संदर्भ
केंद्र सरकार ने ग्रीन हाइड्रोजन सर्टिफिकेशन पोर्टल ऑफ इंडिया (GHCI) का शुभारंभ किया है, जिसका उद्देश्य ग्रीन हाइड्रोजन क्षेत्र में पारदर्शिता, सर्टिफिकेशन तथा नियामकीय अनुपालन को सुदृढ़ करना है।
ग्रीन हाइड्रोजन सर्टिफिकेशन पोर्टल के बारे में
- ग्रीन हाइड्रोजन सर्टिफिकेशन पोर्टल एक डिजिटल प्लेटफार्म है, जो राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के अंतर्गत ग्रीन हाइड्रोजन सर्टिफिकेशन योजना के तहत ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन के प्रमाणन को सुगम बनाता है।
- नोडल मंत्रालय: इस पोर्टल का विकास नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) द्वारा किया गया है।
- नोडल प्राधिकरण: ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (Bureau of Energy Efficiency – BEE) सत्यापन एवं प्रमाणन प्रक्रियाओं के संचालन हेतु नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करता है।
- प्रमुख विशेषताएँ
- पारदर्शी प्रमाणन: यह सुनिश्चित करता है कि हाइड्रोजन उत्पादन भारत के ग्रीन हाइड्रोजन मानकों एवं उत्सर्जन सीमाओं का अनुपालन करता है।
- नियामकीय अनुपालन: यह उत्पादकों को ग्रीन हाइड्रोजन सर्टिफिकेशन योजना के अंतर्गत निर्धारित आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायता प्रदान करता है।
- पता लगाने योग्य एवं विश्वसनीय प्रणाली: ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन की निगरानी, रिपोर्टिंग और सत्यापन के लिए एक मानकीकृत ढाँचा उपलब्ध कराता है।
- बाजार संवर्द्धन: प्रमाणित ग्रीन हाइड्रोजन की प्रामाणिकता सुनिश्चित कर घरेलू उपयोग, निर्यात तथा निवेश को प्रोत्साहित करता है।
- महत्त्व: यह पोर्टल निवेशकों का विश्वास सुदृढ़ करता है, मानकीकृत प्रमाणन व्यवस्था को बढ़ावा देता है तथा भारत को ग्लोबल ग्रीन हाइड्रोजन हब बनाने की दिशा में महत्त्वपूर्ण योगदान देता है।
राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (NGHM)
- राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन भारत का प्रमुख कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य डीकार्बोनाइजेशन, ऊर्जा सुरक्षा तथा औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए एक समग्र ग्रीन हाइड्रोजन इकोसिस्टम का विकास करना है।
- उद्भव: इस मिशन का शुभारंभ जनवरी 2023 में किया गया और इसका कुल परिव्यय ₹19,744 करोड़ है तथा इसका क्रियान्वयन नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) द्वारा किया जा रहा है।
- वर्ष 2030 तक के लक्ष्य
- 5 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) वार्षिक हरित हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता स्थापित करना।
- 125 गीगावाट (GW) समर्पित नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का विकास करना।
- ₹8 लाख करोड़ से अधिक का निवेश आकर्षित करना।
- 6 लाख से अधिक रोजगार सृजित करना।
- जीवाश्म ईंधन आयात पर होने वाले व्यय में प्रतिवर्ष ₹1 लाख करोड़ से अधिक की कमी लाना।
- प्रतिवर्ष लगभग 50 MMT कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) उत्सर्जन कम करना।
हाइड्रोजन के प्रकार (UPSC CSE Prelims 2023)
- ग्रीन हाइड्रोजन: इसका उत्पादन सौर एवं पवन जैसी नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग करते हुए जल के विद्युत अपघटन (Electrolysis) द्वारा किया जाता है। इसके उत्पादन में उत्सर्जन प्रति किलोग्राम हाइड्रोजन पर 2 किलोग्राम CO₂ समतुल्य से अधिक नहीं होता।
- ग्रीन हाइड्रोजन से तेल रिफाइनरियों, इस्पात संयंत्रों तथा उर्वरक उद्योगों जैसे भारी उद्योगों के डीकार्बोनाइजेशन में महत्त्वपूर्ण योगदान मिलने की अपेक्षा है। चूँकि इसका उत्पादन केवल नवीकरणीय ऊर्जा के माध्यम से जल को विघटित करके किया जाता है, इसलिए इसमें कार्बन उत्सर्जन नगण्य होता है।
- ग्रे हाइड्रोजन: इसका उत्पादन प्राकृतिक गैस रिफॉर्मिंग अथवा कोयला गैसीकरण जैसी प्रक्रियाओं के माध्यम से जीवाश्म ईंधनों से किया जाता है। इस प्रक्रिया में उत्पन्न कार्बन उत्सर्जन सीधे वायुमंडल में छोड़ दिया जाता है।
- ब्लू हाइड्रोजन: इसका उत्पादन भी जीवाश्म ईंधनों से किया जाता है, किंतु इसमें कार्बन कैप्चर, उपयोग एवं भंडारण (CCUS) प्रौद्योगिकी का उपयोग कर उत्पन्न कार्बन उत्सर्जन के बड़े हिस्से को पकड़कर संगृहीत किया जाता है, जिससे इसका पर्यावरणीय प्रभाव अपेक्षाकृत कम हो जाता है।