संदर्भ
पिछले एक दशक में, सतत् आर्थिक सुधारों, डिजिटल रूपांतरण और सार्वजनिक सेवा वितरण में सुधारों ने भारत के विस्तृत होते मध्यम वर्ग के जीवन स्तर, आकांक्षाओं और आर्थिक भूमिका को उल्लेखनीय रूप से सुदृढ़ किया है।
संबंधित तथ्य
भारत का बढ़ता मध्यम वर्ग
- भारत की प्रति व्यक्ति आय (GDP per capita) में वर्ष 2011 से 2019 के बीच 53% की वृद्धि हुई।
- भारतीय मध्यम वर्ग ने वर्ष 1995 से 2021 के बीच 6.3% की वार्षिक दर से विस्तार किया।
- वर्तमान में, मध्यम वर्ग भारत की कुल जनसंख्या का लगभग 31% है।
मध्यम वर्ग के बारे में
- “मध्यम वर्ग” की परिभाषा विभिन्न देशों में भिन्न होती है, जो क्रय शक्ति, शिक्षा स्तर, सामाजिक सेवाओं की उपलब्धता तथा संपन्नता की धारणा जैसे कारकों पर निर्भर करती है।
- विश्व बैंक प्रतिवर्ष अर्थव्यवस्थाओं का वर्गीकरण प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय के आधार पर करता है, जो सभी क्षेत्रों की प्राथमिक आय के कुल मूल्य को दर्शाता है।
- वित्त वर्ष 2026 के लिए अद्यतन आय वर्गीकरण (अमेरिकी डॉलर में):
- निम्न आय: ≤ $1,135
- निम्न-मध्य आय: $1,136 – $4,495
- उच्च-मध्य आय: $4,496 – $13,935
- उच्च आय: > $13,935
ये वर्गीकरण वैश्विक अर्थव्यवस्था में विभिन्न आय समूहों, विशेषकर मध्यम वर्ग, की स्थिति को समझने के लिए एक व्यापक रूपरेखा प्रदान करते हैं।
भारत के मध्यम वर्ग की प्रमुख विशेषताएँ
- आकांक्षी, न कि समृद्ध: भारत के अधिकांश मध्यम वर्ग के समृद्ध होने की आकांक्षा पर केंद्रित है, जबकि विकसित देशों में मध्यम वर्ग मुख्यतः अपने वर्तमान जीवन स्तर को बनाए रखने पर ध्यान देता है।
- मानव पूँजी पर अधिक व्यय: भारतीय परिवार अपनी आय का बड़ा हिस्सा शिक्षा, कोचिंग, कौशल विकास और स्वास्थ्य सेवाओं पर व्यय करते हैं, ताकि भविष्य के अवसर सुनिश्चित किए जा सकें।
- सीमित कल्याण सुरक्षा: यूरोप और अन्य विकसित देशों के विपरीत, भारतीय मध्यम वर्ग अक्सर “मिसिंग मिडिल” समस्या का सामना करता है, वे सब्सिडी के संदर्भ में बहुत समृद्ध होते हैं, लेकिन बड़े आर्थिक तनावों को सहन करने के लिए पर्याप्त संपन्न नहीं होते।
- परिवार-केंद्रित वित्तीय मॉडल: पीढ़ियों के मध्य सहयोग मजबूत बना हुआ है, जहाँ मध्यम वर्गीय परिवार प्रायः बच्चों की शिक्षा और बुजुर्ग माता-पिता दोनों का एक साथ भरण-पोषण करते हैं।
- भविष्य की वृद्धि का उत्प्रेरक: विश्व आर्थिक मंच के अनुसार, भारत का मध्यम वर्ग वैश्विक उपभोग वृद्धि के सबसे बड़े स्रोतों में से एक बनने की संभावना रखता है, जबकि विकसित देशों में मध्यम वर्ग का उपभोग अपेक्षाकृत संतृप्त हो चुका है।
भारत का मध्यम वर्ग विकसित देशों के मध्यम वर्ग से कैसे भिन्न है?
| आयाम |
भारत का मध्यम वर्ग |
विकसित देशों का मध्यम वर्ग |
| आय सुरक्षा |
आर्थिक तनावों, चिकित्सा व्यय और रोजगार की हानि के प्रति अधिक संवेदनशील। |
मजबूत कल्याण प्रणालियों और सामाजिक सुरक्षा जाल के कारण उच्च आय सुरक्षा। |
| सामाजिक सुरक्षा |
व्यक्तिगत बचत और पारिवारिक समर्थन पर अधिक निर्भर। |
राज्य द्वारा प्रदत्त पेंशन, स्वास्थ्य सेवा और बेरोजगारी लाभों पर अधिक निर्भरता। |
| उपभोग पैटर्न |
आय का बड़ा हिस्सा आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य और भोजन जैसी आवश्यकताओं पर खर्च होता है। |
अवकाश, यात्रा और जीवनशैली सेवाओं पर अधिक विवेकाधीन व्यय। |
| स्वास्थ्य व्यय |
बीमा कवरेज बढ़ने के बावजूद ‘आउट ऑफ पॉकेट’ व्यय अधिक। |
सार्वभौमिक या अत्यधिक सब्सिडी युक्त स्वास्थ्य सेवाएँ वित्तीय बोझ कम करती हैं। |
| शिक्षा व्यय |
परिवार निजी शिक्षा और कोचिंग पर अधिक निवेश करते हैं। |
गुणवत्तापूर्ण सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली निजी व्यय की आवश्यकता को कम करती है। |
| रोजगार संरचना |
अनौपचारिक या अर्द्ध-औपचारिक क्षेत्रों में बड़ी हिस्सेदारी, सीमित रोजगार सुरक्षा। |
मुख्यतः औपचारिक रोजगार, संविदात्मक सुरक्षा और लाभों के साथ। |
| संपत्ति स्वामित्व |
घर का स्वामित्व वित्तीय सुरक्षा और सामाजिक स्थिति का प्रमुख संकेतक। |
किराये के आवास और विविध वित्तीय संपत्तियों के स्वामित्व को अधिक स्वीकृति। |
| बचत व्यवहार |
अनिश्चितता और सीमित सामाजिक सुरक्षा के कारण उच्च बचत प्रवृत्ति। |
संस्थागत सामाजिक सुरक्षा पर अधिक निर्भरता, जिससे अपेक्षाकृत कम सावधानीपूर्वक बचत। |
| जनसांख्यिकीय प्रोफाइल |
युवा, विस्तारशील और आकांक्षी जनसंख्या। |
वृद्ध होती मध्यम वर्गीय जनसंख्या, धीमी जनसंख्या वृद्धि। |
| आर्थिक भूमिका |
उभरता हुआ विकास प्रेरक, बढ़ती उपभोग क्षमता के साथ। |
विकसित अर्थव्यवस्थाओं को बनाए रखने वाला परिपक्व उपभोक्ता वर्ग। |
मध्यम वर्ग क्यों महत्त्वपूर्ण है?
- उपभोग और विकास का इंजन: यह उपभोक्ता माँग, बचत, निवेश और उद्यमिता को बढ़ावा देता है, जिससे आर्थिक वृद्धि और रोजगार सृजन होता है।
- मानव पूँजी निर्माण: यह शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास और कौशल में निवेश करता है, जिससे उत्पादकता और दीर्घकालिक विकास सुदृढ़ होता है।
- राजकोषीय और शासन समर्थन: यह कर राजस्व में महत्त्वपूर्ण योगदान देता है तथा बेहतर शासन, जवाबदेही और सार्वजनिक सेवा वितरण की माँग करता है।
- सामाजिक स्थिरता और समावेशन: यह असमानताओं को कम करने, सामाजिक एकता और विश्वास को मजबूत करने में सहायक होता है तथा समावेशी एवं सतत् विकास को बढ़ावा देता है।
- उपभोक्ता बाजार का विस्तार: बढ़ता हुआ मध्यम वर्ग क्रय शक्ति बढ़ाता है, जिससे औद्योगिक विकास, नवाचार और सेवा क्षेत्र का विस्तार होता है।
- विश्व आर्थिक मंच के अनुसार, वर्ष 2036 तक भारत का मध्यम वर्ग (और समृद्ध उपभोक्ता) कुल खर्च का 93% हिस्सा वहन करेगा, जो वर्ष 2026 के 80% से वृद्धि दर्शाता है। साथ ही, वर्ष 2035 तक प्रमुख पीढ़ियों (बेबी बूमर्स, जेनरेशन एक्स, मिलेनियल्स, जेनरेशन Z) का 20% से अधिक हिस्सा प्रतिदिन 45 डॉलर या उससे अधिक खर्च करेगा।
- शहरीकरण और आधुनिकीकरण को बढ़ावा: यह बेहतर अवसंरचना, आवास, परिवहन और डिजिटल सेवाओं की माँग को बढ़ाकर शहरी विकास को गति देता है।

- लोकतांत्रिक मूल्यों को प्रोत्साहन: एक सशक्त मध्यम वर्ग पारदर्शिता, विधि का शासन, संस्थागत सुधार और सहभागी शासन का समर्थन करता है।
- आर्थिक स्थिरता का उत्प्रेरक: स्थिर मध्यम वर्गीय आय आर्थिक मंदी के दौरान घरेलू माँग को बनाए रखती है, जिससे बाहरी बाजारों पर निर्भरता कम होती है।
मध्यम वर्ग को सशक्त बनाने हेतु सरकारी पहलें (विभिन्न क्षेत्रों में)
- वित्त
- सरलीकृत कर व्यवस्था: जुलाई 2024 में सरकार ने आयकर अधिनियम, 1961 की व्यापक समीक्षा की घोषणा की। इसे रिकॉर्ड समय में पूरा करते हुए आयकर अधिनियम, 2025 को अप्रैल 2026 से लागू किया गया।
- वर्ष 2014 में ₹2.5 लाख तक की आय पर शून्य कर था। अब नई कर व्यवस्था (2023) के तहत ₹12 लाख (वेतनभोगियों के लिए ₹12.75 लाख) तक की आय पर शून्य कर है, जिससे बचत, उपभोग योग्य आय और वित्तीय विकल्पों में वृद्धि हुई है।
- वस्तु एवं सेवा कर (GST): वर्ष 2017 में लागू GST ने कर प्रणाली को सरल बनाया और दैनिक वस्तुओं की लागत कम की, जिससे मध्यम वर्ग को प्रत्यक्ष लाभ मिला।
- GST करदाता आधार 66.5 लाख (2017) से बढ़कर अप्रैल 2026 तक 1.64 करोड़ हो गया।

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- एकीकृत पेंशन योजना (UPS): अप्रैल 2025 से लागू UPS ने सेवानिवृत्ति सुरक्षा को मजबूत किया है, विशेषकर केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के लिए।
यह योगदान आधारित ढाँचे पर आधारित है, जिसमें कर्मचारी और सरकार दोनों का योगदान होता है तथा मुद्रास्फीति से जुड़ी सुनिश्चित पेंशन प्रदान की जाती है। कम से कम 10 वर्ष की सेवा के बाद ₹10,000 प्रति माह न्यूनतम पेंशन की गारंटी दी जाती है।
- बीमा (Insurance): भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) का लक्ष्य “वर्ष 2047 तक सभी के लिए बीमा” सुनिश्चित करना है।
- इसका उद्देश्य प्रत्येक नागरिक को जीवन, स्वास्थ्य और संपत्ति बीमा, तथा प्रत्येक उद्यम को उपयुक्त जोखिम सुरक्षा उपलब्ध कराना है।
- शहरी विकास और संपर्क का विस्तार
- प्रधानमंत्री आवास योजना–शहरी (PMAY-U): वर्ष 2015 में शुरू की गई यह योजना सुरक्षित आवास प्रदान कर करोड़ों लोगों के जीवन में परिवर्तन ला चुकी है। PMAY-U 2.0 को सितंबर 2024 से ‘सभी के लिए आवास’ मिशन के अंतर्गत लागू किया गया।
- मई 2026 तक 125.31 लाख स्वीकृत घरों में से 98.1 लाख घर पूर्ण/वितरित किए जा चुके हैं।
- स्वामिह कोष (SWAMIH): यह कोष विशेष रूप से मध्यम वर्ग और निम्न-मध्यम वर्ग के लिए बनाया गया है, जिसका उद्देश्य अपूर्ण आवासीय परियोजनाओं को पूर्ण करना है।
- मेट्रो रेल विस्तार: भारत अब विश्व का तीसरा सबसे बड़ा मेट्रो नेटवर्क रखता है, जिससे दैनिक आवागमन में व्यापक सुधार हुआ है। मेट्रो विस्तार की गति वर्ष 2014 से पूर्व 0.68 किमी. प्रति माह से बढ़कर वर्तमान में लगभग 6 किमी प्रति माह हो गई है। पिछले 12 वर्षों में लगभग ₹3.7 लाख करोड़ का निवेश मेट्रो संपर्क विस्तार में किया गया है।
- हवाई अड्डों का विस्तार: भारत में हवाई यात्रा अब मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए अधिक सुलभ और सुविधाजनक हो गई है। संचालित हवाई अड्डों की संख्या वर्ष 2014 के 74 से बढ़कर वर्ष 2026 में 165 हो गई है।

- शिक्षा, उद्यमिता एवं कौशल विकास का सुदृढ़ीकरण
- आईआईटी (IIT) विस्तार: वर्ष 2014 में भारत में 16 भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) थे। बाद के वर्षों में 7 नए IIT जोड़े जाने से इनकी कुल संख्या वर्ष 2025 तक 23 हो गई है।
- भारत में विदेशी विश्वविद्यालयों का आगमन: प्रमुख वैश्विक विश्वविद्यालय जैसे डीकिन विश्वविद्यालय (Deakin University) और वोलोंगोंग विश्वविद्यालय (University of Wollongong) ने गिफ्ट सिटी (GIFT City), गुजरात में अपने परिसर स्थापित किए हैं, जबकि साउथैंप्टन विश्वविद्यालय ने गुरुग्राम में अपना परिसर स्थापित किया है।
- कौशल भारत (Skill India): प्रमुख योजनाओं में शामिल हैं—प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY), जन शिक्षण संस्थान (JSS), प्रधानमंत्री राष्ट्रीय अप्रेंटिसशिप प्रोत्साहन योजना (NAPS) तथा शिल्पकार प्रशिक्षण योजना (CTS)।
- सुविधा हेतु निर्बाध डिजिटल शासन
- डिजिलॉकर (DigiLocker): वर्ष 2015 में प्रारंभ, इसका उद्देश्य नागरिकों को प्रामाणिक डिजिटल दस्तावेजों तक पहुँच प्रदान कर डिजिटल सशक्तीकरण सुनिश्चित करना है।
- उमंग ऐप: वर्ष 2017 में प्रारंभ, यह नवीन शासन के लिए एकीकृत मोबाइल अनुप्रयोग है, जो केंद्र, राज्य और स्थानीय निकायों की सेवाओं तक एकल प्लेटफॉर्म के माध्यम से पहुँच प्रदान करता है।

भारत के मध्यम वर्ग के समक्ष चुनौतियाँ
- आय असमानता: मजबूत GDP वृद्धि के बावजूद विकास के लाभ उच्च आय वर्गों तक केंद्रित रहते हैं, जिससे व्यापक समृद्धि और ऊपर उठने के अवसर सीमित हो जाते हैं।
- रोजगार संबंधी चिंताएँ: बढ़ती शैक्षिक उपलब्धि और आकांक्षाएँ प्रायः गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित रोजगार अवसरों से सामंजस्य नहीं रखती, जिससे कौशल-आधारित रोजगार सृजन पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता होती है।
- जीवन-यापन की बढ़ती लागत: आवास, स्वास्थ्य, शिक्षा और शहरी सेवाओं की बढ़ती लागत उपभोग योग्य आय को कम कर रही है तथा बचत क्षमता को घटा रही है।
- आवास वहनीयता संकट: विशेषकर महानगरों में संपत्ति मूल्य और किराए में तीव्र वृद्धि ने मध्यम आय वर्ग के लिए घर खरीदना कठिन बना दिया है।
- अनौपचारिक रोजगार और सामाजिक सुरक्षा अंतर: कार्यबल का एक बड़ा हिस्सा अभी भी औपचारिक रोजगार से बाहर है, जिससे पेंशन, बीमा और सामाजिक सुरक्षा तक पहुँच सीमित रहती है।
- कौशल असंगति: उद्योग की आवश्यकताओं और कार्यबल की क्षमताओं के मध्य अंतर रोजगार क्षमता को प्रभावित करता है, जिससे निरंतर कौशल विकास और पुनः कौशल विकास की आवश्यकता स्पष्ट होती है।
- वित्तीय संवेदनशीलता: EMI में वृद्धि, उपभोग-आधारित ऋण और मुद्रास्फीति दबाव ने मध्यम वर्गीय परिवारों पर वित्तीय तनाव बढ़ा दिया है, भले ही आय में अल्प वृद्धि हो रही हो।
- आकांक्षाएँ बनाम वहनीयता: गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास और जीवनशैली सुधार की बढ़ती आकांक्षाएँ अक्सर स्थिर वास्तविक आय के कारण सीमित हो जाती हैं, जिससे आकांक्षा और उपलब्धि के बीच अंतर बढ़ता है।
आगे की राह
- गुणवत्तापूर्ण रोजगार सृजन: श्रम-प्रधान विनिर्माण, एमएसएमई और उभरते क्षेत्र जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अर्द्धचालक और हरित ऊर्जा को प्रोत्साहित कर स्थिर एवं उच्च वेतन वाले रोजगार सृजित किए जाएँ।
- कौशल अंतराल को पाटना: उद्योग–शैक्षणिक संस्थान सहयोग को सुदृढ़ किया जाए तथा कौशल भारत जैसी पहलों का विस्तार कर कार्यबल की क्षमताओं को बाजार माँगों के अनुरूप बनाया जाए।
- सामाजिक सुरक्षा को सुदृढ़ करना: पेंशन, स्वास्थ्य बीमा और बेरोजगारी सहायता का दायरा बढ़ाया जाए, विशेषकर अनौपचारिक और गिग श्रमिकों के लिए।
- आवास वहनीयता में सुधार: प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी योजनाओं को गति दी जाए तथा किराये के आवास मॉडल को बढ़ावा देकर शहरी संपत्ति की बढ़ती कीमतों का भार कम किया जाए।
- जीवन-यापन लागत पर नियंत्रण: स्वास्थ्य, शिक्षा और सार्वजनिक परिवहन तक सुलभ और वहनीय पहुँच सुनिश्चित की जाए, जिसके लिए सार्वजनिक निवेश और नियामकीय सुधार बढ़ाए जाएँ।
- शहरी पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करना: जन परिवहन, जल आपूर्ति, अपशिष्ट प्रबंधन और डिजिटल अवसंरचना में निवेश कर तेजी से बढ़ते शहरों में जीवन गुणवत्ता में सुधार किया जाए।
- वित्तीय सुरक्षा को बढ़ावा: वित्तीय साक्षरता, विविधीकृत बचत और दीर्घकालिक निवेश साधनों को प्रोत्साहित कर परिवारों को मुद्रास्फीति और आर्थिक तनावों से सुरक्षित किया जाए।
- उद्यमिता को समर्थन: ऋण, स्टार्ट-अप वित्तपोषण और व्यापार सुगमता सुधारों का विस्तार कर मध्यम वर्ग के लिए संपत्ति सृजन और रोजगार अवसर बढ़ाए जाएँ।
- समावेशी विकास को प्रोत्साहन: क्षेत्रीय और आय असमानताओं को कम करने हेतु टियर-II और टियर-III शहरों में विकास को बढ़ावा दिया जाए, जैसा कि उपभोक्ता शहरों की उभरती अवधारणा में परिलक्षित होता है।
- डिजिटल शासन का उपयोग: डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (JAM, डिजिलॉकर, उमंग) के उपयोग को गहन कर सेवा वितरण में सुधार, लेन-देन की लागत में कमी और जीवन की सुगमता को बढ़ाया जाए।