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सीमा सुरक्षा प्रबंधन

5 Jun 2026

संदर्भ

सीमा प्रबंधन और सुरक्षा समन्वय को सुदृढ़ करने के लिए गुजरात सरकार ने अपनी ‘बॉर्डर रेंज’ का पुनर्गठन करते हुए नया ‘बनासकांठा रेंज’ बनाया है, जिससे पाकिस्तान-सीमा पुलिस के प्रशासनिक कार्यक्षेत्र को दो भागों में विभाजित कर दिया गया है। 

गुजरात की पाकिस्तान सीमा पुलिस संरचना में प्रमुख परिवर्तन

  • बनासकांठा रेंज की स्थापना: गुजरात राज्य ने पकिस्तान से लगती सीमा पर प्रशासन और सुरक्षा में सुधार के लिए एक नई बनासकांठा पुलिस रेंज की स्थापना की है, जो राज्य की 10वीं पुलिस रेंज बन गई है।
  • सीमा संबंधी जिम्मेदारियों का विभाजन: नवगठित बनासकांठा रेंज बनासकांठा, पाटन और वाव-थराद जिलों की निगरानी करेगी, जबकि मौजूदा सीमा रेंज मुख्य रूप से कच्छ और आस-पास के क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करेगी।
  • उन्नत पर्यवेक्षी तंत्र: पुनर्गठन के तहत सीमा सुरक्षा के लिए एक के बजाय दो महानिरीक्षक (IG) स्तर के अधिकारी नियुक्त किए गए हैं, जिससे विभिन्न सीमावर्ती क्षेत्रों की विशेष निगरानी संभव हो सकेगी।
  • उभरती सुरक्षा चुनौतियों पर फोकस: पुनर्गठन का उद्देश्य अवैध प्रवासन, मादक पदार्थों की तस्करी, सीमावर्ती गाँवों की सुरक्षा और ऊर्जा एवं सौर पार्कों सहित रणनीतिक अवसंरचनाओं की सुरक्षा जैसे मुद्दों का समाधान करना है।

सीमा सुरक्षा प्रबंधन के बारे में

  • सीमा सुरक्षा प्रबंधन (BSM) एक व्यापक ढाँचा है, जिसका उद्देश्य अवैध घुसपैठ, आतंकवाद, तस्करी, मानव तस्करी और अन्य सीमा पार अपराधों को रोककर राष्ट्रीय संप्रभुता की रक्षा करना और वैध आवागमन और व्यापार को सुगम बनाना है।
  • सीमा सुरक्षा के लिए जिम्मेदार प्रमुख बल
    • सीमा सुरक्षा बल (BSF) (भारत-पाकिस्तान और भारत-बांग्लादेश सीमा): सीमा सुरक्षा बल (BSF) भारत की पश्चिमी (पाकिस्तान) और पूर्वी (बांग्लादेश) अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर घुसपैठ, सीमा पार अपराधों और तस्करी को रोकने के लिए देश की ‘प्रथम रक्षा पंक्ति’ (First Line of Defence) और प्राथमिक शांतिकालीन सीमा रक्षक बल के रूप में कार्य करता है। 
    • भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) (भारत-चीन सीमा): ITBP वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के साथ स्थित उच्च तुंगता वाली हिमालयी सीमा की सुरक्षा करता है और आपदा प्रबंधन और निगरानी अभियानों में सहायता करता है।
    • सशस्त्र सीमा बल (SSB) (भारत-नेपाल और भारत-भूटान सीमा): SSB खुफिया जानकारी जुटाने, सामुदायिक भागीदारी और सीमा पार अपराधों की रोकथाम के माध्यम से नेपाल तथा भूटान के साथ भारत की खुली सीमाओं को सुरक्षित करता है।
    • असम राइफल्स (AR) (भारत-म्याँमार सीमा): असम राइफल्स भारत-म्याँमार सीमा की रक्षा करती है और साथ ही आतंकवाद विरोधी अभियान चलाकर उत्तर-पूर्व में स्थिरता बनाए रखती है।
    • भारतीय सेना (नियंत्रण रेखा और संवेदनशील LAC क्षेत्र): सेना पाकिस्तान के साथ नियंत्रण रेखा (LOC) और चीन के साथ LAC के महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों जैसे अत्यधिक सैन्यीकृत क्षेत्रों में तैनात है।
    • भारतीय नौसेना और भारतीय तटरक्षक बल (समुद्री सीमाएँ): ये बल भारत की तटरेखा, क्षेत्रीय जल और समुद्री आर्थिक संपत्तियों को बाहरी खतरों से सुरक्षित रखने के लिए जिम्मेदार हैं।

सीमा प्रबंधन में राज्यों की भूमिका

  • आंतरिक सुरक्षा और कानून प्रवर्तन: राज्य पुलिस सीमावर्ती क्षेत्रों में कानून व्यवस्था बनाए रखने और उनसे जुड़े अपराधों की जाँच करके रक्षा की दूसरी पंक्ति के रूप में कार्य करती है।
  • खुफिया जानकारी साझा करना और समन्वय: राज्य की खुफिया एजेंसियाँ ​​घुसपैठियों, तस्करों और उनके सहयोगी नेटवर्क की पहचान करने के लिए केंद्रीय सुरक्षा बलों के साथ सहयोग करती हैं।
  • सीमावर्ती क्षेत्र विकास: राज्य सीमावर्ती क्षेत्रों में जीवन स्तर में सुधार लाने के लिए सीमा अवसंरचना और प्रबंधन योजना तथा जीवंत ग्राम कार्यक्रम जैसी विकासात्मक पहल लागू करते हैं।
  • सहायक सहायता बल: राज्य सीमावर्ती सुरक्षा बलों (CAPF) की निगरानी और गश्त गतिविधियों में सहायता के लिए बॉर्डर विंग होम गार्ड्स (BWHG) का गठन और तैनाती करते हैं।

पुलिस संरचना में बदलाव का महत्त्व 

  • सीमा शासन को मजबूत करना: विभाजन से अलग-अलग सीमावर्ती क्षेत्रों की केंद्रित निगरानी संभव होती है और रणनीतिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र में प्रशासनिक दक्षता में सुधार होता है।
  • राष्ट्रीय सुरक्षा तैयारियों को बढ़ाना: समर्पित निगरानी से घुसपैठ के प्रयासों, मादक पदार्थों की तस्करी और अन्य सुरक्षा खतरों पर त्वरित प्रतिक्रिया देने में सहायता मिलेगी।
  • सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय में सुधार: पुनर्गठन से राज्य पुलिस, सीएपीएफ, खुफिया एजेंसियों और रक्षा बलों के मध्य समन्वय के लिए एक अधिक प्रभावी संस्थागत ढाँचा तैयार होता है।

निष्कर्ष

गुजरात पुलिस का पुनर्गठन एकीकृत सीमा प्रबंधन पर बढ़ते जोर को दर्शाता है, जो मजबूत सुरक्षा, बेहतर शासन और बढ़ी हुई राष्ट्रीय तैयारियों को सुनिश्चित करता है।

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