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सिकल सेल एनीमिया

20 Jun 2026

संदर्भ

ओंकारेश्वर (मध्य प्रदेश) में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सिकल सेल दिवस कार्यक्रम के दौरान, भारत के राष्ट्रपति ने घोषणा की कि भारत विश्व के सबसे बड़े आनुवंशिक स्क्रीनिंग अभियान की सफलता के कारण अपने मूल लक्ष्य वर्ष 2047 से काफी पहले सिकल सेल एनीमिया के उन्मूलन की दिशा में अग्रसर है।

2 19

संबंधित तथ्य

  • CRISPR का उपयोग करते हुए जीन थेरेपी का विकास, भारत के सिकल सेल रोग को वर्ष 2047 तक समाप्त करने के मिशन का एक हिस्सा रहा है।
  • विश्व सिकल सेल दिवस प्रत्येक वर्ष 19 जून को मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य इस आनुवंशिक रक्त विकार के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा लोगों को जीवनशैली प्रबंधन के बारे में शिक्षित करना है।

सिकल सेल रोग के बारे में

  • यह वंशानुगत एकल-जीन लाल रक्त कोशिका विकारों का एक समूह है, जो माता-पिता से संतानों में संचरित होता है।
    • लाल रक्त कोशिकाएँ शरीर में ऑक्सीजन के वितरण के लिए हीमोग्लोबिन नामक प्रोटीन का उपयोग करती हैं।
  • संरचनात्मक विकृति: सामान्य लाल रक्त कोशिकाएँ लचीली, चिकनी और गोलाकार होती हैं। सिकल सेल रोग से ग्रस्त व्यक्तियों में आनुवंशिक उत्परिवर्तन के कारण दोषपूर्ण हीमोग्लोबिन बनता है, जो कोशिकाओं को कठोर, चिपचिपी और C-आकार (सिकल आकृति) में परिवर्तित कर देता है।
  • नैदानिक जटिलताएँ
    • एनीमिया: विकृत कोशिकाएँ संवेदनशील हो जाती हैं और समय से पूर्व नष्ट हो जाती हैं, जिससे कार्यशील लाल रक्त कोशिकाओं की लगातार कमी हो जाती है।
    • वासो-ऑक्लूजन (अवरोध): चिपचिपी सिकल कोशिकाएँ सूक्ष्म रक्त वाहिकाओं के भीतर एकत्र होकर सामान्य रक्त प्रवाह को अवरुद्ध कर देती हैं। इससे अचानक दर्द, दीर्घकालिक ऊतक क्षति, स्ट्रोक का जोखिम और महत्त्वपूर्ण अंगों (विशेषकर हृदय और गुर्दे) की विफलता हो सकती है।
  • संक्रमण की श्रेणियाँ
    • सिकल सेल ट्रेट (वाहक अवस्था): जब किसी व्यक्ति को परिवर्तित जीन की एक प्रति प्राप्त होती है। ऐसे व्यक्ति सामान्य और लक्षण-रहित जीवन जीते हैं, किंतु यह लक्षण अपनी संतानों में संचारित कर सकते हैं।
    • सिकल सेल रोग (सक्रिय अवस्था): जब किसी व्यक्ति को परिवर्तित जीन की दो प्रतियाँ (प्रत्येक माता-पिता से एक) प्राप्त होती हैं, जिससे पूर्ण नैदानिक लक्षण प्रकट होते हैं।
  • जनजातीय चयन संबंध: यह विकार भारत की अनुसूचित जनजातियों में अपेक्षाकृत अधिक पाया जाता है।
    • यह एक विकासात्मक अनुकूलन के कारण है, जो मलेरिया के विरुद्ध सुरक्षा प्रदान करता था, जो ऐतिहासिक रूप से जनजातीय वन क्षेत्रों में व्यापक था।
    • पीढ़ियों के दौरान, सिकल सेल जीन की एक प्रति होना घातक मलेरिया से प्राकृतिक सुरक्षा प्रदान करता था, जिसके कारण यह उत्परिवर्तन इन अलग-थलग आनुवंशिक समूहों में बना रहा।

भारत की पहलें एवं कार्यवाही

  • राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन: केंद्रीय बजट (2023) में प्रस्तुत यह कार्यक्रमात्मक मिशन राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के व्यापक ढाँचे के अंतर्गत वर्ष 2047 तक आनुवंशिक संचरण के पूर्ण उन्मूलन का लक्ष्य रखता है।
  • अंतर-विभागीय संचालन: समन्वित क्रियान्वयन के लिए यह रणनीति स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और जनजातीय कार्य मंत्रालय (MoTA) के मध्य एक संयुक्त परिचालन मॉडल का उपयोग करती है।
  • वृहद स्क्रीनिंग अभियान: इस कार्यक्रम ने 17 उच्च-फोकस राज्यों में 0 से 40 वर्ष आयु वर्ग के 7 करोड़ (70 मिलियन) व्यक्तियों की स्क्रीनिंग सफलतापूर्वक पूरी की है, जिसमें लगभग 2.5 लाख सक्रिय रोगी और 20 लाख से अधिक आनुवंशिक वाहक की पहचान की गई है।
  • वर्गीकृत आनुवंशिक स्थिति कार्ड: राज्य द्वारा 40 वर्ष से कम आयु के नागरिकों को रंग-कोडित निदान कार्ड वितरित किए जाते हैं। ये पूर्व-विवाह परामर्श संकेतक के रूप में कार्य करते हैं, जिससे दो वाहकों के बीच विवाह को रोका जा सके और वंशानुगत संचरण शृंखला को तोड़ा जा सके।
  • SCD सपोर्ट कॉर्नर: जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा प्रारंभ किया गया एक डिजिटल, रोगी-केंद्रित भंडार, जो रोगियों की स्थिति को दर्ज करता है और ग्रामीण समुदायों तथा केंद्रीकृत नैदानिक नेटवर्क के बीच ट्रैकिंग अंतराल को कम करता है।
  • राष्ट्रीय सिकल सेल रोग परिषद: एक विशेष केंद्रीय सलाहकार निकाय, जो चिकित्सा खरीद, राज्य-स्तरीय क्रियान्वयन का निर्देशन तथा उन्नत उपचार के लिए विशेष उत्कृष्टता केंद्रों (Centres of Excellence) के संगठन का प्रबंधन करता है।

वैश्विक पहलें

  • विश्व सिकल सेल रोग दिवस: संयुक्त राष्ट्र महासभा के एक प्रस्ताव के बाद प्रत्येक वर्ष 19 जून को मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य वैश्विक जनस्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाना और स्वास्थ्य सेवाओं में असमानताओं को कम करना है।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन ढाँचा: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) सिकल सेल रोग प्रबंधन को प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं में एकीकृत करने पर बल देता है।
    • इसमें नियमित टीकाकरण (जैसे- न्यूमोकोकल वैक्सीन), फोलिक एसिड प्रबंधन तथा हाइड्रॉक्सीयूरिया जैसी किफायती उपचार विधियों का वितरण शामिल है, जिससे दर्द को कम किया जा सके।
  • पैकेज ऑफ एसेंशियल नॉनकम्युनिकेबल डिजीज इंटरवेंशन्स (PEN) प्लस मॉडल: विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा समर्थित यह क्षेत्रीय रणनीति आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों और युवाओं में समय-पूर्व मृत्यु दर को कम करने पर केंद्रित है, जिसके अंतर्गत गंभीर असंक्रामक रक्त रोगों के लिए समेकित उपचार प्रदान किया जाता है।
  • विश्व सिकल सेल रोग गठबंधन: यह एक अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक-निजी साझेदारी है, जिसका उद्देश्य संसाधनों की व्यवस्था करना, वैज्ञानिक अनुसंधान का समन्वय करना तथा निम्न और मध्यम आय वाले देशों (LMICs) में नैदानिक उपकरण उपलब्ध कराना है, जहाँ इस रोग का भार अधिक है।
  • उन्नत जैव-चिकित्सीय प्रगति
    • CRISPR-Cas9 जीन थेरेपी: यह नवीन स्थायी उपचार CRISPR-Cas9 तकनीक का उपयोग करके दोषपूर्ण DNA को संशोधित करता है।
    • कैसगेवी (Casgevy): यह एक विशेष उपचार है, जो अस्थि मज्जा स्टेम सेल में BCL11A जीन को संशोधित कर शरीर में कार्यात्मक भ्रूण हीमोग्लोबिन के उत्पादन को पुनः प्रारंभ करता है, जिससे सिकल विकृति को नियंत्रित किया जा सके।
    • लाइफजेनिया (Lyfgenia): यह एक वैकल्पिक कोशिकीय इंजीनियरिंग तकनीक है, जो संशोधित लेंटिवायरस के माध्यम से स्वस्थ हीमोग्लोबिन-उत्पादक जीन को सीधे रोगी की कोशिकाओं में पहुँचाती है।

CRISPR-Cas9 के बारे में

  • CRISPR का पूर्ण रूप क्लस्टर्ड रेगुलरली इंटरस्पेस्ड शॉर्ट पैलिंड्रोमिक रिपीट्स’ है।
  • Cas9 का अर्थ CRISPR-असोसिएटेड 9 है, जो वह न्यूक्लिएज एंजाइम है, जो DNA को काटता है।
  • CRISPR इस प्रणाली का DNA-लक्षित भाग है, जिसमें एक RNA अणु (गाइड RNA) होता है, जिसे विशिष्ट DNA बेस से बेसयुग्मन के माध्यम से जुड़ने के लिए डिजाइन किया जाता है।
  • CRISPR-Cas9 प्रणाली की खोज मूल रूप से बैक्टीरिया में हुई थी, जो इस प्रणाली का उपयोग विदेशी आक्रमक बैक्टीरिया को नष्ट करने के लिए करते हैं।
  • यह जीनोम एडिटिंग के लिए सबसे सामान्य, सस्ती और प्रभावी तकनीक मानी जाती है।

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