ट्रांसकैस्पियन मरिंका (स्किजोथोरैक्स पेल्जामी)

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अरुणाचल प्रदेश में सांग्नो (Sangno) कबीले द्वारा संचालित एक सामुदायिक संरक्षण पहल के अंतर्गत, संकटग्रस्त हिमालयन रे-फिन्ड फिश (Himalayan Ray-finned Fish) को उसके दीर्घकालिक संरक्षण हेतु एक सुरक्षित जलधारा में स्थानांतरित किया गया है।
ट्रांसकैस्पियन मारिंका (Transcaspian marinka) या शिजोथोरैक्स पेल्जामी (Schizothorax Pelzami) के बारे में
- स्किजोथोरैक्स पेल्जामी, जिसे सामान्यतः ट्रांसकैस्पियन मरिंका कहा जाता है, कार्प वंश (Cyprinidae) की एक रे-फिन्ड फ्रेशवाटर फिश (Ray-finned Freshwater Fish) है।
- इसे न्यीशी (Nyishi) भाषा में स्थानीय रूप से गारसिंग (Ngarsing) कहा जाता है।
- प्रमुख विशेषताएँ
- आवास: यह स्वच्छ, ठंडे एवं तीव्र प्रवाह वाली पर्वतीय जलधाराओं और नदियों में निवास करती है, जहाँ घुलित ऑक्सीजन की मात्रा अधिक होती है।
- यह हिमालयी क्षेत्र के उच्च ऊँचाई वाले मीठे जल पारितंत्रों के अनुकूलित है।
- यह अरुणाचल प्रदेश की शीतल हिमालयी जलधाराओं की स्थानीय प्रजाति है।
- आहार: यह मुख्यतः सर्वाहारी (Omnivorous) है तथा शैवाल, जलीय पौधों, कीटों, लार्वा एवं अन्य छोटे जलीय जीवों का उपभोग करती है।
- भौतिक विशेषताएँ: इसका शरीर सुगठित एवं लंबाकार (Streamlined and Elongated) होता है तथा इसमें सॉफ्ट फिन-रे (Soft Fin Rays) होती हैं, जो रे-फिन्ड फिश [वर्ग: एक्टिनोप्टेरिजी (Actinopterygii)] की प्रमुख विशेषता है।
- IUCN संरक्षण स्थिति: कम चिंतनीय।
- संरक्षण संबंधी चिंताएँ
- शिकार का दबाव (Predation Pressure): किशोर और उँगलियों के आकार की छोटी मछलियाँ (फिंगरलिंक्स) माहसीर द्वारा शिकार किए जाने के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होती हैं, जो कि एक बड़ी शिकारी मीठे जल की मछली है और इसे अक्सर ‘टाइगर ऑफ द वॉटर’ कहा जाता है।
- आवास का क्षरण: आवास का विखंडन, अत्यधिक मछली पकड़ना, प्रदूषण और नदी की बदलती पारिस्थितिकी इस प्रजाति के दीर्घकालिक अस्तित्व और प्रजनन के लिए खतरा उत्पन्न करती है।
- संरक्षण प्रयास
- सामुदायिक नेतृत्व में संरक्षण: सांग्नो समुदाय ने लापाबुंग जलधारा से 52 फिंगरलिंग्स (उँगलियों के आकार की छोटी मछलियों) को शिकारी-मुक्त रिचासो जलधारा में स्थानांतरित किया और प्रजनन व आबादी के पुनर्स्थापन की सुविधा के लिए पाँच वर्ष तक मछली पकड़ने के प्रतिबंध का प्रस्ताव रखा।
- सतत् आजीविका: इस पहल का उद्देश्य इको-एंगलिंग (पर्यावरण-अनुकूल मछली पकड़ना), स्ट्रीम-ट्रेल ट्रेकिंग और मीठे जल के पारिस्थितिकी तंत्र के समुदाय-आधारित प्रबंधन के माध्यम से जैव विविधता संरक्षण को बढ़ावा देते हुए पारंपरिक सामुदायिक मछली पकड़ने की प्रथा को पुनर्सक्रिय करना है।
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नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE)
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दिल्ली उच्च न्यायालय ने निर्णय दिया है कि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अंतर्गत एक ‘लोक प्राधिकरण’ है।
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के बारे में
- नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE), जिसका मुख्यालय मुंबई में अवस्थित है, भारत का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है तथा इसने देश की प्रथम पूर्णतः स्वचालित, स्क्रीन-आधारित इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग प्रणाली की शुरुआत की।
- स्थापना: NSE की स्थापना वर्ष 1992 में फेरवानी समिति (Pherwani Committee) की अनुशंसाओं पर की गई। वर्ष 1993 में भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) से मान्यता प्राप्त करने के बाद इसने वर्ष 1994 में अपना परिचालन प्रारंभ किया।
- प्रशासन: NSE का संचालन एक स्वतंत्र निदेशक मंडल (Independent Board of Directors) द्वारा किया जाता है, जिसमें लोकहित निदेशक (Public Interest Directors), शेयरधारक निदेशक (Shareholder Directors) तथा प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी शामिल होते हैं।
- यह भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) के नियामकीय पर्यवेक्षण में बाजार अवसंरचना संस्था (Market Infrastructure Institution–MII) के रूप में कार्य करता है।
- प्रमुख विशेषताएँ
- बेंचमार्क सूचकांक: NSE पर निफ्टी 50 सूचीबद्ध है, जो भारत का प्रमुख बेंचमार्क इक्विटी सूचकांक है तथा विभिन्न प्रमुख क्षेत्रों की 50 अग्रणी सूचीबद्ध कंपनियों का प्रतिनिधित्व करता है।
- ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म: यह देशव्यापी इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग नेटवर्क के माध्यम से इक्विटी, डेरिवेटिव्स, मुद्रा एवं ब्याज-दर डेरिवेटिव्स, एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ETFs), म्यूचुअल फंड तथा ऋण प्रतिभूतियों (Debt Securities) में कारोबार की सुविधा प्रदान करता है।
- प्रौद्योगिकी: एक्सचेंज पूर्णतः स्वचालित, स्क्रीन-आधारित ट्रेडिंग प्रणाली पर संचालित होता है, जिसमें उन्नत जोखिम प्रबंधन प्रणाली (Risk Management System) तथा आपदा पुनर्प्राप्ति केंद्र (Disaster Recovery Centre) उपलब्ध है, जिससे बाज़ार संचालन निर्बाध रूप से जारी रहता है।
RTI अधिनियम के अंतर्गत ‘लोक प्राधिकरण’ के बारे में
- परिभाषा: सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 2(h) के अनुसार, लोक प्राधिकरण से आशय ऐसे किसी प्राधिकरण या निकाय से है, जिसकी स्थापना संविधान, किसी विधि अथवा सरकारी अधिसूचना द्वारा हुई हो, या जो सरकार के स्वामित्व, नियंत्रण अथवा पर्याप्त वित्तपोषण के अधीन हो।
- दिल्ली उच्च न्यायालय का निर्णय: दिल्ली उच्च न्यायालय ने निर्णय दिया कि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE), धारा 2(h) की आवश्यकताओं को पूरा करता है, क्योंकि इसकी स्थापना, स्वामित्व संरचना तथा सरकारी भागीदारी इसे लोक प्राधिकरण के रूप में योग्य बनाती है।
इस निर्णय से NSE को सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अंतर्गत निर्धारित सूचना प्रकटीकरण संबंधी दायित्वों का पालन करना होगा, जिससे पारदर्शिता एवं जवाबदेही को बढ़ावा मिलेगा। |
यू.एन. ग्लोबल डायलॉग ऑन AI गवर्नेंस
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‘यू.एन. ग्लोबल डायलॉग ऑन AI गवर्नेंस’ (U.N. Global Dialogue on AI Governance) पर होने वाली पहली बैठक से पहले, UN के एक वैज्ञानिक पैनल ने चेतावनी दी है कि बिना रोक-टोक के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का विकास विनाशकारी जोखिम उत्पन्न कर सकता है।
‘यू.एन. ग्लोबल डायलॉग ऑन AI गवर्नेंस’ (U.N. Global Dialogue on AI Governance)
- ‘यू.एन. ग्लोबल डायलॉग ऑन AI गवर्नेंस’ संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) द्वारा स्थापित प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मंच है, जिसका उद्देश्य समावेशी, पारदर्शी एवं साक्ष्य-आधारित वैश्विक AI शासन को बढ़ावा देना है।
- इसे संयुक्त राष्ट्र महासभा के संकल्प A/RES/79/325 के अंतर्गत अधिदेश प्रदान किया गया है, ताकि AI शासन में संयुक्त राष्ट्र के सभी 193 सदस्य देशों, विशेषकर विकासशील देशों की प्राथमिकताओं को समुचित स्थान मिल सके।
- यह मंच सरकारों, वैज्ञानिकों, उद्योग जगत, शिक्षाविदों तथा नागरिक समाज सहित विभिन्न हितधारकों की भागीदारी वाला वैश्विक संवाद मंच होगा।
- प्रथम सत्र: इसका प्रथम सत्र 6–7 जुलाई, 2026 को जेनेवा (स्विट्जरलैंड) में अल सल्वाडोर एवं एस्टोनिया की सह-अध्यक्षता में आयोजित किया जाएगा।
- प्रमुख उद्देश्य
- AI विभाजन को कम करना: यह संवाद विशेष रूप से विकासशील देशों में क्षमता निर्माण, कंप्यूटिंग अवसंरचना, ओपन-सोर्स AI मॉडल तथा डेटा तक पहुँच को बढ़ावा देकर AI अपनाने में विद्यमान असमानताओं को कम करने का प्रयास करता है।
- अंतर-संचालनीय AI शासन: इसका उद्देश्य सुरक्षित, संरक्षित एवं विश्वसनीय AI हेतु वैश्विक स्तर पर संगत मानकों को प्रोत्साहित करना तथा विभिन्न देशों के AI नियामकीय ढाँचों के बीच समन्वय को सुदृढ़ करना है।
- मानवाधिकार एवं जवाबदेही: यह ढाँचा पारदर्शिता, जवाबदेही, निष्पक्षता तथा सार्थक मानवीय पर्यवेक्षण पर बल देता है, ताकि एल्गोरिद्मिक पक्षपात, भेदभाव एवं AI प्रणालियों के दुरुपयोग को न्यूनतम किया जा सके।
- सामाजिक-आर्थिक प्रभावों का आकलन: यह AI के आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, नैतिक एवं पर्यावरणीय प्रभावों का मूल्यांकन करता है, जिसमें रोजगार, लोक सेवाओं तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं पर इसके प्रभाव भी शामिल हैं।
संयुक्त राष्ट्र के वैज्ञानिक पैनल द्वारा व्यक्त प्रमुख चिंताएँ
- AI का बढ़ता जोखिम: पैनल ने चेतावनी दी कि यदि तेजी से स्वायत्त होती AI प्रणालियों पर नियंत्रण नहीं रखा गया, तो वे छल, दुष्प्रचार, साइबर खतरे, डीपफेक तथा अन्य विनाशकारी जोखिमों को जन्म दे सकती हैं।
- वैश्विक असमानता: AI का विकास कुछ ही देशों में अत्यधिक केंद्रित है, जहाँ सर्वाधिक उन्नत कंप्यूटिंग क्षमता उपलब्ध है, जबकि अनेक देशों के पास फ्रंटियर AI मॉडलों का प्रभावी नियमन एवं मूल्यांकन करने के लिए आवश्यक विशेषज्ञता का अभाव है।
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कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) योजना, 2026
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केंद्र सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) योजना, 1952 के स्थान पर कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) योजना, 2026 को अधिसूचित किया है।
कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) योजना, 2026 के बारे में
- EPF योजना, 2026 श्रम और रोजगार मंत्रालय (भारत सरकार) द्वारा अधिसूचित एक अंशदायी सामाजिक सुरक्षा योजना है, जिसका उद्देश्य भविष्य निधि प्रशासन का आधुनिकीकरण करना और इसे सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के अनुरूप बनाना है।
- शुरुआत: इस योजना को 29 जून, 2026 को अधिसूचित किया गया था और यह सभी मौजूदा अंशदाताओं के लिए निर्बाध परिवर्तन सुनिश्चित करते हुए 74 वर्ष पुरानी EPF योजना, 1952 का स्थान लेती है।
- मुख्य उद्देश्य
- श्रम संहिता संरेखण: यह योजना भविष्य निधि के प्रावधानों को सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के साथ सामंजस्य स्थापित करती है, जिससे एक आधुनिक और सुसंगत कानूनी ढाँचा तैयार होता है।
- डिजिटल गवर्नेंस: यह पारदर्शिता, दक्षता और सेवा वितरण में आसानी लाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक अनुपालन, ऑनलाइन दावों, ई-पासबुक और डिजिटल सेटलमेंट को बढ़ावा देती है।
- उन्नत पोर्टेबिलिटी: यह योजना नियोक्ताओं (नियोक्ता कंपनियों) के मध्य भविष्य निधि खातों के निर्बाध हस्तांतरण को सक्षम करने के लिए यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) ढाँचे को मजबूत करती है।
- मुख्य विशेषताएँ
- अंशदान और कवरेज: अनिवार्य EPF अंशदान कर्मचारी और नियोक्ता दोनों द्वारा वेतन का 12% बना हुआ है, जबकि ₹15,000 की वैधानिक वेतन सीमा अपरिवर्तित है।
- सरलीकृत निकासी: यह योजना निर्धारित शर्तों और न्यूनतम शेष राशि की आवश्यकताओं के अधीन चिकित्सा उपचार, शिक्षा, विवाह, आवास और विशिष्ट आपात स्थितियों के लिए आंशिक निकासी को सरल बनाती है।
- डिजिटल अनुपालन और KYC: यह इलेक्ट्रॉनिक फाइलिंग, आधार (Aadhaar), पैन (PAN) और बैंक खाते को लिंक करना अनिवार्य बनाती है तथा डिजिटल रिकॉर्ड-कीपिंग एवं ऑनलाइन सेटलमेंट की समय सीमा के माध्यम से छूट प्राप्त भविष्य निधि ट्रस्टों के लिए अनुपालन को मजबूत करती है।
- आपातकालीन प्रावधान: केंद्र सरकार अधिसूचित राष्ट्रीय आपदाओं, महामारियों या सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थितियों के दौरान तीन महीने तक के लिए EPF अंशदान को अस्थायी रूप से स्थगित, निलंबित या कम कर सकती है।
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भारत में वर्ष 2025 में 709 नई जीव प्रजातियों और 353 नई वनस्पति प्रजातियों का समावेशन।

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भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (ZSI) और भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण (BSI) ने ‘एनिमल डिस्कवरीज 2025’ और ‘प्लांट डिस्कवरीज 2025’ रिपोर्ट जारी की हैं।
मुख्य बिंदु
- प्राणिजात समावेशन (Faunal Additions): भारत ने वर्ष 2025 में 709 प्राणि प्रजातियों को जोड़ा: जिनमें से 483 प्रजातियाँ विज्ञान के लिए बिल्कुल नवीन हैं।
- 226 प्रजातियाँ भारत में पहली बार दर्ज की गईं।
- प्रमुख जीवों की खोज
- मायोटिस हिमालैकस (Myotis Himalaicus): हिमालयी चमगादड़ की नई प्रजाति।
- टेक्टोलेमस नामदफाएन्सिस (Ptyctolaemus Namdaphaensis) और टेक्टोलेमस सियांगेन्सिस (Ptyctolaemus Siangensis): ग्रीन फेन-थ्रोटेड (पंखे जैसे गले वाली) छिपकली की दो नई प्रजातियाँ।
- लाइकोडन इरविनी (Lycodon Irwini): हाल ही में खोजी गई वॉल्फ स्नेक (Wolf Snake) की प्रजाति।
- जैव विविधता: भारत की कुल दर्ज की गई प्राणी जैव विविधता अब 1,05,953 प्रजातियों तक पहुँच गई है, जो दुनिया के सबसे समृद्ध जैव विविधता वाले देशों में से एक के रूप में इसकी स्थिति की पुष्टि करती है।
- वनस्पति समावेशन (Floral Additions): भारत की वनस्पतियों में 353 पादप टैक्सा (वर्गीकरण समूह) जोड़े गए: जिनमें से 221 टैक्सा विज्ञान के लिए नए हैं।
- 132 टैक्सा भारत में पहली बार दर्ज किए गए (नए वितरण संबंधी रिकॉर्ड)।
- जोड़ी गई पादप विविधता (Plant Diversity Added): ‘प्लांट डिस्कवरीज 2025’ रिपोर्ट में 154 एंजियोस्पर्म (आवृतबीजी), 3 टेरिडोफाइट, 13 ब्रायोफाइट, 62 लाइकेन, 93 कवक (फंगस), 22 शैवाल (एल्गी) और 6 सूक्ष्मजीव (माइक्रोब्स) दर्ज किए गए हैं।
- नई पादप खोजों की संरचना: नए वर्णित पादप टैक्सा में से लगभग 43% संवहनी पौधे (वैस्कुलर प्लांट्स) हैं, जबकि शेष 57% गैर-संवहनी (नॉन-वैस्कुलर) जीव हैं।
- प्रमुख वानस्पतिक खोजें
- पॉलीस्टिचम सियांगेन्स (Polystichum Siangense): अरुणाचल प्रदेश से ‘फर्न’ की नई प्रजाति।
- मिलियूसा बेडडोमेई (Miliusa Beddomei): पश्चिमी घाट से ‘जंगली शरीफा’ (कस्टर्ड एप्पल) की नई संबंधित प्रजाति।
- हेरीसियम इंडिकम (Hericium Indicum): हाल ही में खोजा गया खाने योग्य ‘टूथ फंगस’।
- जोड़े गए प्रमुख पशु समूह
- हाइमनोटेरा (Hymenoptera-मधुमक्खियाँ, ततैया, चींटियाँ): इसमें सबसे अधिक 106 प्रजातियाँ जोड़ी गईं।
- लेपिडोटेरा (Lepidoptera – तितलियाँ और पतंगे): 65 प्रजातियाँ।
- डिटेरा (Diptera – मक्खियाँ और मच्छर): 64 प्रजातियाँ।
- अरेक्निडा (Arachnida – मकड़ियाँ, बिच्छू, घुन): 64 प्रजातियाँ।
- कोलिसियोटेरा (Coleoptera – भृंग/बीटल्स): 55 प्रजातियाँ।
- पिसीज (Pisces – मछलियाँ): 50 प्रजातियाँ।
ये निष्कर्ष भारत के अकशेरुकी (इनवर्टिब्रेड) जीवों की समृद्ध विविधता और पहले से गैर-दस्तावेजीकृत प्रजातियों की निरंतर हो रही खोजों पर प्रकाश डालते हैं।
राज्य-वार मुख्य बिंदु
- प्राणियों की खोजें: केरल में सबसे अधिक संख्या में नई पशु प्रजातियाँ दर्ज की गईं, जहाँ 98 खोजें हुईं। इसके बाद अन्य राज्य इस प्रकार रहे:
- पश्चिम बंगाल: 76 प्रजातियाँ
- कर्नाटक: 67 प्रजातियाँ
- अरुणाचल प्रदेश: 65 प्रजातियाँ।
- वनस्पतियों की खोजें: अरुणाचल प्रदेश 49 वर्गीकरण के साथ नई पादप खोजों में अग्रणी योगदानकर्ता के रूप में उभरा। इसके बाद अन्य राज्य इस प्रकार रहे:
- उत्तराखंड: 39 वर्गीकरण
- केरल: 37 वर्गीकरण।
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