UPSC PYQs

Prelims, Mains & Optional PYQs

UPSC Notes

Comprehensive & Short Notes

संक्षेप में समाचार

7 Mar 2026

रायसीना डायलॉग 2026

6 3

हाल ही में प्रधानमंत्री ने नई दिल्ली में रायसीना डायलॉग 2026 के 11वें संस्करण का उद्घाटन किया, जिसमें फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब ने मुख्य भाषण दिया।

रायसीना डायलॉग के बारे में

  • यह भारत का प्रमुख बहुपक्षीय सम्मेलन है, जो भू-राजनीति और भू-अर्थव्यवस्था से संबंधित विषयों पर केंद्रित है। इसमें वैश्विक नेता, नीति-निर्माता, सैन्य अधिकारी, विद्वान और उद्योग विशेषज्ञ प्रमुख अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक मुद्दों पर चर्चा करने के लिए एकत्रित होते हैं।
  • उत्पत्ति: यह सम्मेलन वर्ष 2016 से प्रतिवर्ष नई दिल्ली में आयोजित किया जाता है। इसका आयोजन ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ORF) द्वारा विदेश मंत्रालय के सहयोग से किया जाता है।
    • पहला संस्करण (2016): पहले संस्करण का विषय था “एशिया: क्षेत्रीय और वैश्विक संपर्क”
    • नाम का स्रोत: “रायसीना डायलॉग” का नाम दिल्ली के रायसीना हिल से लिया गया है, जहाँ भारत सरकार का मुख्य प्रशासनिक केंद्र स्थित है।
  • 2026 की थीम: “संस्कार– प्रतिपादन, समायोजित, प्रगति ”
    • अर्थ: इसका आशय वैश्विक व्यवस्था को “परिष्कृत” करने से है, जिसमें देशों द्वारा अपने हितों का जिम्मेदाराना ढंग से प्रतिपादन, विविध दृष्टिकोणों को समायोजित करना और सामूहिक प्रगति को बढ़ावा देना शामिल है।
  • प्रतिभागी: सम्मेलन में लगभग 110 देशों से करीब 2,700 प्रतिभागियों ने भाग लिया।
    • इनमें मंत्री, पूर्व राष्ट्राध्यक्ष, सांसद, सैन्य नेता, थिंक-टैंक विशेषज्ञ और प्रौद्योगिकी क्षेत्र के प्रमुख नेता शामिल थे।
  • रायसीना डायलॉग 2026 के छह विषयगत स्तंभ
    • विवादित सीमाएँ: शक्ति, ध्रुवीकरण और भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्द्धा।
    • साझा संसाधनों का पुनर्निर्माण: वैश्विक शासन व्यवस्था और सामूहिक कार्रवाई।
    • सफेद व्हेल: एजेंडा 2030 और सतत् विकास लक्ष्यों (SDG) की प्राप्ति।
    • अंतिम समय: जलवायु परिवर्तन, संघर्ष और वैश्विक स्थिरता की चुनौतियाँ।
    • भविष्य की दुनिया: प्रौद्योगिकी शासन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल परिवर्तन।
    • टैरिफ के दौर में व्यापार: आर्थिक लचीलापन और वैश्विक व्यापार व्यवधान।

महत्त्व

  • वैश्विक रणनीतिक मंच: यह सम्मेलन म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन और शांगरी-ला डायलॉग जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों के समान महत्त्व रखता है।
  • कूटनीतिक मंच: यह वैश्विक कूटनीति और रणनीतिक संवाद में भारत की एक संगठक शक्ति के रूप में भूमिका को सुदृढ़ करता है।
  • नीतिगत आदान-प्रदान: यह सरकारों, थिंक-टैंकों, उद्योग जगत और नागरिक समाज के बीच उभरती वैश्विक चुनौतियों पर सहयोग और विचार-विमर्श को बढ़ावा देता है।

ग्रैविटी बम

अमेरिका ने यह दावा करने के बाद कि ईरान की वायु-रक्षा प्रणालियाँ अत्यधिक कमजोर हो चुकी हैं, अपने सैन्य अभियानों में ग्रैविटी बम के उपयोग की ओर रणनीतिक परिवर्तन की घोषणा की है।

ग्रैविटी बम के बारे में

  • ग्रैविटी बम, जिसे फ्री-फॉल बम (Free-fall Bomb) या “डंब बम” (Dumb Bomb) भी कहा जाता है, एक बिना इंजन वाला हवाई गोला-बारूद है, जिसे विमान से गिराया जाता है। इसकी उड़ान का मार्ग मुख्यतः गुरुत्वाकर्षण, वायुगतिकी (Aerodynamics) तथा विमान की गति और ऊँचाई पर निर्भर करता है।
  • नाभिकीय ग्रैविटी बम की कार्यप्रणाली 
    • एक न्यूक्लियर ग्रैविटी बम को विमान से लक्ष्य की ओर छोड़ा जाता है और यह गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव से नीचे गिरता है। सटीकता बढ़ाने के लिए इसमें कभी-कभी टेल-किट सिस्टम (Tail-kit systems) लगाए जाते हैं।
    • विस्फोट पूर्व-निर्धारित ऊँचाई या भूमि से टकराने पर ऑनबोर्ड सेंसर द्वारा सक्रिय होता है।
    • इसके बाद नाभिकीय विखंडन/संलयन प्रतिक्रिया से अत्यधिक विस्फोट, ऊष्मा और विकिरण ऊर्जा उत्पन्न होती है।
  • उदाहरण: संयुक्त राज्य अमेरिका व्यापक रूप से मार्क-80 (Mark 80) शृंखला के बमों का उपयोग करता है, जिनमें शामिल हैं:
    • Mk 82 बम (500 पाउंड): रडार प्रतिष्ठानों या हल्के वाहनों जैसे नरम लक्ष्यों को नष्ट करने के लिए।
    • Mk 83 बम (1,000 पाउंड): मजबूत संरचनाओं और पुलों पर हमले के लिए।
    • Mk 84 बम (2,000 पाउंड): एक भारी बंकर-बस्टर, जो गहराई में स्थित लक्ष्यों को नष्ट करने में सक्षम है।
  • आधुनिक ग्रैविटी बमों में जॉइंट डायरेक्ट अटैक मुनिशन (JDAM) किट लगाई जा सकती है, जिससे जीपीएस मार्गदर्शन और नियंत्रित फिन जुड़ जाते हैं और वे सटीक-निर्देशित हथियार (Precision-guided weapons) बन जाते हैं।
  • भारत का बम: भारत ने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित लॉन्ग-रेंज ग्लाइड बम (LRGB) “गौरव” बनाया है।
    • यह 1,000 किलोग्राम वर्ग का स्वदेशी स्मार्ट बम है। इसे सुखोई-30 MKI लड़ाकू विमान से गिराया जा सकता है।
    • इसका बिना पंख वाला संस्करण “गौतम” कहलाता है।

ग्रैविटी बम की प्रमुख विशेषताएँ

  • लागत-प्रभावी: ग्रैविटी बम लंबी दूरी की मिसाइलों की तुलना में काफी सस्ते होते हैं। JDAM किट से युक्त एक बम की कीमत लगभग 25,000–30,000 डॉलर होती है, जबकि क्रूज मिसाइलों की लागत लाखों डॉलर तक हो सकती है।
  • बहु-उपयोगिता: ये विभिन्न वजन श्रेणियों में बनाए जाते हैं, जिससे हल्के उपकरणों से लेकर मजबूत भूमिगत बंकरों तक विभिन्न सैन्य लक्ष्यों को निशाना बनाया जा सकता है।
  • व्यापक तैनाती: कम लागत और आसान परिवहन के कारण, वायु प्रभुत्व स्थापित होने के बाद बड़े पैमाने पर लगातार हवाई बमबारी संभव होती है।
  • विस्तृत विमान अनुकूलता: इन्हें F-35 लाइटनिंग II जैसे लड़ाकू विमानों और B-52 स्ट्रैटोफोर्ट्रेस जैसे रणनीतिक बमवर्षकों सहित कई प्रकार के विमानों से छोड़ा जा सकता है।

सरल संरचना, लचीले उपयोग और कम लागत के कारण ग्रैविटी बम आधुनिक युद्ध में सबसे व्यापक रूप से उपयोग किए जाने वाले पारंपरिक हवाई हथियारों में से एक बने हुए हैं।

राष्ट्रपति द्वारा राज्यपाल और उपराज्यपाल की नियुक्तियाँ

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भारत के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में राज्यपालों तथा उपराज्यपालों की कई महत्त्वपूर्ण नियुक्तियाँ और स्थानांतरण किए हैं।

राज्यपाल की नियुक्ति से संबंधित संवैधानिक प्रावधान

  • राज्यपाल: राज्यपाल का पद संविधान के भाग VI में वर्णित है, जो अनुच्छेद-153 से 162 तथा संबंधित प्रावधानों में शामिल है।
  • अनुच्छेद-153: प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्यपाल होगा। हालाँकि, एक ही व्यक्ति को दो या अधिक राज्यों का राज्यपाल नियुक्त किया जा सकता है।
    • सातवाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1956: इस संशोधन के माध्यम से अनुच्छेद-153 में परिवर्तन किया गया, जिससे एक व्यक्ति को एक साथ दो या अधिक राज्यों का राज्यपाल नियुक्त करने की अनुमति दी गई।
  • अनुच्छेद-155 – राज्यपाल की नियुक्ति: राज्यपाल की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा उनके हस्ताक्षर और मुहरयुक्त अधिपत्र (Warrant) के माध्यम से की जाती है।
    • यह नियुक्ति केंद्रीय मंत्रिपरिषद की सलाह पर की जाती है।
  • अनुच्छेद-156 – कार्यकाल: राज्यपाल राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद पर बने रहते हैं।
    • सामान्यतः उनका कार्यकाल पाँच वर्ष का होता है, लेकिन उन्हें इससे पहले भी पद से हटाया जा सकता है।
    • “प्रसाद सिद्धांत”: राज्यपाल राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद पर रहते हैं। यद्यपि उनका कार्यकाल पाँच वर्ष का होता है, परंतु सर्वोच्च न्यायालय ने बी.पी. सिंघल मामले में स्पष्ट किया कि राज्यपाल को हटाने का निर्णय मनमाना या बिना उचित कारण के नहीं होना चाहिए।
  • अनुच्छेद-159 – शपथ या प्रतिज्ञान: राज्यपाल राज्य के उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश (या उपलब्ध वरिष्ठतम न्यायाधीश) के समक्ष शपथ या प्रतिज्ञान लेते हैं।

उपराज्यपाल से संबंधित संवैधानिक प्रावधान

  • केंद्रशासित प्रदेशों का प्रशासन: केंद्र-शासित प्रदेशों का प्रावधान संविधान के भाग VIII (अनुच्छेद-239–241) में दिया गया है।
  • अनुच्छेद-239 – केंद्रशासित प्रदेशों का प्रशासन: प्रत्येक केंद्रशासित प्रदेश का प्रशासन राष्ट्रपति द्वारा संचालित किया जाता है।
    • राष्ट्रपति अपने प्रतिनिधि के रूप में एक प्रशासक (आमतौर पर उपराज्यपाल) नियुक्त करते हैं, जो उनकी ओर से उस केंद्रशासित प्रदेश का प्रशासन संचालित करता है।

कुर्द समुदाय

7 2

इजरायल–ईरान संघर्ष के बढ़ते तनाव के बीच कुर्द सशस्त्र समूहों के साथ अमेरिकी केंद्रीय खुफिया एजेंसी (CIA) की संभावित सहभागिता से जुड़ी रिपोर्टों ने कुर्द समुदाय को फिर से वैश्विक चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

कुर्दों के बारे में

  • कुर्द मेसोपोटामिया के मैदानों और आस-पास के पर्वतीय क्षेत्रों के एक स्वदेशी जातीय समूह हैं, जो मुख्यतः तुर्किए, ईरान, इराक और सीरिया में विस्तृत हैं।
  • उनका पारंपरिक निवास क्षेत्र “कुर्दिस्तान” कहलाता है, जो एक सांस्कृतिक–भौगोलिक क्षेत्र है, न कि कोई संप्रभु राष्ट्र-राज्य।
  • लगभग 3 से 4 करोड़ की आबादी के साथ, कुर्दों को विश्व का सबसे बड़ा राज्यविहीन (stateless) जातीय समूह माना जाता है।

विभिन्न देशों में कुर्द समुदाय

  • तुर्किए में कुर्द: कुर्द तुर्किए की जनसंख्या का लगभग 15–19% हैं और उन्हें ऐतिहासिक रूप से भाषा और सांस्कृतिक पहचान से संबंधित प्रतिबंधों का सामना करना पड़ा है। वर्ष 1984 से कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी (PKK) द्वारा चलाया गया विद्रोह तुर्किए–कुर्द संबंधों को गहराई से प्रभावित करता रहा है।
  • ईरान में कुर्द: कुर्द ईरान की जनसंख्या का लगभग 10% हैं और वर्ष 1979 की ईरानी क्रांति के बाद से वे सांस्कृतिक अधिकारों और क्षेत्रीय स्वायत्तता की माँग करते रहे हैं।
  • इराक में कुर्द: खाड़ी युद्ध के बाद इराकी कुर्दों ने कुर्दिस्तान क्षेत्रीय सरकार की स्थापना की, जिससे उन्हें उत्तरी इराक में व्यापक स्वायत्तता प्राप्त हुई।
  • सीरिया में कुर्द: सीरिया की जनसंख्या का लगभग 10% कुर्द हैं। सीरियाई गृहयुद्ध के दौरान उन्होंने उत्तरी सीरिया के कुछ क्षेत्रों पर नियंत्रण स्थापित किया और इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड द लेवांत (ISIL) के विरुद्ध संघर्ष में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।
    • इसके अतिरिक्त, कुर्दों के बड़े प्रवासी समुदाय यूरोप के कई देशों—विशेषकर जर्मनी, फ्राँस, नीदरलैंड और स्विट्जरलैंड—में भी निवास करते हैं।

विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान

  • विशिष्ट भाषा: कुर्दी भाषा इंडो-यूरोपीय भाषा परिवार की ईरानी भाषाओं की उत्तर-पश्चिमी शाखा से संबंधित है और इसमें कई क्षेत्रीय बोलियाँ पाई जाती हैं।
  • विविध धार्मिक संरचना: अधिकांश कुर्द सुन्नी इस्लाम का पालन करते हैं, हालाँकि कुछ समुदाय शिया इस्लाम, अलेविज्म, यजीदी धर्म और ईसाई धर्म का भी अनुसरण करते हैं, जो पश्चिम एशिया की धार्मिक विविधता को दर्शाता है।
  • मजबूत जनजातीय और सामुदायिक परंपराएँ: कुर्द समाज में ऐतिहासिक रूप से जनजातीय नेटवर्क, कबीलाई निष्ठा और स्थानीय नेतृत्व संरचनाएँ महत्त्वपूर्ण रही हैं, जिन्होंने उनकी राजनीतिक और सामाजिक व्यवस्था को प्रभावित किया है।
  • समृद्ध सांस्कृतिक विरासत: कुर्द अपनी सांस्कृतिक पहचान को पारंपरिक संगीत, नृत्य, लोककथाओं और नवरोज (Nowruz) जैसे त्योहारों के माध्यम से बनाए रखते हैं, जो नवीनीकरण और प्रतिरोध का प्रतीक है।

मिनटमैन-III

8 2

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच संयुक्त राज्य अमेरिका की स्पेस फोर्स ने कैलिफोर्निया स्थित वैंडनबर्ग स्पेस फोर्स बेस से न्यूक्लियर-सक्षम LGM-30G मिनटमैन-III का परीक्षण प्रक्षेपण किया।

मिनटमैन-III अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM)

  • LGM-30G मिनटमैन-III एक न्यूक्लियर-सक्षम अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) है, जो संयुक्त राज्य अमेरिका की परमाणु त्रयी (Nuclear Triad) के स्थल-आधारित घटक का हिस्सा है।
  • इसे शीत युद्ध (Cold War) के दौरान विकसित किया गया था। यह संयुक्त राज्य अमेरिका के पश्चिमी भाग में भूमिगत साइलो में तैनात है और इसका उद्देश्य विश्वसनीय परमाणु प्रतिरोध तथा द्वितीय प्रहार क्षमता सुनिश्चित करना है।

प्रमुख विशेषताएँ

  • न्यूक्लियर वारहेड क्षमता: यह मिसाइल ऐसे परमाणु वारहेड ले जा सकती है, जो हिरोशिमा और नागासाकी पर गिराए गए परमाणु बमों से भी अधिक शक्तिशाली होते हैं, जिससे इसकी रणनीतिक प्रतिरोध क्षमता बढ़ती है।
  • दीर्घ दूरी की प्रहार क्षमता: मिनटमैन-III की मारक क्षमता लगभग 6,000 मील (लगभग 9,600 किमी.) है, जिससे यह अमेरिकी क्षेत्र से ही अन्य महाद्वीपों के लक्ष्यों को निशाना बना सकती है।
  • उच्च गति: यह मिसाइल 15,000 मील प्रति घंटे से अधिक गति से यात्रा कर सकती है, जिससे पेलोड को तेजी से अंतरमहाद्वीपीय दूरी तक पहुँचाया जा सकता है।
  • परीक्षण और परिचालन तैनाती: इसके परीक्षण प्रक्षेपण अक्सर वैंडनबर्ग स्पेस फोर्स बेस से किए जाते हैं, जहाँ से किए गए लॉन्च व्हीकल आमतौर पर प्रशांत महासागर में मार्शल द्वीपों के निकट निर्धारित क्षेत्रों में गिरते हैं।

महत्त्व

मिनटमैन-III, संयुक्त राज्य अमेरिका की परमाणु त्रयी (भूमि, समुद्र और वायु आधारित परमाणु वितरण प्रणाली) के भूमि-आधारित घटक के रूप में रणनीतिक स्थिरता और द्वितीय प्रहार क्षमता सुनिश्चित करता है तथा संभावित परमाणु हमलों को रोकने (Deterrence) में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

संक्षेप में समाचार

Explore UPSC Foundation Batches

Need help preparing for UPSC or State PSCs?

Connect with our experts to get free counselling & start preparing

Free Counselling for UPSC Aspirants

Connect with our experts and take the right next step.

Expert Guidance
Personalized Strategy
100% Free

Book Your Free Session

NEED ASSISTANCE?

Request a Callback

Our counsellor will connect with you and help you choose the right course and centre.

  • Expert Guidance
  • Course & Fee Information
  • Quick Callback Support

Request a Callback

Books
UPSC PYQs
UPSC Notes
Current Affairs
Quick Revise Now !
AVAILABLE FOR DOWNLOAD SOON
UDAAN PRELIMS WALLAH
Comprehensive coverage with a concise format
Integration of PYQ within the booklet
Designed as per recent trends of Prelims questions
हिंदी में भी उपलब्ध
Quick Revise Now !
UDAAN PRELIMS WALLAH
Comprehensive coverage with a concise format
Integration of PYQ within the booklet
Designed as per recent trends of Prelims questions
हिंदी में भी उपलब्ध

<div class="new-fform">







    </div>

    Subscribe our Newsletter
    Sign up now for our exclusive newsletter and be the first to know about our latest Initiatives, Quality Content, and much more.
    *Promise! We won't spam you.
    Yes! I want to Subscribe.