भारत का वामपंथी उग्रवाद के बाद का भविष्य: लाल सूरज से नई सुबह तक

भारत का वामपंथी उग्रवाद के बाद का भविष्य: लाल सूरज से नई सुबह तक 23 Apr 2026

संदर्भ:

वामपंथी उग्रवाद (LWE) कभी एक गंभीर आंतरिक सुरक्षा खतरा था, जो हिंसा, कमजोर शासन और आदिवासी अलगाव से चिह्नित था। इसके पतन और वर्ष 2026 की घोषणा के साथ, भारत अब सुरक्षा-आधारित स्थिरीकरण से शासन-आधारित, समावेशी परिवर्तन की ओर बढ़ रहा है।

वामपंथी उग्रवाद (LWE)

उत्पत्ति: नक्सलबाड़ी से उत्पन्न और माओवादी विचारधारा से प्रेरित होकर, यह संसाधन-समृद्ध आदिवासी क्षेत्रों में फैल गया।

वर्त्तमान स्थिति और सफलता के कारक

  • सफलता सहकारी संघवाद, दीर्घकालिक योजना, तथा केंद्रीय बलों (CRPF) और राज्य पुलिस के बीच समन्वय से संचालित होती है।
  • मजबूत राजनीतिक प्रतिबद्धता, संस्थागत ध्यान और संयुक्त रणनीतियों ने हिंसा में कमी सुनिश्चित की।
  • विचारधारात्मक विद्रोह से जमीनी स्तर पर विश्वास निर्माण और शासन की पहुँच की ओर बदलाव।

चुनौतियाँ: “आदिवासी विरोधाभास” और संसाधन संबंधी संघर्ष

  • संसाधन अभिशाप की निरंतरता: खनिजों का दोहन, लेकिन स्थानीय लाभ सीमित।
  • आदिवासी समुदाय माओवादी दबाव और राज्य की कार्रवाइयों के बीच फंसे हुए हैं, जिससे भय और मानसिक आघात उत्पन्न होता है।
  • विस्थापन की समस्याएँ, कमजोर सेवा वितरण और वन अधिकारों की मान्यता में देरी।
  • हिंसा कम होने के साथ-साथ नीतिगत ध्यान के घटने का जोखिम।

रणनीतिक बदलाव: क्षेत्रीय प्रभुत्व से शासन की वैधता तक

  • अब मुख्य चुनौती राज्य के प्रति विश्वास और उसकी वैधता का निर्माण करना है।
  • शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और रोजगार के क्षेत्रों में स्थायी संस्थागत उपस्थिति की आवश्यकता है।
  • AIEEEE ढाँचे को अपनाना:
    • जवाबदेही (Accountability), नवाचार (Innovation), साक्ष्य (Evidence), समानता (Equity), सहानुभूति (Empathy), दक्षता (Efficiency)।
    • एपिसोडिक हस्तक्षेपों के बजाय निरंतर सहभागिता पर बल।

विकासात्मक और सामाजिक समाधान

(a) आर्थिक परिवर्तन

  • स्थानीय मूल्य-आधारित अर्थव्यवस्थाओं को बढ़ावा देना:
    • वन उत्पाद प्रसंस्करण और उचित खरीद
    • कृषि-वनीकरण और संबंधित आजीविकाएँ
    • MSMEs और इको-टूरिज्म
  • सामुदायिक स्वामित्व, लाभ-साझेदारी और सम्मानजनक आजीविका सुनिश्चित करना।

(b) शासन और संस्थागत सुदृढ़ीकरण

  • अंतिम छोर तक सेवा वितरण पर ध्यान केन्द्रित करना:
    • सड़कें, स्कूल, स्वास्थ्य सेवाएँ, बैंकिंग, पोषण
    • महिला सामूहिकीकरण और जमीनी जवाबदेही
  • योजनाओं के माध्यम से अभिसरण:
    • आकांक्षी जिला कार्यक्रम
    • पीएम-जनमन (PM-JANMAN), दाजुगा (DAJUGA)
    • आदि कर्मयोगी अभियान
    • अनुच्छेद 275(1) और जनजातीय उपयोजना अनुदान

(c) न्याय और अधिकार-आधारित दृष्टिकोण

  • मानवीय पुलिसिंग, कानूनी सहायता और त्वरित न्याय सुनिश्चित करना।
  • SC/ST समुदायों को प्रभावित करने वाले विचाराधीन मामलों और छोटे अपराधों की समीक्षा करना।
  • संघर्ष परिवर्तन सिद्धांत के अनुसार निष्पक्षता के माध्यम से विश्वास स्थापित करना।

(d) मानव पूँजी और युवा आकांक्षाएँ

  • अवसरों का विस्तार:
    • शिक्षा, छात्रवृत्ति और कौशल विकास
    • महिला-नेतृत्व वाले उद्यम
  • समावेशन में खेल की भूमिका, जैसा कि सलीमा टेटे (Salima Tete) और ममता हंसदा (Mamta Hansda) में देखा गया।
  • प्रतिभा संवर्धन में प्रधानमंत्री ग्रामीण विकास फेलोशिप जैसी पहलें।

आगे की राह: शांति लाभ को बनाए रखना

  • सुरक्षा उपलब्धियों से शासन की विश्वसनीयता की ओर बढ़ना।
  • सहानुभूतिपूर्ण नेतृत्व और सामुदायिक भागीदारी सुनिश्चित करना।
  • स्थिर स्थानीय अर्थव्यवस्थाएँ और संस्थागत विश्वास विकसित करना।
  • राज्य की निरंतर उपस्थिति और जवाबदेही तंत्र बनाए रखना।

निष्कर्ष

LWE के बाद का चरण केवल एक सुरक्षा उपलब्धि नहीं, बल्कि नैतिक और शासन से जुड़ी एक कसौटी है। वास्तविक परीक्षा शांति को समावेशी और सतत शासन के माध्यम से समृद्धि, विश्वास और गरिमा में बदलने में निहित है। ये क्षेत्र भारत के मूल का अभिन्न हिस्सा हैं, और उनका परिवर्तन सहकारी संघवाद तथा लोकतांत्रिक न्याय की सफलता को परिभाषित करेगा।

मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न: 

प्रश्न: वामपंथी उग्रवाद (LWE) के उन्मूलन के साथ, प्रमुख चुनौती क्षेत्रीय प्रभुत्व से हटकर शासन की वैधता स्थापित करने की हो जाती है। पूर्व ‘रेड कॉरिडोर’ में समावेशन-आधारित, संघर्षोत्तर परिवर्तन सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक सामाजिक-आर्थिक और प्रशासनिक ढाँचों पर चर्चा कीजिए।

(15 अंक, 250 शब्द)

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