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संक्षेप में समाचार

15 Apr 2026

पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण 25 लाख भारतीय गरीबी की चपेट में आ सकते हैं: UNDP 

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) की एक रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि बढ़ती ईंधन और माल ढुलाई लागत भारत की मानव विकास प्रगति को धीमा कर सकती है और लाखों लोगों को पुनः गरीबी में धकेल सकती है।

रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु 

  • भारत में गरीबी पर प्रभाव: भारत की गरीबी दर 23.9% से बढ़कर 24.2% हो सकती है, जिससे लगभग 25 लाख लोग गरीबी में धकेले जा सकते हैं।
  • वैश्विक प्रभाव: यह संकट विश्व स्तर पर लगभग 88 लाख लोगों को गरीबी में धकेल सकता है, इस क्षेत्र में लगभग 299 अरब डॉलर का आर्थिक नुकसान हो सकता है।
  • मानव विकास सूचकांक (HDI) पर प्रभाव: UNDP के अनुसार, संघर्ष के कारण विभिन्न देशों के HDI पर प्रभाव पड़ेगा:
    • भारत: संघर्ष से उत्पन्न आर्थिक व्यवधानों के कारण भारत के मानव विकास सूचकांक में लगभग 0.03 से 0.12 वर्षों की गिरावट का अनुमान है।
    • ईरान: HDI में 1 से 1.5 वर्षों की प्रगति के बराबर गिरावट आ सकती है।
    • नेपाल: HDI प्रगति में लगभग 0.02 से 0.09 वर्षों की गिरावट।
    • वियतनाम: लगभग 0.02 से 0.07 वर्षों की गिरावट।
    • चीन: सीमित प्रभाव, HDI प्रगति में लगभग 0.01 से 0.05 वर्षों की गिरावट।
  • ऊर्जा निर्भरता जोखिम: भारत अपनी तेल आवश्यकताओं का 90% से अधिक आयात करता है, जिसमें 40% से अधिक कच्चा तेल और 90% एलपीजी पश्चिम एशिया से आता है, जिससे आपूर्ति बाधा तथा मूल्य वृद्धि का जोखिम बढ़ता है।
  • उर्वरक और कृषि चिंताएँ: लगभग 45% उर्वरक आयात और 85% घरेलू यूरिया उत्पादन आयातित LNG पर निर्भर है, जिससे व्यवधान जारी रहने पर खरीफ फसल प्रभावित हो सकती है।
  • व्यापार निर्भरता: पश्चिम एशिया भारत के 14% निर्यात और 20.9% आयात का हिस्सा है, जिनमें मुख्य निर्यात: बासमती चावल, चाय, रत्न एवं आभूषण तथा परिधान शामिल हैं।
  • प्रवासी आय जोखिम: लगभग 93.7 लाख भारतीय खाड़ी देशों में रहते हैं, जो भारत के प्रेषण में 38-40% का योगदान करते हैं, जिससे प्रवासी भारतीयों की आय खाड़ी देशों की आर्थिक मंदी के प्रति संवेदनशील हो जाती है।
  • रोजगार जोखिम: आतिथ्य, खाद्य प्रसंस्करण, निर्माण सामग्री और रत्न एवं आभूषण जैसे लघु एवं मध्यम उद्यम क्षेत्रों को उच्च लागत और कम माँग का सामना करना पड़ सकता है, जिससे भारत के मुख्य रूप से अनौपचारिक श्रम बाजार में रोजगार प्रभावित हो सकते हैं।
  • मुद्रास्फीति दबाव: हॉर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान से चिकित्सा उपकरणों में प्रयुक्त कच्चे माल की लागत लगभग 50% तक बढ़ सकती है, जबकि दवाओं की थोक कीमतें पहले ही 10–15% बढ़ चुकी हैं।

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) के बारे में

  • UNDP संयुक्त राष्ट्र की एक विकास एजेंसी है, जो गरीबी उन्मूलन और सतत् मानव विकास पर केंद्रित है।
  • स्थापना: वर्ष 1965
  • मुख्यालय: न्यूयॉर्क (संयुक्त राज्य अमेरिका)।
  • उद्देश्य: प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करते हुए गरीबी उन्मूलन, असमानता में कमी और सतत् विकास को बढ़ावा देने में देशों का समर्थन करना।
  • कार्यप्रणाली: यह पाँच-वर्षीय देश कार्यक्रमों के माध्यम से विकास परियोजनाओं को लागू करता है, निवेश को बढ़ावा देता है, कौशल विकास करता है और आधुनिक तकनीकों को प्रोत्साहित करता है।

हबल टेंशन

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हाल ही में, खगोलविदों ने ब्रह्मांड के स्थानीय विस्तार की दर को संशोधित कर 73.5 किलोमीटर प्रति सेकंड प्रति मेगापारसेक कर दिया है, जिससे हबल टेंशन (Hubble Tension) को लेकर वार्ता पुनः शुरू हो गई है।

मुख्य बिंदु 

  • अर्थ: हबल टेंशन विभिन्न तरीकों से मापी गई ब्रह्मांड की विस्तार दर में अंतर को दर्शाता है।
  • हबल स्थिरांक: यह मापता है कि ब्रह्मांड के विस्तार के साथ आकाशगंगाएँ कितनी तेजी से एक-दूसरे से दूर जा रही हैं, जिसे किलोमीटर प्रति सेकंड प्रति मेगापारसेक में व्यक्त किया जाता है।
  • मुख्य मापन विधियाँ: हबल स्थिरांक का अनुमान लगाने के लिए वैज्ञानिक मुख्य रूप से दो तरीकों का उपयोग करते हैं: कॉस्मिक माइक्रोवेव बैकग्राउंड (Cosmic Microwave Background) और कॉस्मिक डिस्टेंस लेडर (Cosmic Distance Ladder)। 
    • कॉस्मिक माइक्रोवेव बैकग्राउंड (Cosmic Microwave Background): ब्रह्मांडीय माइक्रोवेव पृष्ठभूमि बिग बैंग से बचा हुआ विकिरण है।
      • इसके अध्ययन से पता चलता है कि विस्तार की दर लगभग 67 किलोमीटर प्रति सेकंड प्रति मेगापारसेक है।
    • कॉस्मिक डिस्टेंस लेडर (Cosmic Distance Ladder): यह विधि स्पंदित तारों और विस्फोटित सुपरनोवा जैसी वस्तुओं का उपयोग करके यह गणना करती है कि वे पृथ्वी से कितनी तेजी से दूर जा रही हैं। 
      • ये माप स्थानीय माने जाते हैं और ये लगभग 73 किलोमीटर प्रति सेकंड प्रति मेगापारसेक की विस्तार दर की ओर संकेत करते हैं।
  • विरोधाभास: दोनों विधियाँ अत्यधिक सटीक हैं, लेकिन अलग-अलग परिणाम देती हैं, जिससे मानों के बीच लगातार अंतर बना रहता है।
  • संभावित व्याख्याएँ 
    • दूरी के अनुमानों या अवलोकन डेटा में मापन या अंशांकन त्रुटियाँ। 
    • डार्क एनर्जी के नए या विकसित हो रहे गुण, जो विस्तार को अपेक्षा से भिन्न गति से बढ़ा रहे हों। 
    • वर्तमान मानक ब्रह्मांडीय मॉडल से परे अज्ञात कणों या अंतःक्रियाओं की उपस्थिति, जो संभावित “नई भौतिकी” का संकेत देती है।
  • वैज्ञानिक महत्त्व: यह असंगति दर्शाती है कि वर्तमान ब्रह्मांडीय मॉडल अपूर्ण हो सकता है या ब्रह्मांड के विस्तार को प्रभावित करने वाले कुछ अज्ञात कारक मौजूद हैं, जिससे आधुनिक खगोल विज्ञान में नए सिद्धांतों की आवश्यकता उत्पन्न हो सकती है।

सुपर टाइफून सिनलाकू  

हाल ही में सुपर टाइफून सिनलाकू (Super Typhoon Sinlaku) ने प्रशांत महासागर में स्थित उत्तरी मारियाना द्वीपसमूह को प्रभावित किया, जिससे तेज हवाएँ और गंभीर मौसमीय परिस्थितियाँ उत्पन्न हुईं।

सुपर टाइफून सिनलाकू के बारे में 

  • चक्रवात के प्रकार: यह पश्चिमी प्रशांत महासागर में उत्पन्न एक उच्च तीव्रता वाला उष्णकटिबंधीय चक्रवात है।
  • प्रभाव क्षेत्र: इसने पश्चिमी प्रशांत और पूर्वी एशियाई तटीय क्षेत्रों को प्रभावित किया, जिससे द्वीपीय और मुख्यभूमि क्षेत्रों को खतरा उत्पन्न हुआ।
  • मौसमीय प्रभाव: भारी वर्षा, तेज हवाएँ तथा समुद्री क्षेत्र में खराब परिस्थितियाँ

सुपर टाइफून क्या है?

  • क्षेत्रीय शब्द: पश्चिमी प्रशांत महासागर में चक्रवातों को टाइफून” कहा जाता है।
  • परिभाषा: सुपर टाइफून अत्यंत तीव्र उष्णकटिबंधीय चक्रवात होता है, जिसमें बहुत अधिक सतत् पवन गति होती है।
  • वायु गति सीमा: जब हवाओं की गति लगभग 240 किमी./घंटा से अधिक हो जाती है, तब इसे सुपर टाइफून के रूप में वर्गीकृत किया जाता है।
  • निर्माण की परिस्थितियाँ: ये गर्म समुद्री जल, उच्च आर्द्रता तथा निम्न ऊर्ध्वाधर पवन अपरूपण की स्थिति में विकसित होेते हैं।
  • प्रभाव: ये तीव्र हवाएँ, भारी वर्षा, तूफानी लहरें और व्यापक तटीय क्षति का कारण बनती हैं।

उत्तरी मारियाना द्वीपसमूह 

  • स्थान: यह द्वीप समूह पश्चिमी प्रशांत महासागर में, गुआम के उत्तर में स्थित है।
  • राजनीतिक स्थिति: यह स्थानीय स्वशासन वाला संयुक्त राज्य अमेरिका का एक असंगठित क्षेत्र है।

RBI उत्कर्ष 2.0 

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी संस्थागत प्राथमिकताओं को दिशा देने के लिए उत्कर्ष 2.0 (Utkarsh 2.0) नामक मध्यम-अवधि रणनीतिक ढाँचा प्रस्तुत किया है।

उत्कर्ष (Utkarsh) क्या है?

  • उत्कर्ष RBI का तीन-वर्षीय रणनीतिक ढाँचा है, जिसका उद्देश्य विनियमन, पर्यवेक्षण और केंद्रीय बैंक के समग्र कार्यप्रणाली को सुदृढ़ करना है।
  • प्रथम चरण (2019–2022): वर्ष 2019 में शुरू किया गया, जिसने RBI की मध्यम-अवधि की संस्थागत प्राथमिकताओं को दिशा प्रदान की।

उत्कर्ष 2.0 के बारे में 

  • सात स्तंभ: फोकस क्षेत्रों में विनियमन, ग्राहक केंद्रितता, समावेशी वित्त, प्रतिस्पर्द्धी बाजार, प्रौद्योगिकी, फ्यूचर-रेडी ऑर्गनाइजेशन और वैश्विक फोकस शामिल हैं।
  • विनियामक सरलीकरण: नियमों को सरल बनाकर अनुपालन में आसानी और दक्षता बढ़ाना।
  • वित्तीय समावेशन: वंचित वर्गों के लिए वित्तीय सेवाओं की पहुँच का विस्तार।
  • बाजार विकास: वित्तीय बाजारों को मजबूत करना और विशेषकर सरकारी प्रतिभूतियों में मूल्य पारदर्शिता बढ़ाना।
  • प्रौद्योगिकी पर बल: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के उपयोग और आंतरिक प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण को बढ़ावा।
  • ग्राहक सेवा: बैंकिंग सेवाओं की गुणवत्ता और सुलभता में सुधार को प्राथमिकता।
  • वैश्विक भूमिका: रुपये के अंतरराष्ट्रीयकरण और सीमापार भुगतान प्रणालियों (जैसे- UPI) के विस्तार को प्रोत्साहन।
  • अनुकूलनशील दृष्टिकोण: बदलती वित्तीय परिस्थितियों के अनुसार नियमित समीक्षा और रणनीति में लचीलापन।

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