संदर्भ
वर्ष 2026 की नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, तालिबान द्वारा वर्ष 2022 में अफीम पोस्त की कृषि पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद म्याँमार ने अफगानिस्तान का स्थान लेते हुए दुनिया का सबसे बड़ा अवैध अफीम उत्पादक देश बन गया है।
संबंधित तथ्य
- रिपोर्ट में बताया गया है कि इसके प्रभाव भारत की पूर्वी सीमाओं, विशेषकर मणिपुर, मिजोरम तथा नागालैंड में तेजी से दिखाई दे रहे हैं, जबकि पाकिस्तान से ड्रोन के माध्यम से मादक पदार्थों की तस्करी भी एक प्रमुख सुरक्षा चुनौती बनकर उभरी है।
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB)
- इसकी स्थापना 17 मार्च, 1986 को भारत सरकार द्वारा मादक पदार्थों की तस्करी तथा नशे के दुरुपयोग के विरुद्ध राष्ट्रीय प्रयासों का नेतृत्व करने के लिए की गई थी।
- यह केंद्र सरकार के अधीन कार्य करता है तथा मादक औषधि एवं मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम (NDPS Act), 1985 तथा संबंधित कानूनों के अंतर्गत विभिन्न राज्यों एवं एजेंसियों की प्रवर्तन कार्रवाइयों का समन्वय करता है।

- यह अंतरराष्ट्रीय अभिसमयों के प्रति भारत के दायित्वों का पालन सुनिश्चित करता है, मादक पदार्थों की तस्करी के विरुद्ध वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देता है तथा नशीले पदार्थों के दुरुपयोग से संबंधित मुद्दों के समाधान के लिए अन्य मंत्रालयों के साथ कार्य करता है।
- NCB का विस्तार
- क्षेत्रीय कार्यालय: 3 से बढ़ाकर 7 किए गए (जैसे– अमृतसर, गुवाहाटी, चेन्नई, अहमदाबाद)।
- जोनल कार्यालय: 13 से बढ़ाकर 30 किए गए, जिनमें गोरखपुर, सिलीगुड़ी, अगरतला, ईटानगर तथा रायपुर में नए कार्यालय शामिल हैं।
- कार्मिक संख्या: 536 नए पद सृजित किए गए, जिससे स्वीकृत पदों की संख्या बढ़कर 1,496 हो गई।
- नार्को-केनाइन पूल (Nar-K9): बेहतर पहचान क्षमता के लिए 10 जोनल कार्यालयों में Nar-K9 इकाइयाँ तैनात की गई हैं।
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म्याँमार के वैश्विक अफीम केंद्र के रूप में उभरने के कारण
- तालिबान द्वारा अफीम पर प्रतिबंध: अप्रैल 2022 में तालिबान द्वारा अफीम पोस्ता की कृषि पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद अफगानिस्तान में अफीम उत्पादन में लगभग 93% की गिरावट आई, जिससे वैश्विक स्तर पर आपूर्ति में अत्यधिक कमी आई।
- अफीम पोस्ता की कृषि का विस्तार: वर्ष 2021 से वर्ष 2023 के बीच म्याँमार में अवैध अफीम पोस्ता की कृषि लगभग 56% बढ़कर लगभग 45,200 हेक्टेयर तक पहुँच गई।
- राजनीतिक अस्थिरता: वर्ष 2021 के सैन्य तख्तापलट तथा उसके बाद शुरू हुए घरेलू संघर्ष ने राज्य के नियंत्रण को कमजोर कर दिया, जिससे अवैध मादक पदार्थों के उत्पादन एवं तस्करी नेटवर्क को बढ़ावा मिला।
- जातीय सशस्त्र संगठन: मादक पदार्थों का उत्पादन मुख्यतः शान राज्य में केंद्रित है, जहाँ कई जातीय सशस्त्र संगठन अपनी गतिविधियों के वित्तपोषण के लिए मादक पदार्थों की तस्करी पर निर्भर हैं।
- गोल्डन ट्रायंगल का पुनरुत्थान: गोल्डन ट्रायंगल पुनः अफीम, हेरोइन तथा संश्लेषित मादक पदार्थों, विशेषकर मेथामफेटामाइन (याबा) के उत्पादन के विश्व के सबसे बड़े केंद्रों में से एक बनकर उभरा है।
उत्पादन एवं तस्करी की स्थिति
- वैश्विक उत्पादन
- म्याँमार: तालिबान द्वारा लगाए गए प्रतिबंध के बाद म्याँमार ने अफगानिस्तान का स्थान लेते हुए अवैध अफीम का विश्व का सबसे बड़ा स्रोत बन गया है।
- अफगानिस्तान: यद्यपि अफीम उत्पादन में तीव्र गिरावट आई है, फिर भी प्रतिबंध से पूर्व के बड़े अफीम भंडारों के कारण गोल्डन क्रेसेंट अब भी मादक पदार्थों की तस्करी का एक महत्त्वपूर्ण गलियारा बना हुआ है।

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- अवैध उत्पादन के प्रमुख क्षेत्र
- गोल्डन ट्रायंगल: म्याँमार, लाओस एवं थाईलैंड।
- गोल्डन क्रेसेंट: अफगानिस्तान, पाकिस्तान एवं ईरान।
- भारत की स्थिति
- वैध अफीम उत्पादक: भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल है, जिन्हें मादक औषधियों पर एकल अभिसमय (Single Convention on Narcotic Drugs), 1961 के अंतर्गत औषधीय एवं वैज्ञानिक उद्देश्यों के लिए अफीम पोस्ता की वैध कृषि की अनुमति प्राप्त है।
- लाइसेंस प्राप्त खेती: वैध खेती मध्य प्रदेश, राजस्थान तथा उत्तर प्रदेश में लाइसेंस के अंतर्गत की जाती है।
- पारगमन देश: गोल्डन ट्रायंगल एवं गोल्डन क्रेसेंट के मध्य अपनी रणनीतिक स्थिति के कारण भारत अवैध मादक पदार्थों के लिए एक प्रमुख पारगमन एवं गंतव्य देश के रूप में उभरा है।

भारत की आंतरिक सुरक्षा पर प्रभाव
- पूर्वी सीमा गलियारा: राष्ट्रीय राजमार्ग-102 (NH-102) से जुड़ा मणिपुर गलियारा भारत में हेरोइन एवं मेथामफेटामाइन की तस्करी का प्रमुख स्थलीय मार्ग बन गया है।
- मिजोरम मार्ग: चंफाई (मिजोरम) के माध्यम से भी मादक पदार्थ भारत में प्रवेश करते हैं और वहाँ से असम तथा देश के आंतरिक भागों तक पहुँचाए जाते हैं।
- छिद्रयुक्त सीमा: बाड़रहित सीमाएँ, दुर्गम भौगोलिक क्षेत्र तथा सीमापार जातीय संबंध मादक पदार्थों की अवैध आवाजाही को सुगम बनाते हैं।
- स्वतंत्र आवाजाही व्यवस्था (FMR): FMR के अंतर्गत सीमा क्षेत्र के समुदायों को मिली पारगमन की सुविधा का तस्करी नेटवर्क द्वारा बड़े स्तर पर दुरुपयोग किया जा रहा है।
- ड्रोन आधारित तस्करी: मानवरहित हवाई वाहन (UAVs) के माध्यम से पंजाब सीमा पर सीमापार मादक पदार्थों की तस्करी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
- समुद्री तस्करी: मादक पदार्थ तस्करी गिरोह, गुजरात एवं महाराष्ट्र के तटों के माध्यम से मत्स्यन नौकाओं तथा छोटी तटीय नावों का उपयोग कर मादक पदार्थों का परिवहन कर रहे हैं।
- राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा: मादक पदार्थों की तस्करी से संगठित अपराध, आतंकवाद के वित्तपोषण, धन शोधन, सीमापार उग्रवाद तथा नशे की लत को बढ़ावा मिलता है, जिससे यह आंतरिक सुरक्षा के लिए एक बहुआयामी चुनौती बन गई है।
PWOnlyIAS विशेष
प्रमुख क्षेत्र, मार्ग एवं अवधारणाएँ
- गोल्डन ट्रायंगल
- स्थान: म्याँमार, लाओस एवं थाईलैंड का ट्राई-जंक्शन।
- महत्त्व: अफीम, हेरोइन तथा मेथामफेटामाइन (याबा) के उत्पादन के विश्व के सबसे बड़े केंद्रों में से एक।
- गोल्डन क्रेसेंट
- स्थान: अफगानिस्तान, पाकिस्तान एवं ईरान।
- महत्त्व: परंपरागत रूप से विश्व का सबसे बड़ा अफीम उत्पादक क्षेत्र तथा वैश्विक मादक पदार्थ तस्करी का एक महत्त्वपूर्ण गलियारा।
- याबा
- संघटन: मेथामफेटामाइन एवं कैफीन से निर्मित एक संश्लेषित मादक पदार्थ।
- उत्पत्ति: मुख्यतः गोल्डन ट्रायंगल में निर्मित।
- एंफेटामाइन-प्रकार उद्दीपक (ATS):
- परिभाषा: संश्लेषित मनःप्रभावी पदार्थ, जो केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को उत्प्रेरित करते हैं।
- उदाहरण: मेथामफेटामाइन, एंफेटामाइन तथा MDMA (एक्स्टेसी)।
- मुक्त आवाजाही व्यवस्था (FMR)
- उद्देश्य: मान्यता प्राप्त सीमावर्ती जनजातियों को निर्धारित उद्देश्यों के लिए भारत–म्याँमार सीमा को वीजा के बिना पार करने की अनुमति देना।
- वर्तमान स्थिति: बढ़ती राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं के कारण इसकी समीक्षा की जा रही है।
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