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भारत–दक्षिण कोरिया संबंध

भारत–दक्षिण कोरिया संबंध 23 Apr 2026

संदर्भ:

भारत और कोरिया गणराज्य (दक्षिण कोरिया) ने वर्ष 2026 में राष्ट्रपति ली जे म्युंग की यात्रा के साथ अपने संबंधों को पुनर्जीवित किया है, जो आठ वर्षों में उनकी पहली यात्रा है।

यात्रा का मुख्य उद्देश्य 

  • यह सहभागिता व्यापार, प्रौद्योगिकी और रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने पर केंद्रित रही, जो वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भविष्य-उन्मुख विशेष रणनीतिक साझेदारी की ओर एक बदलाव को दर्शाती है।

प्रमुख परिणाम और आर्थिक ढाँचा 

  • आर्थिक क्षेत्रों में 15 समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर।
  • द्विपक्षीय व्यापार को 27 अरब डॉलर से बढ़ाकर वर्ष 2030 तक 50 अरब डॉलर करने की प्रतिबद्धता।
  • शुल्कों को कम करने और सेवाओं के उदारीकरण के लिए व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) का उन्नयन।
  • कोरियाई तकनीक और भारत के पैमाने का लाभ उठाते हुए सहयोग—विशेष रूप से विनिर्माण और नवाचार के क्षेत्र में।

रणनीतिक सहयोग के स्तंभ

(a) मूलभूत मूल्य

  • लोकतंत्र, बाजार अर्थव्यवस्था और विधि के शासन के प्रति साझा प्रतिबद्धता।

(b) उभरते रणनीतिक क्षेत्र

  • जहाज निर्माण, समुद्री लॉजिस्टिक्स, ऊर्जा सुरक्षा और स्थिरता में सहयोग।
  • महत्वपूर्ण खनिजों (लिथियम, कोबाल्ट, निकेल) और क्वांटम कंप्यूटिंग ।
  • सफल रक्षा सहयोग का उदाहरण: K9 वज्र होवित्जर (K9 Vajra Howitzer)।

रणनीतिक और भू-राजनीतिक अभिसरण

  • भारत की ‘एक्ट ईस्ट नीति’ और कोरिया की ‘इंडो-पैसिफिक रणनीति’ के बीच सामंजस्य स्थापित करना।
  • इन विषयों पर विद्यमान चिंताएँ:
    • पश्चिम एशिया और लाल सागर में आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान
    • ऊर्जा सुरक्षा संबंधी चुनौतियाँ
    • वैश्विक संघर्षों का व्यापार और स्थिरता पर प्रभाव
  • लेन-देन आधारित संबंधों से आगे बढ़कर एक मजबूत, दीर्घकालिक साझेदारी निर्मित करने की आवश्यकता।

सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंध

  • अयोध्या से जुड़ी राजकुमारी सुरिरत्ना (ह्यो ह्वांग-ओक) [Princess Suriratna (Heo Hwang-ok)] के माध्यम से प्राचीन संबंध।
  • भारत में के-पॉप (K-Pop) और के-ड्रामा ( K-Drama) की बढ़ती लोकप्रियता के माध्यम से सॉफ्ट पावर आदान-प्रदान में वृद्धि।
  • इसके बावजूद, पर्यटन और जन-से-जन संपर्क अभी भी सीमित हैं।

चुनौतियाँ और अप्रयुक्त संभावनाएँ

  • आर्थिक आकार की तुलना में कम द्विपक्षीय व्यापार।
  • मानव गतिशीलता और प्रवासी उपस्थिति में महत्वपूर्ण अंतर।
  • निवेश संरक्षण और सेवा क्षेत्र की पहुँच से जुड़े लंबित मुद्दे।
  • CEPA उन्नयन को अंतिम रूप देने में विलंब।
  • मजबूत राजनीतिक और रणनीतिक सहभागिता तंत्र की आवश्यकता।

आगे की राह: परिवर्तनकारी साझेदारी की ओर

  • व्यापार क्षमता को बढ़ाने के लिए CEPA वार्ताओं को तेज करना।
  • जन-से-जन संपर्क और पर्यटन को बढ़ावा देना।
  • महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों और आपूर्ति श्रृंखलाओं में सहयोग मजबूत करना।
  • साझा सुरक्षा और आर्थिक हितों के लिए इंडो-पैसिफिक समन्वय को गहरा करना।
  • वैश्विक तनाव और व्यवधानों से निपटने के लिए मजबूत तंत्र निर्मित करना।

निष्कर्ष

भारत–दक्षिण कोरिया संबंध एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़े हैं, जिनकी मजबूत नींव साझा मूल्यों, आर्थिक पूरकताओं और रणनीतिक अभिसरण पर आधारित है। इसे एक परिवर्तनकारी साझेदारी में बदलने के लिए मौजूदा कमियों को दूर करना और गति बनाए रखना आवश्यक है।

एक अधिक गहन और लचीला सहयोग दोनों देशों को भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं का सामना करने में सक्षम बनाएगा तथा एक स्थिर इंडो-पैसिफिक व्यवस्था को आकार देने में सहायक होगा।

मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न: 

प्रश्न: साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और गहरे ऐतिहासिक संबंधों के बावजूद, भारत और दक्षिण कोरिया के बीच वास्तविक आर्थिक और रणनीतिक क्षमता अभी भी पूर्ण रूप से साकार नहीं हो पाई है। हालिया भू-राजनीतिक उथल-पुथल के संदर्भ में इस द्विपक्षीय संबंध को बाधित करने वाली चुनौतियों का समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए तथा उन्हें दूर करने के उपाय सुझाइए।

 (15 अंक, 250 शब्द) 

भारत–दक्षिण कोरिया संबंध

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