स्वास्थ्य सेवा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)

22 Apr 2026

संदर्भ

बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप’ (BCG) द्वारा किए गए एक अध्यन, जिसका शीर्षक ‘कंज्यूमर्स आर रेडी फॉर AI-इनेबल्ड हेल्थ केयर। हेल्थ सिस्टम्स नीड टू बी, टू’ (Consumers Are Ready for AI-Enabled Health Care. Health Systems Need to Be, Too) है, के अनुसार, व्यक्तिगत स्वास्थ्य के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को अपनाने में भारत वैश्विक स्तर पर अग्रणी बनकर उभरा है।

  • यहाँ 85 प्रतिशत उपभोक्ता पहले से ही AI-संचालित उपकरणों का उपयोग कर रहे हैं, जो दुनिया के प्रमुख विकसित बाजारों से काफी आगे है।

स्वास्थ्य सेवा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बारे में

  • स्वास्थ्य सेवा में AI का तात्पर्य निदान (Diagnosis), उपचार और स्वास्थ्य सेवा वितरण में सुधार के लिए मशीन लर्निंग, डेटा एनालिटिक्स और एल्गोरिदम के उपयोग से है।

रिपोर्ट की मुख्य विशेषताएँ

  • नमूना आकार: यह सर्वेक्षण 15 देशों के 13,000 से अधिक उपभोक्ताओं पर आधारित है। इसमें रेखांकित किया गया है कि भारत की AI को अपनाने की दर संयुक्त राज्य अमेरिका (50 प्रतिशत), यूनाइटेड किंगडम (43 प्रतिशत) और जापान (34 प्रतिशत) से अधिक है।
    • वैश्विक स्तर पर, लगभग 60 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि वे पहले से ही स्वास्थ्य संबंधी उद्देश्यों के लिए AI का उपयोग करते हैं, लेकिन भारत इसमें सबसे आगे है, जो डिजिटल उपकरणों के प्रति बढ़ती सहजता को दर्शाता है।
  • हाइब्रिड हेल्थकेयर मॉडल’ को प्राथमिकता: सर्वेक्षण से प्राप्त निष्कर्ष चिकित्सा देखभाल के प्रति मरीजों के नजरिए में परिवर्तन को दर्शाते हैं। अधिकांश लोग ‘हाइब्रिड दृष्टिकोण’ पसंद करते हैं, जिसमें मानव डॉक्टरों को AI द्वारा प्रतिस्थापित करने के बजाय उनका सहयोग दिया जाए।
  • डायग्नोस्टिक्स और ‘क्रॉनिक केयर’ में AI का उपयोग: यह मॉडल विशेष रूप से परीक्षण परिणामों की व्याख्या करने और जीर्ण बीमारियों के प्रबंधन जैसे कार्यों के लिए लोकप्रिय है।
  • AI के उपयोग में युवाओं का योगदान: इस सर्वेक्षण में स्वास्थ्य क्षेत्र में AI को अपनाने को लेकर युवा पीढ़ी मुख्य चालक के रूप में उभरी है।
    • लगभग 78 प्रतिशत जेन जी (Gen Z) और 71 प्रतिशत मिलेनियल्स स्वास्थ्य संबंधी कार्यों के लिए AI का उपयोग कर रहे हैं।
  • वर्तमान AI अनुप्रयोग: वर्तमान में, स्वास्थ्य सेवा में AI का उपयोग मुख्य रूप से चैटबॉट्स और वियरेबल डिवाइसेस (पहनने योग्य उपकरण) तक सीमित है, किंतु इस क्षेत्र में AI के उपयोग को लेकर संभावनाएँ तेजी से बढ़ रही हैं।
    • हालाँकि वर्तमान उपयोग चैटबॉट्स (33 प्रतिशत) और वियरेबल्स (19 प्रतिशत) में केंद्रित है, एजेंटिक AI’ के लिए स्पष्ट अपेक्षा है, जो अपॉइंटमेंट बुक कर सके, रेफरल प्रबंधित कर सके और दवाओं के प्रतिकूल प्रभाव की पहचान कर सके।
  • स्वास्थ्य सेवा में एजेंटिक AI का उदय: उपभोक्ता तेजी से अधिक उन्नतएजेंटिक AI’ प्रणालियों की तलाश कर रहे हैं, जो स्वतंत्र रूप से कार्य करने में सक्षम हों।

भारत में स्वास्थ्य सेवा में AI के उदय के लिए जिम्मेदार कारक

  1. उच्च डिजिटल विस्तार: स्मार्टफोन के तेजी से विस्तार और सस्ते इंटरनेट ने डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच को बढ़ाया है।
    • उदाहरण के लिए: डिजिटल हेल्थ आईडी मरीजों को विभिन्न अस्पतालों में निर्बाध रूप से चिकित्सकीय जाँच तक पहुँच की अनुमति देती है।
  2. लागत प्रभावी स्वास्थ्य देखभाल की आवश्यकता: भारत की विशाल जनसंख्या और डॉक्टर-मरीज के अनुपात में कमी के लिए मापनीय या विस्तार योग्य समाधानों की आवश्यकता है।
    • AI ने निदान, परामर्श और निगरानी में लागत कम की है।
      • उदाहरण के लिए: टीबी और कैंसर स्क्रीनिंग के लिए AI उपकरण (जैसे- स्वचालित एक्स-रे विश्लेषण) विशेषज्ञों पर निर्भरता कम करते हैं।
  3. स्वास्थ्य जागरूकता में वृद्धि: कोविड-19 महामारी ने निवारक स्वास्थ्य देखभाल और प्रारंभिक निदान पर ध्यान केंद्रित किया है। त्वरित और विश्वसनीय चिकित्सा सलाह की माँग बढ़ रही है।
    • उदाहरण के लिए: स्व-मूल्यांकन के लिए कोविड-19 महामारी के दौरान लक्षण-जाँचकर्ता (Symptom-checker) चैटबॉट्स का उपयोग किया जा रहा है।
  4. युवाओं द्वारा अपनाना: जेन जी और मिलेनियल्स AI-सक्षम स्वास्थ्य सेवा उपकरणों के प्रमुख उपयोगकर्ता हैं।
  5. टेलीमेडिसिन का विस्तार: ई-संजीवनी (eSanjeevani) जैसी टेलीमेडिसिन सेवाएँ दूरदराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवा तक पहुँच में सुधार करती हैं।
    • AI, दूरस्थ निदान और मेडिकल फॉलो-अप को बेहतर बनाता है।
  6. सरकारी प्रोत्साहन और नीतिगत समर्थन: डिजिटल स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र की ओर मजबूत नीतिगत प्रयास किए जा रहे हैं।
    • सार्वजनिक स्वास्थ्य वितरण में AI एकीकरण बढ़ रहा है।
    • उदाहरण के लिए: राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत रोग निगरानी में AI का उपयोग और डायबिटिक रेटिनोपैथी का शीघ्र पता लगाने के लिए पायलट AI उपकरण का उपयोग किया जा रहा है।

स्वास्थ्य सेवा में AI अपनाने की चुनौतियाँ

  • डेटा गोपनीयता और सुरक्षा चिंताएँ: संवेदनशील स्वास्थ्य डेटा के उल्लंघन और दुरुपयोग का खतरा बना रहता है। डेटा सुरक्षा ढाँचे के मजबूत प्रवर्तन की कमी गोपनीयता की चिंताएँ उत्पन्न करती है।
    • उदाहरण के लिए: आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन से संबंधित डिजिटल स्वास्थ्य प्लेटफॉर्मों से डेटा लीक होने का जोखिम बना हुआ है।
  • डिजिटल विभाजन: ग्रामीण आबादी और वृद्ध नागरिक डिजिटल साक्षरता और AI-सक्षम स्वास्थ्य सेवा तक पहुँच स्थापित करने में असमर्थ हैं।
    • शहरी क्षेत्रों की तुलना में दूरदराज के गाँवों में टेलीमेडिसिन सेवाओं का सीमित उपयोग हो पा रहा है।
  • नियामक और नैतिक मुद्दे: स्वास्थ्य सेवा के लिए विशिष्ट व्यापक AI नियामक ढाँचे का अभाव है।
    • AI-आधारित त्रुटियों या गलत निदान के मामले में जवाबदेही तय करने में चुनौतियाँ बनी हुई हैं।
  • सटीकता और विश्वसनीयता संबंधी चिंताएँ: दोषपूर्ण एल्गोरिदम या अशुद्ध डेटा के कारण AI प्रणाली त्रुटियाँ उत्पन्न कर सकते हैं। डेटासेट में पक्षपात के कारण गलत या भेदभावपूर्ण परिणाम हो सकते हैं।
  • गंभीर देखभाल सेवाओं के लिए AI पर कम विश्वास: मरीज अभी भी गंभीर या जानलेवा स्थितियों के लिए डॉक्टरों पर अधिक विश्वास करते हैं।
  • बुनियादी ढाँचे की बाधाएँ: ग्रामीण स्वास्थ्य संस्थानों में अपर्याप्त डिजिटल बुनियादी ढाँचा AI को अपनाने में बाधा डालता है। विभिन्न स्वास्थ्य प्रणालियों और डेटाबेस के बीच खराब इंटरऑपरेबिलिटी है।
    • प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHCs) में उन्नत डायग्नोस्टिक उपकरणों और डिजिटल एकीकरण की कमी है।

आगे की राह

  • डेटा सुरक्षा ढाँचे को मजबूत करना: संवेदनशील स्वास्थ्य डेटा की सुरक्षा के लिए डिजिटल डेटा सुरक्षा कानूनों का प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करना। सुरक्षित और इंटरऑपरेबल (आपस में कार्य करने वाले) स्वास्थ्य डेटा-साझाकरण तंत्र विकसित करना।
    • मरीजों के रिकॉर्ड के दुरुपयोग को रोकने के लिए आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत डेटा सुरक्षा को सुदृढ़ करना।
  • मजबूत AI विनियम विकसित करना: AI-आधारित स्वास्थ्य सेवा में दायित्व, नैतिकता, पारदर्शिता और जवाबदेही के संबंध में स्पष्ट दिशानिर्देश तैयार करना। AI चिकित्सा उपकरणों के लिए प्रमाणन और मानकीकरण तंत्र स्थापित करना।
    • उदाहरण के लिए: AI डायग्नोस्टिक सॉफ्टवेयर के लिए, चिकित्सा उपकरण प्रमाणन के समान नियामक अनुमोदन ढाँचा।
  • डिजिटल डिवाइड को पाटना: ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी और डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं जैसे डिजिटल बुनियादी ढाँचे का विस्तार करना।
  • सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) को बढ़ावा देना: सरकार, स्टार्टअप्स, अस्पतालों और टेक कंपनियों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना। AI-आधारित, इनोवेटिव और किफायती हेल्थकेयर समाधानों के विस्तार को आसान बनाना।
    • उदाहरण के लिए: AI-आधारित बीमारी की जाँच (स्क्रीनिंग) कार्यक्रमों के लिए सरकार और हेल्थ-टेक स्टार्टअप्स के बीच साझेदारी।
  • क्षमता निर्माण: स्वास्थ्य पेशेवरों को AI उपकरणों और डिजिटल स्वास्थ्य तकनीकों में प्रशिक्षित करना। चिकित्सा, डेटा विज्ञान और AI को मिलाकर अंतर्विषयक शिक्षा को बढ़ावा देना।

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