37वाँ अंतरराष्ट्रीय जीवविज्ञान ओलंपियाड (IBO), 2026
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हाल ही में भारत ने विलनियस (लिथुआनिया) में आयोजित 37वें अंतरराष्ट्रीय जीवविज्ञान ओलंपियाड (International Biology Olympiad- IBO), 2026 में 1 स्वर्ण और 3 रजत पदक अर्जित किए हैं।
अंतरराष्ट्रीय जीवविज्ञान ओलंपियाड (IBO) के बारे में
- यह जीवविज्ञान के क्षेत्र में असाधारण प्रतिभाशाली माध्यमिक विद्यालय के विद्यार्थियों के लिए आयोजित एक वार्षिक अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता है।
- यह युवा विद्यार्थियों के मध्य वैज्ञानिक उत्कृष्टता, उन्नत समस्या-समाधान क्षमता तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देता है।
- आयोजन: इस प्रतियोगिता का आयोजन प्रत्येक वर्ष एक अलग देश द्वारा किया जाता है।
- प्रमुख विषय क्षेत्र
- कोशिका एवं आणविक जीवविज्ञान
- आनुवंशिकी एवं विकास
- पादप एवं प्राणी विज्ञान
- पारिस्थितिकी एवं प्राणी व्यवहार विज्ञान
- जैव वर्गिकी।
- प्रायोगिक परीक्षाएँ प्रयोगशाला एवं प्रायोगिक कौशलों का परीक्षण करती हैं।
IBO 2026 के बारे में
- इसमें 78 देशों के 307 विद्यार्थियों ने भाग लिया; भारत ने IBO में अपनी 26वीं भागीदारी की।
- साथ ही कुल 31 स्वर्ण, 61 रजत तथा 91 कांस्य पदक प्रदान किए गए।
- मेजबान: विलनियस विश्वविद्यालय जीवन विज्ञान केंद्र (Vilnius University Life Sciences Centre), लिथुआनिया।
- पदक विजेता
- भाव्या गुणवाल (हरियाणा): स्वर्ण पदक
- सौमिल माइती (पश्चिम बंगाल): रजत पदक
- निशित कलानी (राजस्थान): रजत पदक
- अनमोल कुमार (पंजाब): रजत पदक।
- भारत का समग्र प्रदर्शन: अब तक 104 भारतीय विद्यार्थियों ने IBO में भाग लिया है। भारत ने 17 स्वर्ण, 69 रजत और 17 कांस्य पदक के साथ 1 सम्मानजनक उल्लेख Honourable Mention- यह उच्च स्तर की उपलब्धि को मान्यता प्रदान करता है, भले ही पदक न प्राप्त हुआ हो) भी प्राप्त किया है।
अंतरराष्ट्रीय विज्ञान ओलंपियाड के बारे में
- अंतरराष्ट्रीय विज्ञान ओलंपियाड प्रतिष्ठित वार्षिक प्रतियोगिताएँ हैं, जो असाधारण विद्यालय में अध्ययनरत विद्यार्थियों की उन्नत सैद्धांतिक तथा प्रायोगिक क्षमता का परीक्षण करती हैं।
- ये वैज्ञानिक अभिरुचि, सृजनात्मकता, वैचारिक समझ तथा वैश्विक शैक्षणिक आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करती हैं।
- संगठन: सभी ओलंपियाड के लिए कोई एक स्थायी मुख्यालय अथवा भौतिक केंद्र नहीं है।
- प्रत्येक प्रतियोगिता के लिए मेजबान देश का चयन प्रतिवर्ष परिवर्तित होता रहता है।
- भारत में होमी भाभा विज्ञान शिक्षा केंद्र (HBCSE-TIFR) चयन, प्रशिक्षण तथा भागीदारी के लिए नोडल केंद्र के रूप में कार्य करता है।
- प्रमुख श्रेणियाँ
- अंतरराष्ट्रीय गणित ओलंपियाड (IMO): गणित; स्थापना वर्ष 1959।
- अंतरराष्ट्रीय भौतिकी ओलंपियाड (IPhO): भौतिकी; स्थापना वर्ष 1967।
- अंतरराष्ट्रीय रसायन ओलंपियाड (IChO): रसायन विज्ञान; स्थापना वर्ष 1968।
- अंतरराष्ट्रीय सूचना विज्ञान ओलंपियाड (IOI): सूचना विज्ञान/कंप्यूटर विज्ञान; स्थापना वर्ष 1989।
- अंतरराष्ट्रीय जीवविज्ञान ओलंपियाड (IBO): जीवविज्ञान; स्थापना वर्ष 1990।
- अंतरराष्ट्रीय खगोल विज्ञान एवं खगोल भौतिकी ओलंपियाड (IOAA): खगोल विज्ञान एवं खगोल भौतिकी।
- अंतरराष्ट्रीय भू-विज्ञान ओलंपियाड (IESO): भू-विज्ञान।
- अंतरराष्ट्रीय अर्थशास्त्र ओलंपियाड (IEO): अर्थशास्त्र।
- अन्य प्रतियोगिताओं में खगोल विज्ञान, भू-विज्ञान तथा अर्थशास्त्र ओलंपियाड भी शामिल हैं।
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क्यूडेंगा (QDENGA): भारत में स्वीकृत पहली डेंगू वैक्सीन
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हाल ही में केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने डेंगू की रोकथाम के लिए क्यूडेंगा® (Qdenga®) को भारत की पहली डेंगू वैक्सीन के रूप में अनुमोदन प्रदान किया है।
क्यूडेंगा® (डेंगू टेट्रावैलेंट वैक्सीन) के बारे में
- क्यूडेंगा® एक जीवित, क्षीणीकृत (ऐसा जीवित रोगजनक, जिसकी रोगजनकता (Virulence) को प्रयोगशाला में कम कर दिया गया हो, ताकि वह गंभीर रोग उत्पन्न किए बिना प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया उत्पन्न कर सके) टेट्रावैलेंट डेंगू वैक्सीन है, जिसे रिकॉम्बिनेंट डीएनए प्रौद्योगिकी का उपयोग कर डेंगू वायरस टाइप-2 (DENV-2) आनुवंशिक ढाँचे का उपयोग कर विकसित किया गया है तथा इसमें आनुवंशिक रूप से संशोधित जीव (GMOs) सम्मिलित हैं।
- इसे डेंगू वायरस के सभी चार सीरोटाइपों से सुरक्षा प्रदान करने के लिए विकसित किया गया है।
- स्वरूप: पुनर्गठन हेतु फ्रीज-ड्राइड पाउडर।
- दवा देने का माध्यम: सबक्यूटेनियस इंजेक्शन (त्वचा के नीचे दिया जाने वाला इंजेक्शन)।
- खुराक अनुसूची: 0 एवं 3 माह पर 0.5 मि.ली. की दो खुराकें।
- पात्र आयु वर्ग: 4–60 वर्ष।
- विकसितकर्ता: टाकेदा जीएमबीएच (Takeda GmbH), जर्मनी।
- स्वीकृति का आधार: औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 तथा औषधि नियम, 1945 के अंतर्गत मूल्यांकन के बाद स्वीकृत।
- भारत में 4–60 वर्ष आयु वर्ग पर किए गए चरण-III (Phase III) के सुरक्षा एवं प्रतिरक्षाजनकता (Immunogenicity) अध्ययन द्वारा समर्थित।
वैश्विक स्थिति
- वैश्विक नियामकीय स्वीकृति: यूरोपीय संघ (EU), यूनाइटेड किंगडम, स्विट्जरलैंड, इंडोनेशिया, मलेशिया तथा थाईलैंड सहित 42 देशों में स्वीकृत।
- WHO मान्यता: इसे विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से पूर्व-योग्यता प्राप्त हो गई है।
- वैश्विक उपयोग: विश्वभर में 2.4 करोड़ (24 मिलियन) से अधिक खुराकें वितरित की जा चुकी है।
- सुरक्षा प्रोफाइल: विपणन-पश्चात् निगरानी में वैक्सीन की सुरक्षा संतोषजनक पाई गई तथा कोई महत्त्वपूर्ण सुरक्षा संबंधी जोखिम या चिंता परिलक्षित नहीं हुई।
डेंगू के बारे में
- कारण: डेंगू वायरस (DENV), जो फ्लैविवायरस (Flavivirus) वंश का है तथा इसके चार सीरोटाइप (DENV-1, DENV-2, DENV-3 एवं DENV-4) हैं।
- संचरण: संक्रमित मादा एडीज एजिप्टी (तथा एडीज एल्बोपिक्टस) मच्छर के काटने से होता है।
- काटने का प्रमुख समय: मुख्यतः दिन के समय।
- लक्षण: तीव्र बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों एवं जोड़ों में दर्द, त्वचा पर चकत्ते; गंभीर मामलों में डेंगू रक्तस्रावी ज्वर अथवा डेंगू शॉक सिंड्रोम (डेंगू की एक गंभीर जटिलता, जिसमें प्लाज्मा रिसाव के कारण परिसंचरण विफलता एवं शॉक की स्थिति उत्पन्न हो जाती है ) हो सकता है।
- रोकथाम: वाहक नियंत्रण, मच्छरों के प्रजनन स्रोतों का उन्मूलन, व्यक्तिगत सुरक्षा उपाय तथा जहाँ अनुशंसित हो वहाँ टीकाकरण।
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फीफा विश्व कप 2026
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हाल ही में स्पेन ने फाइनल में अर्जेंटीना को अतिरिक्त समय में 1–0 से हराकर फीफा विश्व कप 2026 का खिताब अपने नाम किया है।
फीफा विश्व कप 2026 विजेता
- चैंपियन: स्पेन।
- इस जीत के साथ स्पेन ने अपना दूसरा फीफा विश्व कप खिताब अपने नाम किया।
- तीसरा स्थान: इंग्लैंड ने तीसरे स्थान के प्लेऑफ में फ्राँस को 6–4 से हराकर तीसरा स्थान प्राप्त किया।
- यह वर्ष 1966 में विश्व कप जीतने के बाद इंग्लैंड का सर्वश्रेष्ठ विश्व कप प्रदर्शन रहा।
फीफा विश्व कप 2026 पुरस्कार
- गोल्डन बूट विजेता: किलियन म्बाप्पे (फ्राँस) ने टूर्नामेंट में 10 गोल कर गोल्डन बूट जीता और विश्व कप में अपने कॅरियर के कुल 22 गोल पूरे किए।
- वे लगातार दो संस्करणों में विश्व कप गोल्डन बूट जीतने वाले पहले खिलाड़ी बने।
- लियोनेल मेसी (अर्जेंटीना) ने 8 गोल के साथ सिल्वर बूट, जबकि जूड बेलिंघम (इंग्लैंड) ने 7 गोल के साथ ब्रॉन्ज बूट पुरस्कार जीता।
- गोल्डन बॉल (सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी): रोद्री (स्पेन) को स्पेन की खिताबी जीत में उनके उत्कृष्ट मिडफील्ड प्रदर्शन के लिए गोल्डन बॉल प्रदान की गई।
- लियोनेल मेसी (अर्जेंटीना) को सिल्वर बॉल प्रदान की गई।
- किलियन म्बाप्पे (फ्राँस) को ब्रॉन्ज बॉल प्रदान की गई।
- गोल्डन ग्लव (सर्वश्रेष्ठ गोलकीपर): उनाई सिमोन (स्पेन) ने सात क्लीन शीट दर्ज कर गोल्डन ग्लव (Golden Glove) पुरस्कार जीता।
- फीफा सर्वश्रेष्ठ युवा खिलाड़ी पुरस्कार: पाउ कुबार्सी (स्पेन) को एक युवा डिफेंडर (Defender) के रूप में उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए यह पुरस्कार प्रदान किया गया है।
- फीफा फेयर प्ले ट्रॉफी: नीदरलैंड को उत्कृष्ट अनुशासन एवं खेल भावना के लिए फीफा फेयर प्ले ट्रॉफी प्रदान की गई।
फीफा विश्व कप 2030
- फीफा विश्व कप 2030 की संयुक्त मेजबानी मोरक्को, पुर्तगाल और स्पेन द्वारा की जाएगी।
- इसके अतिरिक्त, टूर्नामेंट की 100वीं वर्षगाँठ के उपलक्ष्य में उरुग्वे, अर्जेंटीना और पराग्वे में विशेष शताब्दी उद्घाटन मैच आयोजित किए जाएँगे।
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डिस्लिपिडीमिया
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भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के एक राष्ट्रव्यापी अध्ययन में पाया गया कि भारत के 87.3% वयस्कों में कम-से-कम एक असामान्य लिपिड स्तर पाया गया, जिससे डिस्लिपिडीमिया (Dyslipidemia) एक प्रमुख जनस्वास्थ्य चिंता के रूप में उभरकर सामने आया है।
आईसीएमआर अध्ययन के प्रमुख निष्कर्ष
- उच्च व्यापकता: अध्ययन में सभी राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों को शामिल करने वाले राष्ट्रीय प्रतिनिधिक ICMR-INDIAB सर्वेक्षण के 23,665 वयस्कों की लिपिड प्रोफाइल का विश्लेषण किया गया।
- लगभग प्रत्येक 10 में से 9 वयस्कों में कम-से-कम एक असामान्य लिपिड पैरामीटर पाया गया।
- प्रारंभिक एवं व्यापक जोखिम: 30–39 वर्ष आयु वर्ग के वयस्कों में डिस्लिपिडीमिया सर्वाधिक पाया गया, जिससे संकेत मिलता है कि हृदय-वाहिका रोगों का जोखिम अपेक्षाकृत कम आयु में ही प्रारंभ हो जाता है।
- अनुमानतः 35.5 करोड़ भारतीयों में रक्त शर्करा, रक्तचाप एवं शरीर का वजन सामान्य होने के बावजूद असामान्य लिपिड स्तर पाए गए।
- महिलाओं में अधिक बोझ: पुरुषों की तुलना में महिलाओं में डिस्लिपिडीमिया की व्यापकता अधिक पाई गई, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों की अपेक्षा शहरी आबादी अधिक प्रभावित है।
डिस्लिपिडीमिया के बारे में
- डिस्लिपिडीमिया रक्त में वसा (लिपिड) के अस्वास्थ्यकर असंतुलन को संदर्भित करता है, जिसमें उच्च LDL कोलेस्ट्रॉल, उच्च ट्राइग्लिसराइड, निम्न HDL कोलेस्ट्रॉल अथवा उच्च कुल कोलेस्ट्रॉल शामिल होते हैं।
- लिपिड प्रोफाइल एक रक्त परीक्षण है, जो हृदय-वाहिका स्वास्थ्य से संबंधित प्रमुख वसाओं का आकलन करता है।
- यह मुख्यतः उच्च घनत्व लिपोप्रोटीन (HDL) अथवा “अच्छा” कोलेस्ट्रॉल, निम्न घनत्व लिपोप्रोटीन (LDL) अथवा “खराब” कोलेस्ट्रॉल तथा ट्राइग्लिसराइड्स का मूल्यांकन करता है।
- इनका स्वस्थ स्तर बनाए रखने से धमनियों में प्लाक (एथेरोस्क्लेरोसिस) के जमाव को कम करने तथा हृदय रोग एवं स्ट्रोक के जोखिम को घटाने में सहायता मिलती है।
- डिस्लिपिडीमिया के लिए उत्तरदायी कारक
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- अस्वास्थ्यकर आहार: अत्यधिक कार्बोहाइड्रेट, अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ एवं ट्रांस वसा लिपिड स्तरों को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करते हैं।
- गतिहीन जीवनशैली: शारीरिक निष्क्रियता तथा लंबे समय तक बैठे रहने की प्रवृत्ति चयापचयी (Metabolic) जोखिम को बढ़ाती है।
- चयापचयी विकार: मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा एवं इंसुलिन प्रतिरोध डिस्लिपिडीमिया के अधिक जोखिम से जुड़े हैं।
- आनुवंशिक कारक: भारतीयों सहित दक्षिण एशियाई आबादी में प्रतिकूल लिपिड प्रोफाइल तथा समयपूर्व हृदय-वाहिका रोगों के प्रति आनुवंशिक प्रवृत्ति हो सकती है।
- प्रभाव
- हृदय-वाहिका रोग: डिस्लिपिडीमिया धमनियों में वसा के जमाव को बढ़ावा देता है, जिससे हृदयाघात, स्ट्रोक तथा अन्य हृदय-वाहिका रोगों का जोखिम बढ़ जाता है।
- मूक स्वास्थ्य जोखिम: चूँकि डिस्लिपिडीमिया के प्रायः कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते हैं, इसलिए स्वस्थ दिखने वाले, युवा अथवा सामान्य वजन वाले व्यक्ति भी अपने हृदय-वाहिका जोखिम से अनभिज्ञ रह सकते हैं।
- डिस्लिपिडीमिया की रोकथाम के उपाय
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- प्रारंभिक जाँच: मधुमेह, उच्च रक्तचाप या मोटापे तक सीमित रखने के बजाय लिपिड स्क्रीनिंग का दायरा विस्तारित किया जाए।
- स्वस्थ आहार: फल, सब्जियाँ, साबुत अनाज एवं रेशायुक्त (फाइबर युक्त) खाद्य पदार्थों का सेवन बढ़ाया जाए तथा अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स एवं ट्रांस फेट का सेवन कम किया जाए।
- नियमित व्यायाम: नियमित शारीरिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाए तथा गतिहीन जीवनशैली न अपनाई जाए।
- स्वस्थ वजन: उचित शरीर भार बनाए रखा जाए तथा मधुमेह एवं उच्च रक्तचाप का प्रभावी प्रबंधन किया जाए।
- चिकित्सीय देखभाल: निर्धारित दवाओं का नियमित सेवन किया जाए तथा असामान्य लिपिड स्तर पाए जाने पर समय पर चिकित्सकीय परामर्श लिया जाए।
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ऑपरेशन वज्र
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ऑपरेशन वज्र (Operation Vajra) के अंतर्गत केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN) ने अंतरराष्ट्रीय अवैध आपूर्ति नेटवर्क से जुड़े ट्रामाडोल की 12 करोड़ गोलियाँ जब्त की हैं।
ऑपरेशन वज्र के बारे में
- ऑपरेशन वज्र एक खुफिया सूचना-आधारित मादक पदार्थ निरोधी अभियान था, जिसके अंतर्गत लगभग 30 मीट्रिक टन उच्च-शक्ति वाली ट्रामाडोल हाइड्रोक्लोराइड (250 मि.ग्रा.) की 12 करोड़ (120 मिलियन) गोलियों को अवैध आपूर्ति तंत्र में पहुँचने से रोका गया।
- संचालनकर्ता: यह अभियान केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN), ग्वालियर की निवारक टीमों द्वारा संचालित किया गया।
- विधिक आधार: मादक औषधि एवं मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम (NDPS Act), 1985।
ट्रामाडोल हाइड्रोक्लोराइड के बारे में
- ट्रामाडोल हाइड्रोक्लोराइड (Tramadol Hydrochloride) एक केंद्रीय रूप से कार्य करने वाली कृत्रिम ओपिओइड दर्दनाशक औषधि है, जिसका उपयोग मध्यम से गंभीर दर्द के उपचार हेतु किया जाता है।
- यह आंशिक रूप से μ-ओपिओइड रिसेप्टरों पर कार्य करती है तथा सेरोटोनिन एवं नॉरएपिनेफ्रिन के पुनर्ग्रहण को भी प्रभावित करती है।
- “फाइटर ड्रग” अथवा “आईएसआईएस ड्रग”: ट्रामाडोल को प्रायः “फाइटर ड्रग” अथवा “आईएसआईएस ड्रग” कहा जाता है, क्योंकि इसके आतंकवादी एवं उग्रवादी संगठनों द्वारा दुरुपयोग की सूचना मिली है।
- इसकी उच्च मात्रा दर्द एवं थकान की अनुभूति को कम कर उत्पन्न कर सकती है, जिससे इनके लड़ाके लंबे समय तक युद्धक गतिविधियों में व्यस्त रह सकते हैं।
- इसकी अवैध तस्करी का संबंध अफ्रीका एवं मध्य-पूर्व के कुछ भागों में संगठित अपराध तथा आतंकवाद के वित्तपोषण से भी पाया गया है।
- प्रमुख विशेषताएँ
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- चिकित्सीय उपयोग: ट्रामाडोल का वैध रूप से चिकित्सकीय पर्चे पर उपलब्ध दर्दनानाशक के रूप में मध्यम से गंभीर दर्द के उपचार में उपयोग किया जाता है।
- दुरुपयोग की संभावना: अत्यधिक अथवा गैर-चिकित्सीय उपयोग से निर्भरता, लत तथा अन्य स्वास्थ्य संबंधी दुष्प्रभाव उत्पन्न हो सकते हैं। इसलिए इसकी अवैध आपूर्ति एक प्रमुख जनस्वास्थ्य एवं राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चिंता का विषय बनी हुई है।
- आतंकवाद का वित्तपोषण: उग्रवादी समूहों द्वारा इसके उपयोग के अतिरिक्त, ट्रामाडोल की अवैध तस्करी तथा इसके आपूर्ति मार्गों पर अवैध कर वसूली से आतंकवादी एवं संगठित आपराधिक समूहों को वित्तीय संसाधन प्राप्त हो सकते हैं।
- भारत में नियामकीय स्थिति: वर्ष 2018 में ट्रामाडोल को मादक औषधि एवं मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम (NDPS Act), 1985 के अंतर्गत मनोप्रभावी पदार्थ (साइकोट्रॉपिक पदार्थ ) के रूप में अधिसूचित किया गया था।
- इसके निर्माण, कब्जे, बिक्री एवं निर्यात पर भारत के मादक पदार्थ नियंत्रण ढाँचे के अंतर्गत कड़े नियामकीय नियंत्रण लागू हैं।
केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN) के बारे में
- केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो, वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग के अधीन एक विशिष्ट नियामक एवं प्रवर्तन एजेंसी है।
- इसका नेतृत्व भारत के नारकोटिक्स आयुक्त द्वारा किया जाता है।
- स्थापना: इसकी उत्पत्ति नवंबर 1950 में अफीम विभाग (Opium Department) के रूप में हुई थी।
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