संदर्भ
14वें पासपोर्ट सेवा दिवस (24 जून, 2026) के अवसर पर विदेश मंत्रालय (MEA) ने स्पष्ट किया कि भारतीय पासपोर्ट केवल विदेश में भारतीय राष्ट्रीयता को प्रमाणित करने वाला एक वैध यात्रा दस्तावेज है। यह भारत के भीतर नागरिकता (Citizenship) अथवा संप्रभु कल्याणकारी लाभों की पात्रता का अंतिम अथवा निर्णायक प्रमाण नहीं है।

भारत में नागरिकता के प्रमाण के रूप में मान्य प्रमुख दस्तावेज
- जन्म प्रमाण-पत्र: जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 के अंतर्गत जारी किया जाता है, जो व्यक्ति की वंशावली (Parentage) अथवा मूल उत्पत्ति का आधार प्रदान करता है।
- अधिवास प्रमाण-पत्र: संबंधित राज्य सरकार द्वारा जारी किया जाता है, जो भारत में व्यक्ति के दीर्घकालिक निवास का प्रमाण होता है।
- नागरिकता प्रमाण-पत्र: पंजीकरण अथवा देशीयकरण के माध्यम से नागरिकता प्राप्त करने वाले व्यक्तियों के लिए गृह मंत्रालय द्वारा जारी डिजिटल अथवा हस्ताक्षरित आधिकारिक प्रमाण-पत्र।
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भारत में पासपोर्ट एवं उससे संबंधित सुधार
पासपोर्ट केवल एक यात्रा दस्तावेज नहीं है; यह पहचान का प्रमाण प्रदान करता है, अंतरराष्ट्रीय आवागमन को सुगम बनाता है, विदेशों में आर्थिक अवसरों तक पहुँच में सहायता करता है तथा किसी देश की वैश्विक कनेक्टिविटी क्षमता एवं सुरक्षा संरचना को सुदृढ़ करता है।
- डिजिटलीकरण एवं ई-पासपोर्ट के माध्यम से यह सुरक्षित एवं निर्बाध सीमा-पार आवागमन का एक महत्त्वपूर्ण साधन बनता जा रहा है।
- वैधानिक आधार: पासपोर्ट सेवा दिवस, पासपोर्ट अधिनियम, 1967 के अधिनियमन की स्मृति में मनाया जाता है। पासपोर्ट जारी करना एक संप्रभु कार्य है, जिसका संचालन इसी केंद्रीय कानून के अंतर्गत किया जाता है।
- पहचान संबंधी दस्तावेजों की विधिक भिन्नता: पासपोर्ट अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान एवं राष्ट्रीयता का प्रमाण प्रदान करता है, किंतु भारत के भीतर इसे नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता है।
- यह दृष्टिकोण आधार(Aadhaar- केवल निवास का प्रमाण) तथा मतदाता पहचान-पत्र (मताधिकार का प्राधिकरण, न कि नागरिकता का अंतिम प्रमाण) जैसे अन्य पहचान दस्तावेजों के संबंध में न्यायिक एवं सरकारी दृष्टिकोण के अनुरूप है।
- मार्गदर्शक प्रशासनिक सिद्धांत: वर्तमान डिजिटल परिवर्तन “सुरक्षित पासपोर्ट, सुगम सेवा, सशक्त नागरिक” की कार्यकारी अवधारणा पर आधारित है, जो “न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन” (Minimum Government, Maximum Governance) के व्यापक प्रशासनिक दृष्टिकोण के अनुरूप है।
- तकनीकी संरचना (PSP V2.0): पासपोर्ट सेवा कार्यक्रम 2.0 (PSP V2.0): भारत ने देश के भीतर पासपोर्ट सेवा कार्यक्रम 2.0 (PSP V2.0) तथा विदेश स्थित अपने राजनयिक मिशनों में वैश्विक पासपोर्ट सेवा कार्यक्रम (GPSP V2.0) लागू किया है। इसके अंतर्गत—
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- ई-पासपोर्ट: नवीन-जारी पासपोर्टों में रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID) चिप तथा सुरक्षित इलेक्ट्रॉनिक एंटीना समाहित होता है, जो अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) के मानकों के अनुरूप है।
- डेटा संप्रभुता: यद्यपि टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) प्रौद्योगिकी एवं बाह्य सेवा प्रदाता के रूप में कार्य करती है, किंतु नागरिकों का समस्त संप्रभु डेटा केवल विदेश मंत्रालय (MEA) के स्वामित्व एवं नियंत्रण वाले सर्वरों पर ही संगृहीत किया जाता है।
- पासपोर्ट में प्रयुक्त माइक्रोचिप का प्रसंस्करण इंडिया सिक्योरिटी प्रेस, नासिक में किया जाता है, जबकि उनका स्रोत अंतरराष्ट्रीय है।
- संस्थागत विस्तार एवं पहुँच: पिछले एक दशक में पासपोर्ट सेवा नेटवर्क का लगभग छह गुना विस्तार हुआ है, जो 77 केंद्रों से बढ़कर 545 कार्यरत पासपोर्ट सेवा केंद्र (PSKs) एवं डाकघर पासपोर्ट सेवा केंद्र (POPSKs) तक पहुँच गया है।
- सरकार का प्रशासनिक लक्ष्य वर्ष 2027 तक प्रत्येक लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में कम-से-कम एक पासपोर्ट सुविधा केंद्र स्थापित करना है।
- वैश्विक गतिशीलता गठबंधन: भारत ने 25 देशों (मुख्यतः यूरोप एवं खाड़ी क्षेत्र) के साथ 27 प्रवासन एवं गतिशीलता साझेदारी समझौते संस्थागत रूप से स्थापित किए हैं।
- इन समझौतों का उद्देश्य दोहरा है जैसे—पेशेवरों एवं शिक्षाविदों के लिए वैध अंतरराष्ट्रीय गतिशीलता (Legal Mobility Pathways) को सुगम बनाना तथा अवैध अथवा दस्तावेज-विहीन प्रवासियों की वापसी की प्रक्रिया को मानकीकृत करना।
- वैश्विक पहुँच: भारतीय पासपोर्ट की बढ़ती कूटनीतिक स्वीकार्यता के परिणामस्वरूप भारतीय नागरिकों के लिए वीजा-फ्री गंतव्यों की संख्या वर्ष 2019 के 16 देशों से बढ़कर 27 देश हो गई है। इसके अतिरिक्त, भारतीय नागरिकों को 47 वीजा-ऑन-अराइवल तथा 66 ई-वीजा सुविधाओं का लाभ उपलब्ध है।
- प्रवासन सुरक्षा एवं कल्याण तंत्र: विदेश में रोजगार के इच्छुक भारतीय श्रमिकों के लिए विदेश मंत्रालय (MEA) ने eMigrate 2.0 प्लेटफार्म विकसित किया है, जो प्रवासन स्वीकृतियों का डिजिटलीकरण करता है तथा मानव तस्करी की रोकथाम में सहायता करता है।
- इसके अतिरिक्त, भारतीय सामुदायिक कल्याण कोष (ICWF) के माध्यम से सिंगापुर और खाड़ी देशों में संकटग्रस्त भारतीय नागरिकों के लिए वन-स्टॉप सहायता केंद्र एवं विधिक परामर्श सेवाएँ संचालित की जाती हैं।