (OEM) द्वारा न्यूनतम 8% छूट।
    • पात्र डीजल/CNG प्रतिस्थापन वाहनों के लिए मासिक ईंधन वाउचर।
    • इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के प्रतिस्थापन के लिए एकमुश्त वित्तीय सहायता तथा जमा प्रमाण-पत्र (Certificate of Deposit- CoD) ट्रेडिंग की सुविधा।
  • कार्यान्वयन तंत्र: इस योजना का कार्यान्वयन वाहन (VAHAN), वी-स्क्रैप एवं डिजीईएलवी (DigiELV) लोक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (PFMS), सहभागी ऋणदाताओं तथा ईंधन वाउचर प्रणालियों से जुड़े एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से किया जाएगा, ताकि पारदर्शी एवं पूर्णतः डिजिटल (End-to-End) कार्यान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।

एआई स्क्वाटिंग
(AI Squatting)

साइबर सुरक्षा शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि एआई स्क्वाटिंग (AI Squatting) एक नए साइबर खतरे के रूप में उभर रहा है, जो AI-जनित हैलुसिनेशन का दुरुपयोग कर फिशिंग हमलों एवं मैलवेयर का प्रसार करता है।

एआई स्क्वाटिंग के बारे में

  • एआई स्क्वाटिंग एक साइबर हमला तकनीक है, जिसमें हमलावर ऐसी फर्जी वेबसाइटों, सॉफ्टवेयर पैकेजों अथवा डिजिटल परिसंपत्तियों का पंजीकरण कर लेते हैं, जिनका नाम लार्ज लैंग्वेज मॉडल, हैलुसिनेशन (अर्थात् वास्तविकता में अस्तित्वहीन या गलत जानकारी उत्पन्न करने) के दौरान गलती से सुझा सकता है। इसके परिणामस्वरूप, उपयोगकर्ता एआई-जनित अनुशंसाओं के आधार पर दुर्भावनापूर्ण संसाधनों तक पहुँच जाते हैं।
  • हमले के विभिन्न रूप: इसमें फैंटम स्क्वाटिंग (Phantom Squatting) शामिल है, जो हैलुसिनेशन के दौरान उत्पन्न इंटरनेट डोमेनों को लक्ष्य बनाती है, तथा हैलुस्क्वाटिंग, जो हैलुसिनेशन के दौरान उत्पन्न सॉफ्टवेयर पैकेजों एवं रिपॉजिटरीज का दुरुपयोग करती है।
    • एआई हैलुसिनेशन एआई का ऐसा व्यवहार है, जिसमें मॉडल असत्य, मनगढ़ंत अथवा अस्तित्वहीन जानकारी उत्पन्न करता है।
  • प्रमुख विशेषताएँ
    • पूर्वानुमेय एआई त्रुटियों का दुरुपयोग: हमलावर मानवीय टाइपिंग त्रुटियों अथवा सॉफ्टवेयर कमजोरियों के बजाय एआई मॉडलों द्वारा बार-बार उत्पन्न होने वाले हैलुसिनेशन का लाभ उठाते हैं।
    • उपयोगकर्ता के विश्वास को लक्ष्य बनाना: पीड़ित विश्वसनीय एआई सहायकों द्वारा अनुशंसित लिंक अथवा पैकेज नामों पर भरोसा करके स्वेच्छा से दुर्भावनापूर्ण वेबसाइटों पर पहुँच जाते हैं या मैलवेयर इनस्टॉल कर लेते हैं।
    • समाप्त करना कठिन: चूँकि हैलुसिनेशन LLMs की संभाव्यता-आधारित प्रकृति से उत्पन्न होते हैं, इसलिए इस खतरे को पारंपरिक सॉफ्टवेयर पैचों के माध्यम से पूर्णतः समाप्त नहीं किया जा सकता।

निहितार्थ

  • साइबर सुरक्षा जोखिम: एआई स्क्वाटिंग फिशिंग, क्रेडेंशियल चोरी, मैलवेयर वितरण तथा सॉफ़्टवेयर आपूर्ति शृंखला हमलों को सुगम बना सकती है।
  • उद्यम सुरक्षा: कोडिंग, आईटी संचालन तथा स्वचालन के लिए एआई सहायकों का उपयोग करने वाले संगठनों के लिए अपने सिस्टम में दुर्भावनापूर्ण कोड सम्मिलित होने का जोखिम बढ़ जाता है।
  • सत्यापन की आवश्यकता: एआई-जनित लिंक, डोमेन, रिपॉज़िटरीज़ तथा सॉफ़्टवेयर पैकेजों का उपयोग करने से पहले उनका स्वतंत्र सत्यापन आवश्यक है।
  • नीतिगत चुनौती: यह खतरा एआई गवर्नेंस, सुरक्षित एआई परिनियोजन तंत्र तथा अधिक सुदृढ़ साइबर सुरक्षा ढाँचों की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
  • अन्य संबंधित हमले
    • टाइपोस्क्वाटिंग (Typosquatting): एक साइबर हमला, जिसमें हमलावर वैध वेबसाइटों के डोमेन नामों की गलत वर्तनी वाले संस्करणों का पंजीकरण कर उपयोगकर्ताओं को फिशिंग, मैलवेयर वितरण अथवा क्रेडेंशियल चोरी के उद्देश्य से फर्जी वेबसाइटों पर जाने के लिए भ्रमित करते हैं।
    • ब्रांड स्क्वाटिंग (Brand Squatting): एक साइबर हमला, जिसमें हमलावर प्रसिद्ध ब्रांडों या ट्रेडमार्कों के सदृश डोमेन, वेबसाइटें अथवा डिजिटल परिसंपत्तियाँ पंजीकृत कर वैध संगठनों का प्रतिरूपण करते हैं तथा उपयोगकर्ताओं को भ्रमित करते हैं।
    • पैकेज स्क्वाटिंग (Package Squatting): एक साइबर हमला, जिसमें हमलावर वैध लाइब्रेरी अथवा रिपॉज़िटरी के सदृश नामों वाले दुर्भावनापूर्ण सॉफ़्टवेयर पैकेज प्रकाशित करते हैं, जिससे डेवलपर्स उन्हें डाउनलोड कर अनजाने में हानिकारक कोड निष्पादित कर देते हैं।

भारत के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग पर ‘स्टेप अप’
(STEP UP) रिपोर्ट

डेलॉइट इंडिया एवं फिक्की (FICCI) ने फूडवर्ल्ड इंडिया 2026 सम्मेलन में संयुक्त रूप से “स्टेप अप (STEP UP)” रिपोर्ट जारी की, जिसमें भारत के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग की विकास क्षमता को रेखांकित किया गया है।

  • रिपोर्ट के अनुसार, मूल्य संवर्द्धन, प्रौद्योगिकी अपनाने तथा उपभोक्ता माँग में परिवर्तन के कारण वर्ष 2030 तक भारत का प्रसंस्कृत खाद्य बाजार 600 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँच सकता है।

भारत के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को समर्थन देने वाले प्रमुख कारक

  • उपभोक्ता माँग में परिवर्तन: बढ़ते शहरीकरण, उच्च प्रयोज्य आय तथा स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण सुरक्षित, पौष्टिक, प्रीमियम तथा रेडी-टू-ईट (Ready-to-Eat) खाद्य उत्पादों की माँग बढ़ रही है।
    • कार्यात्मक एवं पोषण-आधारित खाद्य पदार्थों की तीव्र वृद्धि मूल्य-संवर्द्धित उपभोग की ओर बढ़ते रुझान को दर्शाती है।
  • प्रौद्योगिकी एवं डिजिटल रूपांतरण: जनरेटिव एआई (Generative AI) को अपनाने से उत्पाद विकास, माँग पूर्वानुमान, स्मार्ट विनिर्माण तथा आपूर्ति शृंखला की दक्षता में तेजी आ रही है।
    • ई-कॉमर्स एवं क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म डिजिटल-फर्स्ट  खाद्य उत्पादों के लॉन्च के प्रमुख माध्यम बनकर उभरे हैं।
  • नीति एवं निर्यात पारितंत्र: सरकारी पहलें नियामकीय सरलीकरण, अवसंरचना विकास तथा वैश्विक ब्रांडिंग को बढ़ावा देकर भारत के खाद्य प्रसंस्करण पारितंत्र को सुदृढ़ कर रही हैं।
    • मूल्य-संवर्द्धित खाद्य निर्यातों पर बढ़ता जोर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रतिस्पर्द्धात्मकता को बढ़ा रहा है।

भारत के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग की संभावनाएँ

  • विशाल घरेलू बाजार का अवसर: 2030 तक प्रसंस्कृत खाद्य बाजार के 560–580 अरब अमेरिकी डॉलर तक तथा व्यापक खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के 600 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है।
  • मूल्य संवर्द्धन की व्यापक संभावना: भारत वर्तमान में अपने कृषि उत्पादन का केवल 12–13% ही प्रसंस्कृत करता है, जो खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के विस्तार तथा फसल कटाई के बाद होने वाली हानियों (Post-Harvest Losses) में कमी की व्यापक संभावनाओं को दर्शाता है।
  • मजबूत निर्यात क्षमता: कृषि उपज (कच्चा माल) के स्थान पर प्रसंस्कृत एवं ब्रांडेड खाद्य उत्पादों के बढ़ते निर्यात से 3–5 गुना अधिक निर्यात मूल्य प्राप्त किया जा सकता है, जिससे किसानों की आय तथा वैश्विक बाजार में भारत की उपस्थिति सुदृढ़ होगी।

फूडवर्ल्ड इंडिया 2026 के बारे में

  • फूडवर्ल्ड इंडिया 2026 खाद्य प्रसंस्करण एवं खाद्य व्यवसाय क्षेत्र के लिए फिक्की (FICCI) के प्रमुख सम्मेलन का 17वाँ संस्करण था, जिसमें नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत के भागीदारों, स्टार्ट-अप्स तथा शोधकर्ताओं ने भाग लिया।
  • थीम: इसकी थीम स्केलेबल ट्रांसफॉर्मेशन फॉर एफिशिएंसी एंड प्रॉफिटेबिलिटी टू अनलीश प्रोग्रेस है, जिसका केंद्रबिंदु प्रतिस्पर्द्धी एवं मूल्य-संचालित खाद्य प्रसंस्करण पारितंत्र का निर्माण करना था।

एमएच-60आर सीहॉक हेलीकॉप्टर 

9 10

हाल ही में संयुक्त राज्य अमेरिका ने घोषणा की कि एमएच-60आर सीहॉक हेलीकॉप्टर कोच्चि में भारतीय नौसेना को सौंप दिया गया है।

एमएच-60आर सीहॉक के बारे में

  • यह लॉकहीड मार्टिन (Lockheed Martin) द्वारा निर्मित ब्लैक हॉक का एक समुद्री बहु-भूमिका (Maritime Multi-Role) वाला हेलीकॉप्टर संस्करण है।
  • यह सभी मौसमों में संचालन करने वाला प्लेटफॉर्म है, जो एंटी-सबमरीन वारफेयर तथा एंटी-सरफेस वारफेयर  के लिए उन्नत एवियोनिक्स एवं सेंसरों से सुसज्जित है।
  • यह जहाजों एवं तटीय अड्डों दोनों से संचालन करने में सक्षम है तथा समुद्री क्षेत्र जागरूकता को सुदृढ़ करता है।
  • यह हेलीकॉप्टर मल्टी-मोड रडार, शत्रु के इलेक्ट्रॉनिक संकेतों का पता लगाने वाली इलेक्ट्रॉनिक सपोर्ट मेजर्स (ESM) प्रणाली, दिन-रात निगरानी हेतु इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल/इन्फ्रारेड (EO/IR) कैमरा, डेटा लिंक, एयरक्राफ्ट सर्वाइवेबिलिटी सिस्टम्स, डिपिंग सोनार तथा सोनोबॉय (Sonobuoys) सहित विभिन्न उन्नत सेंसरों से सुसज्जित है।

अभ्यास पिच ब्लैक 2026 

हाल ही में भारतीय वायुसेना (IAF) का दल अभ्यास पिच ब्लैक 2026 में भाग लेने के लिए ऑस्ट्रेलिया पहुँचा है।

अभ्यास पिच ब्लैक के बारे में

  • यह रॉयल ऑस्ट्रेलियन एयर फोर्स (RAAF) द्वारा आयोजित द्विवार्षिक, बहुराष्ट्रीय एवं बड़े पैमाने का वायु युद्धाभ्यास है।
  • इसमें हिंद-प्रशांत एवं यूरोप की वायु सेनाएँ भाग लेती हैं तथा जटिल एवं यथार्थपरक वायु युद्ध परिदृश्यों का अनुकरण किया जाता है।
  • मुख्य फोकस क्षेत्र: इसमें मुख्य फोकस अंतरसंचालनीयता, कॉम्बैट फ्लाइंग कौशल, व्यावसायिक सैन्य संबंध तथा दीर्घकालिक सामरिक साझेदारियों पर किया जा रहा है।
  • अवस्थिति: इसका आयोजन उत्तरी ऑस्ट्रेलिया में स्थित RAAF के डार्विन (Darwin), टिंडल (Tindal) तथा एंबरली (Amberley) वायुसेना अड्डों पर किया जा रहा है।
  • प्रतिभागी: वर्ष 2026 के संस्करण में 20 देशों की सक्रिय सैन्य टुकड़ियाँ एवं सैन्य कर्मी भाग ले रहे हैं।

भारत के लिए महत्त्व

  • यह भारतीय वायुसेना (IAF) को उन्नत वायु सेनाओं के साथ बहुराष्ट्रीय, उच्च-तीव्रता वाले वायु युद्ध प्रशिक्षण का संचालनात्मक अनुभव प्रदान करता है।
  • यह क्वाड (Quad) जैसे मंचों के साथ हिंद-प्रशांत सुरक्षा संरचना में भारत की बढ़ती भागीदारी को भी प्रतिबिंबित करता है।

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