तृष्णा उपग्रह (TRISHNA Satellite)
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भारत और फ्राँस वर्ष 2027 में संयुक्त रूप से तृष्णा (TRISHNA) उपग्रह का प्रक्षेपण करेंगे, जिसका उद्देश्य जल संसाधनों, कृषि गतिविधियों तथा जलवायु परिवर्तन से संबंधित प्रभावों की उन्नत निगरानी को सुदृढ़ करना है।
तृष्णा (TRISHNA) उपग्रह के बारे में
- तृष्णा (TRISHNA) का पूर्ण रूप थर्मल इन्फ्रारेड इमेजिंग सैटेलाइट फॉर हाई-रिजॉल्यूशन नेचुरल रिसोर्स असेसमेंट (Thermal InfraRed Imaging Satellite for High-resolution Natural Resource Assessment) है।
- भारत–फ्राँस संयुक्त मिशन: यह भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और फ्राँस की राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी सेंटर नेशनल डी‘एट्यूड्स स्पेशियल्स (CNES) के बीच एक संयुक्त पृथ्वी अवलोकन (Earth Observation) मिशन है।
- उद्देश्य: इसका विकास जल तनाव, फसल स्वास्थ्य, सिंचाई दक्षता, सूखा तथा कृषि उत्पादकता की निगरानी के लिए किया गया है।
- प्रौद्योगिकी: इसमें उन्नत थर्मल इन्फ्रारेड सेंसर लगाए जाएँगे, जो भूमि एवं सतही तापमान का उच्च सटीकता के साथ मापन करेंगे।
- दो प्रमुख पेलोड
- TIR पेलोड (CNES): भूमि सतह तापमान तथा उत्सर्जकता (Emissivity) का मापन करेगा।
- VNIR-SWIR पेलोड (ISRO): वनस्पति, सतही परावर्तन तथा जैव-भौतिकीय मापदंडों का आकलन करेगा।
- कक्षा एवं मिशन अवधि: यह 761 किमी. की ऊँचाई पर सूर्य-समकालिक कक्षा (SSO) में संचालित होगा। इसकी नियोजित मिशन अवधि 5 वर्ष होगी।
- जलवायु परिवर्तन संबंधी अनुप्रयोग: वाष्पोत्सर्जन का आकलन, हीट स्ट्रेस की निगरानी, पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य का मूल्यांकन, हिमनदों में होने वाले परिवर्तनों का अध्ययन तथा प्राकृतिक संसाधनों पर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का विश्लेषण करना।
- सतत् संसाधन प्रबंधन में योगदान: इससे प्राप्त आँकड़े जल संसाधन नियोजन, कृषि प्रबंधन, आपदा तैयारी तथा जलवायु अनुकूलन संबंधी नीतिगत निर्णयों में सहायक होंगे।
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भारत बिल्डकॉन 2026

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भारत बिल्डकॉन 2026 का उद्घाटन यशोभूमि कन्वेंशन सेंटर, नई दिल्ली में किया गया।
भारत बिल्डकॉन (Bharat Buildcon) के बारे में
- यह निर्माण सामग्री (Building Materials) एवं निर्माण उद्योग (Construction Industry) के लिए एक राष्ट्रीय प्रदर्शनी एवं व्यावसायिक मंच है, जिसका आयोजन “एक राष्ट्र, एक एक्सपो (One Nation, One Expo)” विषय-वस्तु के अंतर्गत किया जाता है।
- उद्योग जगत के हितधारक: यह मंच विनिर्माताओं, वास्तुकारों (Architects), बिल्डरों, डेवलपर्स, ठेकेदारों, नीति-निर्माताओं, उद्योग संघों तथा अंतरराष्ट्रीय खरीदारों को एक साथ लाता है।
- प्रौद्योगिकी एवं उत्पाद प्रदर्शन: इसमें निर्माण सामग्री के 24 क्षेत्रों से संबंधित नवाचारों एवं उत्पादों का प्रदर्शन किया जाता है, जिनमें — सिरेमिक एवं पत्थर (Ceramics and Stone), सीमेंट एवं इस्पात, हार्डवेयर, प्लाईवुड एवं लैमिनेट्स, पेंट्स तथा निर्माण प्रौद्योगिकियाँ आदि प्रमुख हैं।
- वैश्विक एवं घरेलू भागीदारी: इस आयोजन में 90 से अधिक देशों तथा भारत के 100 से अधिक शहरों के प्रतिभागियों ने भाग लिया।
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शी-बॉक्स 2.0 पोर्टल (SHe-Box 2.0 Portal)
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सरकार ने मिशन शक्ति (Mission Shakti) के अंतर्गत उन्नत शी-बॉक्स 2.0 (SHe-Box 2.0) पोर्टल के माध्यम से महिलाओं के लिए कार्यस्थल सुरक्षा एवं संरक्षण तंत्र को और सुदृढ़ किया है।
शी-बॉक्स 2.0 पोर्टल (SHe-Box 2.0 Portal) के बारे में
- शी-बॉक्स (Sexual Harassment electronic Box) 2.0 एक केंद्रीकृत ऑनलाइन शिकायत निवारण प्लेटफार्म है, जो कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, प्रतिषेध एवं प्रतितोष) अधिनियम, 2013 [POSH Act, 2013] के अंतर्गत कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न संबंधी शिकायतों के पंजीकरण एवं निगरानी की सुविधा प्रदान करता है।
- नोडल मंत्रालय: यह पोर्टल मिशन शक्ति (Mission Shakti) पहल के अंतर्गत महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (Ministry of Women and Child Development) द्वारा विकसित एवं संचालित किया जाता है।
- प्रमुख विशेषताएँ
- सिंगल-विंडो प्लेटफॉर्म: पोर्टल पर संगठित, असंगठित, सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्रों की महिलाएँ कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से संबंधित शिकायतों को दर्ज एवं ट्रैक कर सकती हैं।
- सुरक्षित एवं गोपनीय इंटरफेस: यह सामाजिक कलंक, भेदभाव अथवा प्रतिशोध के भय के बिना घटनाओं की रिपोर्टिंग के लिए एक सुरक्षित एवं उपयोगकर्ता-अनुकूल तंत्र उपलब्ध कराता है।
- उन्नत पहुँच: यह पोर्टल हिंदी एवं अंग्रेजी सहित 22 भाषाओं में उपलब्ध है, जिससे देशभर में इसकी पहुँच एवं समावेशिता बढ़ती है।
- बेहतर निगरानी व्यवस्था: यह विभिन्न हितधारकों के बीच सुचारु समन्वय सुनिश्चित करता है तथा एक संरचित एवं निगरानी योग्य प्रणाली के माध्यम से POSH अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन को सुदृढ़ करता है।
महत्त्व
शी-बॉक्स 2.0 कार्यस्थलों पर महिलाओं की सुरक्षा से संबंधित संस्थागत तंत्र को मजबूत बनाता है, शिकायतों के समयबद्ध निस्तारण को सुनिश्चित करता है तथा महिलाओं की गरिमा, सुरक्षा एवं कार्यबल में भागीदारी को बढ़ावा देता है। |
अभ्यास खान क्वेस्ट 2026
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20 जून से 3 जुलाई, 2026 तक मंगोलिया में आयोजित होने वाले बहुराष्ट्रीय शांति स्थापना सैन्य अभ्यास खान क्वेस्ट 2026 (KHAAN QUEST 2026) में भाग लेने हेतु भारतीय सेना का एक दल मंगोलिया के लिए रवाना हुआ।
अभ्यास खान क्वेस्ट (Exercise KHAAN QUEST) के बारे में
- अभ्यास खान क्वेस्ट एक वार्षिक बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास है, जिसका उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना अभियानों (UN Peacekeeping Missions) के लिए अंतर-संचालनीयता एवं परिचालन तत्परता को सुदृढ़ करना है।
- स्थान: इसका 2026 संस्करण 20 जून से 3 जुलाई, 2026 तक उलानबटार, मंगोलिया स्थित फाइव हिल्स प्रशिक्षण क्षेत्र में आयोजित किया जा रहा है।
- प्रतिभागी: इस अभ्यास में विभिन्न देशों की सैन्य टुकड़ियाँ भाग लेती हैं।
- भारत का प्रतिनिधित्व 40 सदस्यीय सैन्य दल द्वारा किया जा रहा है, जिसका नेतृत्व जाट रेजिमेंट की एक बटालियन के सैनिक कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त अन्य आयुधों एवं सेवाओं के कार्मिक भी इसमें शामिल हैं।
- विकासक्रम: खान क्वेस्ट की शुरुआत वर्ष 2003 में संयुक्त राज्य अमेरिका और मंगोलिया के मध्य एक द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास के रूप में हुई थी।
- वर्ष 2006 से इसे बहुराष्ट्रीय शांति स्थापना अभ्यास का स्वरूप प्रदान किया गया और वर्ष 2026 का संस्करण इसका 23वाँ आयोजन है।
- प्रमुख फोकस क्षेत्र: यह अभ्यास संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अध्याय VII (Chapter VII of the UN Charter) के अंतर्गत संचालित शांति स्थापना अभियानों के लिए सैन्य बलों को तैयार करने पर केंद्रित है। इसकी प्रशिक्षण गतिविधियों में —संयुक्त योजना निर्माण, चेक-पोस्ट स्थापना, घेराबंदी एवं तलाशी अभियान, गश्त, नागरिक निकासी (Civilian Evacuation), इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) निरोधक अभ्यास, युद्धक्षेत्र प्राथमिक उपचार तथा हताहत निकासी शामिल हैं।
महत्त्व
यह सहभागी सैन्य बलों के बीच अंतर-संचालनीयता को बढ़ाता है, रक्षा सहयोग एवं सैन्य समन्वय को सुदृढ़ करता है, वैश्विक शांति स्थापना अभियानों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है तथा भारत–मंगोलिया सामरिक साझेदारी को और मजबूत बनाता है। |
स्मार्ट सीड कोटिंग टेक्नोलॉजी (Smart Seed Coating Technology)
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ICAR–भारतीय तिलहन अनुसंधान संस्थान (ICAR-IIOR) ने जैव-बहुलक (Biopolymer) आधारित स्मार्ट सीड कोटिंग टेक्नोलॉजी (Smart Seed Coating Technology) विकसित की है, जो फसल सुधार, तनाव-सहनशीलता में वृद्धि तथा उपज में 30% तक बढोतरी करने में सहायक है।
स्मार्ट सीड कोटिंग टेक्नोलॉजी के बारे में
- स्मार्ट सीड कोटिंग टेक्नोलॉजी एक अभिनव बीज संवर्द्धन प्रणाली है, जिसके अंतर्गत बीजों के चारों ओर एक सुरक्षात्मक जैव-बहुलक (Biopolymer) परत बनाई जाती है, जिससे अंकुरण, वृद्धि एवं तनाव-सहनशीलता में सुधार होता है।
- विकसितकर्ता: इस प्रौद्योगिकी का विकास ICAR–भारतीय तिलहन अनुसंधान संस्थान (ICAR-IIOR), हैदराबाद द्वारा किया गया है।
- प्रमुख विशेषताएँ
- जैव-बहुलक आधारित सुरक्षात्मक परत: इसमें जैव-अवक्रमणीय (Biodegradable) जैव-बहुलकों का उपयोग कर बीजों के चारों ओर बहु-कार्यात्मक सुरक्षात्मक परत बनाई जाती है, जिससे पर्यावरण-अनुकूल बीज उपचार सुनिश्चित होता है।
- एकीकृत इनपुट वितरण प्रणाली: यह परत लाभकारी सूक्ष्मजीवों, पोषक तत्त्वों, सूक्ष्म पोषक तत्त्वों, फसल संरक्षण एजेंटों तथा पौध वृद्धि प्रवर्धक पदार्थों के वाहक के रूप में कार्य करती है।
- उन्नत बीज प्रदर्शन: यह तीव्र अंकुरण, बेहतर जड़ विकास, अधिक पौध शक्ति तथा प्रारंभिक वृद्धि चरणों में बेहतर फसल स्थापना को बढ़ावा देती है।
- जलवायु सहनशीलता: यह तकनीक फसलों की सूखा, नमी तनाव, अत्यधिक तापमान, कीट एवं रोगों के प्रति सहनशीलता बढ़ाकर जैविक एवं अजैविक तनावों से सुरक्षा प्रदान करती है।
- स्मार्ट सीड कोटिंग टेक्नोलॉजी के अनुप्रयोग
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- वर्षा-आधारित कृषि: यह तकनीक विशेष रूप से वर्षा-आधारित क्षेत्रों में उपयोगी है, जहाँ यह पौध सुधार कर विलंबित मानसून, सूखा एवं खराब मृदा परिस्थितियों से जुड़े जोखिमों को कम करती है।
- बहु-फसली अनुकूलता: इसे विभिन्न कृषि-जलवायु परिस्थितियों के अनुसार, अनाज, मोटे अनाज (Millets), दलहन, तिलहन, रेशा फसलें, चारा फसलों, सब्जियों, मसाले एवं बागवानी फसलों के लिए अनुकूलित किया जा सकता है।
- उत्पादकता में वृद्धि: मूँगफली एवं सोयाबीन पर किए गए क्षेत्रीय जाँच में लगभग 30% तक उपज वृद्धि दर्ज की गई, जबकि विभिन्न फसलों पर बहु-स्थान परीक्षणों में 12% से 37% तक उत्पादकता वृद्धि देखी गई।
महत्त्व
यह प्रौद्योगिकी जलवायु-सहिष्णु कृषि को बढ़ावा देती है, बीज प्रणालियों को सुदृढ़ बनाती है, संसाधनों के दक्ष उपयोग को प्रोत्साहित करती है तथा उच्च उत्पादकता और कम उत्पादन जोखिम के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने में योगदान देती है। |