चीन के शांक्सी प्रांत में कोयला खदान में विस्फोट
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चीन के शांक्सी प्रांत में लियुशेनयु कोयला खदान में हुए एक विस्फोट में 90 से अधिक खनिकों (मजदूरों) की मौत हो गई, जिसके बाद बचाव अभियान और एक उच्च स्तरीय जाँच शुरू की गई।
- कारण: प्रारंभिक रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि यह एक गैस विस्फोट था, जो भूमिगत कोयला खनन कार्यों में होने वाला एक आम खतरा है।
कोयला खदानों में गैस विस्फोट क्यों होता है?
- कोयला खदान विस्फोटों के लिए आमतौर पर तीन कारकों (संचित ज्वलनशील गैसें, ऑक्सीजन और एक प्रज्वलन स्रोत) की आवश्यकता होती है।
- मेथेन का संचय: कोयला निकालने के दौरान प्राकृतिक रूप से मेथेन गैस निकलती है। वायु की अपर्याप्त कमी या मेथेन ड्रेनेज की खराब प्रणाली के कारण गैस विस्फोटक की संभावना बढ़ सकती है।
- प्रज्वलन के स्रोत: विद्युत उपकरणों से निकलने वाली चिंगारी या लपटें, ब्लास्टिंग (विस्फोट), और काटने वाली मशीनों से होने वाला घर्षण, मेथेन-वायु के मिश्रण को तुरंत प्रज्वलित कर सकते हैं।
- कोयले की धूल: वायु में मौजूद कोयले के महीन कण अत्यधिक ज्वलनशील होते हैं। यदि खदान में प्रारंभिक मेथेन विस्फोट होता है, तो वह अक्सर इस धूल को तेजी से हवा में उड़ाकर प्रज्वलित कर देता है, जिससे एक विनाशकारी कोयला-धूल विस्फोट (Coal Dust Explosion) होता है।
चीन के कोयला उत्पादन के बारे में
- चीन दुनिया का सबसे बड़ा कोयला उत्पादक और उपभोक्ता बना हुआ है, जो विद्युत उत्पादन और औद्योगिक गतिविधियों के लिए इस पर निर्भर है।
- नवीकरणीय ऊर्जा में बढ़ते निवेश के बावजूद चीन के ऊर्जा मिश्रण में कोयला केंद्रीय भूमिका निभा रहा है।
- चीन की कुल प्राथमिक ऊर्जा आपूर्ति में कोयले की हिस्सेदारी लगभग 55% से 61% और उसके कुल विद्युत उत्पादन में लगभग 50% से 60% है।
- शांक्सी प्रांत चीन का अग्रणी कोयला उत्पादक क्षेत्र है, जो देश के वार्षिक कोयला उत्पादन में लगभग एक-तिहाई योगदान देता है।
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स्मार्ट बॉर्डर प्रोजेक्ट
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केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) निगरानी प्रणाली को मजबूत करने, बांग्लादेश और पाकिस्तान के साथ भारत की सीमाओं को अभेद्य बनाने और अवैध घुसपैठ को समाप्त करने के लिए ‘स्मार्ट बॉर्डर प्रोजेक्ट’ (Smart Border Project) शुरू करेगा।
संबंधित तथ्य
- एकीकृत सीमा ग्रिड (Integrated Border Grid): सरकार स्मार्ट बॉर्डर अवधारणा के तहत अगले एक वर्ष के भीतर एक अभेद्य सीमा सुरक्षा ग्रिड बनाने की योजना बना रही है।
- यह पहल पारंपरिक सीमा सुरक्षा के बजाय प्रौद्योगिकी-संचालित और सूचना-आधारित सुरक्षा संचालन (Security Operations) की ओर बढ़ते कदम को दर्शाती है।
- प्रौद्योगिकी का एकीकरण: इस परियोजना के तहत सीमा प्रबंधन के लिए ड्रोन, रडार, आधुनिक कैमरे और अन्य उन्नत निगरानी तकनीकों को तैनात किया जाएगा।
- BSF के अधिकार क्षेत्र का विस्तार: सीमा प्रबंधन में सुधार के लिए सरकार ने अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के साथ BSF के अधिकार क्षेत्र को 15 किलोमीटर से बढ़ाकर 50 किलोमीटर कर दिया है।
- समन्यवय-आधारित सुरक्षा: यह परियोजना राज्य पुलिस, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs), खुफिया एजेंसियों, जिला प्रशासनों और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के बीच अधिक मजबूत समन्वय पर जोर देती हैं।
- सूचना-संचालित संचालन: अधिकारी घुसपैठ के मार्गों का नक्शा तैयार करेंगे, तस्करी नेटवर्क की पहचान करेंगे और अवैध प्रवेश मार्गों को व्यवस्थित रूप से बंद करेंगे।
- सामुदायिक भागीदारी: प्रभावी सीमा सुरक्षा के लिए BSF कर्मियों को स्थानीय समुदायों, ग्राम-स्तरीय अधिकारियों और जिला प्रशासनों के साथ समन्वय मजबूत करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है।
स्मार्ट बॉर्डर प्रोजेक्ट का महत्त्व
- वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम के साथ जुड़ाव: यह ‘वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम’ के साथ मिलकर सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास और सुरक्षा को मजबूत करता है।
- वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम वर्ष 2023 में शुरू की गई एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसका उद्देश्य भारत के उत्तरी सीमावर्ती क्षेत्रों के रणनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण गाँवों में बुनियादी ढाँचे, कनेक्टिविटी और आजीविका के अवसरों में सुधार करना है।
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इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस (IBCA)
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सऊदी अरब इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस (IBCA) का सदस्य बन गया है।
इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस (IBCA) के बारे में
IBCA एक अंतर-सरकारी गठबंधन है, जो वैश्विक स्तर पर बिल्ली प्रजाति के सात प्रमुख बिग कैट्स के संरक्षण के लिए समर्पित है।
- यह गठबंधन बाघ (Tiger), शेर (Lion), तेंदुआ (Leopard), हिम तेंदुआ (Snow Leopard), चीता (Cheetah), जगुआर (Jaguar) और प्यूमा (Puma) पर ध्यान केंद्रित करता है।
- इनमें से बाघ, शेर, तेंदुआ, हिम तेंदुआ और चीता भारत में पाए जाते हैं।
- शुरुआत: IBCA की शुरुआत 9 अप्रैल, 2023 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ (1973) की 50वीं वर्षगाँठ के समारोह के दौरान की थी।
- जनवरी 2025 में यह औपचारिक रूप से एक संधि-आधारित अंतर-सरकारी संगठन बन गया।
- बजट: केंद्र सरकार ने वर्ष 2023-24 से 2027-28 तक इस उद्देश्य के लिए ₹150 करोड़ आवंटित किए हैं।
उद्देश्य
- बिग कैट्स की सात प्रजातियों के संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना।
- बिग कैट्स के खतरों और उनके समाधानों पर ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ाना।
- बिग कैट्स के प्रभावी प्रबंधन के लिए रेंज देशों (जहाँ ये जीव पाए जाते हैं) की क्षमता का निर्माण करना।
- वैश्विक जागरूकता बढ़ाना और सात बिग कैट्स के संरक्षण के महत्त्व के बारे में जन संपर्क गतिविधियों को बढ़ावा देना।
- संसाधनों को जुटाना और संरक्षण से जुड़े अंतर्राष्ट्रीय निकायों के साथ सामंजस्य स्थापित करना।
सदस्य
- इसकी सदस्यता संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देशों, विशेष रूप से 95 बिग कैट्स रेंज देशों के लिए खुली है।
- मई 2026 तक इसके 26 सदस्य हैं; भारत, भूटान, नेपाल, कंबोडिया, रूस, श्रीलंका और सऊदी अरब भाग लेने वाले सदस्यों में शामिल हैं।
संगठनात्मक ढाँचा
- अधिवेशन: यह सभी सदस्य देशों को मिलाकर बनने वाला सर्वोच्च निर्णय लेने वाला निकाय है।
- फ्रेमवर्क समझौते, शासन संरचना और वैश्विक संरक्षण रोडमैप को मंजूरी देने के लिए IBCA की पहली असेंबली बैठक नई दिल्ली में आयोजित की गई थी।
- सचिवालय: IBCA का स्थायी सचिवालय और मुख्यालय नई दिल्ली, भारत में अवस्थित है।
- महानिदेशक: महानिदेशक इस गठबंधन के मुख्य कार्यकारी और प्रशासनिक प्रमुख के रूप में कार्य करते हैं।
महत्त्व
IBCA सीमा-पार वन्यजीव संरक्षण, जैव विविधता संरक्षण और सतत् पारिस्थितिकी तंत्र प्रबंधन को बढ़ावा देने के साथ-साथ पर्यावरण के क्षेत्र में भारत के वैश्विक नेतृत्व को मजबूत करता है। |
गोडार्ड एस्ट्रोनॉटिक्स पुरस्कार 2026
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भारत के चंद्रयान-3 मिशन को चंद्र अन्वेषण और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में अपनी ऐतिहासिक उपलब्धियों के लिए वर्ष 2026 के ‘गोडार्ड एस्ट्रोनॉटिक्स अवार्ड’ (Goddard Astronautics Award) से सम्मानित किया गया।
गोडार्ड एस्ट्रोनॉटिक्स अवार्ड के बारे में
- गोडार्ड एस्ट्रोनॉटिक्स अवार्ड अंतरिक्ष विज्ञान (एस्ट्रोनॉटिक्स) और अंतरिक्ष अन्वेषण में उत्कृष्ट उपलब्धियों को मान्यता देने वाले सर्वोच्च अंतरराष्ट्रीय सम्मानों में से एक है।
- विरासत: यह पुरस्कार आधुनिक रॉकेट साइंस और तरल-ईंधन रॉकेट प्रौद्योगिकी के अग्रदूत माने जाने वाले रॉबर्ट एच. गोडार्ड की स्मृति में दिया जाता है।
- आयोजक: यह पुरस्कार प्रतिवर्ष ‘अमेरिकन इंस्टिट्यूट ऑफ एयरोनॉटिक्स एंड एस्ट्रोनॉटिक्स’ (AIAA) द्वारा प्रदान किया जाता है।
- यह आमतौर पर वाशिंगटन, डी.सी. में आयोजित होने वाले AIAA ASCEND (एक्सेलरेटिंग स्पेस कॉमर्स, एक्सप्लोरेशन, एंड न्यू डिस्कवरी) सम्मेलन के दौरान प्रदान किया जाता है।
- मापदंड: यह पुरस्कार अंतरिक्ष विज्ञान, अंतरिक्ष अनुसंधान और एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में असाधारण योगदान के लिए व्यक्तियों या टीमों को दिया जाता है।
चंद्रयान-3 के बारे में
- चंद्रयान-3 भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा विकसित भारत का तीसरा चंद्र अन्वेषण मिशन है।
- लॉन्च: यह मिशन 14 जुलाई, 2023 को सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा से लॉन्च किया गया था।
- चंद्रयान-3 ने 23 अगस्त, 2023 को चंद्रमा पर सफलतापूर्वक सॉफ्ट लैंडिंग की थी।
चंद्रयान-3 की मुख्य उपलब्धियाँ
- चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर ऐतिहासिक लैंडिंग: चंद्रयान-3 चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र के पास सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला पहला मिशन बन गया।
- इसके साथ ही भारत चंद्रमा की सतह पर सफलतापूर्वक उतरने वाला दुनिया का चौथा देश बन गया।
- चंद्र तत्त्वों की खोज: प्रज्ञान रोवर ने चंद्रमा पर सल्फर (गंधक) की उपस्थिति की पुष्टि की और आयरन, कैल्शियम, एल्युमिनियम व टाइटेनियम सहित कई अन्य तत्त्वों का पता लगाया।
- अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में प्रगति: इस मिशन ने चंद्रमा के अत्यंत दुर्गम और विषम क्षेत्र पर ऑटोनॉमस लैंडिंग, नेविगेशन और रोवर मोबिलिटी में भारत की तकनीकी क्षमता को सफलतापूर्वक सिद्ध किया है।
- चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव का वैज्ञानिक महत्त्व: दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में स्थायी रूप से छाया में रहने वाले क्रेटर मौजूद हैं, जिनके बारे में माना जाता है कि वहाँ बर्फ और भविष्य के चंद्र मिशनों के लिए मूल्यवान संसाधन मौजूद हैं।
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