ब्रिक्स स्पेस इकोनॉमी
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ब्रिक्स अंतरिक्ष एजेंसियों के प्रमुखों की बैठक, 2026 में भारत ने “ब्रिक्स स्पेस इकोनॉमी (BRICS Space Economy)” को नवाचार, सतत् विकास तथा साझा आर्थिक प्रगति के नए आयाम के रूप में प्रस्तावित किया।
ब्रिक्स स्पेस इकोनॉमी के बारे में
- ब्रिक्स स्पेस इकोनॉमी भारत द्वारा प्रस्तावित एक सहयोगात्मक ढाँचा है, जिसका उद्देश्य ब्रिक्स देशों के बीच अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, उपग्रह अनुप्रयोगों, नवाचार तथा वाणिज्यिक अंतरिक्ष गतिविधियों में सहयोग को सुदृढ़ करना है।
- उद्देश्य: संयुक्त अनुसंधान, प्रौद्योगिकी साझाकरण तथा नवाचार-आधारित आर्थिक विकास के माध्यम से एक सुदृढ़, समावेशी एवं सतत् अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना।
- प्रमुख विशेषताएँ
- ब्रिक्स रिमोट सेंसिंग उपग्रह समूह (RSSC): RSSC सदस्य देशों के बीच उपग्रह आँकड़ों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देता है, ताकि आपदा प्रबंधन, कृषि, मौसम पूर्वानुमान तथा पर्यावरणीय निगरानी को सुदृढ़ किया जा सके।
- प्रस्तावित ब्रिक्स अंतरिक्ष परिषद: यह प्रस्तावित संस्थागत तंत्र ब्रिक्स देशों के बीच अंतरिक्ष सहयोग में दीर्घकालिक नीतिगत समन्वय, निरंतरता तथा विस्तार सुनिश्चित करने का प्रयास करता है।
- अंतरिक्ष संधारणीयता पर बल: सदस्य देशों ने अंतरिक्ष मलबा-मुक्त (Debris-Free) मिशनों, उत्तरदायी अंतरिक्ष संचालन तथा बाह्य अंतरिक्ष संसाधनों के सतत् उपयोग पर विशेष बल दिया है।
- न्यूस्पेस (NewSpace) पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा: यह पहल स्टार्ट-अप, निजी उद्योग, वैज्ञानिकों एवं नवप्रवर्तकों के बीच सहयोग को प्रोत्साहित करती है, जिससे अंतरिक्ष-आधारित उद्यमिता एवं प्रौद्योगिकीय प्रगति को गति मिल सके।
- ब्रिक्स स्पेस इकोनॉमी की संभावनाएँ
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- वैज्ञानिक एवं औद्योगिक क्षमता: ब्रिक्स देशों के समक्ष सामूहिक रूप से वैज्ञानिक विशेषज्ञता, प्रौद्योगिकीय क्षमता, औद्योगिक आधार एवं विशाल बाजार उपलब्ध है, जो उन्हें वैश्विक स्पेस इकोनॉमी में एक प्रमुख शक्ति बना सकता है।
- वैश्विक चुनौतियों का समाधान: अंतरिक्ष-आधारित अनुप्रयोग जलवायु निगरानी, आपदा सहनशीलता, खाद्य सुरक्षा, जल प्रबंधन, स्वास्थ्य सेवाओं तथा सतत् विकास को सुदृढ़ करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
- आर्थिक एवं नवाचार संबंधी अवसर: गहन सहयोग से प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, निवेश, औद्योगिक साझेदारी तथा तीव्र गति से विकसित हो रहे अंतरिक्ष क्षेत्र में नए बाजारों का सृजन संभव होगा।
- महत्त्व: ब्रिक्स स्पेस इकोनॉमी अंतरिक्ष सहयोग को सह-विकास एवं सह-नवाचार में परिवर्तित कर वैश्विक सुदृढ़ता, आर्थिक विकास तथा वैज्ञानिक प्रगति को सुदृढ़ करने की क्षमता रखती है।
वैश्विक स्पेस इकोनॉमी के बारे में
- वैश्विक बाजार का आकार: वर्तमान में वैश्विक स्पेस इकोनॉमी का मूल्य लगभग 613–630 अरब अमेरिकी डॉलर (USD) है, जिसके वर्ष 2035 तक लगभग 1.8 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है।
- भारत की हिस्सेदारी: भारत की स्पेस इकोनॉमी का वर्तमान मूल्य लगभग 8.4 अरब अमेरिकी डॉलर है, जो वैश्विक अंतरिक्ष बाजार का लगभग 2% है।
- भारत की विकास क्षमता: अंतरिक्ष क्षेत्र में सुधारों एवं निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी के आधार पर भारत का लक्ष्य वर्ष 2033 तक अपनी स्पेस इकोनॉमी को 44 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँचाना तथा वर्ष 2040–47 तक वैश्विक बाजार में 10–15% हिस्सेदारी प्राप्त करना है।
- ब्रिक्स देशों की अंतरिक्ष एजेंसियाँ
- ब्राजील: ब्राजीलियाई अंतरिक्ष एजेंसी, एजेंसिया एस्पासियल ब्राजिलेइरा (Agência Espacial Brasileira – AEB) ।
- रूस: रोस्कोस्मोस (Roscosmos) (राज्य अंतरिक्ष निगम)।
- भारत: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (Indian Space Research Organisation – ISRO)।
- चीन: चाइना नेशनल स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (China National Space Administration–CNSA)।
- दक्षिण अफ्रीका: दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी (South African National Space Agency – SANSA)।
- ब्रिक्स के नए सदस्य देशों की अंतरिक्ष एजेंसियाँ
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- संयुक्त अरब अमीरात (UAE): यू.ए.ई. स्पेस एजेंसी (UAE Space Agency – UAESA)।
- मिस्र: इजिप्शियन स्पेस एजेंसी (Egyptian Space Agency – EgSA)।
- ईरान: ईरानी स्पेस एजेंसी (Iranian Space Agency – ISA)।
- इथियोपिया: इथियोपियन स्पेस साइंस एंड जियोस्पेशियल इंस्टिट्यूट (Ethiopian Space Science and Geospatial Institute – SSGI)।
- सऊदी अरब: सऊदी स्पेस एजेंसी (Saudi Space Agency – SSA)।
- इंडोनेशिया: इंडोनेशियन स्पेस एजेंसी (Indonesian Space Agency – INASA)।
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टेक्सटाइल्स समिट 2026
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वस्त्र मंत्रालय ने दो दिवसीय टेक्सटाइल्स समिट 2026 का सफलतापूर्वक समापन किया।
प्रमुख बिंदु
- राष्ट्रीय वस्त्र निर्यात रोडमैप: राज्यों, जिलों, उद्योग हितधारकों तथा निर्यात संवर्द्धन परिषदों (EPCs) से प्राप्त सुझावों को राष्ट्रीय वस्त्र निर्यात रोडमैप में शामिल किया जाएगा।
- इस रोडमैप का उद्देश्य वस्त्र निर्यात को सुदृढ़ करना तथा वैश्विक वस्त्र व्यापार में भारत की उपस्थिति को मजबूत बनाना है।
- मुक्त व्यापार समझौते (FTAs): सम्मेलन में मुक्त व्यापार समझौतों (FTAs) के प्रभावी उपयोग तथा पुनर्जीवित जिला निर्यात केंद्र (DEH) पहल पर विशेष बल दिया गया।
- गुणवत्ता एवं संधारणीयता: सम्मेलन में गुणवत्ता मानकों, संधारणीयता प्रमाणन, वस्त्र अपशिष्ट प्रबंधन, पुनर्चक्रण प्रणाली तथा डिजिटल उत्पाद पासपोर्ट जैसे विषयों पर चर्चा की गई।
- मानव-निर्मित रेशे (MMF): मानव-निर्मित रेशों (MMF) को बढ़ावा देने तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में ब्रांड इंडिया (Brand India) को सशक्त बनाने पर भी विशेष ध्यान दिया गया।
- निर्यात लक्ष्य: टेक्सटाइल क्षेत्र ने वर्ष 2030 तक 100 अरब अमेरिकी डॉलर (USD 100 Billion) के वस्त्र निर्यात लक्ष्य को प्राप्त करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
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वेनेजुएला में भूकंप

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हाल ही में वेनेजुएला के निकट 7.1 एवं 7.5 तीव्रता के दो शक्तिशाली भूकंप आए, जिसके परिणामस्वरूप कैरेबियाई क्षेत्र के अनेक भागों में सुनामी की चेतावनी जारी की गई।
वेनेजुएला के बारे में
- वेनेजुएला दक्षिण अमेरिका के उत्तरी तट पर स्थित प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध देश है, जिसके पास विश्व का सर्वाधिक प्रमाणित कच्चे तेल का भंडार है।
- अवस्थिति: यह दक्षिण अमेरिका के उत्तरी भाग में स्थित है तथा कैरेबियाई सागर एवं अटलांटिक महासागर के साथ इसकी सामरिक तटरेखा है।
- सीमाएँ: पूर्व में गुयाना, दक्षिण में ब्राजील तथा पश्चिम एवं दक्षिण-पश्चिम में कोलंबिया इसकी सीमाएँ साझा करते हैं।
- भौगोलिक विशेषताएँ
- स्थलाकृतियाँ: एंडीज पर्वतमाला, मराकाइबो निम्नभूमि तथा गुयाना उच्चभूमि।
- नदियाँ एवं झीलें: प्रमुख जल निकायों में ओरिनोको नदी, रियो नेग्रो, मराकाइबो झील तथा गुरी झील शामिल हैं, जो परिवहन, जलविद्युत उत्पादन एवं जैव विविधता की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण हैं।
- घास के मैदान: ल्यानोस (Llanos) मध्य वेनेजुएला में विस्तृत उष्णकटिबंधीय घासभूमियाँ हैं, जो व्यापक पशुपालन, विशेषकर गो-पालन, के लिए प्रसिद्ध हैं।
- जलप्रपात एवं प्राकृतिक संसाधन: चुरून नदी पर स्थित एंजेल जलप्रपात विश्व का सबसे ऊँचा अविरल (Uninterrupted) जलप्रपात है, जबकि ओरिनोको ऑयल बेल्ट में कच्चे तेल के विशाल भंडार स्थित हैं।
- भूकंप के प्रति संवेदनशीलता
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- प्लेट विवर्तनिक स्थिति: वेनेजुएला कैरेबियाई प्लेट एवं दक्षिण अमेरिकी प्लेट की सीमा के निकट स्थित है, जिससे यह भूकंपीय गतिविधियों के प्रति संवेदनशील है।
- तटीय एवं सुनामी जोखिम: कैरेबियाई क्षेत्र में समुद्र के भीतर आने वाले शक्तिशाली भूकंप वेनेजुएला के उत्तरी तट एवं निकटवर्ती द्वीपों के लिए सुनामी का खतरा उत्पन्न कर सकते हैं।
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शेषाचलम वन में 16वीं शताब्दी के विजयनगरकालीन अभिलेख की खोज
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भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण (ASI) के विशेषज्ञ दल ने आंध्र प्रदेश के तिरुपति जिले में शेषाचलम वन के भीतर स्थित सदाशिवकोना में 16वीं शताब्दी के तीन दुर्लभ अभिलेख खोजे हैं।
खोज से संबंधित तथ्य
- विजयनगर साम्राज्य से संबंध: ये अभिलेख सदाशिव राय के शासनकाल (31 जुलाई, 1554 ई.) के हैं तथा इनमें राजा की तीर्थयात्रा, मंदिर संरक्षण एवं प्रशासनिक अनुदानों का उल्लेख मिलता है।
- बहुभाषी अभिलेख: ये अभिलेख तेलुगु, तमिल एवं कन्नड़ भाषाओं में लिखे गए हैं, जो विजयनगर काल के बहुभाषी प्रशासन एवं सांस्कृतिक विविधता को दर्शाते हैं।
- मंदिर संरक्षण: अभिलेखों में सदाशिवकोना की राजा की तीर्थयात्रा, शिव मंदिर एवं मठ के निर्माण तथा मंदिर के रखरखाव एवं पूजा-अर्चना के लिए दिए गए शाही अनुदानों का उल्लेख है।
- गुडिमल्लम से संबंध: इन अभिलेखों में गुडिमल्लम् परशुरामेश्वर मंदिर के लिए भूमि अनुदान एवं कर आवंटन का विवरण मिलता है, जिससे विजयनगर काल में भारत के सबसे प्राचीन जीवित शिव मंदिरों में से एक के महत्त्व की पुनः पुष्टि होती है।
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भारती कार्यक्रम
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कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) ने भारती कार्यक्रम (BHARATI Programme) का सफलतापूर्वक समापन किया। इस कार्यक्रम के अंतर्गत 22 राज्यों एवं 2 केंद्रशासित प्रदेशों के 100 स्टार्ट-अप्स ने कृषि-खाद्य निर्यात (Agri-Food Exports) पर केंद्रित एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जिसका उद्देश्य भारत के कृषि-खाद्य निर्यात पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ बनाना है।
भारती कार्यक्रम के बारे में
- भारती (BHARATI – भारत्’स हब फॉर एग्रीटेक, रेजिलिएंस, एडवांसमेंट एंड इन्क्यूबेशन फॉर एक्सपोर्ट इनोवेशन), कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) का प्रमुख निर्यात-सक्षम एवं स्टार्ट-अप प्रोत्साहन कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य भारत के कृषि-खाद्य निर्यात में नवाचार-आधारित विकास को बढ़ावा देना है।
- उद्देश्य: ऐसे उच्च क्षमता वाले स्टार्ट-अप्स की पहचान, संवर्धन एवं समर्थन करना, जो अभिनव उत्पाद, प्रौद्योगिकियाँ एवं समाधान विकसित कर भारत के कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य निर्यात को सुदृढ़ करें तथा वर्ष 2030 तक 50 अरब अमेरिकी डॉलर (USD 50 Billion) के निर्यात लक्ष्य की प्राप्ति में योगदान दें।
- नोडल निकाय: इस कार्यक्रम का संचालन कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) द्वारा वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन किया जाता है।
- प्रमुख फोकस क्षेत्र
- निर्यात-उन्मुख कृषि-खाद्य उत्पादों, मूल्य संवर्द्धन, ब्रांडिंग तथा बाजार विविधीकरण को बढ़ावा देकर वैश्विक प्रतिस्पर्द्धात्मकता को सुदृढ़ करना।
- ट्रेसेबिलिटी, गुणवत्ता आश्वासन, स्वच्छता एवं पादप स्वच्छता (SPS) अनुपालन तथा निर्यात लॉजिस्टिक्स जैसी प्रौद्योगिकी-आधारित समाधानों को प्रोत्साहित करना।
- GI-टैग उत्पाद, ऑर्गेनिक फूड्स, मोटे अनाज, न्यूट्रास्यूटिकल्स तथा प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों जैसे उच्च-मूल्य उत्पादों में नवाचार को बढ़ावा देना।
- प्रमुख विशेषताएँ
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- बाजार पहुँच, नियामकीय अनुपाल, पैकेजिंग, ब्रांडिंग तथा निवेशक तैयारी पर केंद्रित एक संरचित निर्यात-उन्मुख त्वरण कार्यक्रम उपलब्ध कराना।
- मार्गदर्शन, हितधारकों की सहभागिता, वैश्विक बाजार परिचय तथा अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के साथ व्यवसाय-से-व्यवसाय (B2B) संपर्क को सुगम बनाना।
- वैश्विक व्यापार आयोजनों में स्टार्ट-अप्स की भागीदारी को सुदृढ़ कर निर्यात अवसरों एवं बाजार संपर्कों का विस्तार करना।
- महत्त्व: भारती कार्यक्रम मूल्य संवर्द्धन, निर्यात तैयारी, प्रौद्योगिकी अपनाने तथा वैश्विक बाजार तक पहुँच को बढ़ावा देकर भारतीय कृषि-खाद्य उद्यमों के नवाचार-आधारित निर्यात विकास को सुदृढ़ करता है।
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सेवा उत्पादन सूचकांक (ISP)
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केंद्रीय सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) जुलाई 2026 में सेवा उत्पादन सूचकांक (Index of Services Production–ISP) प्रारंभ करेगा। यह भारत के सेवा क्षेत्र की अल्पकालिक वृद्धि का आकलन करने वाला मासिक सूचकांक होगा।
सेवा उत्पादन सूचकांक (ISP) के बारे में
- सेवा उत्पादन सूचकांक (ISP) एक उच्च-आवृत्ति आर्थिक सूचकांक है, जिसे भारत के सेवा क्षेत्र के मासिक उत्पादन एवं वृद्धि प्रवृत्तियों का आकलन करने के लिए विकसित किया गया है। यह औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) के समान कार्य करेगा।
- नोडल निकाय: सेवा उत्पादन सूचकांक (ISP) का संकलन राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के अधीन किया जाएगा।
- प्रमुख विशेषताएँ
- कवरेज: प्रारंभिक चरण में यह सूचकांक औपचारिक सेवा क्षेत्र के प्रमुख उद्योगों, जैसे— व्यापार, परिवहन, बैंकिंग, बीमा, दूरसंचार, आतिथ्य, रियल एस्टेट, पेशेवर सेवाएँ तथा मनोरंजन क्षेत्र को सम्मिलित करेगा।
- डेटा स्रोत: सेवा क्षेत्र के उत्पादन का अनुमान लगाने के लिए मुख्यतः GST आँकड़ों, प्रशासनिक अभिलेखों तथा वार्षिक निगमित सेवा क्षेत्र उद्यम सर्वेक्षण (ASISSE) के आँकड़ों का उपयोग किया जाएगा।
- कार्यप्रणाली: सेवा उत्पादन सूचकांक (ISP) का संकलन फिक्स्ड-वेट लासपेयर्स वॉल्यूम इंडेक्स (Fixed-Weight Laspeyres Volume Index) पद्धति से किया जाएगा। विभिन्न क्षेत्रों के भार (Weights) सकल मूल्य संवर्द्धन (GVA) में उनके योगदान के आधार पर निर्धारित होंगे तथा आधार वर्ष 2024–25 होगा।
- आवृत्ति: यह सूचकांक प्रत्येक माह जारी किया जाएगा तथा लगभग 60 दिनों के समय-अंतराल के साथ उपलब्ध होगा, जिससे समयबद्ध आर्थिक संकेत प्राप्त होंगे।
- अपवर्जन: इस सूचकांक में असंगठित क्षेत्र के प्रमुख भाग तथा सार्वजनिक प्रशासन, रक्षा एवं केंद्रीय बैंकिंग जैसी गैर-बाजार गतिविधियाँ शामिल नहीं होंगी।
- महत्त्व: सेवा उत्पादन सूचकांक (ISP) सेवा क्षेत्र से संबंधित विश्वसनीय एवं उच्च-आवृत्ति आँकड़े उपलब्ध कराकर आर्थिक पूर्वानुमान, GDP के आकलन तथा साक्ष्य-आधारित नीति-निर्माण के लिए एक महत्त्वपूर्ण सांख्यिकीय रिक्ति को भरता है।
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