पाइरोप्रोसेसिंग (Pyroprocessing)
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जापान, दक्षिण कोरिया और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे देश परमाणु ईंधन पुनर्चक्रण को अधिक प्रभावी बनाने, रेडियोधर्मी अपशिष्ट को कम करने तथा उन्नत फास्ट रिएक्टरों के लिए ईंधन दक्षता बढ़ाने हेतु पाइरोप्रोसेसिंग (Pyroprocessing) तकनीक का उपयोग कर रहे हैं।
पाइरोप्रोसेसिंग क्या है?
- उच्च तापमान प्रक्रिया: पाइरोप्रोसेसिंग एक ऊष्मा-आधारित औद्योगिक प्रक्रिया है, जिसमें पदार्थों में भौतिक या रासायनिक परिवर्तन लाने के लिए अत्यधिक तापमान का उपयोग किया जाता है।
- शुष्क प्रक्रिया: यह एक शुष्क प्रक्रिया (ड्राई प्रोसेसिंग) तकनीक है, जो हाइड्रोमेटलर्जी (Hydrometallurgy) से भिन्न है, क्योंकि इसमें जलीय घोल का उपयोग नहीं किया जाता।
- ऊर्जा-गहन: इस प्रक्रिया में 100°C से लेकर 1,400°C से अधिक तापमान की आवश्यकता होती है, जिससे यह अत्यधिक ऊर्जा-गहन प्रक्रिया बन जाती है।
पायरोप्रोसेसिंग के अनुप्रयोग
- सीमेंट निर्माण: चूना पत्थर, मिट्टी और लौह अयस्क को क्लिंकर में परिवर्तित करने हेतु उपयोग किया जाता है, जो सीमेंट का प्रमुख घटक है।
- धातुकर्म उद्योग: रोस्टिंग (भर्जन), स्मेल्टिंग (प्रगलन), और कैल्सिनेशन (निस्तापन) जैसी प्रक्रियाओं के माध्यम से धातु निष्कर्षण में उपयोग किया जाता है।
- परमाणु ईंधन पुनर्संसाधन: प्रयुक्त परमाणु ईंधन से उपयोगी पदार्थों की पुनर्प्राप्ति एवं पृथक्करण हेतु गलित-लवण (Molten-salt) विद्युत-रासायनिक तकनीकों के माध्यम से उपयोग किया जा सकता है।
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ऑरोरा (उत्तरी एवं दक्षिणी ध्रुवीय ज्योति)
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जून 2026 में आए एक शक्तिशाली सौर तूफान (Solar Storm) के कारण उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में ऑरोरा (Aurora) के दृश्य दिखाई दिए।
ऑरोरा के बारे में (UPSC CSE Main 2024)
- ऑरोरा पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल में ध्रुवीय क्षेत्रों के निकट दिखाई देने वाले प्राकृतिक प्रकाशीय पुंज हैं।
- ये तब उत्पन्न होते हैं, जब सूर्य से उत्सर्जित विद्युत आवेशित कण पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र और वायुमंडल के साथ परस्पर क्रिया करते हैं।
- ऑरोरा के प्रकार
- ऑरोरा बोरियालिस (उत्तरी ज्योति): उत्तरी गोलार्द्ध में पाया जाता है।
- ऑरोरा ऑस्ट्रेलिस (दक्षिणी ज्योति): दक्षिणी गोलार्द्ध में पाया जाता है।
- ऑरोरा की प्रक्रिया
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- सौर तूफान और कोरोनल मास इजेक्शन (CMEs) सूर्य से बड़ी मात्रा में आवेशित कण उत्सर्जित करते हैं।
- ये कण पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र द्वारा ध्रुवीय क्षेत्रों की ओर निर्देशित होते हैं।
- जब ये ऊपरी वायुमंडल में ऑक्सीजन और नाइट्रोजन परमाणुओं से टकराते हैं, तो ऊर्जा दृश्य प्रकाश के रूप में उत्सर्जित होती है।
- तीव्र सौर गतिविधियों और भू-चुंबकीय तूफानों के दौरान ऑरोरा गतिविधि बढ़ जाती है।
- ऑरोरा के रंग: देखा जाने वाला रंग वायुमंडलीय गैस के प्रकार और टकराव की ऊँचाई पर निर्भर करता है।
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- हरा: निम्न तुंगता पर ऑक्सीजन परमाणुओं द्वारा उत्पन्न; सबसे सामान्य ऑरोरा रंग।
- लाल: उच्च तुंगता पर ऑक्सीजन परमाणुओं द्वारा उत्पन्न।
- नीला और बैंगनी: नाइट्रोजन अणुओं द्वारा उत्पन्न।
- घटित होने के सामान्य क्षेत्र: ये प्रायः उच्च अक्षांश वाले क्षेत्रों में देखे जाते हैं, जैसे नॉर्वे, स्वीडन, फिनलैंड, आइसलैंड, ग्रीनलैंड, कनाडा और अलास्का।
भारत में ऑरोरा
- ऑरोरा कहाँ देखे जा सकते हैं?
- लद्दाख के उच्च तुंगता वाले क्षेत्र, जिनमें पैंगोंग त्सो (Pangong Tso) और हनले (Hanle) शामिल हैं।
- कश्मीर के कुछ भाग।
- उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्र।
- भारत में ऑरोरा कभी-कभी क्यों देखे जा सकते हैं?
- अत्यधिक शक्तिशाली भू-चुंबकीय तूफानों (Geomagnetic Storms) के दौरान ऑरोरा गतिविधियाँ ध्रुवीय क्षेत्रों से नीचे निम्न अक्षांशों तक फैल सकती हैं।
- उच्च तुंगता वाले हिमालयी क्षेत्रों में वायुमंडलीय अवरोध कम और प्रकाश प्रदूषण न्यून होने के कारण दृश्यता बेहतर होती है।
- तीव्र सौर घटनाओं के दौरान उत्तर भारत पृथ्वी के विस्तारित ऑरोरा क्षेत्र के अपेक्षाकृत अधिक निकट आ जाता है, जिससे ऑरोरा देखने की संभावना बढ़ जाती है।
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अजोव सागर

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हाल ही में अजोव सागर (Sea of Azov) में संचालित वाणिज्यिक मालवाहक जहाजों पर संदिग्ध यूक्रेनी ड्रोन हमलों में पाँच व्यापारी नाविकों की मृत्यु हो गई।
अजोव सागर के बारे में
- अजोव सागर पूर्वी यूरोप में स्थित एक अंतर्देशीय शेल्फ सागर (Inland Shelf Sea) है और इसे विश्व का सबसे उथला सागर माना जाता है।
- यह काला सागर (Black Sea) का उत्तरी विस्तार है तथा कम लवणता, उच्च जैव उत्पादकता और रणनीतिक भू-राजनीतिक महत्त्व के लिए जाना जाता है।
- यह केर्च जलडमरूमध्य (Kerch Strait) के माध्यम से काला सागर से जुड़ा हुआ है, जो इसका एकमात्र समुद्री निकास मार्ग है।
- केर्च जलडमरूमध्य के पश्चिम में क्रीमिया प्रायद्वीप (Crimean Peninsula) और पूर्व में तमन प्रायद्वीप (Taman Peninsula) स्थित हैं।
- अवस्थिति: उत्तर-पश्चिम में यूक्रेन और पूर्व में रूस इसकी सीमा बनाते हैं।
- इसके पश्चिम में क्रीमिया प्रायद्वीप स्थित है।
- अजोव सागर के प्रमुख क्षेत्र
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- प्रमुख यूक्रेनी बंदरगाह: मारियुपोल (Mariupol), बर्दियांस्क (Berdyansk)।
- प्रमुख रूसी बंदरगाह: तगानरोग (Taganrog), येयस्क (Yeysk)।
- रोस्तोव-ऑन-डॉन (Rostov-on-Don) शहर डॉन नदी के किनारे इसके निकट अवस्थित है।
- महत्त्वपूर्ण भौगोलिक विशेषताएँ: सिवाश लैगून (Syvash lagoons) और अरबत स्पिट (Arabat Spit), जो विश्व की सबसे लंबी रेतीली स्पिट्स में से एक है।
- प्रमुख नदियाँ
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- डॉन नदी (Don River) और क्यूबन नदी (Kuban River) इस सागर में 90% से अधिक मीठे जल का प्रवाह प्रदान करती हैं।
- इन नदियों से आने वाले भारी अवसाद के कारण इसकी औसत गहराई केवल लगभग 7 मीटर है।
अजोव सागर का महत्त्व
- पारिस्थितिकी महत्त्व: यह विविध मत्स्य प्रजातियों और समुद्री जीव-जंतुओं, जिनमें हार्बर पोरपोइज (Harbour Porpoise) शामिल है, का समर्थन करता है।
- आर्थिक महत्त्व: यह वोल्गा–डॉन नहर (Volga–Don Canal) के माध्यम से काला सागर बेसिन और कैस्पियन सागर के मध्य संपर्क स्थापित करता है, जिससे क्षेत्रीय व्यापार और परिवहन को बढ़ावा मिलता है।
- भू-राजनीतिक महत्त्व: यह सागर समुद्री पहुँच, क्षेत्रीय सुरक्षा और सैन्य अभियानों के दृष्टिकोण से अत्यंत रणनीतिक महत्त्व रखता है।
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जोजिला सुरंग

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हाल ही में जोजिला सुरंग (Zoji La Tunnel) का अंतिम चरण में सफलतापूर्वक पूरा हो गया है, जिससे हिमालय क्षेत्र में वर्षभर कनेक्टिविटी स्थापित होने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
जोजिला सुरंग के बारे में
- जोजिला सुरंग 13.14 किमी लंबी (प्रत्येक मौसम में उपयोग योग्य), सिंगल-ट्यूब बाइ-डायरेक्शनल (single-tube bi-directional) सड़क सुरंग है, जो कश्मीर घाटी को लद्दाख के कारगिल से जोड़ती है।
- मुख्य विशेषताएँ
- यह हिमालय में लगभग 11,578 फीट की ऊँचाई पर जोजिला दर्रे के नीचे स्थित है।
- इसकी निर्माण लागत ₹6,800 करोड़ से अधिक है।
- इसमें 7.57 मीटर ऊँची घोड़े की नाल (horseshoe-shaped) आकार की दो-लेन सुरंग शामिल है।
- इसमें चार कलवर्ट (Culvert), चार निलग्रार सुरंगें, आठ कट-एंड-कवर खंड तथा 220 मीटर लंबी ऊर्ध्वाधर वेंटिलेशन शाफ्ट शामिल है।
- निर्माण तकनीक: इसका निर्माण न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड (New Austrian Tunnelling Method – NATM) के माध्यम से किया गया है, जो हिमालय की संवेदनशील भू-गर्भीय संरचना और बदलती चट्टान परिस्थितियों के लिए उपयुक्त है।
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- इसमें क्रमिक खुदाई के साथ त्वरित सहारा प्रणाली अपनाई जाती है।
- इसमें शॉटक्रेट, रॉक बोल्टिंग (rock bolting) और सतत भू-तकनीकी निगरानी का उपयोग कर स्थिरता सुनिश्चित की जाती है।
जोजिला सुरंग का महत्त्व
- वर्षभर कनेक्टिविटी: यह हिम से ढके जोजिला दर्रे को बायपास करते हुए कश्मीर घाटी और लद्दाख के बीच निर्बाध वर्षभर सड़क कनेक्टिविटी सुनिश्चित करेगी।
- यात्रा समय में कमी: जोजिला क्षेत्र में यात्रा समय लगभग तीन घंटे से घटकर लगभग 20 मिनट रह जाएगा।
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सैफ चैंपियनशिप (SAFF Championship)
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भारत ने मडगाँव (गोवा) में आयोजित फाइनल मुकाबले में बांग्लादेश को 3–1 से पराजित कर सैफ महिला चैंपियनशिप, 2026 का खिताब जीत लिया।
सैफ चैंपियनशिप (SAFF Championship) के बारे में
- दक्षिण एशियाई फुटबॉल महासंघ (SAFF) चैंपियनशिप दक्षिण एशिया की राष्ट्रीय फुटबॉल टीमों के लिए प्रमुख अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल टूर्नामेंट है।
- आयोजक: दक्षिण एशियाई फुटबॉल महासंघ (SAFF), जो एशियाई फुटबॉल परिसंघ (AFC) के अंतर्गत एक क्षेत्रीय उप-परिसंघ के रूप में कार्य करता है।
- इस चैंपियनशिप का उद्देश्य दक्षिण एशियाई देशों के मध्य फुटबॉल के विकास, क्षेत्रीय खेल सहयोग तथा स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना है।
- पुरुषों और महिलाओं की राष्ट्रीय टीमों के लिए अलग-अलग टूर्नामेंट आयोजित किए जाते हैं।
- उद्भव और विकास
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- सार्क गोल्ड कप: इस टूर्नामेंट का पहला आयोजन वर्ष 1993 में पाकिस्तान के लाहौर में सार्क गोल्ड कप के रूप में किया गया था।
- भारत ने उद्घाटन संस्करण का खिताब जीतकर दक्षिण एशियाई फुटबॉल का पहला चैंपियन बनने का गौरव प्राप्त किया।
- SAFF का गठन: दक्षिण एशियाई फुटबॉल महासंघ (SAFF) की औपचारिक स्थापना वर्ष 1997 में की गई थी।
- संस्थापक सदस्य: इसके संस्थापक सदस्यों में बांग्लादेश, भूटान, भारत, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका शामिल थे।
- अफगानिस्तान: अफगानिस्तान पहले SAFF का सदस्य था, लेकिन बाद में वह मध्य एशियाई फुटबॉल संघ (CAFA) में शामिल हो गया।
- टूर्नामेंट का नाम परिवर्तन: इस प्रतियोगिता का नाम वर्ष 2008 में सैफ चैंपियनशिप रखा गया।
- इसका आयोजन सामान्यतः द्विवार्षिक आधार पर किया जाता है।
- SAFF का शासन: SAFF की संगठनात्मक संरचना वैश्विक सर्वोच्च प्राधिकरण से लेकर उप-महाद्वीपीय सदस्य संघों तक क्रमबद्ध रूप से संचालित होती है:
- फीफा (Federation Internationale de Football Association-FIFA): यह विश्व फुटबॉल का सर्वोच्च वैश्विक शासी निकाय है, जो सभी सदस्य परिसंघों के लिए व्यापक नियम, उपनियम तथा वित्तीय विनियम निर्धारित करता है।
- एशियाई फुटबॉल परिसंघ (Asian Football Confederation-AFC): यह एशिया में फुटबॉल का महाद्वीपीय शासी निकाय है।
- AFC के अंतर्गत मान्यता प्राप्त पाँच क्षेत्रीय महासंघों में से एक है, जो दक्षिण एशिया में फुटबॉल के विकास और क्षेत्रीय प्रतियोगिताओं के संचालन का कार्य करता है।
- SAFF कार्यकारी समिति एवं कांग्रेस: यह दक्षिण एशियाई फुटबॉल का प्रमुख क्षेत्रीय शासी निकाय है।
- सदस्य संघ: संबंधित देशों के राष्ट्रीय फुटबॉल शासी निकाय [जैसे- भारत में अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (AIFF)] अपने-अपने देशों में आधारभूत स्तर से लेकर पेशेवर क्लब स्तर तक फुटबॉल के विकास का कार्य करते हैं।
- SAFF सचिवालय: इसका मुख्यालय ढाका, बांग्लादेश में स्थित है।
महिला सैफ चैंपियनशिप 2026
- मेजबान: भारत (मडगाँव, गोवा)
- आयोजन स्थल: पंडित जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम
- विजेता: भारत
- उपविजेता: बांग्लादेश
- भारत ने फाइनल में बांग्लादेश को 3–1 से पराजित कर सात वर्ष बाद पुनः चैंपियनशिप का खिताब अपने नाम किया।
- इस जीत के साथ भारत ने रिकॉर्ड छठा सैफ महिला चैंपियनशिप खिताब हासिल कर अपना रिकॉर्ड और मजबूत किया।
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स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टिट्यूट (SIPRI) ईयरबुक 2026
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SIPRI ईयरबुक 2026 के अनुसार, भारत के परमाणु शस्त्रागार में वृद्धि होकर लगभग 190 वारहेड हो गई है तथा इसका आधुनिकीकरण कार्यक्रम सक्रिय रूप से जारी है।
SIPRI ईयरबुक 2026: प्रमुख बिंदु
- भारत का परमाणु शस्त्रागार: SIPRI के अनुसार, भारत के परमाणु वारहेडों की संख्या वर्ष 2025 में लगभग 180 से बढ़कर वर्ष 2026 की शुरुआत में लगभग 190 हो गई।
- क्षेत्रीय संतुलन: भारवर्ष 2025 में संयुक्त राज्य अमेरिका त ने पाकिस्तान (170 वारहेड) पर अपनी परमाणु बढ़त और मजबूत की है, हालांकि वह अभी भी चीन (620 वारहेड) से काफी पीछे है।
- रक्षा व्यय: वर्ष 2025 में वैश्विक सैन्य व्यय वास्तविक रूप से 2.9% बढ़कर 2,887 अरब डॉलर तक पहुँच गया। यह सैन्य व्यय में वृद्धि का लगातार 11वाँ वर्ष था।
- वर्ष 2025 में भारत लगभग 92.1 अरब डॉलर के रक्षा व्यय के साथ विश्व का पाँचवाँ सबसे बड़ा सैन्य व्ययकर्ता बना रहा। यह पिछले वर्ष की तुलना में 8.9% की वृद्धि दर्शाता है।
- लगभग 954 अरब डॉलर के अनुमानित रक्षा व्यय के साथ विश्व का सबसे बड़ा सैन्य व्ययकर्ता रहा, इसके बाद चीन और रूस का स्थान रहा।
- हथियार आयात: वर्ष 2021–25 के दौरान भारत प्रमुख हथियारों का दूसरा सबसे बड़ा आयातक रहा, जिसका वैश्विक आयात में 8.2% हिस्सा था। हालाँकि, वर्ष 2016–20 की तुलना में भारत के हथियार आयात में 4% की कमी दर्ज की गई।
- यूक्रेन वैश्विक हथियार आयात का 9.7% हिस्सा लेकर विश्व का सबसे बड़ा हथियार आयातक बन गया।
- वैश्विक परमाणु रुझान: वर्ष 2026 की शुरुआत में विश्व के नौ परमाणु-सशस्त्र देशों के पास सामूहिक रूप से अनुमानित 12,187 परमाणु वारहेड थे।
- शीर्ष 3 परमाणु शक्तियाँ: रूस (5,580), संयुक्त राज्य अमेरिका (5,244) तथा चीन (620)।
- सभी परमाणु-सशस्त्र देशों ने अपने परमाणु शस्त्रागारों के आधुनिकीकरण की प्रक्रिया जारी रखी, जो वैश्विक सुरक्षा रणनीतियों में परमाणु प्रतिरोधक क्षमता पर बढ़ते जोर को दर्शाता है।
SIPRI के बारे मे
- स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टिट्यूट (SIPRI) संघर्ष, आयुध, हथियार नियंत्रण तथा निरस्त्रीकरण के क्षेत्र में विशेषज्ञता रखने वाला एक स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान संस्थान है।
- स्थापना: SIPRI की स्थापना वर्ष 1966 में स्वीडिश संसद द्वारा की गई थी।
- मुख्यालय: स्टॉकहोम, स्वीडन।
- प्रमुख रिपोर्टें और डेटाबेस
- आयुधों, निरस्त्रीकरण और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर SIPRI ईयरबुक।
- वैश्विक सैन्य व्यय डेटाबेस।
- अंतरराष्ट्रीय हथियार हस्तांतरण डेटाबेस।
- परमाणु बलों तथा हथियार प्रतिबंधों से संबंधित डेटाबेस।
- मूल्यांकन की कार्यप्रणाली
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- SIPRI मुख्यतः ओपन-सोर्स (सार्वजनिक रूप से उपलब्ध) सूचनाओं पर निर्भर करता है, जिनमें सरकारी प्रकाशन, आधिकारिक वक्तव्य तथा सत्यापित सार्वजनिक आँकड़े शामिल हैं।
- अंतरराष्ट्रीय हथियार हस्तांतरण को ट्रेंड-इंडिकेटर वैल्यू (TIV) नामक मानकीकृत इकाई के माध्यम से मापा जाता है, जो प्रमुख पारंपरिक हथियारों के हस्तांतरण की मात्रा का अनुमान लगाती है।
- TIV हथियारों के मौद्रिक मूल्य को नहीं, बल्कि हस्तांतरित की गई सैन्य क्षमता को मापता है।
- महत्त्व: SIPRI सैन्य व्यय, हथियारों के हस्तांतरण, परमाणु शस्त्रागार तथा वैश्विक सुरक्षा प्रवृत्तियों पर विश्व के सबसे अधिक प्रामाणिक स्रोतों में से एक है। इसके आँकड़ों और विश्लेषणों का व्यापक रूप से नीति-निर्माताओं, शोधकर्ताओं तथा अंतरराष्ट्रीय संगठनों द्वारा उपयोग किया जाता है।
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