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भारत में मातृ मृत्यु दर का परिदृश्य

3 Apr 2026

संदर्भ 

द लैंसेट ऑब्स्टेट्रिक्स, गायनकोलॉजी और विमेंस हेल्थ पत्रिका में हाल ही में प्रकाशित एक अध्ययन से पता चलता है कि वर्ष 2030 तक मातृ मृत्यु दर (MMR) को प्रति 1 लाख जीवित जन्मों पर 70 मौतों से नीचे लाने के सतत् विकास लक्ष्य को पूरा करने में भारत के समक्ष क्या चुनौतियाँ उपस्थित हैं।

संबंधित तथ्य 

  • भारत में मातृ मृत्यु दर (MMA) वर्ष 2015-17 में प्रति एक लाख जीवित जन्मों पर 122 से घटकर वर्ष 2021-2023 में 88 हो गई, इसी अवधि में असम में MMA 215 से घटकर 110 हो गई तथा उत्तर प्रदेश में 197 से घटकर 141 हो गई।

मातृ मृत्यु दर के बारे में

  • इसे प्रसूति संबंधी जटिलताओं या गर्भावस्था के कारण बढ़ जाने वाले सह-रुग्ण विकारों के कारण होने वाली मृत्यु के रूप में परिभाषित किया जाता है; यह मृत्यु गर्भावस्था समाप्त होने के 1 वर्ष तक हो सकती है, चाहे गर्भावस्था किसी भी तरीके से समाप्त हुई हो।

मातृ मृत्यु दर के बारे में

  • यह किसी निश्चित समयावधि में प्रति एक लाख जीवित जन्मों पर मातृ मृत्यु की संख्या है।
  • वैश्विक और राष्ट्रीय लक्ष्य
    • विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का वैश्विक लक्ष्य: सतत् विकास लक्ष्यों (SDG) के अंतर्गत वर्ष 2030 तक मातृ मृत्यु दर (MMR) को प्रति 1,00,000 जीवित जन्मों पर 70 से कम करना।
    • भारत का राष्ट्रीय लक्ष्य: वर्ष 2030 तक MMR को 70 से नीचे लाना।

मुख्य निष्कर्ष

  • मातृ मृत्यु दर में कमी: देश ने वर्ष 2023 में प्रति लाख जीवित जन्मों पर मातृ मृत्यु दर को 16 तक सफलतापूर्वक कम कर दिया है।
  • मातृ मृत्यु अनुपात के आँकड़े: वर्ष 2023 में, दुनिया भर में हुई कुल मातृ मृत्यु के मामलों में भारत की हिस्सेदारी दसवें हिस्से के बराबर रही, जिससे वैश्विक स्तर पर कुल मौतों की संख्या 2.4 लाख तक पहुँच गई।
  • SDG लक्ष्य प्राप्त करने वाले देश: अध्ययन से यह भी पता चलता है कि अध्ययन में शामिल 204 देशों और क्षेत्रों में से 100 ने वर्ष 2023 तक 70 से कम मातृ मृत्यु दर के वर्ष 2030 SDG लक्ष्य को प्राप्त कर लिया था।
    • लक्ष्य हासिल न कर पाने वाले देश: लक्ष्य को पूरा न कर पाने वाले 104 देशों में से 15 देशों में MMR 70 से 100 के बीच, 16 देशों में 100 से 140 के बीच (भारत सहित) और 73 देशों में 140 से अधिक थी।
  • सतत् विकास लक्ष्यों की दिशा में प्रगति: भारत के अलावा, सतत् विकास लक्ष्य वर्ष 2030 को पूरा करने में संघर्ष कर रहे देशों में कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, इथियोपिया, नाइजीरिया और पाकिस्तान शामिल हैं।
    • हालाँकि, भारत बांग्लादेश, इथियोपिया, मोरक्को, नेपाल और रवांडा के साथ उन देशों में शामिल है, जिन्होंने वर्ष 1990 के बाद से मातृ मृत्यु दर (MMR) में सबसे अधिक सुधार दर्शाया है।
  • क्षेत्रीय असमानता: भारत के भीतर, जहाँ दक्षिण भारत और कुछ राज्य वर्ष 2030 तक सतत् विकास लक्ष्य प्राप्त करने की दिशा में अग्रसर हैं, वहीं असम और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों के कारण समग्र मातृ मृत्यु दर में गिरावट आ रही है।
  • रोकथाम योग्य चिकित्सा कारण: आसानी से रोके जा सकने वाले रक्तस्राव और उच्च रक्तचाप संबंधी विकार वर्ष 2023 में मातृ मृत्यु के लगभग आधे (40% से अधिक) मामलों के लिए जिम्मेदार थे।
    • कोविड-19 महामारी का प्रभाव: माना जाता है कि कोविड के दौरान सामान्य स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर उत्पन्न हुए अवरोधों ने वर्ष 2020-21 में देखी गई गिरावट में भूमिका निभाई है।

मातृ मृत्यु दर (MMR) को प्रभावित करने वाली सरकारी योजनाएँ

योजना उद्देश्य प्रभाव
जननी सुरक्षा योजना (Janani Suraksha Yojana -JSY) यह संस्था संस्थागत प्रसवों के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है, विशेष रूप से कम आय वाली और ग्रामीण महिलाओं के लिए। कुशल प्रसव सहायकों और संस्थागत देखभाल तक बेहतर पहुँच से मातृ मृत्यु दर में कमी आई है।
प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA) यह संस्था हर महीने की 9 तारीख को गर्भवती महिलाओं को मुफ्त और व्यापक प्रसवपूर्व देखभाल प्रदान करती है। इससे उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की शीघ्र पहचान और प्रबंधन संभव हो पाता है, जिससे मातृ स्वास्थ्य परिणामों में सुधार होता है।
लक्ष्य योजना प्रसव कक्षों और प्रसूति शल्य चिकित्सा कक्षों में प्रसव के दौरान देखभाल की गुणवत्ता में सुधार पर ध्यान केंद्रित किया गया है। उच्च प्रसव भार वाले सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्रों में मातृ एवं नवजात शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए इसे लागू किया गया है।
पोषण अभियान (POSHAN Abhiyaan) इसका उद्देश्य गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए पोषण संबंधी परिणामों को बेहतर बनाना है। मातृ पोषण और स्वास्थ्य स्थिति में सुधार करके मातृ मृत्यु दर के अप्रत्यक्ष कारणों का समाधान करता है।

सुझाव

  • प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों को सुदृढ़ बनाना: मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य (MCH) पर केंद्रित दृष्टिकोण के साथ प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों को सुदृढ़ बनाने से मातृ मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी आ सकती है।
    • प्रसवपूर्व देखभाल (ANC), कुशल प्रसव सहायक और प्रसवोत्तर देखभाल (PNC) तक बेहतर पहुँच से जटिलताओं का शीघ्र पता लगाना और उनका प्रबंधन सुनिश्चित होता है।
  • शिशु मृत्यु दर, प्रजनन दर और मातृ मृत्यु दर के मध्य संबंध: शिशु मृत्यु दर में कमी से परिवारों में अनिश्चितता कम होती है, जिससे उच्च प्रजनन दर की आवश्यकता कम हो जाती है।
    • कम प्रजनन दर के परिणामस्वरूप प्रति महिला गर्भधारण की संख्या कम होती है, जिससे मातृ मृत्यु का आजीवन जोखिम सीधे कम हो जाता है।
    • यह सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति में एकीकृत जीवन-चक्र दृष्टिकोण के महत्त्व को उजागर करता है।
  • एकीकृत स्वास्थ्य सेवा दृष्टिकोण: मातृ स्वास्थ्य, बाल स्वास्थ्य, पोषण और परिवार नियोजन सेवाओं को मिलाकर बनाई गई एक एकीकृत रणनीति से सहक्रियात्मक परिणाम प्राप्त हो सकते हैं।
  • योजनाओं का अभिसरण जैसे
    • जननी सुरक्षा योजना
    • प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना
    • POSHAN अभियान समग्र मातृ स्वास्थ्य परिणामों में सुधार ला सकता है।
भारत में मातृ मृत्यु दर का परिदृश्य

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