संदर्भ
संयुक्त राष्ट्र बाल मृत्यु अनुमान अंतर-एजेंसी समूह (UNIGME) रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने नवजात मृत्यु दर को कम करने में अच्छी प्रगति की है।
संबंधित तथ्य
- वर्ष 2024 में, उप-सहारा अफ्रीका ने पाँच वर्ष से कम आयु की कुल मृत्यु का 58% हिस्सा दर्ज किया।
- भारत उन देशों में शामिल है, जो सतत् सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयासों के माध्यम से बाल मृत्यु दर को कम करने में निरंतर प्रगति प्रदर्शित कर रहे हैं।
बाल मृत्यु दर के बारे में
- बाल मृत्यु दर पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु को संदर्भित करती है।
- मापन: इसे सामान्यतः पाँच वर्ष से कम आयु के दौरान मृत्यु दर के रूप में मापा जाता है, अर्थात् प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु की संख्या।
बाल मृत्यु दर को कम करने के लिए सरकारी पहलें
- राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन: मातृ और शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए एक समग्र कार्यक्रम, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में।
- जननी सुरक्षा योजना: गर्भवती महिलाओं को नकद प्रोत्साहन प्रदान कर संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देती है।
- जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम: गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के लिए निःशुल्क प्रसव (सी-सेक्शन सहित), दवाएँ, जाँच और परिवहन सुनिश्चित करता है।
- राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम: बच्चों (0–18 वर्ष) में रोगों, कमी और विकलांगताओं की शीघ्र पहचान और उपचार पर केंद्रित है।
- सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम: बच्चों और गर्भवती महिलाओं को प्रमुख जानलेवा रोगों के विरुद्ध निःशुल्क टीके प्रदान करता है।
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नवजात मृत्यु दर के बारे में
- नवजात मृत्यु दर जीवन के पहले 28 दिनों के भीतर शिशुओं की मृत्यु की संख्या को प्रति 1,000 जीवित जन्मों के आधार पर दर्शाती है।
- केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुमानों के अनुसार, नवजात मृत्यु दर में वर्ष 1990 से गिरावट दर्ज की गई है।
- वर्ष 1990 में भारत की नवजात मृत्यु दर प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर 57 थी, जो वर्ष 2024 में घटकर 17 हो गई।
- नवजात मृत्यु दर में वर्ष 1990 से गिरावट दर्ज की गई है। वर्ष 1990 में भारत की नवजात मृत्यु दर प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर 57 थी, जो वर्ष 2024 में घटकर 17 हो गई।
- पाँच वर्ष से कम आयु मृत्यु दर में भी उल्लेखनीय गिरावट देखी गई है। वर्ष 1990 में यह प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर 127 थी, जबकि वर्ष 2024 में घटकर 27 हो गई।
- मुख्य कारण
- अपरिपक्व जन्म से संबंधित जटिलताएँ
- जन्म के समय घुटन के कारण (ऑक्सीजन की कमी)
- सेप्सिस जैसे संक्रमण
- जन्मजात असामान्यताएँ।
- वैश्विक लक्ष्य: सतत् विकास लक्ष्य 3 (अच्छा स्वास्थ्य और कल्याण) के अंतर्गत वर्ष 2030 तक नवजात मृत्यु दर को प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर 12 या उससे कम करने का लक्ष्य है।
मुख्य निष्कर्ष
- वैश्विक रूप से पाँच वर्ष से कम आयु एवं नवजात मृत्यु दर, 2024: वर्ष 2024 में वैश्विक स्तर पर अनुमानित 4.9 मिलियन बच्चों की मृत्यु पाँच वर्ष से पहले हुई, जिनमें 2.3 मिलियन नवजात शामिल थे।
- इनमें से अधिकांश मृत्यु प्रमाणित, कम लागत वाले हस्तक्षेपों और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच से रोकी जा सकती थीं।
- वैश्विक स्तर पर पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु में वर्ष 2000 के बाद से आधे से अधिक की कमी आई है।
- हालाँकि, वर्ष 2015 के बाद बाल मृत्यु दर में कमी की गति 60% से अधिक धीमी हो गई है।
- वर्ष 2024 में 5–24 वर्ष आयु वर्ग के अनुमानित 2.1 मिलियन बच्चों, किशोरों और युवाओं की मृत्यु हुई।
- कारण: कम आयु के बच्चों में संक्रामक रोग और चोटें प्रमुख कारण बने रहते हैं, जबकि किशोरावस्था में जोखिम बदल जाते हैं, लड़कों में सड़क यातायात दुर्घटनाएँ प्रमुख कारण हैं।
- कुपोषण से होने वाली मृत्यु: इसमें पाया गया कि वर्ष 2024 में 1–59 माह आयु वर्ग के 1,00,000 से अधिक या 5% बच्चे की मौत कुपोषण के कारण हुई।
- नवजात मृत्यु: नवजात मृत्यु, पाँच वर्ष से कम आयु की कुल मृत्यु का लगभग आधा हिस्सा है, जो जन्म के समय के आस-पास मृत्यु को रोकने में धीमी प्रगति को दर्शाता है।
- कारण: अपरिपक्व जन्म से उत्पन्न जटिलताएँ (36%) तथा प्रसव और डिलीवरी के दौरान (21%)।
- संक्रमण, जिनमें नवजात सेप्सिस और जन्मजात असामान्यताएँ शामिल हैं।
- प्रमुख रोग: पहले महीने के बाद, संक्रामक रोग, जिनमें मलेरिया, दस्त और निमोनिया शामिल हैं, प्रमुख कारण रहे।
- इस आयु वर्ग में मलेरिया सबसे बड़ा एकल कारण (17%) बना रहा, जिसमें अधिकांश मृत्यु उप-सहारा अफ्रीका के स्थानिक क्षेत्रों में हुई।
- वैश्विक वित्तपोषण चुनौतियाँ: वैश्विक विकास वित्तपोषण प्रणाली में परिवर्तन मातृ, नवजात और बाल स्वास्थ्य कार्यक्रमों पर दबाव डाल रहे हैं।
- निवेश का उच्च महत्त्व: बाल स्वास्थ्य पर व्यय सबसे अधिक वहनीय विकास निवेशों में से एक है।