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‘विजय’ रोडमैप

2 Jul 2026

संदर्भ 

हाल ही में थल सेना प्रमुख (COAS) ने ‘विजय’ (VIJAY) रोडमैप का अनावरण किया, जिसमें भारतीय सेना को प्रौद्योगिकी-सक्षम, भविष्योन्मुखी तथा बहु-परिदृश्यीय (Multi-Domain) बल में रूपांतरित करने की अपनी परिकल्पना प्रस्तुत की गई है।

संबंधित तथ्य

  • यह रोडमैप रक्षा मंत्री के ‘परिवर्तन के दशक’ (Decade of Transformation) के दृष्टिकोण के अनुरूप है तथा भारतीय सेना को विकसित होती पारंपरिक, हाइब्रिड एवं उभरती सुरक्षा चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने के लिए तैयार करने का लक्ष्य रखता है।

‘विजय’ (VIJAY) रोडमैप के बारे में

‘विजय’ (VIJAY) भारतीय सेना का दीर्घकालिक परिवर्तन रोडमैप है, जिसका उद्देश्य आधुनिक, प्रौद्योगिकी-संचालित एवं आत्मनिर्भर सेना का निर्माण करना है, जो युद्ध के बहु-क्षेत्रीय स्वरूप में प्रभावी ढंग से कार्य करने में सक्षम हो।

  • राष्ट्रीय दृष्टिकोण के साथ सामंजस्य: यह रोडमैप ‘परिवर्तन के दशक’ (2025–2035) की परिकल्पना के अनुरूप है तथा विकसित भारत @2047 के लक्ष्य की प्राप्ति हेतु राष्ट्रीय सुरक्षा एवं रक्षा तैयारियों को सुदृढ़ करने में योगदान देता है।

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  • ‘विजय’ (VIJAY) रोडमैप के प्रमुख स्तंभ
    • V – Vigilance (सतर्कता)
      • संचालनात्मक तैयारी: विकसित होती सुरक्षा चुनौतियों के विरुद्ध युद्धक तैयारी, सीमा सतर्कता तथा त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता के उच्च स्तर को बनाए रखना।
      • सीमा सुरक्षा: उन्नत प्रौद्योगिकियों एवं खुफिया-आधारित अभियानों के माध्यम से भारत की स्थलीय सीमाओं पर निगरानी एवं संचालनात्मक तैयारी को सुदृढ़ करना।
    • I – Innovation and Transformation (नवाचार एवं परिवर्तन)
      • प्रौद्योगिकी-संचालित युद्ध: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), मानवरहित हवाई प्रणालियाँ (UAS), रोबोटिक्स, साइबर क्षमताएँ, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध तथा स्वायत्त प्रणालियों को तेजी से अपनाना।
      • सिद्धांतगत सुधार: युद्ध की बदलती प्रकृति के अनुरूप सैन्य सिद्धांत, बल संरचना तथा संचालनात्मक अवधारणाओं का निरंतर आधुनिकीकरण करना।
      • क्षमता विकास: स्वदेशी अनुसंधान, प्रयोगों तथा उभरती प्रौद्योगिकियों को शीघ्रता से संचालनात्मक सेवा में सम्मिलित करना।
    • J – Jointness and Integration (संयुक्तता एवं एकीकरण)
      • त्रि-सेवा एकीकरण: थल सेना, नौसेना एवं वायु सेना के बीच एकीकृत योजना, लॉजिस्टिक्स, खुफिया साझाकरण तथा थिएटर-स्तरीय समन्वय के माध्यम से संचालनात्मक तालमेल को सुदृढ़ करना।
      • संपूर्ण राष्ट्र दृष्टिकोण (Whole-of-Nation Approach): सशस्त्र बलों, सरकारी एजेंसियों, उद्योग, शैक्षणिक संस्थानों, स्टार्ट-अप्स तथा नागरिक समाज के मध्य घनिष्ठ समन्वय को बढ़ावा देना।
      • एकीकृत थिएटर कमान: संसाधनों के इष्टतम उपयोग एवं युद्धक क्षमता बढ़ाने के लिए संयुक्त संचालनात्मक संरचनाओं को आगे बढ़ाना।
    • A – Atmanirbharta (आत्मनिर्भरता)
      • रक्षा का स्वदेशीकरण: “स्वदेशी समाधानों के साथ युद्ध जीतना” के मार्गदर्शक सिद्धांत के तहत स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देना।
      • रक्षा विनिर्माण: मेक इन इंडिया, iDEX, इनोवेशंस फॉर डिफेंस एक्सीलेंस, रक्षा औद्योगिक गलियारों तथा निजी क्षेत्र के साथ रणनीतिक साझेदारी जैसी पहलों के माध्यम से घरेलू रक्षा उत्पादन को प्रोत्साहित करना।
      • आयात निर्भरता में कमी: स्वदेशी खरीद, रक्षा निर्यात तथा घरेलू अनुसंधान एवं विकास (R&D) को बढ़ाकर आत्मनिर्भरता को सुदृढ़ करना।
    • Y – Yodha First (योद्धा प्रथम)
      • मानव-केंद्रित आधुनिकीकरण: सैनिक को सैन्य परिवर्तन के केंद्र में रखते हुए प्रशिक्षण, व्यावसायिक सैन्य शिक्षा, तकनीकी कौशल तथा नेतृत्व में सुधार करना।
      • कार्मिक कल्याण: स्वास्थ्य सेवाओं, आवास, मानसिक स्वास्थ्य, पारिवारिक कल्याण तथा कॅरियर उन्नति को सुदृढ़ करना।
      • पूर्व सैनिकों का समर्थन: पूर्व सैनिकों, अग्निवीरों तथा वीर नारियों के लिए कल्याणकारी उपायों को सुदृढ़ करना तथा उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा के महत्त्वपूर्ण हितधारक के रूप में मान्यता देना।

सैन्य परिवर्तन की आवश्यकता

  • युद्ध की बदलती प्रकृति: आधुनिक संघर्षों में हाइब्रिड युद्ध, साइबर हमले, सूचना युद्ध, अंतरिक्ष-आधारित अभियान, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित युद्ध प्रणालियों की भूमिका लगातार बढ़ रही है।
  • उभरती सुरक्षा चुनौतियाँ: भारत को सीमापार आतंकवाद, सीमा विवाद, ग्रे-जोन युद्ध, ड्रोन घुसपैठ तथा बदलते क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य जैसी जटिल चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
  • ‘प्रौद्योगिकी’ एक बल गुणक के रूप में: उन्नत प्रौद्योगिकियों का समावेशन स्थितिजन्य जागरूकता, सटीक प्रहार क्षमता, निर्णय-निर्माण तथा संचालनात्मक प्रभावशीलता को सुदृढ़ करता है।
  • बहु-क्षेत्रीय अभियान: भविष्य के संघर्षों में स्थल, वायु, समुद्र, साइबर, अंतरिक्ष तथा विद्युत-चुंबकीय क्षेत्र के बीच निर्बाध एकीकरण की आवश्यकता होगी।

‘विजय’ (VIJAY) रोडमैप का महत्त्व

  • भविष्य के लिए तैयार सशस्त्र बल: यह रोडमैप प्रौद्योगिकीय श्रेष्ठता के माध्यम से पारंपरिक एवं गैर-पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए भारतीय सेना को तैयार करता है।
  • राष्ट्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ करना: बेहतर संचालनात्मक तैयारी भारत की निरोधक क्षमता को मजबूत करती है तथा क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा सुनिश्चित करती है।
  • रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा: स्वदेशी प्रौद्योगिकियों पर अधिक बल आत्मनिर्भर भारत को सुदृढ़ करता है, आयात पर रणनीतिक निर्भरता को कम करता है तथा घरेलू रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाता है।
  • संयुक्त अभियानों को सुदृढ़ करना: तीनों सेनाओं के मध्य अधिक एकीकरण से अंतःसंचालनीयता, संचालनात्मक दक्षता तथा संसाधनों के इष्टतम उपयोग में वृद्धि होती है।
  • आर्थिक विकास को समर्थन: स्वदेशी रक्षा विनिर्माण नवाचार, रोजगार सृजन, प्रौद्योगिकी विकास तथा रक्षा निर्यात को प्रोत्साहित करता है।

निष्कर्ष

‘विजय’ (VIJAY) रोडमैप क्रमिक सैन्य आधुनिकीकरण से आगे बढ़कर समग्र सैन्य रूपांतरण की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण पहल है, जो प्रौद्योगिकीय श्रेष्ठता, संयुक्तता, आत्मनिर्भरता तथा सैनिक-केंद्रित सुधारों का समन्वय करता है। इसका सफल क्रियान्वयन भारत की सैन्य तैयारियों को सुदृढ़ करेगा तथा निरंतर जटिल होते रणनीतिक परिवेश में भारत की सुरक्षित एवं आत्मनिर्भर राष्ट्र के रूप में स्थिति को और मजबूत बनाएगा।

‘विजय’ रोडमैप

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